कैंसर का इलाज – cancer ka ilaj

१ ] तुलसी : cancer me tulsi ka upyog

★ तुलसी की 21 से 35 पत्तियाँ स्वच्छ खरल (जिसमे रसोई में मसाला कूटा जाता है) या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भांति पीस लें और 10 से 30 ग्राम मीठी दही (ताज़ा दही, खट्टा ना हो) में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खायें। ध्यान रहे दही खट्टा न हो और यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। दूध के साथ भुलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। एक से डेड घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं।

मात्रा :-दवा कैंसर जैसे असह्य दर्द और कष्टप्रद रोगो में ३ बार सुबह-दोपहर-शाम लेना हैं।
यह प्रयोग कैंसर जैसे असाध्य रोगों में बहुत लाभप्रद है।
( सूर्यास्त के बाद दही नही खाना चाहिए)

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२] वज्र-रसायन : Achyutaya hariom Vajra Rasayan Tablet

★ वज्र रसायन बनती है हीरों को भस्म बनाकर | केन्सर (cancer) वालों को वज्र रसायन देना…. केन्सर को मार भगाता है |

मात्रा :-‘वज्र-रसायन’ की आधी गोली दिन में २ बार लें।

प्राप्ति-स्थान : संत श्री आशारामजी आश्रमों और श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र

3] निम्बू के छिलके : Nimbu Ke Chilke

★ निम्बू के छिलके चाकू से निकाल के उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। अथवा निम्बू को फ्रीजर में रखें और सख्त हो जाने पर उसके छिलके को कदुकश कर लें। उन टुकड़ों या कदुकश किये छिलकों को दाल, सब्ज़ी, सलाद, सूप आदि खाद्य पदार्थों में मिला के नियमित सेवन करने से कैंसर (cancer)रोग में लाभ होता है।

मात्रा :-१ दिन के लिए १ निम्बू का छिलका पर्याप्त है।”

– पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू (Pujya Asaram Bapu Ji )