एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार और अचूक घरेलू नुस्खे | Acidity Ka Ilaj

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एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार और अचूक घरेलू नुस्खे | Acidity Ka Ilaj

एसिडिटी के कारण : Acidity Causes in Hindi

किन कारणों से होती है एसिडिटी की समस्या ?

* खान पान पर ध्यान न देने से
* बाजारी, तीखे व चटपटे खाने के कारण
* नशे व धूम्रपान के कारण
* वक़्त पर खाना न खाने से
* खाली पेट चाय पिने से
* चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन करने से
* शरीर में गर्मी का अधिक होना भी एसिडिटी का कारण बन सकता है।

एसिडिटी के लक्षण क्या होते हैं? : Acidity Symptoms in Hindi

* पेट में गैस होने से पाचन क्रिया अव्यवस्थित हो जाती है.
* अम्ल और क्षार का संतुलन बिगड़ जाता है.
* भूख खुलकर नहीं लगती.
* पेट व पीठ में हल्का -सा दर्द भी महसूस होता है,
* दस्त साफ़ नहीं होता.
* पेट भारी रहता है.
* डकारें अधिक आती हैं,
* थकावट व आलस्य घेरे रहते हैं.

एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार / इलाज : Acidity ka Gharelu ilaj

पहला प्रयोगः एक लीटर कुनकुने पानी में 8-10 ग्राम सेंधा नमक डालकर पंजे के बल बैठकर पी जायें। फिर मुँह में उँगली डालकर वमन कर दें। इस क्रिया को गजकरणी कहते हैं। सप्ताह में एक बार करने से अम्लपित्त सदा के मिट जाता है।

आश्रम से प्रकाशित ‘योगासन’ पुस्तक में गजकरणी की विधि दी गयी है।

दूसरा प्रयोगः आँवले का मुरब्बा खाने अथवा आँवले का शर्बत पीने से अथवा द्राक्ष (किसमिस), हरड़े और मिश्री के सेवन से अम्लपित्त में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः 1-1 ग्राम नींबू के फूल एवं काला नमक को 10 ग्राम अदरक के रस में पीने से अथवा ‘संतकृपा चूर्ण’ को पानी या नींबू के शर्बत में लेने से लाभ होता है।

चौथा प्रयोगः सुबह 5 से 10 तुलसी के पत्ते एवं दोपहर को ककड़ी खाना तथा रात्रि में 2 से 5 ग्राम त्रिफला का सेवन करना एसिडिटी के मरीजों के लिए वरदान है।

पाँचवाँ प्रयोगः अम्लपित्त के प्रकोप से ज्वर होता है। इसमें एकाध उपवास रखकर पित्तपापड़ा, नागरमोथ, चंदन, खस, सोंठ डालकर उबालकर ठंडा किया गया पानी पीने से एवं पैरों के तलुओं में घी घिसने से लाभ होता है। ज्वर उतर जाने पर ऊपर की औषधियों में गुडुच, काली द्राक्ष एवं त्रिफला मिलाकर उसका काढ़ा बनाकर पीना चाहिए।

छठा प्रयोगः करेले के पत्तों के रस का सेवन करने से पित्तनाश होता है। वमन, विरेचन व पित्त के प्रकोप में इसके पत्तों के रस में सेंधा नमक मिलाकर देने से फायदा होता है।

सातवाँ प्रयोगः जिनको पित्त-विकार हो उन्हें महासुदर्शन चूर्ण, नीम पर चढी हुई गुडुच, नीम की अंतरछाल जैसी कड़वी एवं कसैली चीजों का सेवन करने से लाभ होता है। गुडुच का मिश्री के साथ सेवन करने से भी लाभ होता है।

आठवाँ प्रयोगः पित्त की उल्टी होने पर एक गिलास गन्ने के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। अजीर्ण में यह प्रयोग न करें।

नौवाँ प्रयोगः ताजे अनार के दानों का रस निकालकर उसमें मिश्री डालकर पीने से हर प्रकार का पित्तप्रकोप शांत होता है।

दसवाँ प्रयोगः खाली पेट ठण्डा दूध या अरण्डी का 2 से 10 मि.ली. तेल 100 से 200 मि.ली. गाय के दूध में मिलाकर या मीठी छाछ में मिश्री डालकर पीने से पित्तप्रकोप शांत होता है।

ग्यारहवाँ प्रयोगः नीम के पत्तों का 20 से 50 मि.ली. रस 5 से 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सात दिन पीने से गर्मी मिटती है।

एसिडिटी के घरेलू उपाय : Acidity ka Gharelu Upchar

• सौंफ व अदरक या जीरे का एक साथ सेवन करने से पेट की जलन व हाजमे में लाभ होता है।
• बबूना अथवा बबूनी के फूल का पॉउडर एक से दो ग्राम या इसके फूलों के तेल की 2-3 बूंदें सीने में जलन, पेट दर्द एवं तनाव से उत्पन्न एसिडिटी में विशेष लाभदायक होती हैं।
• भोजन के पश्चात् सौंफ के सेवन से सांस की बदबू, अपच व उल्टी में भी आराम मिलता है। इसके अतिरिक्त 15-20 ग्राम सौंफ को 100 ग्राम पानी में आधा घंटे उबाल कर बचे पानी का सेवन करने से अपच, उबकाई तथा खाने के पश्चात हुए पेट दर्द व एसिडिटी में राहत मिलती है।
• एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से गैस व घबराहट ठीक होती है।
• एक गिलास पानी में 60 ग्राम पुदीना, 10 ग्राम अदरक, 10 ग्राम अजवायन को डालकर उबालें। खूब उबलने पर इसमें आधा कप दूध, तथा चीनी डालकर चाय की तरह पियें। गैस दूर होगी और पाचन शक्ति बढ़ेगी।
• एक लहसुन की फांक छीलकर बीज निकले हुए 4 नग मुनक्कों के साथ, भोजन के बाद चबाकर निगल जाएं। इस विधि से पेट में रुकी हुई वायु तत्काल निकल जाएगी।
• अलसी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है।
• अजवायन, सौंफ, काला नमक, काली मिर्च बारीक कूट-छानकर ताजे पानी से लें, अफारा ठीक हो जाएगा।
• अदरक और पिसा धनिया समान मात्रा (लगभग एक चम्मच) में लेकर खायें। इससे एसिडिटी से छुटकारा मिलेगा।
• पेट की वायु को ईसबगोल भी नष्ट करता है। ईसबगोल की मात्रा ज्यादा नहीं लेनी चाहिए।
• पुननर्वा के मूल का चूर्ण 2 ग्राम, हींग 1/2 ग्राम तथा काला नमक 1 ग्राम गर्म पानी से लें। पेट के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
• आंवले का रस, मिश्री और भुने जीरे का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से अम्लपित्त की विकृति नष्ट होती है।

एसिडिटी के देसी नुस्खे  : Acidity ke desi nuskhe in hindi

1. मुलठी के चूर्ण का सेवन करने से गले में जलन और एसिडिटी की परेशानी से राहत मिलती है। मुलठी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से यह और भी असरदार साबित होता है।

2. अशवगंधा का इस्तेमाल एसिडिटी में रामबाण आयुर्वेदिक नुस्खा है। एक गिलास दूध में अशवगंधा मिला कर लेने से एसिडिटी में आराम मिलता है।

3. रात को एक गिलास पानी में नीम की छाल को भिगोकर रख दे और सुबह इस पानी को छानकर इसका सेवन करे या नीम की छाल का चूर्ण बनाकर प्रयोग करे।

4. मुन्नका भी एसिडिटी का उपचार में कामयाब तरीका है। इसे एक गिलास दूध में उबाल ले और दूध पिए या फिर दूध के साथ सेवन करे।

5. पांच से सात गिलोय की जड़ के टुकड़े ले और इन्हें पानी में उबाल ले, फिर गुनगुना होने पर आराम से घूट-घूट कर पिए।

6. रात के समय “अच्युताय हरिओम त्रिफला” के चूर्ण को “अच्युताय हरिओम संजीवनी शहद “के साथ उपयोग करे। इससे भी काफी लाभ मिलता है।

विशेष :- अच्युताय हरिओम संतकृपा चूर्ण व अच्युताय हरिओम आवला-मिश्री चूर्ण एसिडिटी को मिनटों मे दूर करता है जरुर आजमायें

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)