नमस्कार मुद्रा : सुस्ती आलस्य को दूर करती है यह मुद्रा | Namaskara mudra benefits in hindi

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नमस्कार मुद्रा : सुस्ती आलस्य को दूर करती है यह मुद्रा | Namaskara mudra benefits in hindi

सूर्य नमस्कार की शुरुआत भी इसी मुद्रा से होती है। इसी मुद्रा में कई आसन किए जाते हैं। प्रणाम विनय का सूचक है। इसे नमस्कार या नमस्ते भी कह सकते हैं। समूचे भारतवर्ष में इसका प्रचलन है। इस मुद्रा को करने के अनेकों फायदे हैं। योगासन या अन्य कार्य की शुरुआत के पूर्व इसे करना चाहिए। इसको करने से मन में अच्छा भाव उत्पन्न होता है और कार्य में सफलता मिलती है।
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मुद्रा बनाने का तरीका-

अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाने से नमस्कार मुद्रा बनती है। यह मुद्रा ऐसी होती है जैसे कि नमस्कार करते हैं।

समय-

नमस्कार मुद्रा को 1 घंटे सुबह और 1 घंटे शाम को करना चाहिए और धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाते रहना चाहिए। इस मुद्रा के सिद्ध होने पर साधक दूसरे के दिल की बात भी जान सकता है। यह सिद्ध योगियों की मुद्रा कहलाई जाती है।

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लाभकारी-

*<>* नमस्कार मुद्रा को रोजाना करने से आंखों के सारे रोग समाप्त हो जाते हैं और नज़र तेज हो जाती है।
*<>* यह मुद्रा ज्यादा नींद आने और सुस्ती के रोगों को दूर करती है।
*<>* नमस्कार मुद्रा का निरंतर अभ्यास करने से मन शांत होता है। यह मुद्रा शरीर को हल्का, मन का साफ, खुश और कोमल बनाती है। इस मुद्रा के द्वारा शारीरिक और दिमागी दोनों शक्तियां बढ़ जाती है।

*<>* हमारे हाथ के तंतु मष्तिष्क के तंतुओं से जुड़े हैं। हथेलियों को दबाने से या जोड़े रखने से हृदयचक्र और आज्ञाचक्र में सक्रियता आती है जिससे जागरण बढ़ता है। उक्त जागरण से मन शांत एवं चित्त में प्रसन्नता उत्पन्न होती है। हृदय में पुष्टता आती है तथा निर्भिकता बढ़ती है।

*<>* इस मुद्रा का प्रभाव हमारे समूचे भावनात्मक और वैचारिक मनोभावों पर पड़ता है, जिससे सकारात्मकता बढ़ती है। यह सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी लाभदायक है।
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