बांझपन क्या होता है : banjhpan kya hota hai

इस रोग का अत्यन्त ही सीधा सादा सा अर्थ है बच्चे न होना । स्त्री गर्भधारण करने में असमर्थ रहती हैं । यह रोग पुरुषों को भी होता है। पुरुष भी स्त्री को गर्भ स्थापित करने में असमर्थ हो सकता है।
यदि पति में दोष न होने पर विवाहोपरान्त भी 5 बर्ष तक गर्भ न ठहरे तो स्त्री को बाँझ रोग से ग्रसित माना जाता है । आइये जाने बांझपन क्यों होता है,

स्त्री बाँझपन के कारण : banjhpan ke karan

इस रोग के मुख्यत: दो कारण हैं।banjhpan ka ayurvedic ilaj

1.  जन्मजात-जैसे स्त्री का जन्म से ही गर्भाशय न होना अथवा गर्भाशय बहुत ही छोटा होना, कुमारी पर्दा बहुत मोटा और बिल्कुल बन्द होना, योनि की नाली बिल्कुल बन्द होना या उसका अन्तिम भाग बन्द या बहुत तंग होना अथवा फैलोडिंयन ट्यूबों का न होना अथवा बन्द होना, डिम्बाशय का न होना या बन्द होना, गर्भाशय का मुख बिल्कुल ही बन्द हो जाना इत्यादि ।

2.  भगद्वार के ओष्ठों का आपस में जुड़ जाना,गर्भाशय शोथ, गर्भाशय का उलट जाना, गर्भाशय में बहुत अधिक चर्बी एकत्र हो जाना, गर्भाशय कठोर हो जाना, डिम्बाशय पर आप्राकृतिक झिल्ली उत्पन्न हो जाना और उसकी रचना खराब हो जाना, फैलोपियन ट्यूब के झालर वाले किनारे खराब हो जाना, उपदंश श्वेत प्रदर आदि होना है ।
गर्भाशय के अन्दर दूषित तरल का एकत्र हो जाना, मासिकधर्म सम्बन्धी विकार, गर्भाशय के घाव और कैन्सर, गर्भाशय में सर्दी, गर्मी, खुश्की और तरल की अधिकता, गर्भाशय में वायु एकत्र हो जाना या पानी पड़ जाना, गर्भाशय की बबासीर, हारमोन्स के दोष, मोटापा, रक्त अल्पता, गर्भाशय के तरल में अधिक अम्लता उत्पन्न हो जाना तथा गर्भाशय के अन्य अनेक रोग बाँझपन का कारण हो सकते हैं ।

स्त्री बाँझपन के लक्षण : banjhpan ke lakshan

1)   यदि बाँझपन का कारण स्त्री को जन्म से हो तो इसका निरीक्षण से पता चल जाता है । कुमारी पर्दा और योनि के बन्द होने की अवस्था में रति क्रीड़ा नहीं किया जा सकता है ।
2)   डिम्बाशय न होने पर या उसकी रचना खराब होने पर स्त्री को रति क्रीड़ा का आनंद प्रतीत न होने के कारण, उसको मैथुन की इच्छा ही उत्पन्न नहीं हुआ करती है।
3)   डिम्बाशय पर अप्राकृतिक झिल्ली उत्पन्न हो जाने पर या फैलोपियन प्रणालियों के बन्द हो जाने पर या उनके न होने पर रति क्रीड़ा का आनंद तो आता है किन्तु तरलपात नहीं होता है।
4)   वृक्कों के ऊपर की ग्रन्थियों और डिम्बाशय में रसूली हो जाये तो स्त्रियों में मर्दाना गुण उत्पन्न हो जाता है और उनकी दाढ़ी मूछों के बाल निकल आते हैं। छाती पेट हाथ तथा पैरों पर बहुत अधिक बाल निकल आते हैं । स्तन छोटे और कड़े हो जाते हैं । मासिक बन्द हो जाता है । कामकेन्द्र बड़ा हो जाता है और स्वर पुरुषों की भाँति भारी हो जाता है।
5)   यदि गर्भाशय के किसी दूसरे रोग के कारण बाँझपन हो तो स्त्री को उस रोग का स्वयं ज्ञान होता है ।
आइये जाने बांझपन कैसे दूर करे ,बांझपन दूर करने का उपाय,बांझपन के घरेलू उपाय,banjhpan ka ayurvedic ilaj

स्त्री बाँझपन के उपचार : banjhpan ka gharelu ilaj

सर्वप्रथम बाँझपन के वास्तविक कारण को जान कर उसको दूर करने का प्रयत्न करें । यदि स्त्री में जन्म से कोई दोष हो तो उसकी चिकित्सा नहीं हो सकती है । यदि अन्य गर्भाशय रोगों के कारण बाँझपन हो या पति में कोई वीर्य सम्बन्धी विकार है तो उसकी चिकित्सा पूर्णतः सम्भव है । मात्र धैर्य की आवश्यकता है।

1)   कस्तूरी 2 रत्ती, अफीम, केसर, जायफल, प्रत्येक 1-1 मांशा, भाँग के पत्ते 2 मांशा 2 रत्ती, पुराना गुड़, सफेद कत्था प्रत्येक 5 माशा 2 रत्ती, सुपारी 3 नग्न, लौंग 4 नग, सभी को कूटपीस छानकर जंगली बेर के समान गोलियाँ बनाकर मासिक धर्म समाप्त होने के बाद 1-1 गोली सुबह-शाम 5 दिन तक खिलायें। इस औषधि से जिन स्त्रियों की आयु 40 वर्ष से भी अधिक हो गई और गर्भ नहीं ठहर पाया हो, उनकी भी मनोकामना पूर्ण हो गई । यदि प्रथम मास गर्भ न ठहरे, तो यही प्रयोग पुनः दूसरे तीसरे मांस कर सकते हैं।   ( और पढ़ें – बांझपन को दूर करेंगे यह 34 आयुर्वेदिक उपचार)

2)   मोरपंख के अन्दर सुन्दर गोल (चाँद) 9 लेकर गर्म तवे पर भून लें। और बारीक पीसकर पुराने गुड़ में गूंथकर 9 गोलियां बना लें । मासिक धर्म आने के दिनों में 1-1 गोली बहुत सबेरे गाय के दूध के साथ 9 दिन तक खिलायें । इसके बाद पति पत्नी गर्भाधान (रति क्रीडा) करें । इस प्रयोग से भी यदि प्रथम मास में सफल न हो तो दूसरे तीसरे मांस पुन; किया जा सकता है।  ( और पढ़ें – मासिक धर्म की अनियमितता दूर करने के  19 घरेलू उपचार)

3)  पीपल की दाड़ी छाया में सुखाई हुई और नागकेशर प्रत्येक 6-6 माशा, हाथी दाँत, बहुत बारीक कटा हुआ हो 1 तोला, असगन्ध, कायफल प्रत्येक 3 माशा लें । सभी औषधियों को अलग-अलग कूटपीसकर 2 तोला खांड में मिलाकर रख लें । मासिक धर्म आ चुकने के बाद रात को सोते समय 6 से 9 माशा की मात्रा में यह औषधि खिलायें और तीसरे चौथे दिन पति-पत्नी गर्भाधान करें । इस 5 दिन तक यह दवा खिलाते रहें । 3 मास के अन्दर गर्भ ठहर जाता है। ( और पढ़ें – गर्भरक्षा के लिए अपनाये यह 17 उपाय )

4)   शास्त्रीय औषधि सुपारी पाक के निरन्तर सेवन से भी श्वेत प्रदर और, गर्भाशय के रोग और कमजोरी दूर होकर गर्भ ठहर जाता है । ( और पढ़ें –सुंदर पुत्रप्राप्ति के लिये उपाय )

5)   भुनी हुई फिटकरी, जायफल, बड़ी माई, अनार का छिलका सभी सममात्रा में बारीक पीसकर पानी मिलाकर बत्तियां बनालें । मासिकधर्म आ चुकने के बाद 1 बत्ती गर्भाशय के पास रखें तथा रात्रि को बत्ती निकाल कर गर्भाधान करें।
रति क्रीडा के बाद स्त्री पुट्ठों के नीचे तकिया रखकर काफी समय तक लेटी रहे । शक्ति वर्धक भोजन खाये । अनार, सेव, सन्तरा, गेहूँ का दलिया, लाभप्रद है। खट्टी वायुकारक और भारी देर से हज्म होने वाली वस्तुएँ न खाएँ । यह अपथ्य है । ( और पढ़ें –  श्वेत प्रदर में तुरंत देते है राहत यह 17 प्राकृतिक घरेलू उपचार )

6)  गोरोचन 3 ग्राम, गजपीपल 10 ग्राम, असगन्ध 10 ग्राम लें। सभी को बारीक कूट पीसकर चूर्ण कर लें । ऋतु स्नान के पश्चात् चौथे दिन से 5 दिन तक यह चूर्ण 4-4 ग्राम की मात्रा में गौदुग्ध के साथ प्रयोग करें। तत्पश्चात् गर्भाधान करें । अवश्य गर्भधारण एवं पुत्र उत्पन्न होगा। ( और पढ़ें –मासिक धर्म में होने वाले दर्द को दूर करते है यह 12 घरेलू उपचार )

7) असगन्ध नागौरी को कूट पीसकर चूर्ण बना लें । तदुपरान्त गौघृत से चिकना कर लें । मासिक धर्म के पश्चात् 1 मास तक निरन्तर 6 ग्राम चूर्ण गौघृत के साथ सेवन करायें । अवश्य गर्भ धारण होगा । ( और पढ़ें – अश्वगंधा के 11 जबरदस्त फायदे )

8)  शिवलिंग के बीज 9 अदद मासिकधर्म के बाद (सान के बाद) 4 दिन तक निरन्तर सेवन करें, तत्पश्चात् गर्भाधान करें तो अवश्य गर्भ धारण होगा। यदि 1 बार में प्रयोग सफल न हो तो निराश न हों। 3-4 बार के प्रयोग में निराशा आशा में बदल जायेगी। ( और पढ़ें – शिवलिंगी बीज के हैरान करदेने वाले चमत्कारी फायदे )

9)  माजूफल 10 ग्राम, दक्षिणी सुपारी 10 ग्राम, हाथी दाँत का बुरादा 50 ग्राम लें । तीनों को कूटपीसकर गुड़ में मिलाकर रख लें । ऋतुकाल के पश्चात् स्नानकर शुद्ध होकर चौथे दिन से 6 ग्राम औषधि बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्या (बाँझ) स्त्री अवश्य गर्भवती हो जाती है।

10)  अपामार्ग की जड़ का चूर्ण 30 ग्राम, काली मिर्च 30 नग दोनों को बारीक पीस लें । मासिक धर्म के 1 सप्ताह पूर्व से प्रयोग करें । तीन मास तक ब्रह्मचर्य का पालन करें । गर्भाशय के समस्त रोग दूर हो जाते हैं, मासिक धर्म नियमित हो जाता है । प्रदर एवं बांझपन को दूर करने वाला अमृत समान योग है। ( और पढ़ें –अपामार्ग (चिचड़ी) के चमत्कारिक प्रयोग )

11)  भली प्रकार साफ की हुई अजवायन 4 ग्राम, सेंधानमक 2 ग्राम लें । दोनों को बारीक पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर पोटली बनालें । इसे सावधानी से योनि में गर्भाशय के समीप रखें । कुछ ही मिनटों में तेजी से पानी जैसा प्रवाह चालू होगा और थोड़ी देर बाद स्वयं ही बन्द हो जायेगा । जब पानी बन्द हो जाये तब पोटली बाहर निकाल लें । इससे गर्भाशय के समस्त विकार बाहर निकल जायेगें। यह प्रयोग शाम को 4-5 बजे करें । उस दिन सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन खीर अथवा गर्म हलुवा का सेवन करें तथा रात्रि के द्वितीय पहर में पति के संग गर्भाधान(रति क्रीड़ा) करें । इस प्रयोग से अवश्य ही बाँझ स्त्री पुत्रवती हो जाती है । ( और पढ़ें –अजवाइन के 129 चमत्कारी फायदे व दिव्य औषधीय प्रयोग  )

12)  मासिकधर्म के बाद अजवायन और मिश्री 25-25 ग्राम को 25 ग्राम पानी में रात्रि में मिट्टी के बर्तन में भिगोयें। प्रात:काल ठन्डाई की तरह खूब पीसकर पी जायें । पथ्य में मूंग की दाल और रोटी (बिना नमक की) खायें । औषधि सेवन मासिकधर्म के बाद आठ दिन तक निरन्तर करें । अवश्य गर्भ धारण होगा ।

13)  बंगला पान 1 नग, लौंग 1 नग, बढ़िया अफीम 1 रत्ती लें । तीनों को बिना पानी मिलाये घोटकर गोलियां बनालें । मासिक धर्म स्नान के पश्चात् 1 गोली ताजा जल से प्रतिदिन 3 दिन तक निगलें और रात्रि में गर्भाधान करें । प्रथम मास में ही उम्मीद सफल हो जायेगी । यदि कामयाबी हासिल न हो तो धैर्य पूर्वक पुनः यहीं क्रिया दूसरे मांस करें ।

14)  सौंठ, काली मिर्च, पीपल, नागकेशर, सभी 20-20 ग्राम लें । कुटपीसकर चूर्ण बनाकर रख लें । इसे 3-3 ग्राम की मात्रा में गाय दूध में मिलाकर ऋतु स्नान के पीछे सेवन करायें । बाँझपन को नाश कर गर्भित करने वाला योग है।  ( और पढ़ें – अदरक के 111 औषधीय प्रयोग )

15)  तुलसी के बीज आधा तोला पानी में पीसकर मासिक धर्म के समय 3 दिन तक देने से अवश्य गर्भ ठहर जाता है । ( और पढ़ें – बुखार में तुलसी के यह रामबाण प्रयोग )

16)  सुपारी और नागकेशर को सम मात्रा में लें । पीसकर कपड़छन कर लें। इस चूर्ण को 2-3 माशे की मात्रा में ऋतु काल के 16 दिन तक जल के साथ स्त्री के सेवन करने से अवश्य ही गर्भ ठहर जाता है

बाँझपन की दवा : Banjhpan ki dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित बाँझपन में शीघ्र राहत देने वाली लाभदायक आयुर्वेदिक औषधियां |

1) अश्वगँधा चूर्ण(Achyutaya Hariom Ashwagandha Churna)
2) तुलसी गोली (Achyutaya Hariom Tulsi Tablet)

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

नोट :- किसी भी औषधि या जानकारी को व्यावहारिक रूप में आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले यह नितांत जरूरी है ।