पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

अगर बार बार जन्म लेते ही बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो गर्भरक्षा के लिए अपनाये यह उपाय

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अगर बार बार जन्म लेते ही बच्चे की मृत्यु हो जाती है तो गर्भरक्षा के लिए अपनाये यह उपाय

आइये जाने गर्भरक्षा(Garbh Raksha) के आयुर्वेदिक उपाय|

उपाय :

धतूरा: जिस स्त्री को बार-बार गर्भपात को जाता हो उसकी कमर में धतूरे की जड़ का चार उँगल का टुकड़ा बाँध दें। इससे गर्भपात नहीं होगा। जब नौ मास पूर्ण हो जाय तब जड़ को खोल दें।

जौ : जौ के आटे को एवं मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुकता है।
काला सुरमा: काला सुरमा, रीठा का छिलका 20-20 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी में घोटकर छोटी-छोटी आकार की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। गर्भ ठहरने के बाद 1-1 गोली सुबह-शाम 1 कप दूध से बच्चा होने तक बच्चे को भी दूध पीने तक प्रयोग करायें।

 शिवलिंगी के बीज: शिवलिंगी के बीज पांच ग्राम, दखनी मिर्च लगभग 7 ग्राम, नागकेसर, धन्तर के बीज 2-2 ग्राम सुच्चे मोती, 240 मिलीग्राम कस्तूरी, 360 मिलीग्राम लौह भस्म, 5 ग्राम हाथी के दांत का बुरादा, 7 ग्राम संख्या भस्म, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पानी मिलाकर छोटी-छोटी की गोलियां बनाकर माहवारी खत्म होने के बाद रात को खाना खाने के बाद 2 घंटे बाद एक गोली दूध से 7 दिनों तक सेवन करना चाहिए। इससे निश्चित रूप से गर्भाधान होगा और बच्चा होने पर बच्चा मरता नहीं है।
विशेष :अच्युताय हरिओम सुवर्णप्राश टेबलेट ” सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु,शक्ति,मेधा,बुद्धि,कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है ।गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी,तेजस्वी ,मेधावी संतती को जन्म दे सकती है ।

अन्य लाभकारी उपाय :

1. मुलहठी: जिन स्त्रियों को गर्भपात का भय रहता हो उन्हें मुलहठी पंच, तृण, तथा कमल की जड़ का काढ़ा हर महीने एक सप्ताह दूध में औटाकर घी डालकर पीना चाहिए।

2. नीलोफर: नीलोफर, कमल के फूल, कुमुद के फूल तथा मुलहठी का काढ़ा बनाकर दूध में औटाये तथा इसमें मिश्री मिलाकर पिलाने से गर्भपात होने की संभावना बिल्कुल समाप्त हो जाती है।

3. बिरोजा: बिरोजा और गुलाबी फिटकरी दोनों को मिलाकर लगभग तीऩ ग्राम की मात्रा में देने से गिरता हुआ गर्भ तुरंत रुक जाता है। इस औषधि के सेवन के बाद गर्भवती को पानी नहीं पीने देना चाहिए, बल्कि मिश्री खिलाना चाहिए। साथ ही अन्य गर्भरक्षक उपाय करने चाहिए।

4. वंशलोचन: वंशलोचन आधा-आधा ग्राम की मात्रा में पानी या दूध के साथ सुबह-शाम को सेवन करायें। इससे गर्भपात नहीं होगा और गर्भशक्तिशाली बनता है। इससे गर्भवती स्त्री और बच्चे का स्वास्थ्य ठीक रहेगा।

5. गंभारी: गंभारी फल और मुलेठी दोनों के बराबर मिश्री मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इसे 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से गर्भावस्था में बच्चों की रक्षा होती है।

6. कमल: जिनको बार-बार गर्भपात हो जाता है, तो गर्भ स्थापित होते ही नियमित रूप से कमल के बीजों का सेवन करें। कमल की डंडी और नाग केसर को बराबर की मात्रा में पीसकर सेवन करने से पहले के महीनों में होने वाला गर्भस्राव रुकता है।

8. दूब हरी: प्रदर रोग में तथा रक्तस्राव, गर्भपात आदि योनि रोगों में दूब का उपयोग करते हैं। इससे रक्त रुकता है और गर्भाशय को शक्ति मिलती है तथा गर्भ का पोषण करता है।

9. फिटकरी: पिसी हुई फिटकरी चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक जाता है। गर्भपात के समय दर्द और रक्तस्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घंटे से एक-एक खुराक दें।

10. मूली: मूली को उबालकर खाने से गर्भ में स्थिरता आती है और गर्भपात नहीं होता है।

11. गुड़हल: सफेद गुड़हल की जड़, गोपीचन्दन, सफेद चिकनी मिट्टी और कुम्हार के काम आने वाली मिट्टी को दूध में पीसकर पिलाने से गर्भस्राव में आराम आता है।

12. अश्वगंधा: गर्भपात की आदत होने पर अश्वगंधा और सफेद कटेरी की जड़ इन दोनों का 10-10 ग्राम रस पहले पांच महीने तक सेवन करने से अकाल में गर्भपात नहीं होगा और गर्भपात के समय सेवन करने से गर्भ रुक जाता है।

13. कटेरी: कटेरी या बड़ी कटेरी की 10-20 ग्राम जड़ों के चूर्ण को 5-10 ग्राम छोटी पीपल के साथ भैंस के दूध में पीस-छानकर कुछ दिनों तक रोज पिलाने से गर्भपात का भय नहीं रहता है और बच्चा स्वस्थ पैदा होता है।

 

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