गला बैठने का घरेलू उपचार और नुस्खे | Laryngitis in Hindi

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गला बैठने का घरेलू उपचार और नुस्खे | Laryngitis in Hindi

गला बैठना क्या है ?

स्वर यन्त्र की श्लैष्मिक झिल्ली का फूलना और लसदार श्लेष्मा निकलने को स्वरयन्त्र-प्रदाह, स्वरयन्त्र-शोथ तथा-स्वर यन्त्र की सूजन ,गला बैठना ,अंग्रेजी में लेरिन्जाइटिस आदि नामों से जाना जाता है।
आइये जाने Laryngitis Causes in Hindi

गला बैठने का कारण : Gala Baithne ka Karan

✱ यह रोग सर्दी लग जाने से।
✱पानी में भीगने से।
✱गले में धूल के कण या धुएँ के जाने से।
✱सीलन भरी जगह में रहने से ।
✱जोर से गाना गाने एवं व्याख्यान अथवा भाषण आदि देने से (जिसमें स्वरयन्त्र का अधिक व्यवहार होता है) ।
✱ एकाएक हवा की गति परिर्वतन आदि कारणों से होता है।
आइये जाने Laryngitis Symptoms in Hindi

गला बैठने के लक्षण : Gala Baithne ke Lakshan in Hindi

✱इस रोग में गले में दर्द होता है तथा गला कुटकुटाता है ।
✱गले में जलन होती है।
✱ज्वर, स्वरभंग, प्यास, अरुचि एवं श्वास लेने में तकलीफ आदि होती है।
✱स्वर की श्लैष्मिक झिल्ली फूल उठती है।
✱लसदार बलगम निकलता है।
✱आवाज बिगड़ जाती है।
✱कुछ भी खाने-पीने पर उसे निगलने में तकलीफ पैदा हो जाती है।
✱उचित चिकित्सा व्यवस्था से शीघ्र तथा अधिकतम 8-10 दिनों में ही रोगी ठीक हो जाता है।
नोट :-यदि रोग समूल नष्ट न हुआ तो पुराना पड़कर बहुत दिनों तक तकलीफ देता है।
आइये जाने Laryngitis Treatment in Hindi

गला बैठने का इलाज और घरेलू उपाय : Gala Baithne ka Gharelu Upay

1- आँवले का चूर्ण गाय के धारोष्ण दूध के साथ पीवें।

2- मूली के बीज, कवाव चीनी, कुंलजन, काली मिर्च, बड़ी इलाइची, मुलहठी-इन सबको बराबर लेकर कूट-छान लें और पानी के साथ गोली बना लें। इन गोलियों को मुख में रखकर चूसें।

3-अगर, देवदारु, हल्दी, बच, मीठा कूट, काली मिर्च बराबर लेकर जौकुट करके दो तोला लें। उसे छह छटांक पानी में पकायें जब डेढ छटांक रह जावे तो मिश्री मिलाकर पीयें।

4-गन्ना भूनकर चूसने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।

5- सोंठ, काली मिर्च, पीपल, हरड़, बहेड़ा, आँवला और जवाखार-इन सबका चूर्ण थोड़ी-थोड़ा मुँह में डालते रहें।

6-अजबाइन और खसखस के पोस्त बराबर लेकर उसका काढ़ा बनावें । इस काढ़े से गरारे करने चाहिए।

7-अकरकरा, कुलंजन और मुलैठी के टुकड़े सुपाड़ी की तरह मुँह में रखने से बैठा हुआ गला खुल जाता है।

8-अदरख की गाँठ में छेद करके इसमें थोड़ा-सा नमक और भुनी हुई हींग भरकर आग में भून लें, इसे पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें, इन्हें चूसें।

9- मैदा, हल्दी अलसी का तेल और फिटकरी की पुल्टिस बनाकर गले पर बाँधे।

10- अनार की कली, सूखा धनियाँ, पोस्त के दाने, शहतूत केहरे पत्ते, मसूर की दाल छह-छह मासे लेकर एक सेर पानी में काढ़ा बनावें, उससे कुल्ला करने से गले की सूजन और दरद बंद हो जाता है।

11- गोरखमुंडी की जड़ पान में रखकर खावें।

12- बच, खुरासानी अजबाइन, मालकांगनी, बच, कुलंजन,हरड़ की गिरी, सेंधा नमक-इन सबको बराबर पीसकर चूर्ण बना लें। इसे सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें।

13- बड़ा गोखरू, खिरेंटी, सोंठ, रास्ना, छोटी पीपर, काली मिर्च-इन्हें १ तोला लेकर सिलपर पीसकर मिश्री के साथ चाटें।

14- पीपर, अडूसा, हरड़, बच, ब्राह्मी-इनका चूर्ण ३ माशा शहद और घी में मिलाकर चाटें।

15-अडूसे के पत्तों का काढ़ा शहद के साथ पीने से गला खुल जाता है।

16-अमलताश के गूदे का काढ़ा बनाकर उससे गरम-गरम कुल्ले करें।

17- चव्य, चित्रक, तालसी पत्र, सफेद जीरा, बंशलोचन, काली मिर्च, अमलबेत, सोंठ, तेजपात, इलाइची, दालचीनी-इन सबको बराबर लेकर कूट-छान लें। इस चूर्ण को २ माशा शहद के साथ चाटें।

18- अमृतधारा की कुछ बूंदे उबलते जल में डालकर सुंघाने से भी लाभ होता है।

19-पंसारी के यहाँ से मुलहठी लाकर छोटे-छोटे टुकड़े कर रोगी को चुसवाने से भी लाभ होता है।

20-खौलते जल में यूकेलिप्टस आयल डालकर रोगी को सुंघाने से लाभ होता है।

गला बैठने से बचाव और सावधानी : Prevention of Laryngitis in Hindi

1- नये रोग में रोगी को गरम कमरे में रखें तथा किसी प्रकार की पतली तथा ठन्डी चीजें खाने को न दें।
2- गले का भीतरी अंश कोमल रखने के लिए ग्लैंसरीन या जैतून का तेल (Olive Oil) अथवा 3-ग्लैसरीन तथा रेक्टी फाइड स्प्रिट बराबर मात्रा में मिलाकर गले में लगायें।
4-रोगी को बोलने न दें तथा उसे ठन्ड से बचायें एवं गरम रखें।
5-गले में राई की पुल्टिस लगा सकते हैं।
6-गले का भीतरी भाग साफ रखें।
7-पुराने रोग में गले में फलालैन आदि के वस्त्र न लपेटने दें, क्योंकि ऐसा करने से लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है।
8-पैर का तलवा हमेशा सूखा और गर्म रखें,
9-पैरों में मौजे पहनाये रखे।
आइये जाने Medicines for Laryngitis in Hindi

गला बैठना की दवा : Gala Baithne ki Dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित ” अमृत द्रव ” गले के रोगों में शीघ्र राहत देने वाली लाभदायक आयुर्वेदिक औषधि है |

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

2018-09-10T10:27:25+00:00 By |Disease diagnostics|0 Comments