पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

गुणकारी अदरक के 111 औषधीय प्रयोग | Benefits of ginger in hindi

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गुणकारी अदरक के 111 औषधीय प्रयोग | Benefits of ginger in hindi

अदरक Adrak / Ginger ke fayde :

भोजन को स्वादिष्ट व पाचन युक्त बनाने के लिए अदरक(Adrak / Ginger) का उपयोग आमतौर पर हर घर में किया जाता है। वैसे तो यह सभी प्रदेशों में पैदा होती है, लेकिन अधिकांश उत्पादन केरल राज्य में किया जाता है। भूमि के अंदर उगने वाला कन्द आर्द्र अवस्था में अदरक, व सूखी अवस्था में सोंठ कहलाता है। गीली मिट्टी में दबाकर रखने से यह काफी समय तक ताजा बना रहता है। इसका कन्द हल्का पीलापन लिए, बहुखंडी और सुगंधित होता है।

अदरक Adrak / Ginger के गुण :

★ अदरक में अनेक औषधीय गुण होने के कारण आयुर्वेद में इसे महा औषधि माना गया है।
★ यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला, पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात, पित्त और कफ नाशक होता है।
★ वैज्ञानिकों के मतानुसार अदरक की रसायनिक संरचना में 80 प्रतिशत भाग जल होता है, जबकि सोंठ में इसकी मात्रा लगभग 10 प्रतिशत होती है।
★ इसके अलावा स्टार्च 53 प्रतिशत, प्रोटीन 12.4 प्रतिशत, रेशा (फाइबर) 7.2 प्रतिशत, राख 6.6 प्रतिशत, तात्विक तेल (इसेन्शियल ऑइल) 1.8 प्रतिशत तथा औथियोरेजिन मुख्य रूप में पाए जाते हैं।
★ सोंठ में प्रोटीन, नाइट्रोजन, अमीनो एसिड्स, स्टार्च, ग्लूकोज, सुक्रोस, फ्रूक्टोस, सुगंधित तेल, ओलियोरेसिन, जिंजीवरीन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन `बी` और `सी`, प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स और लोहा भी मिलते हैं। प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सोंठ कफ हटाने व पाचन संस्थान में विशेष गुणकारी सिद्ध हुई है।

मात्रा :
अदरक 5 से 10 ग्राम, सोंठ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम, रस 5 से 10 से मिलीलीटर, रस और शर्बत 10 से 30 मिलीलीटर। आइये जाने ginger ke fayde

विभिन्न रोगों में उपयोग :benefits of ginger in hindi

1. हिचकी :
• सभी प्रकार की हिचकियों में अदरक(Adrak / Ginger) की साफ की हुई छोटी डली चूसनी चाहिए।
• अदरक के बारीक टुकड़े को चूसने से हिचकी जल्द बंद हो जाती है। घी या पानी में सेंधानमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।
• एक चम्मच अदरक का रस लेकर गाय के 250 मिलीलीटर ताजे दूध में मिलाकर पीने से हिचकी में फायदा होता है।
• एक कप दूध को उबालकर उसमें आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण डाल दें और ठंडा करके पिलाएं।
• ताजे अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके चूसने से पुरानी एवं नई तथा लगातार उठने वाली हिचकियां बंद हो जाती हैं। समस्त प्रकार की असाध्य हिचकियां दूर करने का यह एक प्राकृतिक उपाय है।
2. पेट दर्द :
• अदरक और लहसुन को बराबर की मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में पानी से सेवन कराएं।
• पिसी हुई सोंठ एक ग्राम और जरा-सी हींग और सेंधानमक की फंकी गर्म पानी से लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है। एक चम्मच पिसी हुई सोंठ और सेंधानमक एक गिलास पानी में गर्म करके पीने से पेट दर्द, कब्ज, अपच ठीक हो जाते हैं।
• अदरक और पुदीना का रस आधा-आधा तोला लेकर उसमें एक ग्राम सेंधानमक डालकर पीने से पेट दर्द में तुरन्त लाभ होता है।
• अदरक का रस और तुलसी के पत्ते का रस 2-2 चम्मच थोड़े से गर्म पानी के साथ पिलाने से पेट का दर्द शांत हो जाता है।
• एक कप गर्म पानी में थोड़ा अजवायन डालकर 2 चम्मच अदरक का रस डालकर पीने से लाभ होता है।
• अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर उस पर कालीमिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।
• अदरक का रस 5 मिलीलीटर, नींबू का रस 5 मिलीलीटर, कालीमिर्च का चूर्ण 1 ग्राम को मिलाकर पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
3. मुंह की दुर्गध :
• एक चम्मच अदरक का रस एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुख की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।
4. दांत का दर्द :
• महीन पिसा हुआ सेंधानमक अदरक के रस में मिलाकर दर्द वाले दांत पर लगाएं।
• दांतों में अचानक दर्द होने पर अदरक के छोट-छोटे टुकड़े को छीलकर दर्द वाले दांत के नीचे दबाकर रखें।
• सर्दी की वजह से दांत के दर्द में अदरक के टुकड़ों को दांतों के बीच दबाने से लाभ होता है।
5. भूख की कमी : अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को नींबू के रस में भिगोकर इसमें सेंधानमक मिला लें, इसे भोजन करने से पहले नियमित रूप से खिलाएं।
6. सर्दी-जुकाम : पानी में गुड़, अदरक, नींबू का रस, अजवाइन, हल्दी को बराबर की मात्रा में डालकर उबालें और फिर इसे छानकर पिलाएं।
7. गला खराब होना : अदरक, लौंग, हींग और नमक को मिलाकर पीस लें और इसकी छोटी-छोटी गोलियां तैयार करें। दिन में 3-4 बार एक-एक गोली चूसें।
8. पक्षाघात (लकवा) :
• घी में उड़द की दाल भूनकर, इसकी आधी मात्रा में गुड़ और सोंठ मिलाकर पीस लें। इसे दो चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार खिलाएं।
• उड़द की दाल पीसकर घी में सेकें फिर उसमें गुड़ और सौंठ पीसकर मिलाकर लड्डू बनाकर रख लें। एक लड्डू प्रतिदिन खाएं या सोंठ और उड़द उबालकर इनका पानी पीयें। इससे भी लकवा ठीक हो जाता है।
9. पेट और सीने की जलन : एक गिलास गन्ने के रस में दो चम्मच अदरक (Adrak / Ginger)का रस और एक चम्मच पुदीने का रस मिलाकर पिलाएं।
10. वात और कमर के दर्द में : अदरक का रस नारियल के तेल में मिलाकर मालिश करें और सोंठ को देशी घी में मिलाकर खिलाएं।
11. पसली का दर्द : 30 ग्राम सोंठ को आधा किलो पानी में उबालकर और छानकर 4 बार पीने से पसली का दर्द खत्म हो जाता है।
12. चोट लगना, कुचल जाना : चोट लगने, भारी चीज उठाने या कुचल जाने से पीड़ित स्थान पर अदरक को पीसकर गर्म करके आधा इंच मोटा लेप करके पट्टी बॉंध दें। दो घण्टे के बाद पट्टी हटाकर ऊपर सरसो का तेल लगाकर सेंक करें। यह प्रयोग प्रतिदिन एक बार करने से दर्द शीघ्र ही दूर हो जाता है।
13. संग्रहणी (खूनी दस्त) : सोंठ, नागरमोथा, अतीस, गिलोय, इन्हें समभाग लेकर पानी के साथ काढ़ा बनाए। इस काढे़ को सुबह-शाम पीने से राहत मिलती है।
14. ग्रहणी (दस्त) : गिलोय, अतीस, सोंठ नागरमोथा का काढ़ा बनाकर 20 से 25 मिलीलीटर दिन में दो बार दें।
15. भूखवर्द्धक :
• दो ग्राम सोंठ का चूर्ण घी के साथ अथवा केवल सोंठ का चूर्ण गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-सुबह खाने से भूख बढ़ती है।
• प्रतिदिन भोजन से पहले नमक और अदरक की चटनी खाने से जीभ और गले की शुद्धि होती है तथा भूख बढ़ती है।
• अदरक का अचार खाने से भूख बढ़ती है।
• सोंठ और पित्तपापड़ा का पाक (काढ़ा) बुखार में राहत देने वाला और भूख बढ़ाने वाला है। इसे पांच से दस ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करें।
• सोंठ, चिरायता, नागरमोथा, गिलोय का काढ़ा बनाकर सेवन करने से भूख बढ़ती है और बुखार में भी लाभदायक है।
16. अजीर्ण :
• यदि प्रात:काल अजीर्ण (रात्रि का भोजन न पचने) की शंका हो तो हरड़, सोंठ तथा सेंधानमक का चूर्ण जल के साथ लें। दोपहर या शाम को थोड़ा भोजन करें।
• अजवायन, सेंधानमक, हरड़, सोंठ इनके चूर्णों को एक समान मात्रा में एकत्रित करें। एक-एक चम्मच प्रतिदिन सेवन करें।
• अदरक के 10-20 मिलीलीटर रस में समभाग नींबू का रस मिलाकर पिलाने से मंदाग्नि दूर होती है।
17. उदर (पेट के) रोग : सोंठ, हरीतकी, बहेड़ा, आंवला इनको समभाग लेकर कल्क बना लें। गाय का घी तथा तिल का तेल ढाई किलोग्राम, दही का पानी ढाई किलोग्राम, इन सबको मिलाकर विधिपूर्वक घी का पाक करें, तैयार हो जाने पर छानकर रख लें। इस घी का सेवन 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम करने से सभी प्रकार के पेट के रोगों का नाश होता है।
18. बहुमूत्र : अरदक के दो चम्मच रस में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से लाभ होता है।
19. बवासीर जनित वेदना (बवासीर के कारण होने वाला दर्द) : दुर्लभा और पाठा, बेल का गूदा और पाठा, अजवाइन व पाठा अथवा सौंठ और पाठा इनमें से किसी एक योग का सेवन करने से बवासीर के कारण होने वाले दर्द में राहत मिलती है।
20. मूत्रकृच्छ (पेशाब करते समय लिंग होने में वाली जलन) :
• सोंठ, कटेली की जड़, बला मूल, गोखरू इन सबको दो-दो ग्राम मात्रा तथा 10 ग्राम गुड़ को 250 मिलीलीटर दूध में उबालकर सुबह-शाम पीने से मल-मूत्र के समय होने वाला दर्द ठीक होता है।
• सोंठ पीसकर छानकर दूध में मिश्री मिलाकर पिलाएं।
21. अंडकोषवृद्धि : इसके 10-20 मिलीलीटर रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से वातज अंडकोष की वृद्धि मिटती है।
22. कामला (पीलिया) : अदरक, त्रिफला और गुड़ के मिश्रण का सेवन करने से लाभ होता है।
23. अतिसार (दस्त) :
• सोंठ, खस, बेल की गिरी, मोथा, धनिया, मोचरस तथा नेत्रबाला का काढ़ा दस्तनाशक तथा पित्त-कफ ज्वर नाशक है।
• धनिया 10 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम इनका विधिवत काढ़ा बनाकर रोगी को सुबह-शाम सेवन कराने से दस्त में काफी राहत मिलती है।
24. वातरक्त : अंशुमती के काढ़ा में 640 मिलीलीटर दूध को पकाकर उसमें 80 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने के लिए दें। उसी प्रकार पिप्पली और सौंठ का काढ़ा तैयार करके 20 मिलीलीटर प्रात:-शाम वातरक्त के रोगी को पीने के लिए दें।
25. वातशूल : सोंठ तथा एरंड के जड़ के काढे़ में हींग और सौवर्चल नमक मिलाकर पीने से वात शूल नष्ट होता है।
26. सूजन :
• सोंठ, पिप्पली, जमालगोटा की जड़, चित्रकमूल, बायविडिंग इन सभी को समान भाग लें और दूनी मात्रा में हरीतकी चूर्ण लेकर इस चूर्ण का सेवन तीन से छ: ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सुबह करें।
• सोंठ, पिप्पली, पान, गजपिप्पली, छोटी कटेरी, चित्रकमूल, पिप्पलामूल, हल्दी, जीरा, मोथा इन सभी द्रव्यों को समभाग लेकर इनके कपडे़ से छानकर चूर्ण को मिलाकर रख लें, इस चूर्ण को दो ग्राम की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से त्रिदोष के कारण उत्पन्न सूजन तथा पुरानी सूजन नष्ट होती है।
• अदरक के 10 से 20 मिलीलीटर रस में गुड़ मिलाकर सुबह-सुबह पी लें। इससे सभी प्रकार की सूजन जल्दी ही खत्म हो जाती है।
27. शूल (दर्द) : सोंठ के काढ़े के साथ कालानमक, हींग तथा सोंठ के मिश्रित चूर्ण का सेवन करने से कफवातज हृदयशूल, पीठ का दर्द, कमर का दर्द, जलोदर, तथा विसूचिका आदि रोग नष्ट होते हैं। यदि मल बंद होता है तो इसके चूर्ण को जौ के साथ पीना चाहिए।
28. संधिपीड़ा (जोड़ों का दर्द):
• अदरक के एक किलोग्राम रस में 500 मिलीलीटर तिल का तेल डालकर आग पर पकाना चाहिए, जब रस जलकर तेल मात्र रह जाये, तब उतारकर छान लेना चाहिए। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है।
• अदरक के रस को गुनगुना गर्म करके इससे मालिश करें।
29. बुखार में बार-बार प्यास लगना : सोंठ, पित्तपापड़ा, नागरमोथा, खस लाल चंदन, सुगन्ध बेला इन सबको समभाग लेकर बनाये गये काढ़े को थोड़ा-थोड़ा पीने से बुखार तथा प्यास शांत होती है। यह उस रोगी को देना चाहिए जिसे बुखार में बार-बार प्यास लगती है।
30. कुष्ठ (कोढ़) : सोंठ, मदार की पत्ती, अडूसा की पत्ती, निशोथ, बड़ी इलायची, कुन्दरू इन सबका समान-समान मात्रा में बने चूर्ण को पलाश के क्षार और गोमूत्र में घोलकर बने लेप को लगाकर धूप में तब तक बैठे जब तक वह सूख न जाए, इससे मण्डल कुष्ठ फूट जाता है और उसके घाव शीघ्र ही भर जाते हैं।
31. बुखार में जलन : सोंठ, गन्धबाला, पित्तपापड़ा खस, मोथा, लाल चंदन इनका काढ़ा ठंडा करके सेवन करने से प्यास के साथ उल्टी, पित्तज्वर तथा जलन आदि ठीक हो जाती है।
32. हैजा : अदरक का 10 ग्राम, आक की जड़ 10 ग्राम, इन दोनों को खरल (कूटकर) इसकी कालीमिर्च के बराबर गोली बना लें। इन गोलियों को गुनगुने पानी के साथ देने से हैजे में लाभ पहुंचता है इसी प्रकार अदरक का रस व तुलसी का रस समान भाग लेकर उसमें थोड़ी सी शहद अथवा थोड़ी सा मोर के पंख की भस्म मिलाने से भी हैजे में लाभ पहुंचता है।
33. इन्फ्लुएंजा : 6 मिलीलीटर अदरक रस में, 6 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार सेवन करें।
34. सन्निपात ज्वर :
• त्रिकुटा, सेंधानमक और अदरक का रस मिलाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम चटायें।
• सन्निपात की दशा में जब शरीर ठंडा पड़ जाए तो इसके रस में थोड़ा लहसुन का रस मिलाकर मालिश करने से गरमाई आ जाती है।
35. गठिया : 10 ग्राम सोंठ 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।
36. वात दर्द, कमर दर्द तथा जांघ और गृध्रसी दर्द : एक चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच घी मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
37. मासिक-धर्म का दर्द से होना (कष्टर्त्तव) : इस कष्ट में सोंठ और पुराने गुड़ का काढ़ा बनाकर पीना लाभकारी है। ठंडे पानी और खट्टी चीजों से परहेज रखें।
38. प्रदर : 10 ग्राम सोंठ 250 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें और शीशी में छानकर रख लें। इसे 3 सप्ताह तक पीएं।
39. हाथ-पैर सुन्न हो जाना : सोंठ और लहसुन की एक-एक गांठ में पानी डालकर पीस लें तथा प्रभावित अंग पर इसका लेप करें। सुबह खाली पेट जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो कली प्रतिदिन 10 दिनों तक चबाएं।
40. मसूढ़े फूलना (मसूढ़ों की सूजन) :
• मसूढ़े फूल जाएं तो तीन ग्राम सोंठ को दिन में एक बार पानी के साथ फांकें। इससे दांत का दर्द ठीक हो जाता है। यदि दांत में दर्द सर्दी से हो तो अदरक पर नमक डालकर पीड़ित दांतों के नीचे रखें।
• मसूढ़ों के फूल जाने पर 3 ग्राम सूखा अदरक दिन में 1 बार गर्म पानी के साथ खायें। इससे रोग में लाभ होता है।
• अदरक के रस में नमक मिलाकर रोजाना सुबह-शाम मलने से सूजन ठीक होती है।
41. गला बैठना, श्वांस-खांसी और जुकाम : अदरक का रस और शहद 30-30 ग्राम हल्का गर्म करके दिन में तीन बार दस दिनों तक सेवन करें। दमा-खांसी के लिए यह परमोपयोगी है। यदि गला बैठ जाए, जुकाम हो जाए तब भी यह योग लाभकारी है। दही, खटाई आदि का परहेज रखें।
42. खांसी-जुकाम : अदरक को घी में तलकर भी ले सकते हैं। 12 ग्राम अदरक के टुकड़े करके 250 मिलीलीटर पानी में दूध और शक्कर मिलाकर चाय की भांति उबालकर पीने से खांसी और जुकाम ठीक हो जाता है। घी को गुड़ में डालकर गर्म करें। जब यह दोनों मिलकर एक रस हो जाये तो इसमें 12 ग्राम पिसी हुई सोंठ डाल दें। (यह एक मात्रा है) इसको सुबह खाने खाने के बाद प्रतिदिन सेवन करने से खांसी-जुकाम ठीक हो जाता है।
43. इन्फ्लुएंजा, खांसी, जुकाम सिरदर्द और वात श्लेष्मा ज्वर : सोंठ तीन ग्राम, सात तुलसी के पत्ते, सात दाने कालीमिर्च 250 मिलीलीटर पानी में पकाकर, चीनी मिलाकर गमागर्म पीने से इन्फ्लुएंजा, खांसी, जुकाम और सिरदर्द दूर हो जाता है अथवा एक चम्मच सौंठ, चौथाई चम्मच सेंधानमक पीसकर चौथाई चम्मच तीन बार गर्म पानी से लें।
44. आधे सिर का दर्द, गर्दन का दर्द, मांसपेशियों का दर्द : यदि उपरोक्त कष्ट अपच, पेट की गड़बड़ी से उत्पन्न हुए हो तो सोंठ को पीसकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर लुग्दी बनाकर तथा हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें। इस प्रयोग से आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है, बाद में शाघ्र ही ठीक हो जाएगा। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप करें। पिसी हुई सौंठ को सूंघने से छीके आकर भी सिरदर्द दूर हो जाता है।
45. गले का बैठ जाना : अदरक में छेद करके उसमें एक चने के बराबर हींग भरकर कपड़े में लपेटकर सेंक लें। उसके बाद इसको पीसकर मटर के दाने के आकार की गोली बना लें। दिन में एक-एक करके 8 गोलियां तक चूसें अथवा अदरक का रस शहद के रस में मिलाकर चूसने से भी गले की बैठी हुई आवाज खुल जाती है। आधा चम्मच अदरक का रस प्रत्येक आधा-आधा घंटे के अन्तराल में सेवन करने से खट्टी चीजें खाने के कारण बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को कुछ समय तक गले में रोकना चाहिए, इससे गला साफ हो जाता है।
46. कफज बुखार :
• आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ एक कप पानी में उबालें, जब आधा पानी शेष बचे तो मिश्री मिलाकर सेवन कराएं।
• अदरक और पुदीना का काढ़ा देने से पसीना निकलकर बुखार उतर जाता है। शीत ज्वर में भी यह प्रयोग हितकारी है। अदरक और पुदीना वायु तथा कफ प्रकृति वाले के लिए परम हितकारी है।
47. अपच: ताजे अदरक का रस, नींबू का रस और सेंधानमक मिलाकर भोजन से पहले और बाद में सेवन करने से अपच दूर हो जाती है। इससे भोजन पचता है, खाने में रुचि बढ़ती है और पेट में गैस से होने वाला तनाव कम होता है। कब्ज भी दूर होती है। अदरक, सेंधानमक और कालीमिर्च की चटनी भोजन से आधा घंटे पहले तीन दिन तक निरन्तर खाने से अपच नहीं रहेगा।
48. पाचन संस्थान सम्बन्धी प्रयोग :
• 6 ग्राम अदरक बारीक काटकर थोड़ा-सा नमक लगाकर दिन में एक बार 10 दिनों तक भोजन से पूर्व खाएं। इस योग के प्रयोग से हाजमा ठीक होगा, भूख लगेगी, पेट की गैस कब्ज दूर होगी। मुंह का स्वाद ठीक होगा, भूख बढे़गी और गले और जीभ में चिपका बलगम साफ होगा।
• सोंठ, हींग और कालानमक इन तीनों का चूर्ण गैस बाहर निकालता है। सोंठ, अजवाइन पीसकर नींबू के रस में गीला कर लें तथा इसे छाया में सुखाकर नमक मिला लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम पानी से एक ग्राम की मात्रा में खाएं। इससे पाचन-विकार, वायु पीड़ा और खट्टी डकारों आदि की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
• यदि पेट फूलता हो, बदहजमी हो तो अदरक के टुकड़े देशी घी में सेंक करके स्वादानुसार नमक डालकर दो बार प्रतिदिन खाएं। इस प्रयोग से पेट के समस्त सामान्य रोग ठीक हो जाते हैं।
• अदरक के एक लीटर रस में 100 ग्राम चीनी मिलाकर पकाएं। जब मिश्रण कुछ गाढ़ा हो जाए तो उसमें लौंग का चूर्ण पांच ग्राम और छोटी इलायची का चूर्ण पांच ग्राम मिलाकर शीशे के बर्तन में भरकर रखें। एक चम्मच उबले दूध या जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पाचन संबधी सभी परेशानी ठीक होती है।
49. कर्णनाद (कानों में सांय-सांय की आवाज होने पर) : एक चम्मच सोंठ और एक चम्मच घी तथा 25 ग्राम गुड़ मिलाकर गर्म करके खाने से लाभ होता है।
50. आंव (कच्चा अनपचा अन्न) : आंव अर्थात् कच्चा अनपचा अन्न। जब यह लम्बे समय तक पेट में रहता है तो अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। सम्पूर्ण पाचनसंस्थान ही बिगड़ जाता है। पेट के अनेक रोग पैदा हो जाते हैं। कमर दर्द, सन्धिवात, अपच, नींद न आना, सिरदर्द आदि आंव के कारण होते हैं। ये सब रोग प्रतिदिन दो चम्मच अदरक का रस सुबह खाली पेट सेवन करते रहने से ठीक हो जाते हैं।
51. बार-बार पेशाब आने की समस्या : अदरक का रस और खड़ी शक्कर मिलाकर पीने से बहुमूत्र रोग की बीमारी नष्ट हो जाती है।
52. शीतपित्त :
• अदरक का रस और शहद पांच-पांच ग्राम मिलाकर पीने से सारे शरीर पर कण्डों की राख मलकर, कम्बल ओढ़कर सो जाने से शीतपित्त रोग तुरन्त दूर हो जाता है।
• अदरक का रस 5 मिलीलीटर चाटने से शीत पित्त का निवारण होता है।
53. आधासीसी (आधे सिर का दर्द) :
• अदरक और गुड़ की पोटली बनाकर उसके रसबिन्दु को नाक में डालने से आधासीसी के दर्द में लाभ होता है।
• आधे सिर में दर्द होने पर नाक में अदरक के रस की बूंदें टपकाने से बहुत लाभ होता है।
54. गले की खराश : ठंडी के मौसम में खांसी के कारण गले में खराश होने पर अदरक के सात-आठ ग्राम रस में शहद मिलाकर, चाटकर खाने से बहुत लाभ होता है। खांसी का प्रकोप भी कम होता है।
55. अस्थमा के कारण उत्पन्न खांसी : अदरक के 10 मिलीलीटर रस में 50 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटकर खाने से सर्दी-जुकाम से उत्पन्न खांसी नष्ट होती है। चिकित्सकों के अनुसार अस्थमा के कारण उत्पन्न खांसी में भी अदरक से लाभ होता है।
56. तेज बुखार : पांच ग्राम अदरक के रस में पांच ग्राम शहद मिलाकर चाटकर खाने से बेचैनी और गर्मी नष्ट होती है।
57. बहरापन :
• अदरक का रस हल्का गर्म करके बूंद-बूंद कान में डालने से बहरापन नष्ट होता है।
• अदरक के रस में शहद, तेल और थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर कान में डालने से बहरापन और कान के अन्य रोग समाप्त हो जाते हैं।
58. जलोदर : प्रतिदिन सुबह-शाम 5 से 10 मिलीलीटर अदरक का रस पानी में मिलाकर पीने से जलोदर रोग में बहुत लाभ होता है।
59. ठंड के मौसम में बार-बार मूत्र के लिए जाने से परेशानी होने पर: दस ग्राम अदरक के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
60. ज्वर (बुखार) :
• अदरक का रस पुदीने के क्वाथ (काढ़ा) में डालकर पीने से बुखार में राहत मिलती है।
• एक चम्मच शहद के साथ समान मात्रा में अदरक का रस मिलाकर दिन में 3-4 बार पिलायें।
61. ठंडी के मौसम में स्वरभंग अर्थात आवाज बैठने की विकृति होने पर : अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटने से बहुत लाभ होता है।
62. संधिशोथ (जोड़ों की सूजन) :
• अदरक को पीसकर संधिशोथ (जोड़ों की सूजन) पर लेप करने से सूजन और दर्द जल्द ही ठीक होते हैं।
• अदरक का 500 मिलीलीटर रस और 250 मिलीलीटर तिल का तेल दोनों को देर तक आग पर पकाएं। जब रस जलकर खत्म हो जाए तो तेल को छानकर रखें। इस तेल की मालिश करने से जोड़ों की सूजन में बहुत लाभ होता है। अदरक के रस में नारियल का तेल भी पकाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।
63. अम्लपित्त (खट्टी डकारें):
• अदरक का रस पांच ग्राम मात्रा में 100 मिलीलीटर अनार के रस में मिलाकर कुछ दिनों तक सुबह-शाम सेवन करने से अम्लपित्त (खट्टी डकारें) की समस्या नहीं होती है।
• अदरक और धनिया को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ पीने से लाभ होता है।
• एक चम्मच अदरक का रस शहद में मिलाकर प्रयोग करने से आराम मिलता है।
64. वायु विकार के कारण अंडकोष वृद्धि : वायु विकार के कारण अंडकोष की वृद्धि होने पर अदरक के पांच ग्राम रस में शहद मिलाकर तीन-चार सप्ताह प्रतिदिन सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
65. दमा :
• लगभग एक ग्राम अदरक के रस को एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लेने से दमा और श्वास रोग ठीक हो जाते हैं।
• अदरक के रस में शहद मिलाकर खाने से सभी प्रकार के श्वास, खांसी, जुकाम तथा अरुचि आदि ठीक हो जाते हैं।
• अदरक के रस में कस्तूरी मिलाकर देने से श्वास-रोग ठीक हो जाता है।
• लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जस्ता-भस्म में 6 मिलीलीटर अदरक का रस और 6 ग्राम शहद मिलाकर रोगी को देने से दमा और खांसी दूर हो जाती है।
• अदरक (Adrak / Ginger)का रस शहद के साथ खाने से बुढ़ापे में होने वाला दमा ठीक हो जाता है।
• अदरक की चासनी में तेजपात और पीपल मिलाकर चाटने से श्वास-नली के रोग दूर हो जाते हैं।
• अदरक का छिलका उतारकर खूब महीन पीस लें और छुआरे के बीज निकालकर बारीक पीस लें। अब इन दोनों को शहद में मिलाकर किसी साफ बड़े बर्तन में अच्छी तरह से मिला लेते हैं। अब इसे हांडी में भरकर आटे से ढक्कन बंद करके रख दें। जमीन में हांडी के आकार का गड्ढा खोदकर इस गड्ढे में इस हांडी को रख दें और 36 घंटे बाद सावधानी से मिट्टी हटाकर हांडी को निकाल लें। इसके सुबह नाश्ते के समय तथा रात में सोने से पहले एक चम्मच की मात्रा में सेवन करें तथा ऊपर से एक गिलास मीठा, गुनगुने दूध को पी लेने से श्वास या दमा का रोग ठीक हो जाता है। इसका दो महीने तक लगातार सेवन करना चाहिए।
• अदरक का रस, लहसुन का रस, ग्वारपाठे का रस और शहद सभी को 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर चीनी या मिट्टी के बर्तन में भरकर उसका मुंह बंद करके जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़कर मिट्टी से ढक देते हैं। 3 दिन के बाद उसे जमीन से बाहर निकाल लेते हैं। इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन रोगी को सेवन कराने से 15 से 30 दिन में ही यह दमा मिट जाता है।
66. ब्रोंकाइटिस : 15 ग्राम अदरक, चार बादाम, 8 मुनक्का- इन सभी को पीसकर सुबह-शाम गर्म पानी से सेवन करने से ब्रोंकाइटिस में लाभ मिलता है।
67. गीली खांसी :
• अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में लेकर थोड़ा सा गर्म करके दिन में 3-4 बार चाटने से 3-4 दिनों में कफ वाली गीली खांसी दूर हो जाती है।
• अदरक का रस 14 मिलीमीटर लेकर बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेना चाहिए।
68. काली खांसी : अदरक के रस को शहद में मिलाकर 2-3 बार चाटने से काली खांसी का असर खत्म हो जाता है।
69. बालों के रोग :
• अदरक और प्याज का रस सेंधानमक के साथ मिलाकर गंजे सिर पर मालिश करें, इससे गंजेपन से राहत मिलती है।
• अदरक के टुकडे़ को गंजे सिर पर मालिश करने से बालों के रोग मिट जाते हैं।
70. साधारण खांसी :
• साधारण खांसी में अदरक का रस निकालकर उसमें थोड़ा शहद और थोड़ा सा काला नमक मिलाकर चाटने से लाभ मिलता है।
• अदरक का रस और तालीस-पत्र को मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।
• बिना खांसी के कफ बढ़ा हो तो अदरक, नागरबेल का पान और तुलसी के पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर सेवन करने से कफ दूर हो जाता है।
• अदरक के रस में इलायची का चूर्ण और शहद मिलाकर हल्का गर्म करके चाटने से सांस के रोग की खांसी दूर हो जाती है।
• एक चम्मच अदरक के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से खांसी मे बहुत ही जल्द आराम आता है।
71. इंफ्लुएन्जा के लिए:
• अदरक, तुलसी, कालीमिर्च तथा पटोल (परवल) के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करें।
• 3 ग्राम अदरक या सोंठ, 7 तुलसी के पत्ते, 7 कालीमिर्च, जरा-सी दालचीनी आदि को 250 मिलीलीटर पानी में उबालकर चीनी मिलाकर गर्म-गर्म पीने से इंफ्लुएन्जा, जुकाम, खांसी और सिर में दर्द दूर होता है।
72. कफयुक्त खांसी, दमा :
• अदरक का रस रोजाना 3 बार 10 दिन तक पियें। खांसी, दमा के लिए यह बहुत उपयोगी होता है। परहेज- खटाई और दही का प्रयोग न करें। 12 ग्राम अदरक के टुकड़े करके एक गिलास पानी में, दूध, शक्कर, मिलाकर चाय की तरह उबालकर पीने से खांसी, जुकाम ठीक हो जाता है। आठ कालीमिर्च स्वादानुसार नमक और गुड़, चौथाई चम्मच पिसी हुई सोंठ एक गिलास पानी में उबालें। गर्म होने पर आधा रहने पर गर्म-गर्म सुहाता हुआ पियें। इससे खांसी ठीक हो जाएगी। 10 ग्राम अदरक को बारीक-बारीक काट कर कटोरी में रखें और इसमें 20 ग्राम गुड़ डालकर आग पर रख दें। थोड़ी देर में गुड़ पिघलने लगेगा। तब चम्मच से गुड़ को हिलाकर-मिलाकर रख लेते हैं। जब अच्छी तरह पिघलकर दोनों पदार्थ मिल जाएं तब इसे उतार लेते हैं। इसे थोड़ा सा गर्म रहने पर एक या दो चम्मच चाटने से कफयुक्त खांसी में आराम होता है। इसे खाने के एक घंटे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए या सोते समय चाटकर गुनगुने गर्म पानी से कुल्ला करके मुंह साफ करके सो जाना चाहिए। यह बहुत ही लाभप्रद उपाय है।
• 5 मिलीलीटर अदरक के रस में 3 ग्राम शहद को मिलाकर चाटने से खांसी में बहुत ही लाभ मिलता है।
• 6-6 मिलीलीटर अदरक और तुलसी के पत्तों का रस तथा 6 ग्राम शहद को मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से सूखी खांसी में लाभ मिलता है।
73. निमोनिया :
• एक-एक चम्मच अदरक और तुलसी का रस शहद के साथ देने ये निमोनिया का रोग दूर होता है।
• अदरक रस में एक या दो वर्ष पुराना घी व कपूर मिलाकर गर्म कर छाती पर मालिश करें।
74. अफारा (गैस का बनना) : अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसा हुआ गुड़ के साथ सेवन करने से आध्यमान (अफारा, गैस) को समाप्त करता है।
75. सर्दी, जुकाम और खांसी:
• अदरक की चाय जुखाम, खांसी, और सर्दी के दिनों में बहुत लाभप्रद है। तीन ग्राम अदरक और 10 ग्राम गुड़ दोनों को पाव भर पानी में उबालें, 50 मिलीलीटर शेष रह जाने पर छान लें और थोड़ा गर्म-गर्म ही पीकर कंबल ओढ़कर सो जायें।
• यह चाय काफी गर्म होती है। अत: प्रतिदिन इसका सेवन नहीं करना चाहिए। साधारण दशा में गुड़ के स्थान पर बूरा या चीनी डाल सकते हैं तथा दूध भी मिला सकते हैं।
• अदरक 10 ग्राम काटकर लगभग 200 मिलीलीटर गर्म पानी में उबालकर एक चौथाई रह जाने पर छान लेते हैं। इसमें खांड मिले एक कप कम गर्म दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से जुकाम और खांसी नष्ट हो जाती है।
76. रतौंधी : अदरक और प्याज का रस मिलाकर सलाई से दिन में 3 बार आंखों में डालने से रतौंधी का रोग दूर हो जाता है।
77. मसूढ़ों से खून आना : मसूढ़े में सूजन हो या मसूढ़ों से खून निकल रहा हो तो अदरक का रस निकालकर इसमें नमक मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे खून का निकलना बंद हो जाता है।
78. कब्ज (कोष्ठबद्वता) :
• अदरक का रस 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है।
• एक कप पानी में एक चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। छानकर पीने से कब्ज नहीं रहती है।
• अदरक, फूला हुआ चना और सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।
79. वमन (उल्टी) :
• एक चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच प्याज का रस और एक चम्मच पानी को मिलाकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
• 5 मिलीलीटर अदरक के रस में थोड़ा सा सेंधानमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
• एक चम्मच अदरक का रस लेकर उसमें थोड़ा सा सेंधानमक और कालीमिर्च डाल लें और चाटने से उल्टी आना रुक जाती है। अगर जरूरत पड़े तो 1 घंटे के बाद पहले की तरह 1 बार और लें।
• 10 मिलीलीटर अदरक के रस में 10 मिलीलीटर प्याज का रस मिलाकर पीने से जी मिचलाना (उबकाई) और उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है।
• अदरक का रस, तुलसी का रस, शहद और मोरपंख के चंदोवे की राख को एक साथ मिलाकर खाने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
• अदरक और प्याज के रस को बराबर मात्रा में लेकर पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है।
• 20-20 ग्राम अदरक, प्याज, लहसुन और नींबू के रस को मिलाकर इनका 2 चम्मच रस 125 मिलीलीटर पानी में मिलाकर इसके अंदर 1 ग्राम मीठा सोड़ा डालकर पीने से उल्टी के रोग में लाभ होता है।
80. अतिक्षुधा भस्मक रोग (भूख अधिक लगना) : 50-50 मिलीलीटर अदरक, नींबू के रस में लाहौरी नमक पिसा मिलाकर तीन दिन धूप में रख दें। भोजन के बाद सुबह-शाम 1-1 चम्मच पीने से भूख लगने लगती है और भोजन पच जाता है।
81. गैस : अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस का आधा चम्मच और शहद को डालकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता है।
82. दस्त :
• रात को सोने से पहले अदरक को पानी में डाल दें, सुबह इसे निकालकर साफ पानी के साथ पीसकर घोल बनाकर 1 दिन में 3 से 4 बार पीने से अतिसार (दस्त) समाप्त हो जाता है।
• एक चम्मच अदरक के रस को उतना गर्म करके पीना चाहिए जितना पिया जा सके ऐसा करने से पतले दस्त का आना बंद हो जाता है।
• अदरक का रस नाभि पर लगाने से दस्त में राहत मिलती है।
• एक चम्मच अदरक के रस को आधा कप उबाले हुऐ पानी में डालकर 1 घण्टे के अन्तराल के बाद पीने से पतले दस्त का आना बंद हो जाता है।
• अदरक के रस में सेंधानमक मिलाकर चाटें।
• 2 मिलीलीटर अदरक के रस को आधे कप गर्म पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ मिलता है।
• उड़द के आटे को नाभि के चारों लगाकर उसमें अदरक का रस भरने से रोगी को लाभ मिलता है।
83. गर्भवती स्त्री की उल्टी और जी का मिचलाना : अदरक का रस 10 मिलीलीटर, प्याज का रस 10 मिलीलीटर मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से उल्टी और जी का मिचलाना बंद हो जाता है।
84. कान का दर्द :
• अदरक, सहजन की छाल, करेला, लहसुन में से किसी भी चीज का रस निकालकर गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
• कान में मैल जमने के कारण, सर्दी लगने के कारण, फुंसियां निकलने के कारण या चोट लगने के कारण कान में दर्द हो रहा हो तो अदरक के रस को कपड़े में छानकर हल्का सा गर्म करके 3-4 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। अगर पहली बार डालने से दर्द नहीं जाता तो इसे दुबारा डाल सकते हैं।
• अगर ठंडे मौसम में घूमने की वजह से कान में दर्द हो रहा हो तो 5 मिलीलीटर अदरक के रस को गुनगुना करके किसी कपड़े में छानकर बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
• अदरक का रस, सेंधानमक, तिल का तेल और शहद को एक साथ मिलाकर उसमें पानी मिलाकर हल्का सा गर्म करके कान में डालकर कान को साफ करने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
• अदरक के रस को हल्का सा गर्म करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
• मूली, अदरक और लहसुन को एक साथ मिलाकर उनका रस निकाल लें। इस रस को हल्का सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
• सर्दी लग जाने के कारण कान में दर्द होने पर अदरक के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
85. आमातिसार : आमातिसार के रोगी को रोग ठीक करने के लिए 10 से 20 मोथे के फलों को अदरक के रस के साथ पीसकर शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन 2 से 3 बार सेवन करने से रोगी को रोग में लाभ मिलता है।
86. बवासीर (अर्श) : अदरक 500 ग्राम और पीपल 250 ग्राम को मिलाकर पेस्ट बनाकर इसे 500 ग्राम घी में पकायें। कालीमिर्च, चाव-चितावर, नाग केसर, पीपलामूल, इलायची, अजमोद, कालाजीरा और हर्रे। सब थोड़े-थोड़े से बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें। अदरक और पीपल से बने पेस्ट को इस चूर्ण के साथ मिलाकर इसमें 1 किलो गुड़ की चासनी बनाकर डालें। गुड़ और बाकी पेस्ट से बने गाढ़े चासनी को 60 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पाक बवासीर, कामला, अरुचि और मंदाग्नि बवासीर ठीक होता है।
87. कमर दर्द: 10 मिलीलीटर अदरक के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कमर दर्द में लाभ करता है।
88. मासिक-धर्म की अनियमितता : अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सेवन करने से रुका हुआ मासिक धर्म नियमित रूप से आना शुरू हो जाता है।
89. गुर्दे के रोग : अदरक का रस 10 मिलीलीटर में हींग भूनी लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पीसकर नमक मिलाकर पीयें।
90. कान के रोग : अदरक के रस को छानकर थोड़ा सा गर्म करके उसकी 2-3 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द, कान में मैल जमना और कान की फुंसियां पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।
91. कान में आवाज होना : लगभग 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 ग्राम शहद, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक और 3 ग्राम तिल के तेल को एक साथ मिलाकर रोजाना 2-3 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द, कानों में अजीब सी आवाजे सुनाई देना और कानों से सुनाई न देना (बहरापन) आदि रोग दूर हो जाते हैं।
92. जिगर की खराबी : 1-3 ग्राम अदरक की पिसी बारीक चूर्ण जल के साथ सेवन से जिगर और प्लीहा के रोग दूर हो जाते हैं।
93. अग्निमान्द्य (हाजमे की खराबी) :
• अदरक को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़ों को नींबू और नमक में मिलाकर रोजाना सुबह और शाम भोजन के साथ सेवन करें।
• अदरक का रस आधा चम्मच, सेंधानमक 1 चुटकी और नींबू का आधा चम्मच रस को मिलाकर सुबह और शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से लाभ होता है।
• आंवला का रस पीने से खाना पचता और भूख लगने लगती है।
• अदरक का रस, नींबू का रस और सेंधानमक मिलाकर खाना खाने के पहले और बाद में पीने से अपच मिटती है।
• 10 ग्राम अदरक, एक कली लहसुन, दो चुटकी काला नमक आदि को गन्ने के रस में मिलाकर सेवन करें।
• अदरक और नमक को मिलाकर खाना खाने से पहले देने से लाभ होता है।
• अदरक को छीलकर इसमें सेंधानमक लगाकर खाने से भूख बढ़ने लगती है तथा जीभ और गला भी साफ हो जाता है।
94. कफ : अदरक को छीलकर मटर के बराबर उसका टुकड़ा मुख में रखकर चूसने से कफ(बलगम) आसानी से निकल आता है।
95. पित्त ज्वर : अदरख और पटोलपत्र का काढ़ा पीने से उल्टी, जलन और कफ आदि का बुखार ठीक हो जाता है।
96. पेट के सभी प्रकार के रोग :
• पिसी हुई सोंठ एक ग्राम, जरा-सा हींग और सेंधानमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ फंकी के रूप में सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।
• एक चम्मच सोंठ का बारीक चूर्ण और सेंधानमक को एक गिलास पानी में गर्म करके पीने से पेट की पीड़ा में लाभ होता है।
• अदरक के काटे हुऐ टुकड़ों को देशी घी में सेंककर स्वादानुसार नमक डालकर रोजाना दिन में 2 बार सुबह और शाम से पेट के दर्द में आराम होता है।
97. जुकाम :
• गले में दर्द होने पर पान के पत्ते में एक छोटा सा टुकड़ा अदरक और 2 लौंग रखकर आराम-आराम से चूसने से गले का दर्द ठीक हो जाता है।
• 5 मिलीलीटर अदरक के रस को 5 मिलीलीटर शहद में मिलाकर रोजाना 3-4 बार चाटने से जुकाम में बहुत आराम आता है।
• एक चम्मच अदरक के रस में स्वाद के अनुसार सेंधानमक मिलाकर गर्म करके 2-3 दिन तक लगातार पीने से सर्दी दूर हो जाती है और छींके आना भी बंद हो जाती है।
• 10 ग्राम अदरक को 10 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके रोजाना रात को सोते समय खाने से बार-बार जुकाम होने का रोग ठीक हो जाता है। इसको खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए।
• 6 ग्राम अदरक, 7 काली मिर्च के दाने, 10 तुलसी के पत्ते और 5 लौंग को पीसकर 1 कप पानी में डालकर उबाल लें और छान लें। इसके अंदर शक्कर डालकर पीने से जुकाम दूर हो जाता है।
• अदरक तीन ग्राम, मिश्री छ: ग्राम, कालीमिर्च पांच दाने तीनों को थोड़ा-सा कूटकर लगभग 30 मिलीलीटर पानी में पकाकर क्वाथ (काढ़ा) बनाएं। इस क्वाथ को छानकार पीने से जुकाम नष्ट होता है।
98. प्लीहा वृद्धि (तिल्ली) : लगभग 1 से 3 मिलीलीटर अदरक के रस को जल के साथ मिलाकर पीने से तिल्ली की वृद्धि ठीक हो जाती है।
99. नाक के रोग :
• नजले या जुकाम के साथ-साथ अगर लगातार छींके भी आ रही हो तो 3 ग्राम अदरक को 6 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर रात को सोने से पहले खाने से छींके बंद हो जाती हैं। इसके ऊपर से पानी नहीं पीना चाहिए।
• अदरक के रस को पान के पत्ते के रस के साथ मिलाकर सुबह और शाम पीने से और पान के पत्ते के ऊपर एरंड का तेल लगाकर गर्म करके छाती पर बांधने से सर्दी-खांसी में आराम आता है।
100. नजला, नया जुकाम :
• सौंठ और गुड़ पानी में डालकर उबाल लें। जब चौथाई रह जाए तब सुहाता-सुहाता छानकर पी जाएं। गले में ठंडक और खराश होने पर अदरक चूसें अथवा अदरक के छोट-छोटे टुकड़े, अजवायन, दाना मेथी और हल्दी प्रत्येक आधा-आधा चम्मच भरकर एक गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी शेष रह जाए तब स्वादानुसार जरा-सा गुड़ मिलाकर छानकर रात को सोते समय यह काढ़ा पी कर सो जाएं।
• एक ग्राम अदरक का रस पानी के साथ सुबह और शाम लेने से जुकाम में आराम आता है।
• दो चम्मच अदरक का रस गर्म करके उसमें शहद मिलाकर पीने से नजला या जुकाम कम हो जाता है।
101. मूर्च्छा बेहोशी: अदरक का रस सूंघने से बुखार में होने वाली बेहोशी से राहत मिलती है।
102. एलर्जी : अदरक के रस में थोड़ा-सा जीरा तथा पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करने से एलर्जी के रोग में लाभ होता है।
103. हृदय की दुर्बलता : हृदय दुर्बल हो, धड़कन कम हो, दिल बैठता-सा लगे तो सोंठ का गर्म काढ़ा नमक मिलाकर एक प्याला प्रतिदिन पीने से लाभ होता है।
104. हृदय रोग :
• अदरक का रस तथा शहद, दोनों को मिलाकर नित्य उंगली से धीरे-धीरे चाटें। दोनों की मात्रा आधा-आधा चम्मच होनी चाहिए। इससे हृदय रोग में लाभ मिलता है।
• अदरक का रस और पानी सममात्रा में मिलाकर सेवन करने से हृदय रोग मिटता है।
105. मस्सा और तिल : अदरक के एक छोटे से टुकड़े को काटकर छील लें और उसकी नोक बना लें। फिर मस्से पर थोड़ा सा चूना लगाकर अदरक की नोक से धीरे-धीरे घिसने से मस्सा बिना किसी आप्रेशन के कट जायेगा और त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पडे़गा। बस शुरू में थोड़ी सी सूजन आयेगी।
106. सिर का दर्द :
• अदरक के रस और दूध को बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
• अदरक का रस, गुड़, सेंधानमक और पीपल को एक साथ घिस लें और पानी के साथ सूंघने से सिर की सभी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
• गर्मी के कारण होने वाले सिर के दर्द में अदरक के रस की बूंदें नाक में डालने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
• अदरक को गाय के दूध या मां के दूध में पीसकर माथे पर लेप की तरह से लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
• दूध में सोंठ का काढ़ा मिलाकर, सूंघने से विभिन्न प्रकार के दोशों से उत्पन्न तेज सिर दर्द खत्म हो जाता है।
107. सफेद दाग : 30 मिलीलीटर अदरक का रस और 15 ग्राम बावची को एक साथ मिलाकर और भिगोकर रख दें। जब अदरक का रस और बावची दोनों सूख जायें तो इन दोनों के बराबर लगभग 45 ग्राम चीनी को मिलाकर पीस लें। अब इसकी एक चम्मच की फंकी को ठंडे पानी से रोजाना 1 बार खाना खाने के एक घंटे के बाद लें।
108. गले की सूजन : एक चम्मच अदरक का रस, 2 लौंग का चूर्ण और आधी चुटकी हींग को मिलाकर चाटने से गले का हर प्रकार का रोग दूर होता है।
109. श्लेष्म पित्त : अदरक और परवल के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से श्लेष्म के कारण होने वाला पित्त ठीक हो जाता है।
110. आवाज का बैठ जाना :
• अदरक के अंदर छेद करके उसमें लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग हींग भरके कपड़े में लपेटकर सेंक लें। फिर मटर के दाने के बराबर गोली बना लें। इस गोली को दिन में 1-1 करके 8 बार तक चूसें। यह स्वर-भंग (आवाज खराब होना) में लाभकारी है। अदरक का रस शहद में मिलाकर चाटने से भी बैठा हुआ गला खुल जाता है।
• आधा चम्मच अदरक का रस को चौथाई कप गर्म पानी में मिलाकर आधे-आधे घंटे में चार बार पीने से सर्दी के कारण या खट्टी चीजों के खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। अदरक के रस को गले में कुछ समय तक रोकना चाहिए यानी कि रस को कुछ समय तक निगलना नहीं चाहिए। इससे गला साफ हो जाता है।
111. गले के रोग में :
• गर्म पानी में अदरक का रस मिलाकर 21 बार गरारे करने से बैठी हुई आवाज ठीक हो जाती हैं।
• अदरक के अंदर छेद करके उसमें हींग भर दें, उसमें ऊपर से पान का पत्ता लपेटकर मिट्टी लगा दें, फिर उपलों (ये गाय-भैंस के गोबर के बने होते हैं) की आग में तब तक गर्म करें, जब तक कि मिट्टी का रंग लाल न हो जाये। फिर ठंडा होने पर अदरक को पीसकर चने के बराबर की गोलियां बनाकर चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।
• अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से गले की घरघराहट (आवाज में खराबी) दूर हो जाती है।
• अदरक के अंदर छेद करके उसमें थोड़ी सी हींग और नमक भरकर उस अदरक को कपड़े में लपेटकर उसके ऊपर मिट्टी लगा दें और आग में रख दें। जब अदरक पक जाये और खुशबू आने लगे तब आग से निकालकर कपड़े को उतारकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अदरक को खाने से गला खुल जायेगा और आवाज भी साफ हो जायेगी।

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गुणकारी अदरक के 111 औषधीय प्रयोग | Benefits of ginger in hindi
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2017-07-18T15:29:22+00:00 By |Herbs|0 Comments

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