परिचय एवं स्वरूप :

मटर रबी की उपज है। मुख्यत: पानी की कम उपलब्धतावाले क्षेत्रों में बोई जाती है। इसका पौधा नाजुक, एक मीटर या उससे अधिक लंबा, आरोहणशील, ऋतुजीवी होता है। पत्ते दो से आठ, अंडाकृति पत्रकोंवाले होते हैं। फूल सफेद और लाल-जामुनी आभावाले होते हैं। फलियाँ 4 से 6 सेमी. लंबी तथा 1 से 1.7 सेमी. चौड़ी वृंत पर लगती हैं। दाने लगभग गोल, कुछ चपटे से, हरे, गहरे हरे छिलके के अंदर बंद होते हैं, पर दाने सीधी पंक्ति । में छिलके के आंतरिक एक सिरे से जुड़े हुए. कच्चे दाने स्वाद में मिठास लिए हुए, पकने पर स्वाद रहित, कठोर हो जाते हैं। यह दक्षिणी यूरोप का मूलवासी पौधा है। भारत के मैदानी भागों में रबी की फसल के रूप में उगाया जाता है। यह भयंकर सर्दी तथा पाले को सहन नहीं कर पाता है। ओलों से इसे भारी हानि पहुँचती है। कुछ इलाकों में इसे जौ अथवा गेहूँ के साथ बोया जाता है। मोटे अनाज तथा दलहन में इसकी गिनती होती है। मटर की सब्जी खूब पसंद की जाती है।

विविध भाषाओं में नाम :

अंग्रेजी-Pea, कन्नड़-बाटानी, बाटागडले, गुजराती वाटनी,तमिल–पट्टनी, तेलुगू–पातांलु, बँगला–मॉटर, मराठी वाटनी, मलयालम–पट्टनी, संस्कृत –सतिला, कलाय, हिंदी-मटर।

मटर के गुण : matar ke gun

• आयुर्वेदिक चिकित्सकों की दृष्टि में मटर मधुर, शीतल होने के कारण वायुवर्धक और वातकारक है।
• यह कफ-पित्त संबंधी दोषों को दूर करनेवाली है।
• पत्तों की सब्जी वात, पित्त एवं कफ के विकार नष्ट करनेवाली होती है।
• मटर शुष्क तथा ठंड़ी एवं रक्त को शुद्ध करनेवाली है।
• इसमें कैल्सियम, गंधक तथा लौह तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं।
• सूखे मटर में प्रोटीन 22.01, चिकनाई 1,96, कार्बोज 53.7 प्रतिशत होते हैं। हरी मटर में पोषक तत्त्व 4.4, वसा 0.5, कार्बोज 60,1, खनिज पदार्थ 0.9 तथा जल की मात्रा 78.1 प्रतिशत तक होती है|
• मटर में विटामिन ‘ए’ एवं ‘सी’ पर्याप्त मात्रा में होते हैं।

मटर के उपयोग :

• मटर की कई किस्में उगाई जाती हैं। हरी मटर का सब्जी के रूप में आलू, पनीर तथा दूसरी अन्य सब्जियों के साथ उपयोग किया जाता है।
• चावल के साथ यह विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ खाई जाती है।
• यह समोसे के पेट में भी स्थान पाती है।
• हरी मटर की सब्जी अमीर-गरीब सभी को सुलभ होती है। गरीब लोग मटर का सेवन करके पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन्स की पूर्ति कर सकते हैं। इसके हरे दानों को लंबे समय तक फ्रीज करके रखा जा सकता है।
• पकी या सुखाकर तैयार की गई मटर से दाल, बेसन आदि तैयार किए जाते हैं।
• जब मटर का मौसम न हो तो उन दिनों में मटर की दाल को अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। इसके सेवन से शरीर में मांस की वृद्धि होती है।
• इसके बेसन से कड़ी, पकौड़े आदि व्यंजन बनाने में उपयोगिता है।
• इसे भूनकर पूँजा के रूप में खाया जाता है।
• आजकल तो हरी मटर (निर्जलित रूप में) बारहों मास उपलब्ध रहती है। यह पनीर की सब्जी के साथ शादी-पार्टियों की शान है।

मटर के फायदे / रोगों का इलाज : matar ke fayde / rogo ka ilaj

1- कच्ची मटर के दाने धीरे-धीरे चबाकर खाने में मीठे, स्वाद तथा अनेक रोग-विकारों को दूर करनेवाले होते हैं। घरेलू चिकित्सा में अनेक रूपों में इसका उपयोग होता है।

2-उँगलियों की सोज : पानी में भीगते रहने या कड़ाके की सर्दियों में उँगलियों पर सूजन आ जाती है, तब मटर को उबालकर इसके पानी में एक चम्मच तिल का तेल डालकर उँगलियों की सिंकाई करें, साथ ही इस पानी से उन्हें धोएँ। इससे उँगलियों की सूजन बिल्कुल मिट जाती है।

3- कब्ज की शिकायत : कच्ची मटर चबाकर खाने या ताजा मटर की सब्जी खाने से कब्ज दूर होती है। भुनी मटर चबाकर खाने से पेट अच्छी तरह से साफ होता है। मटर का निरंतर सेवन करने से रक्त एवं मांस में वृद्धि होती है। ( और पढ़ेकब्‍ज दूर करने के 19 असरकारक घरेलू उपचार )

4- जल जाने पर : आग या गरम पानी, चाय, कॉफी आदि से जल जाने पर अथवा शरीर में कहीं भी जलन और दाहवाली जगह पर हरी मटर पीसकर लेप करने से दर्द, जलन आदि शांत हो जाते हैं।

5- दुग्धवृद्धि : मटर की दाल या ताजा मटर, किसी भी रूप में पर्याप्त मात्रा में सेवन करने से पयस्विनी माताओं के दुग्ध में वृद्धि होती है। अत: दुग्धपान करानेवाली माताओं को इसे अपने भोजन में अवश्य शामिल करना चाहिए। चूंकि मटर में फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम, गंधक, ताँबा एवं लौह तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होते हैं। ( और पढ़ेमाँ का दूध बढ़ाने के घरेलु उपाय )

6-कष्टार्तव : जिन माता-बहनों को मासिक धर्म रुक-रुककर और कष्ट के साथ आता है, इन्हें प्रतिदिन ताजी मटर जरूर खानी चाहिए। इसके खाने से ऋतुस्राव का अवरोध दूर होकर कमजोरी भी दूर होती है।

7-रंग निखारने : हरी मटर अथवा सूखी मटर को पानी में भिगोकर खूब बारीक पीसकर पेस्ट बना लें। इसमें नीबू का रस मिलाकर उबटन की तरह शरीर पर मलें। घंटे भर बाद मसलमसलकर स्नान करें। इससे शरीर का रंग निखरकर गोरा तथा आभामय हो जाता है। ( और पढ़ेगोरा होने के घरेलु नुस्खे )

8-चेहरे की कांति : मटर के दानों को भूनकर तथा संतरे के सूखे छिलकों के साथ पीसकर पेस्ट तैयार करें, यह पेस्ट पानी के साथ नहीं, दूध मिलाकर बनाएँ। इस तैयार पेस्ट को चेहरे पर धीरे-धीरे मलें। लगभग घंटा भर बाद पानी में नीबू की बूंदें डालकर चेहरा धो डालें। कुछ दिन ऐसा करने से चेहरे की रंगत में निखार आ जाएगा।

9- शारीरिक दुर्बलता : चूँकि मटर में प्रोटीन्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं। अतः 100 ग्राम दाने प्रतिदिन चबा-चबाकर जाने से शरीर को पर्याप्त में प्रोटीन्स मिल जाते हैं। इससे शरीर की दुर्बलता दूर होती है। इसके अलावा घी में मटर भूनकर खाने से कमजोर व्यक्तियों को बड़ा लाभ होता है। ( और पढ़ेकमजोरी दूर करने के देसी नुस्खे)

मटर के नुकसान : matar ke nuksan

निघंटुकारों के अनुसार मटर की तासीर गरम है,इसमें खुश्की तथा रूखापन होता है, साथ ही यह वादीकारक भी है।