पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

तृप्ति प्राणायाम – इसकी खोज महर्षि च्यवन ने की है

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तृप्ति प्राणायाम – इसकी खोज महर्षि च्यवन ने की है

जीवन से शुष्कता मिटाने के लिए व ख़ुशी लाने के लिए

पहले दायें बायें से श्वास लिया छोड़ा 10 बार (अनुलोम विलोम); बाद में दोनो नथूनों से शुद्ध हवामान में श्वास भरा; और गुरु मंत्र एक बार जपा और आनंद आनंद चिंतन किया और फूँक मार के अशांति, अतृप्ति को बाहर फेंक दिया; पूरा श्वास भरा और एक दो बार गुरु मंत्र जपा और श्वास मुँह से निकाल दिया, 50-100 बार ऐसा करो; आपके जीवन में उसी समय तृप्ति प्रसन्नता होने लगेगी ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

2017-01-03T05:53:05+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments

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