अलसी के 26 लाजवाब फायदे | alsi ke fayde aur nuksan

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अलसी के 26 लाजवाब फायदे | alsi ke fayde aur nuksan

परिचय :

हमारे ऋषि मुनि योग, तप, दैविक आहार व औषधियों के सेवन से सैकड़ों वर्ष जीवित रहते थे। ऐसा ही एक दैविक आयुवर्धक भोजन है, ‘अलसी’ । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे ‘वेज ओमेगा’ भी कहता है। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन अलसी को ‘सुपर स्टार’ फूड का दरजा देता है।

अलसी खाने के फायदे / लाभ /औषधीय गुण : alsi khane ke fayde /aushadhi gun

1- अलसी में मुख्य पौष्टिक तत्त्व लगभग 18 प्रतिशत ओमेगा-3 फैटी एसिड (एल्फालिनोलेनिक एसिड) लिगनेन, प्रोटीन व फाइबर होते हैं।

2- अलसी में ईसबगोल से अधिक फाइबर होते हैं।

3- स्नायुतंत्र, परिसंचरण तंत्र, पाचनतंत्र एवं प्रजनन तंत्र अलसी के सेवन से मजबूत होते हैं।

4- अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड का पृथ्वी पर सबसे बड़ा स्रोत है।

5- अलसी के सेवन से सकारात्मक शक्तियों में इजाफा होगा। आत्म विश्वास में दृढता आएगी।

6- लिगनेन हमें प्रोस्टेट, स्तन, बच्चेदानी, आँत व त्वचा के कैंसर से बचाता है।alsi ke aushadhi gun

7- ‘एड्स रिसर्च असिस्टेंट इंस्टीट्यूट’ के डायरेक्टर डेन्यिल देञ्ज कहते हैं कि जल्दी ही लिगनेन से एड्स ठीक होने वाला है। अलसी ही लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत है।

8- अलसी बाल्यावस्था से वृद्धावस्था तथा फायदेमंद है।

9- अलसी हमारी प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाती है।

10- हमारे स्वास्थ्य पर अलसी के चमत्कारी प्रभावों को भली-भाँति समझने के लिए ओमेगा-3 व ओमेगा-6 फैटी एसिड को समझना होगा। दोनों ही फैटी एसिड हमारे शरीर के लिए आवश्यक है। यह हमारे शरीर में नहीं बन सकते हैं। इसलिए इन्हें भोजन द्वारा ही ग्रहण करना होता है।
• ओमेगा-3 हमारे शरीर के विभिन्न अंगों, विशेष तौर पर मस्तिष्क, हृदय, पाचन तंत्र, स्नायु तंत्र व आँखों के विकास में सहयोगी है। ओमेगा-3 हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। यह यकृत, गुरदे, एड्रिनल, थायरॉइड आदि ग्रंथियों को संतुलित करने में सहायक होते हैं। हमारी कोशिकाओं की भित्तियाँ ओमेगा-3 से बनती हैं। इसकी कमी होने पर यह भित्तियाँ ओमेगा-6 से बनने लगती हैं। अतएव, इस कारण वे कठोर व जड़ हो जाती हैं। तब हमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, आर्थराइटिस, मोटापा, कैंसर आदि बीमारियाँ होने लगती हैं। ओमेगा-6 आयु घटाते हैं, ओमेगा-3 आयु बढ़ाते हैं। ओमेगा6 शरीर में रोग पैदा करते हैं तो ओमेगा-3 हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। अन दोनों फैटी एसिड में संतुलन आवश्यक है। फास्ट फूड, रिफाइंड तेल व टांसफेट ओमेगा 6 बढ़ाते हैं। ओमेगा-3 की यह कमी 30-60 ग्राम अलसी प्रतिदिन खाकर आसानी से | पूरी कर सकते हैं।

11- नोबेल पुरस्कार हेतु चयनित जर्मन डॉ. योहाना बुडविझ ने अलसी आधारित कैंसर रोधी प्रोटोकॉल खोजा है। यह एक आहार चिकित्सा है, जिसमें पनीर के साथ ठंडी विधि से बना अलसी का तेल अखरोट व बादाम आदि लेने से 90 प्रतिशत कैंसर ठीक होता है। इसमें डॉ. बुडिविझ इलेक्ट्रोन युक्त ऑर्गनिक आहार का सुझाव देते हैं।

12- डॉ. ऑटो वारबर्ग को 1931 में इस खोज पर कि कोशिकीय ऑक्सीजन की कमी से कैंसर होता है व ऑक्सीजन की मात्रा कोशिकाओं में बढ़ने से कैंसर ठीक होता है, नोबेल पुरस्कार मिला था, लेकिन वो कोशिकाओं में ऑक्सीजन अधिक पहुँचाने की विधि नहीं खोज पाए हैं। डॉ. बुडविझ ने उक्त काम अलसी व पनीर पर अनुसंधान कर किया।

13- अलसी का सेवन करने से  शारीरिक व मानसिक विकार तो दूर होते ही हैं, साथ ही नपुंसकता भी नष्ट हो जाती है।

14- त्वचा की सुंदरता को निखारने में अलसी का जवाब नहीं है।

15- नाड़ियो को स्वस्थ रखने में अलसी का जवाब नहीं है। दरअसल इसमें विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटिन, फोलेट, कॉपर आदि के कारण नाड़ियों की सक्रियता में इजाफा होता है। ये शिथिल पड़ी अथवा क्षति ग्रस्त नाड़ियों का काया कल्प भी करती है।

16- महान लेखिका, शोधकर्ता और चिंतक हेलन फिशर ने अलसी के गुणों को जिस तरह से व्याख्यायित किया है, उसके अनुसार अलसी केवल सौंदर्य को ही नहीं बढ़ाता है, अपितु फिटनेस को भी बढ़ाता है।

17- अलसी के सेवन से त्वचा स्निग्ध होती है, कोमल, मुलायम, बेदाग होकर त्वचा का रंग गोरा हो जाता है। सांवली स्त्रियों को इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

18- बालों में लगाने से केश काले, घने मजबूत व चमकदार तथा रेशम से हो जाएंगे।

19- अलसी के सेवन से स्त्री-पुरूष के जिस्म में मांसलता बढ़ती है। देह की ऊर्जा बढ़ती है, शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है, इसके साथ ही दिमाग की तरावट बनी रहेगी।

20 – आपकी नम्रता बढ़ेगी। क्रोध शांत होगा, मन के समस्त विकार नष्ट होंगे।

अलसी खाने का सही तरीका और मात्रा : alsi khane ka sahi tarika

1-  हमें प्रतिदिन 30-60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिए।
2- रोज 30-60 ग्राम अलसी को मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकररोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिए।
3-  प्रात:काल अंकुरित अलसी का नाश्ता भी किया जा सकता है।
4- सुबह-शाम दो-दो चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ, सब्जी जूस, दाल या सलाद में मिलाकर भी ले सकते हैं।
5- साफ बीनी हुई अलसी को धीमी आँच पर तिल की तरह भून लें, फिर मुखवास की तरह इसका सेवन करें।
आइये जाने अलसी का सेवन किस रोग में व कैसे करें

अलसी से रोगों का उपचार : alsi se rogon ka upchar

1-  अलसी के चूर्ण को पानी में पकाकर गरम-गरम सन्धिवात् से आक्रान्त अंग पर 1 अंगुल मोटा लेप लगाकर उस पर एन्ड का पत्ता रखकर फलालैन कपड़े की पट्टी सुबह-शाम बांधने से सन्धिवात की पीड़ा दूर हो जाती है तथा चिंगुड़े हुए हाथ-पैर खुल जाते हैं और रोगी आराम से चलने-फिरने लगता है।   ( और पढ़ें –  गठिया वात रोग के 13 रामबाण घरेलु उपचार )

2- अलसी बीज का चूर्ण 1 तोला और पानी 16 तोला लेकर क्वाथ बनायें। जब पानी जलकर अष्टमांश शेष बचे तब इसको पिलायें । यह क्रिया सुबह-शाम करने से सुजाक और उष्णवात की दाह और मूत्रकृच्छ दूर हो जाता है । इस योग के सेवन से गले की खराश भी मिट जाती है तथा इसको सुखोष्ण पीने से इसमें थोड़ी हल्दी और गुड़ भी क्वाथ बनाते समय डाल लें) गले और सुजाक में इसके काढ़े को ठण्डा करके ही पियें ।

3-  अलसी के बीजों के चूर्ण को पानी में पकाकर हलुवा जैसा बनाकर गरमगरम ही (मात्र 1-2 बार रात-दिन में) 24 घंटे व्रण पर बांधने से व्रण शोथ फूट जाता है ।
नोट-मोटे व्रण में 2-3 दिन लगा सकते हैं किन्तु लगाते ही पीड़ा कम हो जाती है ।

4-  अलसी के बीजों के चूर्ण को पकाकर हलुवा जैसा बनाकर गरम-गरम फुलालैन के कपड़े में फैलाकर (इस लेप युक्त कपड़े को) छाती और पीठ पर बाँधने से निमोमियाजन्य फुफ्फुसशोथ और उरक्षतजन्य उर:शोथ मिट जाता है।

5- अलसी के फूलयुक्त सम्पूर्ण पौधे को सुखाकर जलालें । इसकी राख को अलसी के तैल में मिलाकर बच्चों के गुदपाक पर लगाना अत्यन्त लाभकारी है। इसके लगाने से दुष्ट किस्म के व्रण भी ठीक हो जाते हैं।

6- अलसी का तैल और चूने का निथरा हुआ जल (Lime Water) समभाग एक पात्र में मिलाकर और खूब फेंटकर गाढ़ा-गाढ़ा मलहम जैसा बनाकर आग से जले जख्म पर लगाने से मिटकर घाव भरकर सूख जाता है ।   ( और पढ़ें – आग से जलने पर आयुर्वेद के सबसे असरकारक 79 घरेलु उपचार )

अलसी खाने से नुकसान : alsi ke nuksan

1-  लो ब्लडप्रेशर के मरीजों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। यह उनके रोग को बढ़ा सकता है |

2- गर्भवती महिलाओं को इसके सेवन से बचना चाहिये | अधिक मात्रा में सेवन किये जाने पर यह गर्भ को हानि पहुचा सकता है |

3- जिनका पाचनतंत्र कमजोर है उन्हें ज्यादा मात्रा में अलसी का सेवन नहीं करना चाहिये | यह उन्हें एसिडिटी, पेट दर्द, अफारा, मरोड़, उल्टी जैसी समस्याएं दे सकता है |

2018-06-12T12:15:43+00:00 By |Herbs|0 Comments