पुदीना खाने के लाभ : Health Benefits of Pudina in Summer

ताजा हरा पुदीना अधिक गुणकारी व विटामिन ‘A’ से भरपूर होता है। साथ ही इसका स्वाद व सुगंध भोजन को स्वादिष्ट व रुचिकर बनाता है। पुदीना को घरों में उपलब्ध छोटी-सी जगह, जैसे गमलों आदि में आसानी से उगाया जा सकता है। यह भारत में सर्वत्र लगाया जाता है। घरों में पुदीने की चटनी बनाई जाती है। ताजा पुदीना न होने पर इसके पत्तों को सुखाकर उपयोग में लाया जा सकता है। पुदीने का अर्क या सत विशेष तौर पर औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।पुदीना का महत्व आयुर्वेद में भी बताया गया है। आइये जाने पुदीने के सेहतमंद फायदों के बारे में -pudina ke laabh,pudina ke fayde

पुदीना के सेहतमंद फायदे : Pudina ke Fayde in Hindi

१) तलवों में जलन : तलवे में गर्मी के कारण जलन होने पर पुदीने का रस लगाना लाभकारी होता है।

२) त्वचा की गर्मी :ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें इसके पश्चात ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह प्रयोग त्वचा की गर्मी निकाल देता है।

३)खांसी : खांसी होने पर पुदीने (pudina)को अदरक के रस के साथ शहद में मिलाकर चाटने से खांसी ठीक हो जाती है।

४)लू से भी बचाव :सूखा या हरा पुदीना छाछ, लस्सी, कच्चे आम के पने के साथ पिया जाए तो पेट में होने वाली जलन दूर होकर ठंडक मिलती है। लू से भी बचाव होता है।

५) सौन्दर्य : हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूंद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। इसके बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुंहासे दूर हो जाएंगे तथा चेहरे की कांति खिल उठेगी।

६) अरुचि : पेटदर्द और अरुचि में 2 से 3 ग्राम पुदीने के रस में कालीमिर्च,जीरा, हींग, कुछ नमक डालकर गर्म करके चुस्की लेते हुये पीने से लाभ होता है।

पुदीना, सेंधा नमक, मुनक्का, काली मिर्च, हींग, जीरा, छुहारा सबको मिलाकर बारीक पीस लें। यह चटनी पेट के कई रोगों से बचावतो करती ही है साथ ही यह खाने में भी स्वादिष्ट होती है। भूख न लगने या भोजन में अरुचि होने पर यह चटनी भूख को खोलती है।

७) मूर्छा :पुदीने के ताजे पत्तों को मसलकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से मूर्छा(बेहोशी) दूर होती है।

८) कृमि : आतों के कृमि में पुदीने का रस दें। अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है।

९) प्रसव पीड़ा : प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है।

१०) विष :बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क या रस लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी तुरंत शांत करता है।

११) पित्ती : नौ से दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार बढ़ जानेवाला पित्ती ठीक हो जाता है।

१२) बुखार :पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई निर्बलता भी दूर होती है। 15 से 20 पत्ते पुदीने के और सौंठ का क्वाथ बनाकर पीने से सर्दी के कारण होने वाले बुखार में राहत मिलती है।

१३) उल्टी : जीरा , सौंफ व धनिया बराबर मात्रा में लेकर उसे भिगोकर पीस लें। फिर 100 ग्राम पानी मिलाकर छान लें। इसमें पुदीने का अर्क मिलाकर पीने से उल्टी की परेशानी दूर होती है।

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१४) अतिसार : पुदीने के पत्तों को पीसकर सुद्ध शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से अतिसार सें राहत मिलती है।

१५) हिचकी : हरे पुदीने की 15 से 20 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2 से 3 दाने इन सबको मिलाकर पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।

१६) जुएं :पुदीने का रस निकालकर साबुन के पानी में घोलकर सिर पर डालें। 15-20 मिनट तक सिर में लगा रहने दें। बाद में सिर को पानी से धो लें। दो-तीन बार इस प्रयोग को करने से बालों में पड़ गई जुएं खत्म जाएंगे।

१७) हैजा :हैजे के रोग में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर २ घंटे में रोगी को पिलाएं।

विशेष : अच्युताय हरिओम पुदीना अर्क (Achyutaya Hariom Pudina Ark) पेट के समस्त रोग,कृमि,बालकों के रोग, अरूचि,अतिसार,प्रवाहिका,संग्रहणी,उल्टी दस्त,पेचिस,पांडु,श्वास-खांसी,कफ-वात रोग ,मंदाग्नि,आफरा,अजीर्ण,जी मचलना(घबराहट),आदि में उपयोगी तथा मुख दुर्गंधनाशक ,पाचक,पीडानाशक एवं रक्तवर्धक बहुगुणकारी औषधि है ।

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