पिप्पली के फायदे | Pippali Benefits in Hindi

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पिप्पली के फायदे | Pippali Benefits in Hindi

पिप्पली के फायदे | Pippali Benefits in hindi

पिप्पली काली होती है । इसका लेटिन नाम-पाइपर नाइग्रम (Piper Nigrum) है। पीपरामूल जिसका मसाले के रूप में उपयोग होता है पीपर लता की जड़ है। यह गाँठ वाली गाँठ सदृश आकार की होती है। पीपर या पील की बेल होती है। | पीपरामूल जितने मोटे और वजनदार हों, उतने ही अधिक गुणवान माने जाते हैं। पीपरामूल की महेरी बनाकर सेवन की जाती है तथा पीपरामूल का औषधियों में भी उपयोग होता है।

पिप्पली के औषधीय उपयोग : pippali ke ayurved gun

✦  मसाले के तौर पर इसे अनेक पाकों में भी डाला जाता है। अपने देश के छोटा नागपुर के क्षेत्र में स्त्रियों के आर्तवदोषजन्य कफ-विकारों में पीपरामूल का क्वाथ दिया जाता है।
✦  प्रसूता स्त्रियों के गर्भाशय को मूल स्थिति में लाने के लिए पीपर और पीपरामूल का उपयोग किया जाता है।
✦ त्रावणकोर के आप-पास के प्रदेशों में सगर्भास्त्रियों के आँवल को निकालने के लिए पीपरामूल का क्वाथ दिया जाता है ।
✦  अतिशय गर्मी के कारण लगी हुई प्यास को दूर करने के लिए भी पीपरामूल का उपयोग होता है ।
✦  पीपरामूल दीपन, तीखा, गर्म हल्का, रुक्ष, पित्तकारक और दस्त को भेदने वाला है।
✦  यह कफ, वायु, उदररोग, अफरा, तिल्ली, गुल्म, कृमि, श्वास तथा क्षयनाशक है । मस्तिष्क की दुर्बलता, उन्माद, वात प्रकोप, सूतिका-रोग, मासिकधर्म साफ न आना, निद्रानाश, कास-श्वास आदि पर प्राचीनकाल से ही पीपरामूल का घरेलू औषधि के रूप में उपयोग होता है।
✦  वैज्ञानिक मतानुसार-पीपर और पीपरामूल वात हर, उत्तेजक, रक्तशोधक और सारक है। । मलेरिया-3 पीपल पीसकर शहद में मिलाकर चाटने से श्वास, खाँसी के साथ ज्वर मलेरिया भी ठीक हो जाता है।

पिप्पली के फायदे / रोगों का उपचार : pippali ke fayde / rogo ka ilaj

1-फ्लू- दूध में पिप्पली या चौथाई चम्मच सोंठ उबालकर पीने से लाभ होता है।

2-यकृत वृद्धि- 4 पिप्पली का चूर्ण आधा चम्मच शहद में डालकर नित्य चाटे । इस प्रयोग से मोटापा भी घटता है।( और पढ़ेलिवर की बीमारी व सूजन दूर करने के रामबाण नुस्खे )

3-नारू- पीपरामूल को ठण्डे पानी में घिसकर पानी मिलाकर पीने से नारू मिटता है।

4-खाँसी- पीपरामूल, सौंठ और बहेड़ादल का चूर्ण शहद में चाटने से खाँसी मिटती है। ( और पढ़ेखांसी दूर करने के 191 सबसे असरकारक घरेलु देसी नुस्खे )

5-उल्टी-पीपरामूल व सोंठ का चूर्ण 3-3 माशा चूर्ण शहद में चाटने से उल्टी बन्द होती
हैं।

6-अम्ल पित्त- पीपरामूल और शर्करा का चूर्ण एकाध महीना लेने से अम्ल पित्त मिटता है।

7-अनिद्रा – पीपरामूल का चूर्ण गुड़ के साथ मिलाकर खाने से और ऊपर से गर्म पीने से नींद अच्छी आती है। ( और पढ़ेगहरी नींद के लिए 17 आसान घरेलु उपाय )

8-कफ, अस्थमा के लिए पिप्पली कल्प –

छोटी पिप्पली 1 नग लेकर गाय के दूध में 10-15 मिनट उबालें। उबालकर पहले पिप्पली खाकर ऊपर से दूध पी लें। अगले दिन 2 पिप्पली लेकर दूध में अच्छी तरह उबालकर, पहले पिप्पली खा लें, फिर दूध पी लेवें। इस प्रकार 7 से 11 पिप्पली तक सेवन करके पुनः क्रमशः कम करते जाएँ अर्थात् जिस तरह एक-एक पिप्पली प्रतिदिन बढ़ाई थी, वैसे ही एक-एक पिप्पली कम करते हुए 1 नग पर वापस लौट आयें। यदि अधिक गर्मी न लगे तो अधिकतम 15 दिन में 15 पिप्पली तक भी इस कल्प में ले सकते हैं। अधिक गर्मी लगने पर आप 7 या 11 पिप्पली पर ही रोककर पुनः क्रमशः एक पिप्पली पर लौट आएँ। यह कल्प कफ, अस्थमा, नजला, जुकाम व पुरानी खांसी में लाभप्रद है। इससे मन्दाग्नि, गैस, अपचन आदि रोग भी दूर हो जाते हैं।
यह पिप्पलीयुक्त दूध प्रातःकाल सेवन करें। दिन में सादा आहार लें। घी, तैल एवं किसी प्रकार की भी खट्टी एवं शीतल चीजें न लें। ( और पढ़ेअस्थमा–दमा-श्वास के 170 आयुर्वेदिक घरेलु उपचार)

2018-08-06T12:49:35+00:00 By |Herbs|0 Comments

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