पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

बीमार है तो रूद्र गायत्री मंत्र

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बीमार है तो रूद्र गायत्री मंत्र

समझो किसीके घर में कोई बीमार है, या कोई कष्ट नष्ट ही नहीं हो रहा है तो दीक्षा में जो गुरुमंत्र मिला है उसका जप बढाये और सोमवार को घर के आसपास शिव मंदिर हो तो मंदिर में जाकर शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल, दूध चढ़ा देना फिर दिया जलाकर रख देना और रूद्र गायत्री मंत्र बोलना | मंत्र इस प्रकार है –

ॐ सर्वेश्वराय विद्महे, शूलहस्ताय धीमहि | तन्नो रूद्र प्रचोदयात् ||

“हे सर्वेश्वर भगवान ! आपके हाथ में त्रिशूल है | मेरे जीवन में जो शूल है, कष्ट है | वो आपके कृपा से ही नष्ट होंगे | मैं आपकी शरण में हूँ “.. ऐसा करने से उस भक्त की रक्षा हो जाती है |

– Shri Sureshanand ji

2017-01-05T17:22:18+00:00 By |Mantra Vigyan|0 Comments

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