पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

कर्ण पीड़ासन : कान के रोगों में विशेष लाभकारी आसन | Karna Pidasana Steps and Health Benefits

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कर्ण पीड़ासन : कान के रोगों में विशेष लाभकारी आसन | Karna Pidasana Steps and Health Benefits

Karna Pidasana / Karnapidasana Steps and Health Benefits

आसन (Karna Pidasana /Karana pira asana)से रोगों में लाभ-

★ इस आसन(कर्ण पीड़ासन) के अभ्यास से स्नायु तंत्र (नर्वससिस्टम) मजबूत तथा क्रियाशील बनता है।
★ यह आसन सुषुम्ना में मौजूद सभी नाड़ियों को जगाता है, जिससे शरीर का रोम-रोम जाग उठता है।
★ इस आसन को करने से पूरा शरीर स्वस्थ, शक्तिशाली तथा सक्रिय बना रहता है।
★ कर्ण पीड़ासन पीठ, कमर, गर्दन, मेरुदण्ड तथा कानों को सबल बनाता है।
★ जिगर, स्पलीन तथा पेट के अन्य रोगों में भी लाभप्रद है।
★ मधुमेह तथा हार्निया के रोगों के लिए भी उपयोगी है।
★ शरीर के सभी जोड़ों को सबल बनाता है।
★ निम्न रक्तचाप के लिए लाभप्रद है।
कर्ण रोगों में विशेष लाभकारी होने से इस आसन का नाम कर्णपीड़ासन है ।

कर्ण पीड़ासन आसन (Karna Pidasana /Karana pira asana) की विधि-Karna Pidasana  Karana pira asana

★ कर्ण पीड़ासन(Karna Pidasana) आसन का अभ्यास एकांत व साफ-स्वच्छ जगह पर करना चाहिए।
★ इस आसन के लिए नीचे जमीन पर दरी या चटाई बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं।
★ अब पूरे शरीर को ढीला छोड़ें। दोनों हाथों को दोनों बगल में कमर के पास लगाकर सीधा रखें तथा हथेलियों को नीचे की तरफ करके रखें।
★ अब दोनों पैरों को एक साथ उठाकर धीरे-धीरे ऊपर सिर की ओर लाएं।
★ अब दोनों पैरों को दोनों कान से सटाकर सिर के दोनों ओर रखें तथा पंजे व घुटनों को नीचे फर्श से टिकाकर रखें। इस स्थिति में कुछ देर तक रहे, फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं और कुछ समय तक आराम करें।
★ इसके बाद फिर इस क्रिया को करें। इस क्रिया को प्रतिदिन 5 बार करें।

कर्ण पीड़ासन (Karnapidasana) करने में सावधानी-

★ इस आसन(Karnapidasana) के अभ्यास के समय पैरों को झटके से ऊपर ले जाने की कोशिश न करें। इससे गर्दन में मोच आदि आ सकती है। इस आसन को आराम से करें।
★ यह आसन कठिन है, इसलिए घुटनों व पंजों को फर्श पर टिकाने के स्थान पर पहले केवल पंजो को ही फर्श पर टिकाने की कोशिश करें। इसके बाद धीरे-धीरे घुटनों को भी फर्श पर टिकाने की कोशिश करें।

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कर्ण पीड़ासन : कान के रोगों में विशेष लाभकारी आसन | Karna Pidasana Steps and Health Benefits
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2017-08-25T09:34:01+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments

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