प्रवाल पिष्टी के 6 हैरान करदेने वाले लाजवाब फायदे | Praval Pishti ke fayde

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प्रवाल पिष्टी के 6 हैरान करदेने वाले लाजवाब फायदे | Praval Pishti ke fayde

प्रवाल पिष्टी के गुण और उपयोग : Praval Pishti Benefits, Use & Side Effects in Hindi

★ प्रवाल पिष्टी प्रवाल से बनायी जाने वाली दवा है, प्रवाल को आम बोलचाल में मूँगा के नाम से जाना जाता है, अंग्रेज़ी में इसे Coral Calcium कहते हैं|
★ इसके इस्तेमाल से शरीर से कहीं से भी खून बहने, कैल्शियम की कमी, सुखी खांसी, कमज़ोरी, सर दर्द, जलन, एसिडिटी, गैस्ट्रिक, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, हेपेटाइटिस, जौंडिस, आँखों का लाल होना और पेशाब की जलन जैसे रोग दूर होते हैं |
★ आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रवाल पिष्टी का उपयोग उसके चिकित्सीय लाभ और औषधीय मूल्य के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। हालांकि, आयुर्वेद में मूंगा कैल्शियम चूर्ण का सीधे उपयोग नहीं किया जाता है। मूंगा कैल्शियम चूर्ण को खाने योग्य गुलाब जल के साथ संसाधित किया जाता है और खरल करके महीन चूर्ण बनाया जाता है। जब मूंगा चूर्ण को गुलाब जल के साथ संसाधित किया जाता है तो उसे प्रवाल पिष्टी कहते हैं।
★ प्रवाल पिष्टी और प्रवाल भस्म रक्तस्राव विकारों, कैल्शियम की कमी, सूखी खांसी, सामान्य दुर्बलता, जलन के साथ सिरदर्द, अम्लता, जठरशोथ, व्रण, सव्रण बृहदांत्रशोथ, हेपेटाइटिस या पीलिया, खट्टी उल्टी, नेत्रश्लेष्मलाशोथ (लाल आँखें) और पेशाब में जलन में लाभदायक है।

प्रवाल पिष्टी के औषधीय गुण: Praval Pishti ke Ayurvedic gun

प्रवाल पिष्टी (मूंगा कैल्शियम) में निम्नलिखित उपचार के गुण हैं।
१. दाहक विरोधी (इसका प्रभाव यकृतशोथ में अधिक दिखाई देता है)
२. गठिया नाशक (प्राकृतिक कैल्शियम पूरक के रूप में)
३. पाचन उत्तेजक (जब यह अम्लता के साथ आता है)
४. अम्लत्वनाशक (पेट में अम्ल उत्पादन कम कर देता है)
५. ज्वरनाशक (प्रभाव एसिटामिनोफेन के समान हैं)

आयुर्वेदिक गुण :
तासीर –शीत
विकारों पर प्रभाव- तीनों दोषों को शांत करता हैं – वात दोष (Vata Dosha), पित्त दोष (Pitta Dosha) और कफ दोष (Kapha Dosha)

प्रवाल पिष्टी के स्वास्थ्य लाभ /फायदे : Praval Pishti ke fayde / labh

★ शरीर की गर्मी या जलन : प्रवाल पिष्टी या मूंगा कैल्शियम उन लोगों के लिए लाभदायक है जो शरीर के किसी हिस्से या पूरे शरीर में जलन या गर्मी का अनुभव करते हैं।
★ शीतलता : यह शरीर की गर्मी को कम करता है और ज्वर में बढ़े हुए तापमान को कम करता है। ज्वर में, यह एसिटामिनोफेन के समान काम करता है। यह मस्तिष्क में तापमान केंद्र पर कार्य करके ज्वर काम करता है और शरीर में शीतलता लाता है। इसकी स्वाभाविक प्रकृति शीतल है, जिसका अर्थ है की इसको खाने के बाद यह शरीर में शीतलता लाता है।
★ बुखार : बुखार में इसके इस्तेमाल से अच्छा लाभ मिलता है, बुखार में इसे गोदंती भस्म के साथ लेना चाहिए. यह बॉडी Temperature को कम करता है और कमज़ोरी नहीं होने देता |
★ कमज़ोरी : पुरानी बीमारी के बाद कमजोरी और थकावट दूर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है
★ हड्डियों की कमजोरी : प्रवाल पिष्टी हड्डियों की कमजोरी के उपचार के लिए आवश्यक खनिजों का एक प्राकृतिक स्रोत है। प्रवाल में कैल्शियम की अत्यधिक जैव उपलब्धता है। इसमें कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) के अलावा मैग्नीशियम और अन्य आवश्यक खनिज होते हैं, जो हड्डियों के गठन में मदद करते हैं
★ इसके प्रयोग से सामान्य कमज़ोरी, डिप्रेशन, तनाव, चिंता, बेचैनी, दिल का ज़्यादा धड़कना, सुखी, खाँसी, अल्सर, अल्सरेटिव कोलाइटिस, ब्लीडिंग पाइल्स, हड्डियों की कमज़ोरी, Osteoporosis, पेशाब की जलन, बॉडी की जलन, पीरियड के दर्द, Heavy Menstrual Bleeding जैसे रोगों में दूसरी दवाओं के साथ इस्तेमाल किया जाता है

प्रवाल पिष्टी के चिकित्सीय उपयोग : Uses of Praval Pishti

प्रवाल पिष्टी (मूंगा कैल्शियम) स्वास्थ्य की निम्नलिखित स्थितियों में लाभदायक है।

• कैल्शियम की कमी
• ज्वर
• सामान्य दुर्बलता
• अवसाद
• बेचैनी और चिंता के साथ व्यग्रता
• ह्रदय में घबराहट
• हृदक्षिपता
सूखी खाँसी
बाल झड़ना
• त्वचा में जलन या गर्मी की सनसनी
• सूर्या अनावरण के बाद त्वचा में चुभन
• सूर्यदाह
• रजोनिवृत्ति के बाद ऑस्टियोपोरोसिस रोकथाम
• गर्भाशय से अत्यधिक रक्तस्राव
• मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव
• कष्टदायक मासिक धर्म अवधियां (विशेषकर झिल्लीदार डाइस्मानोरेरा)
• स्तन मृदुता
• अल्पशुक्राणुता (अगर व्यक्ति अम्लता और जलन का सामना कर रहा है, अन्यथा यह काम नहीं करेगा।)
• खांसते समय बलगम ना निकलने की कठिनाई वाला दमा
• अम्लता
• व्रण
• सव्रण बृहदांत्रशोथ
• गुदा विदर
• रक्त बहने वाला बवासीर
• कैल्शियम पूरक
• अस्थिसंधिशोथ
• ऑस्टियोपोरोसिस
• निम्न अस्थि खनिज घनत्व
• समयपूर्व बालों का सफ़ेद होना

प्रवाल पिष्टी सेवन विधि : Dosage of Praval Pishti

प्रवाल पिष्टी की खुराक दिन में दो या तीन बार 125 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम तक है। प्रवाल पिष्टी की अधिकतम खुराक प्रति दिन 2500 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सावधानी और दुष्प्रभाव :

★ विपरीत संकेत – रक्त में बढ़ा हुआ कैल्शियम स्तर प्रवाल पिष्टी या मूंगा कैल्शियम का प्रमुख विपरीत संकेत है।
★ औषधियों से परस्पर क्रिया – यह कुछ औषधियों के साथ क्रिया कर सकता है, इसलिए यदि आप कोई औषधि पहले से ही ले रहे हैं तो इसका उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
★ गर्भावस्था (praval pishti in pregnancy)और स्तनपान- आयुर्वेदिक चिकित्सक नियमित रूप से संसाधित मूंगा कैल्शियम या प्रवाल पिष्टी का उपयोग गर्भावस्था और स्तनपान में करते हैं। यह चिकित्सीय देखरेख में संभवतः सुरक्षित है।
★ इसे डॉक्टर की देख-रेख में ही लें।

2018-03-19T08:43:31+00:00 By |भस्म(Bhasma)|0 Comments