उड़द दाल के 15 लाजवाब फायदे | Black Gram Health Benefits

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उड़द दाल के 15 लाजवाब फायदे | Black Gram Health Benefits

परिचय :

भारतवर्ष के लगभग सभी स्थानों पर कम या अधिक मात्रा में उड़द का उत्पादन होता है। उड़द के छिलके का रंग काला होता है, किन्तु उड़द की दाल का रंग सफेद होता है। उड़द की दाल और बाजरे की रोटी परिश्रमी किसानों का प्रिय आहार है। उड़द पौष्टिक और शीतल है। ये पक्षाघात में पथ्य है। यह आध्यमान, अफरा करने वाला और दीर्घपाकी है। पाचनोपरान्त उड़द मधुर रस उत्पन्न करता है।
उड़द के बड़े, बड़ियाँ, पापड़, लड्डू, पाक आदि बनते हैं । उड़द पाक अपने पौष्टिक गुणों के कारण अत्यन्त ही प्रसिद्ध है। उड़द की दाल वायुकारक न हो, इस हेतु उसमें लहसुन, हींग आदि पर्याप्त मात्रा में डालने चाहिए।

उड़द दाल के गुण धर्म : Urad Dal ke gun

✦ उड़द पौष्टिक दलहन है। यह भारी, पाक में मधुर, स्निग्ध, रुचिकारक, वायुनाशक, मल को ढीलाकर नीचे उतारने वाला, तृप्तिदायक, बल प्रदायक, वीर्यवर्धक, अत्यन्त पुष्टिदायक, मल-मूत्र को मुक्त करने वाला, दुग्धपान कराने वाली माता का दूध बढ़ाने वाला और मेदकर्ता है।
✦ उड़द पित्त और कफ को बढ़ाते हैं।
✦ ये अर्श, वात, श्वास और शूल को नष्ट करते हैं । बबासीर, गठिया, लकवा और दमा में भी इसकी दाल खाना लाभदायक है।
✦ उड़द के बड़े और बड़ियाँ बलप्रद, पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक, वायु रोग नाशक, रुचि उत्पादक तथा विशेषकर अर्दित (वायु रोग का एक प्रकार जिसमें रोगी का मुँह टेढ़ा हो जाता है ।) नाशक हैं।
✦ उड़द की दाल के पापड़-रुचि उत्पादक, अग्नि प्रदीपक, पाचक, रुक्ष और कुछ भारी है।
✦ ठण्ड की ऋतु में तथा वायु प्रकृति वालों के लिए उड़द हितकारक है परन्तु पाचन होने पर ये गर्म और मधुर रस उत्पन्न करते हैं । अतः पित्त तथा कफ प्रकृति वालों के लिए इसका सेवन हानिकारक है।

उड़द दाल के फायदे / लाभ : Urad Dal ke Fayde / labh

1- शक्तिवर्द्धक-उड़द में शक्तिवर्द्धक गुण है। उड़द किसी भी तरह और किसी भी रूप में खाएँ, इससे शक्ति बढ़ेगी ही। रात को आधा छटाँक उड़द की दाल भिगो दें और प्रातः समय इसे पीसकर दूध मिश्री मिलाकर पीएँ । प्रयोग से हृदय, मस्तिष्क और वीर्य के लिए बहुत ही लाभकारी है किन्तु इसे अच्छी पाचनशक्ति वाले ही प्रयोग करें। | छिलके सहित उड़द खाने से माँस बढ़ता है। उड़द की दाल में हींग का छौंका देने से इसके गुणों में और भी अधिक वृद्धि हो जाती है। भीगी हुई उड़द की दाल को पीसकर 1 चम्मच देशी घी और आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटने के बाद मिश्री मिला हुआ दूध पीना लाभदायक है। इस प्रयोग को लगातार करते रहने से पुरुष घोड़े की भाँति बलवान हो जाता है। ( और पढ़े शरीर को मजबूत बनाने वाले चमत्कारी प्रयोग )

2-सफेद दाग (Leucoderma)-उड़द के आटे को भिगोकर पुनः पीसकर सफेद दाग पर नित्य चार माह तक लगाते रहने से दाग नष्ट हो जाते हैं।

3-गंजापन-उड़द की दाल को उबालकर पीसलें । इसका सोते समय सिर पर लेप करते रहें । गंजापन धीरे-धीरे दूर होकर नए बाल उगने लगेंगे। ( और पढ़ेगंजापन दूर करने के 47 घरेलु नुस्खे )

4-मर्दाना शक्तिवर्द्धक-उड़द का एक लड्डू खाकर ऊपर से दुग्धपान करने से वीर्य बढ़कर धातु पुष्ट होती है और रति शक्ति बढ़ती है।

5-अर्धागवात (Hamiplegia)-उड़द और सौंठ को चाय की भाँति उबालकर इनका पानी पिलाएँ। इससे लाभ होता है।

6-हिचकी-साबुत उड़द जलते हुए कोयले पर डालें । इसका धुआँ पूँघने से हिचकी मिट जाती हैं। ( और पढ़ेतुरंत हिचकी रोकेंगे ये 10 असरकारक रामबाण उपाय )

7-नकसीर, सिरदर्द-उड़द की दाल को भिगोकर पीसकर ललाट पर लेप करने से नकसीर व गर्मी से हुआ सिरदर्द ठीक हो जाता है।

8-फोड़े-यदि फोड़े से गाढ़ी और पीव निकले तो उड़द की पुल्टिश बाँधे ।

9-नासा रोग- उड़द का आटा, कपूर और लाल रेशमी कपड़े की राख को पानी में मिलाकर, सिर पर उसका लेप करने से नासा रोग में लाभ होता है।

10-सफेद कोढ़- ताजा उड़द पीसकर सफेद कोढ़ पर लगाना लाभदायक है। ( और पढ़ेसफेद दाग के 40 घरेलु इलाज )

11-धातुस्राव- उड़द की दाल का आटा 10-15 ग्राम लेकर उसे गाय के दूध में उबालें । उसमें घी डालकर थोड़ा गरम-गरम सात दिन लगातार पीने से मूत्रमार्ग से होने वाला धातुस्राव बन्द होता है।

12- मुख टेढ़ा हो जाना –उड़द की दाल को पानी में भिगोकर रख दें। फिर उसे पीसकर उसमें नमक, काली मिर्च, हींग, जीरा, लहसुन और अदरक डालकर उसके बड़े बनाएँ। ये बड़े घी या तेल में तलकर खाने से वायु, अर्दित वायु (मुख वक्र या टेढ़ा हो जाना), अरुचि, दुर्बलता, क्षय और शूल दूर होता है। ( और पढ़ेचेहरे का लकवा दूर करने वाले दस अनुभूत प्रयोग)

13-धातु वृद्धि- उड़द की दाल को पीसकर दही में मिलाकर या तलकर खाने से पुरुषों के बल और धातु में वृद्धि होती है।( और पढ़ेवीर्य को गाढ़ा व पुष्ट करने के आयुर्वेदिक उपाय)

14-शारीरिक बल-उड़द की दाल का आटा, गेहूँ का आटा और पीपर का चूर्ण (प्रत्येक 500 ग्राम) लेकर उन्हें एकत्र करें । उसमें 100 ग्राम घी डालकर चूल्हे पर रख दें । फिर उसके 40-40 ग्राम वजन के लड्डू बनाकर सुरक्षित रखलें । रात्रि को सोते समय एक लड्डू खाकर ऊपर से चौथाई लीटर दूध पी लें । इस प्रयोगकाल में खट्टे, खारे व तेल वाले पदार्थों का सेवन निषेध है। इससे शरीर क्षीण नहीं होता और शारीरिक बल बढ़ता है।

15-लकवा-उड़द, बला, खपाट, कौंच, कृतण नामक घास, रास्ना, अश्वगन्धा और एरण्डमूलइन 7 द्रव्यों को सममात्रा में लेकर अधकुटा करके क्वाथ बनालें । यह क्वाथ आयुर्वेद का प्रसिद्ध शास्त्रोक्त योग है जो ‘माषादि सप्तक क्वाथ’ के नाम से प्रसिद्ध है तथा बाजार में आयुर्वेदिक दवा की दुकानों पर उपलब्ध है। इसे थोड़ा गर्म रहने पर इसमें उचित मात्रा में हींग तथा सेंधानमक का चूर्ण डालकर पीने से पक्षाघात, लकवा, मन्यास्तम्भ (गले की नाड़ी का जकड़ा जाना), कर्णनाद (कान में विशेष प्रकार की आवाज आना), कर्णशूल एवं दुर्जय (मुश्किल से अच्छा होने वाला अर्दित रोग) मुँह का लकवा आदि रोग दूर होते हैं ।

16- उड़द खिलाने से पशु पुष्ट होते हैं । दुधारू गाय-भैंस उड़द खिलाने से दूध अधिक मात्रा में देती हैं। उड़द के पत्तों और डण्डलों का चूरा भी पशुओं को खिलाया जाता है।

उड़द दाल के नुकसान : Urad Dal ke Nuksan

1-उड़द भारी है। अतः अपनी पाचनशक्ति को ध्यान में रखते हुए ही इसका उपयोग करना चाहिए। मन्दाग्नि वाले इसका सेवन न करें।
2-उड़द अफरा करने वाला एवं दीर्घपाकी है । इसका शमन अदरक, काली मिर्च और हींग से होता है।

2018-08-21T21:28:27+00:00 By |Herbs|0 Comments