अगस्तिया के चमत्कारी फायदे व औषधीय प्रयोग | Agastya ke Fayde

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अगस्तिया के चमत्कारी फायदे व औषधीय प्रयोग | Agastya ke Fayde

वर्णन :

✦इस वृक्ष की उँचाई २० से ३० फीट तक होती है ।
✦ इसकी छाल चिकनी और हलके भूरे रग की होती है।
✦लकड़ी सफेद और कोमल होती है ।
✦ पत्ते इमली के पत्तों के समान पर, आकार में उनसे कुछ बड़े इच डेढ़ इच लंबे किंचित अंडाकार होते हैं ।
✦फूल तिरछे, लाल या सफेद होते हैं। फलियाँ १०-१२ इच लम्बी, तिहाई इच चौड़ी, और चपटी होती है।
✦इसकी दो जातियों होती है । एक का फूल सफेद होता है और दूसरी का लाल । इसकी फलियों, फूल और पत्तों का शाक बनाया जाता है।

अगस्तिया का विभिन्न भाषाओं मे नाम :

संस्कृत-अगस्त्य, हिन्दी-अगस्तिया, गुजराती-अगस्थियो, बंगला-बक, मराठी-अगस्ता, कनाड़ी-अगसेयमरन्, चोगची, तामील अक्कम, अर्गती, तेलंगी -अविसी, लेटिन- Agati Grandi-flora ( अगटी ग्राडी फ्लोरा )

अगस्तिया के औषधीय गुण : agastya ke aushadhi gun

आयुर्वेदिक मत-

Agastya ke Fayde in hindi

✦भावप्रकाश के मतानुसार अगस्तिया शीतल, रूखा, बात-कारक, कडुआ तथा शीतवीर्य है और पित्त, कफ, और चौथे दिन आने वाले बुखार तथा जुकाम को नष्ट करने वाला है ।
✦इसके फूल शीतल, चातुर्थिक ज्वर को दूर करने वाले, कडवे, कसैले, पचने में चरपरे तथा पीनसरोग, कफ, पित्त और वात को नाश करनेवाले हैं ।( निघंटु-रत्नाकर )
✦इसके पत्ते चरपरे, कड़वे, भारी, मधुर, किंचित गरम, स्वच्छ तथा कृमि, कफ, विष और रक्तपित्त को हरने वाले हैं । इसकी फली हलकी, दस्तावर, बुद्धिदायक ,रुचिकारक, पचने में मधुर, कड़वी स्मरण-शक्ति-वर्द्धक, तथा त्रिदोष, शूल, कफ, पाडुरोग, और गुल्मनाशक है।

यूनानी मत-

यूनानी ग्रन्थकार इसको दूसरे दर्जे में ठण्डा और रुक्ष मानते है । मीर महमद हुसैन के कथनानुमार इसके पत्तों का रस निकालकर २-३ बूंद नाक में टपकाने से छींक कर तथा नाक बहकर सिर दर्द व सिर का भारीपन दूर होता है।

अगस्तिया के फायदे /लाभ /उपयोग  : agastya ke fayde

1-अपस्मार, ( मृगी)–अगस्तिया के पत्तों को काली मिरच के साथ गोमूत्र में बारीक पीसकर मृगी के रोगी को सुंघाने से लाभ होता हैं।  ( और पढ़ेमिर्गी  के 12 घरेलु उपचार)

२-वातरक्त–अगस्तिया के फूल को चूर्णकर उसको भैंस के दूध में मिलाकर दही जमाना चाहिये । इस दही से निकाले हुए मक्खन से वात-रक्त में आराम होता है।

3-चेचक–चेचक की प्रथमावस्था में इसकी छाल का चूर्ण बनाकर देने से लाभ होता है।  ( और पढ़ेचेचक (बड़ी माता) के कारण लक्षण और इलाज )

4-चोट- कहीं पर भी चोट लगने से या कुचल जाने से इसके पत्ते को पीसकर बाँधने से लाभ होता है ।

5-नेत्र की कमजोरी- इसके फूलों का रस निचोड़ कर आँखो में डालने से दृष्टि की कमजोरी और धुंधलेपन में फायदा होता है।  ( और पढ़ेआँखों की रौशनी बढ़ाने वाले 44 घरेलु नुस्खे)

6-श्वेतप्रदर—अगस्त की ताजी छाल को कूटकर उसका रस निकाल कर उसमें कपड़े को तर कर बत्ती बनाकर योनि-मार्ग में रखने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है ।

7-आधा शीशी पर- जिस तरफ के कपाल में दर्द होता हो उसकी दूसरी ओर की नाक में अगस्त के फूलों या पत्तों का रस निकाल कर टपकाना चाहिये ।  ( और पढ़ेधा सिर दर्द की छुट्टी करदेंगे यह 27 घरेलू इलाज)

8-चित्त विभ्रम-अगस्त के पत्तो के रस में सोंठ,पीपर और गुड़ को मिलाकर सुंघाने से चित्त विभ्रम में फायदा होता है ।

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें )

2018-06-30T15:10:44+00:00 By |Herbs|0 Comments

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