पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

मुख्‍य द्वार के 12 वास्तु टिप्स | Mukhya Dwar Vastu Tips in Hindi

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मुख्‍य द्वार के 12 वास्तु टिप्स | Mukhya Dwar Vastu Tips in Hindi

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार :Vastu anusar mukh dwar

★ माना जाता है कि जिस घर की स्त्री प्रातः मुख्य द्वार(Mukhya dwar) खोल कर सर्वप्रथम घर की दहलीज पर जल छिड़कती है उस घर से किसी भी प्रकार की बुरी / नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और ऐसे भवन में माँ लक्ष्मी का आने का मार्ग प्रशस्त होता है ।

★ मुख्य द्वार (Mukhya dwar)के दोनों तरफ व ऊपर कुमकुम, रोली, केसर, हल्दी आदि को घोलकर उनसे स्वास्तिक या ॐ का शुभ चिन्ह अवश्य ही बनाएं।

★ यदि किसी भी भवन में एक ही मुख्य द्वार बनाना हो तो उसे पूर्व या उत्तर दिशा में ही बनाना चाहिए लेकिन यदि भवन पश्चिम या दक्षिण मुखी है तो उनमें कभी भी एक ही प्रवेश द्वार ना बनवाएं ।

★ यदि भवन दक्षिण दिशा में हो और उसके पीछे उत्तर दिशा में दूसरा भवन हो अर्थात उत्तर दिशा बंद हो तो भवन के सामने दक्षिण दिशा में छोटा द्वार बना कर उसके बाएं अर्थात पूर्व दिशा में रिक्त स्थान देकर पूर्व दिशा की तरफ खुलने वाला बड़ा द्वार बनाये और इसे ही मुख्य द्वार का दर्जा दें अर्थात इसे ही ज्यादा उपयोग में लाएं ।

★ यदि भवन पश्चिम दिशा में हो और उसके पीछे पूर्व दिशा में दूसरा भवन हो अर्थात पूर्व दिशा बंद हो तो भवन के सामने पश्चिम दिशा में छोटा द्वार बना कर उसके दायें अर्थात उत्तर दिशा में रिक्त स्थान देकर उत्तर दिशा की तरफ खुलने वाला बड़ा द्वार बनाये और इसे ही मुख्य द्वार का दर्जा दें अर्थात इसे ही ज्यादा उपयोग में लाएं ।

★ मुख्य द्वार(Mukhya dwar) सदैव भवन के अंदर एवं घडी की दिशा में ही खुलना चाहिए । बाहर की तरफ एवं घडी की विपरीत दिशा में खुलने वाला मुख्य द्वार अशुभ माना जाता है ।

★ ध्यान रहे की घर के मुख्य द्वार को खोलने बंद करने में किसी भी तरह की आवाज़ नहीं होनी चाहिए ।

★ अगर एक द्वार के ऊपर दूसरा द्वार बनवाना पड़े तो ऊपर वाला द्वार नीचे वाले द्वार से छोटा एवं एक सीध में ही होना चाहिए ।

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★ घर का मुख्य द्वार और रसोई घर आमने-सामने न हो क्योंकि इससे घर के सदस्यों के बीमार होने का अंदेशा रहता है। यदि रसोई घर का स्थान परिवर्तन करना सम्भव ना हो तो उसके दरवाजे पर परदा लगा दें।

★ भवन के मुख्य द्वार पर 4 x 4 इन्च का ताम्र धातु में निर्मित वास्तु दोष निवारण यन्त्र अवश्य ही लगाना चाहिए., इस उपाय से यदि मुख्य द्वार या भवन में कोई भी वास्तु दोष होता है तो वह काफी हद तक कम या दूर हो जाता है ।

★ मुख्य द्वार के वस्तु दोष को दूर करने के लिए घर के द्वार पर घंटियों की झालर लगाएं जिसमें हिलने पर आवाज हो ,इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं हो पाता है घर के लोग ऊर्जा से भरे रहते है ।

★ फेंगशुई के अनुसार भवन के मुख्य द्वार (Mukhya dwar)के हैंडल पर अंदर से लाल रंग के धागे अथवा फीते में 3 ताम्बे के छेद वाले सिक्के बांधे । इससे घर में धन का आगमन होता रहता है , धन रुकता है धन की हानि नहीं होती है ।

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मुख्‍य द्वार के 12 वास्तु टिप्स | Mukhya Dwar Vastu Tips in Hindi
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2017-07-31T19:44:32+00:00 By |Vastu|0 Comments

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