पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

एक्जिमा के 22 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Eczema ke gharelu nuskhe

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एक्जिमा के 22 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Eczema ke gharelu nuskhe

एक्जिमा : Eczema

एक्जिमा क्यों होता है:

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एक्जिमा रोग शरीर के किसी भी भाग में एक गोल आकार के दाने के रूप में पैदा हो जाता है। एक्जिमा में हर समय खुजली होती रहती है जो 2 तरह की होती है- सूखी (dry eczema)और तर।

कारण : eczema ka karan

★ एक्जिमा (Eczema)शरीर में खून की खराबी के कारण होता है। एक्जिमा होने पर अगर तुरन्त ही इसकी चिकित्सा न कराई जाए तो ये बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैलता है।
★ कुछ लोगों में एक्जिमा सफाई नहीं रखने और भोजन में लापरवाही बरतने की वजह से कई सालों तक बना रहता है।
★ एक्जिमा से संक्रमित व्यक्ति के जख्म को छूने से दूसरे लोग भी एक्जिमा के शिकार हो जाते हैं।
★ हाजमे की खराबी की वजह से कब्ज (गैस) बन जाने के कारण भी एक्जिमा हो जाता है।
★ औरतों में मासिकधर्म से सम्बंधित रोगों के कारण भी एक्जिमा हो जाता है।

लक्षण : eczema ke lakshan in hindi

★ एक्जिमा रोग की शुरुआत में रोगी को तेज खुजली होती है।
★ बार-बार खुजली करने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं। इन फुंसियों में बहुत तेज जलन और खुजली होती है। ★ फुंसियों के पक जाने पर उसमें से मवाद बहता रहता है।
★ फुंसियों के जब जख्म बन जाते हैं तो उसमें से पूरी तरह मवाद बहने लगता है।

परहेज :

★ एक्जिमा रोग में रोगी को खून साफ करने वाली औषधियों का प्रयोग करना चाहिए।
★ एक्जिमा रोग में रोजाना नीम के साबुन से या पानी में थोड़ा डिटोल डालकर नहाना चाहिए।
★ एक्जिमा रोग में रोगी को भोजन में खट्टी-मीठी चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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विभिन्न औषधियों से उपचार:Eczema Ayurvedic Treatment In Hindi

1. कटहल : कटहल के पत्तों पर घी लगाकर एक्जिमा पर बांधने से आराम आता है।

2. अजवायन : अजवायन को पानी के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा कुछ दिनों में ही समाप्त हो जाता है।

3. मकोय : मकोय के रस में अंकोल के बीजों को पीसकर लगाने से एक्जिमा के निशान समाप्त हो जाते हैं।

4. जीरा : 1 ग्राम भुने हुए जीरे को 10 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर और नींबू के रस के साथ मिलाकर रोजाना सुबह और शाम पीने से एक्जिमा रोग कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।

5. आम : एक्जिमा को थोड़ा सा खुजलाकर उस पर आम के डंठल से निकले रस को लगाने से एक्जिमा रोग समाप्त हो जाता है।

6. नारियल : नारियल के तेल और कपूर को अच्छी तरह मिलाकर एक्जिमा वाले स्थान पर लगाने से एक्जिमा का रोग दूर हो जाता है।

7. तिल : 1 लीटर तिल के तेल में 250 ग्राम कनेर की जड़ को जलाकर छान लें। इस तेल में जड़ को डालकर काफी देर तक उबालने से जड़ जल जाती है। इस तेल को रोजाना साफ रूई से एक्जिमा पर सुबह और शाम लगाने से एक्जिमा कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाता है।

8. सत्यानाशी : सत्यानाशी के पौधे के ताजे रस में पानी मिलाकर भाप द्वारा उसका अर्क (रस) तैयार करें। यह 25 मिलीलीटर अर्क (रस) सुबह और शाम पीने से एक्जिमा और त्वचा की दूसरी बीमारियां कुछ ही समय में समाप्त हो जाती हैं।

9. वासा : वासा के कोमल पत्तों को हल्दी में मिलाकर गौमूत्र (गाय का पेशाब) के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा रोग दूर हो जाता है।

10. नीम :

★   नीम के गुलाबी पत्ते लेकर तेल में काफी देर तक पकाएं। इस तेल को एक्जिमा पर लगाने से बहुत आराम आता है।
★   नीम के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पीने से खून साफ होकर खून की खराबी से होने वाले सारे रोग दाद, खुजली, फुंसियां आदि नष्ट हो जाते हैं।
★   नीम के पत्तों को पानी में उबालकर एक्जिमा को साफ करें। फिर उस जगह पर नींबू का रस और तुलसी के पत्तों को पीसकर लेप करने से एक्जिमा रोग ठीक हो जाता है।

11. आक : 10 ग्राम आक (मदार) के दूध को 50 मिलीलीटर सरसों के तेल में पकाकर एक्जिमा पर लगाने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

12. प्याज : प्याज के बीजों को पीसकर लेप करने से 8 से 10 सप्ताह में एक्जिमा समाप्त हो जाता है।

13. त्रिफला :

★   त्रिफला, नीम की छाल और परवल के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इस काढ़े से एक्जिमा के दाद को साफ करने से यह रोग जल्दी खत्म हो जाता है।
★   त्रिफला, कुटकी, बच, दारूहल्दी, मजीठ, गिलोय और नींबू की छाल को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को रोजाना 3-4 बार पीने से एक्जिमा कुछ दिनों में ही समाप्त हो जाता है।

14. चंदन : चंदन बला लक्षादि तेल को सूखी खुजली या एक्जिमा में खुजलाकर रोजाना 3 से 4 बार लगाने से लाभ होता है।

15. राई : राई को सिरके के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा रोग में आराम आता है।

16. कूठ : कूठ के चूर्ण को मक्खन के साथ अच्छी तरह मिलाकर हल्के-हल्के मालिश करने से कुछ सप्ताह में ही एक्जिमा रोग सही हो जाता है।

17. कालीमिर्च : ज्योतिष्मती (मालकांगनी) के पत्तों को कालीमिर्च के साथ पीसकर लेप करने से एक्जिमा रोग समाप्त हो जाता है।

18. पालक : पालक की जड़ को नींबू के रस में पीसकर लगाने से एक्जिमा रोग ठीक हो जाता है।

19. तुलसी : तुलसी के पत्तों के रस में घी को मिलाकर किसी कांसे के बर्तन में अच्छी तरह घोटकर लेप करने से एक्जिमा से छुटकारा मिलता है।

20. कुटकी :

★   कुटकी और चिरायता को हल्का सा गर्म करके इससे एक्जिमा ग्रस्त भाग को साफ करने से लाभ होता है।
★   5-5 ग्राम कुटकी और चिरायता को किसी कांच के बर्तन में भरकर रख दें। फिर उसमे रात के समय 100 मिलीलीटर पानी को डाल दें। सुबह उठने पर इस पानी को छानकर पीने से एक्जिमा कुछ ही समय में समाप्त हो जाता है। बाकी बचे चिरायता और कुटकी को रात को सोने से पहले पानी में डालकर रख दें। सुबह उठने पर उसे छानकर पीने से खून साफ हो जाता है।

21. गंधक : शुद्ध गंधक और मिश्री को मिलाकर रख लें। इस मिश्रण में से 3 से 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना 2 बार सुबह और शाम सेवन करने से हर तरह की खाज-खुजली या एक्जिमा रोग समाप्त हो जाता है।

22. हरड़ : हरड़ को गौमूत्र (गाय के पेशाब में) में पीसकर लेप बनाकर रोजाना 2-3 बार एक्जिमा पर लगाने से लाभ होता है।

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