नींबू के फायदे और नुकसान | Lemon Benefits and Side Effects in Hindi

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नींबू के फायदे और नुकसान | Lemon Benefits and Side Effects in Hindi

परिचय : lemon in hindi

नींबू सबके लिए एक सुपरिचित फल है इसलिए इसका परिचय देना ज़रूरी नहीं। हम यहां काग़ज़ी नींबू के विषय में विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं जो कि पतले छिलके वाला होता है और सब्ज़ी बेचने वालों की दुकान पर मिलता है। यह सारे भारत में पैदा होता है और घरोघर इसका उपयोगी किया जाता है। इसका विशेष और सबसे बड़ा गुण कृमियों को नष्ट करने वाला होता है और इसी गुण के कारण नींबू कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता रखता है।
नींबू खट्टा होते हुए भी वैसा विकार नहीं करता जैसा विकार दूसरी खटाई जैसे इमली, अमचूर आदि के सेवन से होता है। नींबू 5-6 प्रकार का होता है। जिसमें काग़ज़ी नींबू का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। यहां काग़ज़ी नींबू का परिचय और घरेलू इलाज में उपयोगी इसके कुछ औषधीय प्रयोगों की जानकारी प्रस्तुत की जा रही है।

नींबू (Lemon) के विभिन्न भाषाओं के नाम :

संस्कृत – निम्बुका । हिन्दी – काग़ज़ी नींबू । मराठी – लिंबू । गुजराती – लींबु । बंगला – काग़दी लेबू । तेलुगु -निम्म पंडु। तामिल – एलुमिच्चै । मलयालम – चेरुनारकम् । फ़ारसी– लिमुनेतुर्श । इंगलिश -लेमन (Lemon) । लैटिन – साइट्रस मेडिका एसिडा (Citrus medica acida).

नींबू (Lemon) के औषधीय गुण : nimbu ke gun in hindi

यह खट्टा, वातनाशक, दीपक, पाचक, हलका, कृमि समूह को नष्ट करने वाला, तीखा, उदर पीड़ानाशक, अत्यन्त रुचिकारक और वात, पित्त, शूल से पीड़ित रोगी के लिए हितकारी है। यह तीनों दोषों को, अग्नि की क्षीणता, वात विकारों को, मन्दाग्नि, मलबन्ध, विषुचिका आदि विकारों को नष्ट करने वाला है।

रासायनिक संघटन :

इसके रस में जल तत्व 85.0, प्रोटीन 1-0, फेट (वसा) 0.9, मिनरल्स 0.3, रेशा 1.3, कार्बोहाइड्रेट 11.1, ऊर्जा 57 कैलोरी, कैल्शियम 70 चस., फास्फोरस 10 चस, लौह 0.26 चस. पोटेशियम 270 चस., थायमिन 0.02 चस., रिबोफ्लेमिन 0.01 चस. नियासिन 0.1 चस. विटामिन सी 39 चस. प्रति 100 ग्राम। इसके रस में साइटि-क एसिड और छिलके में उड़नशील तैल होता है।

नींबू के फायदे और उपयोग : nimbu ke fayde in hindi

Lemon Benefits in Hindi
पके हुए नींबू का उपयोग आहार के रूप में भी किया जाता है और औषधि के रूप में भी चिकित्सा के रूप में नींबू का कल्प भी किया जाता है जिसे ‘नींबू-कल्प’ कहते हैं।
नींबू के रस को अकेला न ले कर किसी भी खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ के साथ ही लिया जाता है। खाद्य पदार्थों में दाल, शाक, पोहा आदि भोज्य व्यंजनों में डाल कर लेना चाहिए और पेय पदार्थों में फलों के रस या ताज़े सादे पानी में डाल कर पीना चाहिए। । नींबू को ज़रा सेक कर यानी गरम करके रस निकालने से रस अच्छी मात्रा में निकलता है। चिकित्सा हेतु इसका उपयोग सिर्फ़ पानी के साथ किया जाता है, खाली पेट किया जाता है किसी भोज्य पदार्थ के साथ नहीं। यहां घरेलू इलाज के रूप में प्रयोग किये जाने वाले कुछ प्रयोग प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

1-अम्लपित्त में नींबू के फायदे :
अम्लपित्त (हायपर एसिडिटी) की प्रारम्भिक अवस्था में, दोपहर के भोजन के आधा घण्टा पहले, एक गिलास ठण्डे पानी में, एक नींबू निचोड़ कर एक चम्मच (बड़ा) शक्कर घोल कर पीना चाहिए। यह प्रयोग दोनों वक्त यानी भोजन करने के आधा से एक घण्टे पहले यह प्रयोग करना चाहिए। ( और पढ़ेएसिडिटी के 59 घरेलु उपचार)

2-रक्ताल्पता में नींबू के फायदे :
शरीर में खून की कमी होने को रक्ताल्पता (एनीमिया) कहते हैं। सुबह शाम एक गिलास ठण्डे पानी में नींबू निचोड़ कर पीना चाहिए। ( और पढ़ेहीमोग्लोबिन व खून की कमी दूर करने के 46 उपाय)

3-जी मचलाना में नींबू के फायदे :
अपच (अजीर्ण) या एसिडिटी के कारण जी मचलाता हो, उलटी जैसा जी करता हो तो एक पके हुए नींबू को बीच में से चीर कर दो भाग कर लें फिर इसके बीज निकाल दें और इसमें सोंठ, शक्कर, कालीमिर्च और काला नमक- चारों बारीक पिसे हुए-एक-एक चुटकी दोनों टुकड़ों में भर दें और आग पर रख कर गरम करें। जब नींबू खदबताने लगे तब उतार कर ठण्डा करके चूस लें। इस प्रयोग से जी मचलाना व उलटी होना बन्द हो जाता है।

4-अजीर्ण (पुरानी कब्ज) में नींबू के फायदे :
खाना खाने से पहले नींबू, अदरक और सेंधानमक को मिलाकर सेवन करने कब्ज दूर होती है और पाचनशक्ति बढ़ती है। इस तरह रोजाना सेवन करने से वायु, कफ, दस्त का न आना एवं आमवात (गठिया) रोग भी ठीक होता है।

5-हैजा में नींबू के फायदे :
हैजा की बीमारी फैलने के समय 2 नींबू का रस निकालकर रोजाना भोजन अथवा नमक के साथ सेवन करना चाहिए। इससे हैजा से बचाव होता है। इसका प्रयोग हैजा होने पर भी करना लाभकारी होता है।  ( और पढ़ेहैजा (विशूचिका) के कारण लक्षण और इलाज )

6-पाचनशक्ति कमजोर होना में नींबू के फायदे :
नींबू व नमक को किसी मिट्टी के बर्तन में अच्छी तरह से मिलाकर रख दें और फिर बर्तन का मुख ढककर अच्छी तरह धूप में सूखाएं। नमक अच्छी तरह नींबू में मिल जाने के बाद उसमें से रोज 1-2 टुकड़े खाएं। इससे पाचनशक्ति की कमजोरी दूर होती है और कब्ज खत्म होती है। इसे भोजन के समय खाने से स्वाद भी बढ़ता है।

7-आंखों के दर्द में नींबू के फायदे :
लोहे के तवे पर अफीम और दन्ती को नींबू के रस के साथ खरल करके लेप बना लें और इस लेप को आंखों के ऊपर लेप करें। इससे आंखों का दर्द ठीक होता है।

8-पेट के दर्द में नींबू के फायदे :
एक नींबू का रस निकाल लें और उसमें थोड़ी सी चीनी डालकर पीएं। इससे पेट का दर्द समाप्त होता है। ( और पढ़ेपेट दर्द के 41 देसी घरेलु उपचार )

9-पित्तशमन में नींबू के फायदे :
नींबू का रस और नमक मिलाकर सेवन करने से पित्त नष्ट होता है।

10-पेट के कीडे़ में नींबू के फायदे :
नींबू का रस निकालकर दिन में 2 बार पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।

11-प्यास का अधिक लगना में नींबू के फायदे :
एक नींबू का रस निकालकर उसमें दो चुटकी चीनी डालकर पीने से प्यास का अधिक लगना कम होता है।

12-जोड़ों के दर्द व खांसी में नींबू के फायदे :
5 ग्राम नीबू के रस में 3 ग्राम चीनी डालकर पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है और खांसी दूर होती है।

13-पित्त गिरना में नींबू के फायदे :
नींबू का शर्बत बनाकर पीने से शरीर में पित्त की मात्रा सामान्य बनता है।

14-हिचकी में नींबू के फायदे :
सूखे नींबू को जलाकर उसके राख को बारीक करके शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी का बार-बार आना ठीक होता है। उल्टी आने पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।

15-दस्त साफ न आना व भूख न लगना में नींबू के फायदे :
6 ग्राम नींबू का रस, 50 ग्राम पानी और 10 ग्राम चीनी मिलाकर शर्बत बनाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पीना चाहिए। इसका सेवन 5 से 7 दिन तक करने से दस्त साफ आने लगता है और भूख भी बढ़ती है।

16-खुजली में नींबू के फायदे :
10 ग्राम नारियल का तेल व 6 ग्राम नींबू का रस मिलाकर शरीर पर मलना चाहिए और फिर गर्म पानी से नहाने चाहिए। इससे त्वचा की खुजली दूर होती है।

17-पेशाब का बंद होना में नींबू के फायदे :
नींबू के बीजों को थोड़ा कूटकर नाभि में भरकर ऊपर से मट्ठे या पानी की धार नाभि पर छोड़ने से पेशाब आता है। इसका प्रयोग 10 वर्ष से नीचे के आयु वाले बच्चों का पेशाब बंद हो जाने पर किया जाता है।

18-जिगर के रोग में नींबू के फायदे :
1 पका कागजी नींबू लेकर उसके दो टुकड़े कर लें और इसका बीज निकालकर आधे नींबू को चार भाग में बांट लें। इस बात का ध्यान रखें कि इसके टुकड़े अलग-अलग न हों। इसके बाद 1 भाग में कालीमिर्च का चूर्ण, दूसरे भाग में काला सेंधानमक, तीसरे में सोंठ का चूर्ण और चौथे में मिश्री का चूर्ण भर दें। इसे रात को प्लेट में रखकर ढक दें। सुबह खाना-खाने से 1 घंटा पहले इस नींबू की टुकड़े को हल्की आंग पर गर्म करके चूसें। इसे आवश्कतानुसार 7-21 दिन तक लेने से लीवर (जिगर) सही होता है और यकृत विकार ठीक हो जाता है। इसके प्रयोग से मुंह का स्वाद भी अच्छा रहता है। इससे भूख बढ़ती है। यह सिर दर्द और पुरानी कब्ज दूर होती है। इस का प्रयोग यकृत (जिगर) की सभी बीमारियां जैसे- पुराना मलेरिया, बुखार, कुनैन- पारा का जहर, अधिक शराब पीना, मिठाई खाना, अमीबिक पेचिश जीवाणुओं का यकृत (जिगर) में प्रवेश कर जाना आदि में लाभ होता है।

19-मोटापा में नींबू के फायदे :
शरीर के मोटापे को कम करने में नींबू का यह प्रयोग गुणकारी सिद्ध हुआ है। एक गिलास सादे ठण्डे पानी में एक पका हुआ नींबू निचोड़ कर 4 छोटे चम्मच शुद्ध शहद डाल कर रोज़ाना सुबह उठते ही खाली पेट पीने से मोटापा बढ़ना रुक जाता है। 5-6 महीने लगातार नियमित पीने से मोटापा दूर हो जाता है।

20-कब्ज़ में नींबू के फायदे :
क़ब्ज़ पुराना और कठोर हो तो नींबू का रस 2 चम्मच और शक्कर 2 चम्मच, एक कप पानी में घोल कर रात को सोते समय पिएं फिर कुछ देर शौचालय में बैठे। सिर्फ बैठे रहें, मल निकालने के लिए। ज़ोर न लगाएं। इस नियम का पालन आजीवन पालन करना चाहिए ताकि क़ब्ज़ होने की नौबत न आये।

नींबू के नुकसान : nimbu ke nuksan in hindi

Nimbu ke Side Effect in Hindi
✦ नींबू में सिट्रस ऐसिड होता है, जिसका उपयोग से दांत संवेदनशील हो जाते हैं।
✦ जिन लोगों के पेट में घाव हो उन्हें इसका सेवन नही करना चाहिये
✦ पैरों के जोड़ों में दर्द रहने पर इसके सेवन से परहेज करें |
✦ गले की टॉन्सिल होने पर इसका सेवन ना करें ।
✦ चक्कर आना तथा निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए।
✦ कमजोर यकृत (लीवर) वाले रोगी यदि नींबू का सेवन करते हैं तो उनके हाथ पैरों में तनाव पैदा होता है और निर्बलता (कमजोरी) बढ़ती जाती है। यदि नींबू का सेवन जारी रहता है तो बुखार आता है।
✦ खांसी होने पर खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसे करने से खांसी बढ़ती जाती है।

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

2018-09-16T15:54:39+00:00 By |Herbs|0 Comments