कपूर के 20 फायदे जिसे सुन आपभी रह जायेंगे हैरान | kapoor ke fayde aur nuksan

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कपूर के 20 फायदे जिसे सुन आपभी रह जायेंगे हैरान | kapoor ke fayde aur nuksan

कपूर के फायदे / लाभ / रोगों का उपचार : kapoor (Camphor) ke fayde

1-  देवपूजन, हवन, यज्ञ, अनुष्ठान, आरती में प्रमुखता से कार्य में आता है।   ( और पढ़ें – कपूर के 93 लाजवाब औषधीय प्रयोग)

2- कपूर को मद्यसार (स्प्रिट) में घोलकर रुई का फोहा लगाने से बृश्चिकदंश (बिच्छू काटने )में तुरन्त लाभ होता है । ( और पढ़ें – कर्पूर का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व )

3- कपूर को खोपरे के तैल में लगाने से शीत पित्त नष्ट हो जाती है।  ( और पढ़ें – पूजा के लिये शुद्ध कपूर )

4- कपूर को दांत में दबाने से दन्तपीड़ा दूर हो जाती है ।  ( और पढ़ें – दाँत दर्द की छुट्टी कर देंगे यह 51 घरेलू उपचार )

5- कपूर 2 रत्ती, मुलहठी दो माशा मिलाकर सुबह-शाम मधु से चाटने से गले की खराश और खाँसी तुरन्त कम होकर 3-3 दिन में जड़ से नष्ट हो जाती है।  ( और पढ़ें – खांसी दूर करने के 191 देसी नुस्खे)

6-  कपूर 1 रत्ती और कच्चे बिल्व (बेल) का चूर्ण तीन माशा सुबह-शाम तक्र के साथ सेवन करने से अतिसार 24 घंटे में ही थम जाता है । ( और पढ़ें – दस्त रोकने के 33 घरेलु उपाय )

7- हींग और कपूर 2-2 रत्ती मिलाकर शहद के साथ चाटने से श्वास, मूर्छा और उदर विकार दूर हो जाते हैं ।  ( और पढ़ें – बेहोशी दूर करने के 43 सबसे कामयाब घरेलु उपाय  )

8- सरसों के तेल में कपूर घोटकर छाती पर मालिश करने से निमोनिया और छाती का दर्द शान्त हो जाता है ।kapoor(Camphor) health benefits

9- 24 औंस शुद्ध,मथ-सार स्प्रिट में 4 औस कपूर मिलाने पर कपूर अर्क बन जाता है । इस अर्क की 10 से 20 बूंद तक बताशे में टपकाकर अथवा जल में मिलाकर रोगी को सेवन कराने से वमन, अजीर्ण, विशूचिका, आँव दस्त और पेट की मरोड़ निःसन्देह मिट जाते हैं ।

10- प्रसवोत्तर एवं प्रसवकालीन वेदनाधिक्य में डेली वाला कपूर 250 से 750 मि.ग्रा. तक पान में रखकर खिलाना लाभप्रद है। ( और पढ़ेंप्रसव पीड़ा को दूर करते है यह असरकारक 38 घरेलु उपाय )

11- गर्भाशय शूल एवं कष्टार्तव में 250 से 500 मि.ग्रा. तक कपूर और काला जीरा 1 ग्राम का मिश्रण दिन में 2-3 बार शहद से चटाना लाभकारी है।

12- स्त्रियों की कामवासना की अधिकता में कपूर 250 मि.ग्रा. की मात्रा में दिन में 2-3 बार कदली (केला) स्वरस आधा औंस के अनुपान से देना अतीव गुणकारी है ।

13- प्रसव के बाद होने वाले उन्माद रोग में कपूर 250 मि.ग्रा. की दिन में 4 मात्राएँ शंखपुष्पी स्वरस या सारस्वतारिष्ट आधी से 1 औंस के अनुपान से सेवन कराने से लाभ होता है ।

14- कपूर को जल में घिसकर स्त्री के स्तनों पर लेप करने से स्तनों का दूध सूख जाता है । इस प्रयोग को दुग्धपान करने वाले शिशु की मृत्यु हो जाने पर अक्सर महिलायें करती हैं और लाभान्वित होती हैं ।

15- कपूर को रूमाल में बांधकर सूंघते रहने से जुकाम दूर हो जाता है । ( और पढ़ें – सर्दी-जुकाम के 20 आयुर्वेदिक घरेलु उपचार)

16- कपूर और श्वेत चन्दन को तुलसी पत्र के स्वरस में पीसकर ललाट प्रदेश में लेप करने से शिर:शूल (सिर की पीड़ा) मिट जाती है । ( और पढ़ें – सिर दर्द को दूर करने के 145  घरेलु उपचार)

17- कपूर को चत्गुणं तिल या एरन्ड के तैल में खूब भली प्रकार खरल करके दर्द के स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करने से सन्धिशूल, कटिशूल और नाड़ीशूल नष्ट हो जाता है ।

18- कपूर और हींग सममात्रा में लेकर मधु के साथ खरल करके 250 से 500 मि.ग्रा, की गोलियाँ बनाकर अदरक के स्वरस के साथ 4-4 घंटे पर सेवन करने से तमकश्वास और जीर्ण कास के दौरों में शीघ्र लाभ होता है ।

19- गाय, बैल, भैंस, बकरी इत्यादि पालतू जानवरों के घावों में कृमि पड़ने पर कपूर का बारीक चूर्ण बनाकर भर देने से व्रणगत कृमि नष्ट हो जाते हैं ।

20- डेली वाला कपूर 3 ग्राम, जल 750 मि.ली. लें । 2 साफ-स्वच्छ खाली बोतलों में कपूर की स्वच्छ रेशमी वस्त्र में पोटली बाँधकर जल से भरी बोतल में डाल दें । एक घंटे बाद यह सभी प्रकार के ज्वरों में लाभ पहुँचाने वाला कपूर पेय तैयार हो जाता है । आवश्यकतानुसार थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें । यह पेय समस्त प्रकार के ज्वरों को दूर करता है । यह पेय अति सौम्य, हृदय को बल देने वाला, शीतल, एन्टीसैप्टिक, दीपक, पाचक और ज्वरों से उत्पन्न तृषा को नष्ट करने वाला है । आन्त्रिक ज्वर में यदि इसका प्रारम्भ से ही सेवन कराया जाए तो टाक्सीमिया जैसी स्थिति नहीं बनने पाती है और रोगी शीघ्र रोगमुक्त हो जाता है।

कपूर सेवन की मात्रा :

•  कपूर की मात्रा वयस्कों में अधिकतम 10 ग्राम तक और बच्चों में डेढ़ ग्राम तक है। साधारण गृहस्थ उक्त मात्रा से अधिक मात्रा में सेवन कदापि न करें अन्यथा हानि होगी क्योंकि अधिक मात्रा में कपूर सेवन करना जहर सेवन करना है। यदि आवश्यक हो तो अपने पारिवारिक सुयोग्य रजिस् वैद्य (चिकित्सक से परामर्शानुसार ही सेवन करें ।

कपूर के नुकसान : kapoor (Camphor) ke nuksan

•  कपूर का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में विषैला प्रभाव उत्पन्न करता है |
•  कपूर के अधिक मात्रा में सेवन से आंखों से कम दिखाई देना, शरीर का नीला होना, चेहरे का सूज जाना, दस्त रोग, नपुंसकता, तन्द्रा, दुर्बलता, पेट दर्द, उल्टी, प्रलाप, भ्रम, पक्षाघात (लकवा), पेशाब में रुकावट, अंगों का सुन्न होना, पागलपन, बेहोशी, खून की कमी आदि लक्षण उत्पन्न हो सकते है।

कपूर से बनी आयुर्वेदिक दवा : kapoor (Camphor) se bani dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा कपूर से निर्मित लाभदायक आयुर्वेदिक औषधियां |

1) अमृत द्रव (Achyutaya Hariom Amrit Drav )
2) संतकृपा सुरमा (Achyutaya HariOm Santkrupa Surma)
3) दंत सुरक्षा तेल -Achyutaya Hariom Dant Suraksha Tel

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

2018-06-08T19:23:51+00:00By |Herbs|0 Comments

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