पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

जीवनोपयोगी कुंजियाँ

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जीवनोपयोगी कुंजियाँ

* अपने कल्याण के इच्छुक व्यक्ति को बुधवार व शुक्रवार के अतिरिक्त अन्य दिनों में बाल नहीं कटवाने चाहिए। बुधवार को बाल कटवाने से धन की प्राप्ति और शुक्रवार को कटवाने से लाभ और यश की प्राप्ति होती है। रविवार सूर्यदेव का दिन है इस दिन बाल कटवाने से धन, बुद्धि और धर्म की हानि होती है।

* सोमवार, बुधवार और शनिवार शरीर में तेल लगाने हेतु उत्तम दिन हैं। शरीर में तेल लगाते समय पहले नाभि और हाथ-पैर की उँगलियों के नखों के नीचे के भागों में भलीप्रकार तेल लगाना चाहिए। सिर पर तेल लगाने के बाद उसी हाथ से दूसरे अंगों का स्पर्श नहीं करना चाहिए।

अश्लील पुस्तक आदि न पढ़कर ज्ञानवर्धक सत्संग की पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए।

अपने मन के गुलाम नहीं, स्वामी बनो। तुच्छ इच्छाओं की पूर्ति के लिए कभी स्वार्थी न बनो।

किसी भी व्यक्ति, परिस्थिति या कठिनाई से कभी न डरो बल्कि हिम्मत से उसका सामना करो।

अपना रहन-सहन, वेशभूषा सादगी से युक्त रखनी चाहिए। सिनेमा की अभिनेत्रियों तथा अभिनेताओं के चित्र छपे हुए अथवा उनके नाम के वस्त्र को कभी मत पहनो। जितना सादा भोजन, सादा रहन-सहन रखोगे, उतने ही स्वस्थ रहोगे। फैशन की वस्तुओं का जितना उपयोग करोगे या जिह्वा के स्वाद में जितना फँसोगे, स्वास्थ्य उतना ही दुर्बल होता जायेगा।

दीन-हीनों, असहायों व जरूरत-मंदों की सहायता-सेवा करो। किसी की उपेक्षा न करो।

तुलसी या पीपल की जड़ की मिट्टी अथवा गाय के खुर के मिट्टी पुण्यदायी, कार्यसाफल्यदायी व सात्त्विक होती है। उसका या हल्दी या चंदन का अथवा हल्दी-चंदन के मिश्रण का तिलक हितकारी है।

जूठे मुँह पढ़ना-पढ़ाना, शयन करना, जूठे हाथ से मस्तक का स्पर्श करना कदापि उचित नहीं है। सात्त्विकता और स्वास्थ्य चाहने वाले एक दूसरे से हाथ मिलाने की आदत से बचें। अभिवादन हेतु दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करना उत्तम है।

Sant Shri Asaram ji Ashram (Tejasvi Ban Book) 

2017-01-12T17:13:56+00:00 By |kya kare kya na kare, Students|0 Comments

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