Ashwini Mudra in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

जिस प्रकार से घोडा अपने गुदाद्वार को बार बार सिकोड़ता ढीला करता है, उसी प्रकार गुदाद्वार को सिकोड़ना और फैलाने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते है| यह एक बहुत ही आसान क्रिया है, जिसे करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है|

आकुंचयेद् गुदाद्वार प्रसारयेत् पुन: पुन:।
सामवेदाश्विनी मुद्रा शक्तिप्रबोधकारिणी।।
अश्विनोपरमा मुद्रा गुहारोग विनाशिनी।
बलपुष्टिरीचव अकालमरणंहरेत्

अश्विनी मुद्रा(Ashwani mudra) से लाभ:

★ गुदाद्वार को बार-बार सिकोड़ें और फैला लें। इसे ही अश्विनी मुद्रा कहते हैं।
★ इस मुद्रा से कुण्डलिनी का जागरण होता है।
★ इस मुद्रा के निंरतर अभ्यास से गुदा रोग ठीक हो जाते हैं,
शरीर में ताकत बढ़ती है तथा उम्र लंबी होती है।
★ यह नपुंसकता को दूर करता है तथा शीघ्रपतन की समस्या रोकने में प्रभावी है|
★ इससे बुद्धि बढ़ती है साथ ही Ashwini Mudra for Piles (बवासीर) और कब्ज की परेशानी से राहत मिलती है|

अश्विनी मुद्रा करने का तरीका:

★ इसे करने के लिए जमीन पर कम्बल या चटाई आदि बिछा दें और सिर को पूर्व दिशा में रखें|
★ अब साँस को बाहर निकाले और पैट को 2-5 बार अंदर बाहर करें और योनि संकुचन विस्तरण 25 बार करें ।
★ इसके बाद फिर साँस लो फिर इसे बाहर छोड़े और शौच जाने की जगह को अंदर-बाहर करें|
★ इस क्रिया को अपनी शक्ति अनुसार करें| इसे आप 100 बार तक कर सकते है|

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जानकारी-

अश्विनी मुद्रा इतनी आसान है कि इसको करने में किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होती है। इस मुद्रा को करने से गुदा के सारे रोग ठीक हो जाते हैं। जो व्यक्ति इस मुद्रा को करता है उसको ताकत मिलती है, उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है और वह बहुत लंबी उम्र पाता है। यह मुद्रा साधु-संतों के लिए बहुत ही अच्छी मानी जाती है।