मूंगफली खाने के 28 लाजवाब फायदे | Mungfali khane ke Fayde aur Nuksan

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मूंगफली खाने के 28 लाजवाब फायदे | Mungfali khane ke Fayde aur Nuksan

परिचय :

•  मूंगफली सर्वविदित एवं प्रसिद्ध एक उत्तम खाद्य पदार्थ है। इसकी बेल होती है, जो जमीन पर फैलती है, इसमें पीले रंग के फूल आते हैं तथा इसके पत्ते चकबड़ या पंवाड़ के पत्तों के सदृश होते हैं।
•  इसकी फलियां जमीन के अन्दर (कन्द जैसे) गुच्छों में लगती हैं । जब ऊपर की बेल सूखने लगती है तब समझा जाता है कि अन्दर की फलियाँ पक गई हैं, और प्रत्येक बेल के आस-पास मिट्टी खोदकर फलियां निकाल ली जाती हैं।
•  इसका कोई भी भाग व्यर्थ नहीं जाता है। बेल तथा बेल की पत्तियां एवं फलियों का छिलका भी जानवरों के लिए एक पौष्टिक खाद्य है।
•  मूंगफली की कच्ची फली भी भूनकर खाई जाती है जो अत्यन्त स्वादिष्ट होती है।

मूंगफली के औषधीय गुण : mungfali ke aushadhiya gun

•  मूंगफली मधुर, स्निग्ध, वादी, कफकारक, पित्तकारक, मलावरोध (मल को बांधने वाली) है ।
•  इसके तैल के गुण भी इसी प्रकार है । इसमें बहुत सा भाग स्टार्च (Starch) तैल और एल्ब्यूमिन से परिपूर्ण होता है ।

मूंगफली खाने के फायदे / लाभ : mungfali khane ke fayde / labh

1- सप्ताह में पांच दिन मूंगफली के कुछ दाने खाने से दिल की बीमारियां होने का खतरा कम रहता है। मूंगफली खाने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रहता है।

2- इसमें प्रोटीन, लाभदायक वसा, फाइबर, खनिज, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचूर मात्रा में पाए जाते | हैं, इसलिए इसके सेवन से त्वचा उम्र भर जवां दिखाई देती है।

3- मूंगफली में कैल्शियम और विटामिन डी अधिक मात्रा में होता है, इसलिए इसे खाने से हड्डियां मजबूत | हो जाती हैं।

4- रोजाना थोड़ी मात्रा में मूंगफली खाने से महिलाओं और पुरुषों में हार्मोस का संतुलन बना रहता है।mungfali khane ke labh aushadhiya gun

5- मूंगफली प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत है। इसमें प्रोटीन की मात्रा मांस की तुलना में 1.3 गुना, अंडे से 2.5 गुना और फलों से 8 गुना अधिक होती हैं। 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। यह आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और जिंक का अच्छा स्रोत हैं। इसमें विटामिन ई, के और बी 6 भी भरपूर मात्रा में पाए जाते है।

6- मूंगफली में तेल का अंश होने से यह पेट की बीमारियों को खत्म करती है। इसके नियमित सेवन से कब्ज की समस्या नहीं होती है। साथ ही, गैस व एसिडिटी की समस्या से भी राहत मिलती है।

7-  मूंगफली गीली खांसी में भी उपयोगी है। इसके नियमित सेवन से आमाशय और फेफड़ों को मजबूती मिलती है, पाचन शक्ति बढ़ती है और भूख न लगने की समस्या भी दूर होती है।

8- मूंगफली का नियमित सेवन गर्भवती स्त्री के लिए भी बहुत अच्छा होता है। यह गर्भावस्था में शिशु के विकास में मददकरती है।

9- मूंगफली में ओमेगा-6 फैट भी भरपूर मात्रा में मिलता है, जो स्वस्थ कोशिकाओं और अच्छी त्वचा के लिए जिम्मेदार है, इसलिए मूंगफली त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती है।

10- खाने के बाद यदि 50 या 100 ग्राम मूंगफली रोजाना खाई जाए तो सेहत बनती है, भोजन पचता है, खून | की कमी नहीं होती है।

मूंगफली के औषधीय प्रयोग / रोग उपचार : mungfali se rogo ka upchar / ilaj

1- मूंगफली का तैल 1 पाव और ब्राह्मी रस 1 से लेकर मन्दाग्नि पर पकाकर तैल मात्र शेष रहने पर उतारकर, छानकर किसी साफ स्वच्छ शीशी में सुरक्षित रखलें। इस तैल को प्रतिदिन मस्तक पर मर्दन करने से सिरदर्द इत्यादि नष्ट होकर मस्तिष्क बलवान होता है तथा इससे अपस्मार रोग में भी फायदा होता है।   ( और पढ़े – सिर दर्द को दूर करने के 145  घरेलु उपचार)

2- मूंगफली का तैल 1 चम्मच और शहद दो चम्मच मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से दस्त साफ होकर कोष्ठाश्रित वात-नष्ट हो जाता है ।
इस ढंग से एक ही बार सेवन करने से कोठा साफ हो जाता है (जैसे कि एन्ड तैल से होता है) मूंगफली का तैल 5 तोला और शहद ढाई तोला एकत्र कर एक ही बार सेवन करायें ।  ( और पढ़े – कब्‍ज दूर करने के 19 असरकारक घरेलू उपचार )

3– नित्य तालु तथा मस्तक पर केवल मूंगफली का तैल मर्दन करने से नेत्रों की उष्णता कम होकर मस्तक ठण्डा बना रहता है।

4- मूंगफली का तैल आधा सेर, हल्दी 1 पाव, खश (उशीर) 1 तोला लेकर कल्क बनाकर तैल विधि से सिद्ध कर सुरक्षित रखें । इस तैल की शरीर में मालिश करने से जीर्ण ज्वर में लाभ होता है, शरीर की खुजली रक्त शुद्ध होता है।  ( और पढ़े – खून की खराबी दूर करने के 12 घरेलु आयुर्वेदिक उपाय)

5- क्षय रोग से ग्रसित रोगी के शरीर में उपर्युक्त योग (तैल) की नित्य मालिश करने से क्षय रोग का जोर कम हो जाता है।

6- मूंगफली का तैल, बच, बच्छनाग और अपामार्ग क्षार 1-1 तोला और मदार का दूध या रस आधा सेर लेकर मन्दाग्नि पर तेल सिद्ध कर सुरक्षित रखलें । इस तैल को कान में डालने से बहरापन कर्णनाद, कर्णस्राव आदि रोग नष्ट हो जाते हैं।  ( और पढ़े – कान का बहना रोग के रामबाण घरेलु उपाय)

7- मूंगफली के तैल की छाती, सिर, तालु सहित समस्त बदन पर करने के उपरान्त उष्ण जल से स्नान कराने से बालकों को अपस्मार रोग नहीं होता है ।

8- शरीर पर कहीं पर भी जख्म होने के कारण रक्तस्राव होने पर मुंगफली के तैल को कपास के फाहे में तर करके लगा देने से तुरन्त ही रक्त स्राव बन्द हो जाता है ।

9- 250 ग्राम मूंगफली का तेल गरम करके उसमें दो तोला कपूर मिलाकर शीशी में सुरक्षित रखलें । सन्धिवात वेदना इसकी मालिश से दूर हो जाती है। यदि छाती में दर्द हो तो इस तैल की अथवा मात्र मूंगफली के तैल की ही मालिश करें । अत्यन्त लाभकारी है।शरीर में लाठी आदि की गुम चोट की पीड़ा व सूजन में भी उक्त तैल लाभकारी है।  ( और पढ़ेवात नाशक 50 सबसे असरकारक आयुर्वेदिक घरेलु उपचार )

10 – मूंगफली का तैल 5 तोला की मात्रा में गरम कर इसमें पिपरमेन्ट का फूल (सत) ढाई तोला मिलाकर शीशी में मुख बन्द करके सुरक्षित रख लें । पेटदर्द की शिकायत होने पर इस तैल की 2-3 बूंदें शक्कर के साथ खाने से पेट का दर्द बन्द हो जाता है।  ( और पढ़े – पेट दर्द या मरोड़ दूर करने के 10 रामबाण घरेलु उपचार)

11- उपरोक्त तैल की 2-3 बूंदें रुई के फाहे में डालकर दाढ़-दांत में पीड़ा होने पर दबाने से लाभ होता है।

12- मूंगफली का तैल 4 तोला, भांगरा (शृंगराज) का रस दो तोला, बायविंडग तीन माशे, अपामार्ग क्षार दो माशा, कपूर दो माशा और कबीला आधा तोला लें । सर्वप्रथम बायविंडग क्षार तथा कबीला एकत्र कर खूब महीन चूर्ण कर लें तदुपरान्त उक्त तैल और रस में मिलाकर सब एकजान करलें । उसके बाद आग पर चढ़ा दें। जल रस जब जाए तो तब इसमें 1 तोला शहद डालकर गाढ़ा हो जाने तक पकालें । नित्य प्रति इसकी 2-3 बूंदें नाक में छोड़ने और तालु पर मालिश करने से 7 दिन में पीनस रोग में लाभ हो जाता है।

13- मूंगफली का तैल 1 पाव, कपूर और मोम 1-1 तोला लें । तैल और मोम आग पर गरम करके तदुपरान्त नीचे उतारकर इसमें कपूर डालकर खूब घोटकर मलहम बनालें । इस मलहम के लगाने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोग नष्ट हो जाते हैं।

14- मूंगफली का तैल 6 तोला, मुर्दासंग, राल और मोम 1-1 तोला लें ।
सर्वप्रथम मोम और तैल को एकत्र कर पकायें फिर इसमें राल और मुर्दासंग का महीन चूर्ण डाल दें तथा खूब घोटकर मलहम तैयार कर लें। यह मरहम अस्थिव्रण, नासूर तथा भगन्दर को नष्ट कर देता है । इसके लगाने से कोई भी व्रण हो शीघ्र ही, रोपण हो जाता है। दिन में 2-3 बार लगाया करें।

15- मस्तक रोपन पाक-मूंगफली के दाने 1 पाव, बादाम की गिरी, छोटी इलायची, पिस्ता, चिरौंजी, किशमिश, खुशखश (प्रत्येक 9-9 टंक) और शुद्ध केसर 1 तोला लेकर सभी को एकत्र कर गाय के दूध में कूटकर 1 गोला सा बनाकर रखलें । फिर इसमें गाय के दूध का खोवा (मावा) 1 सेर मिलाकर कड़ाही में आधा सेर घी के साथ अच्छी तरह पका लें । तदुपरान्त मिश्री 1 सेर लेकर इसकी चाशनी बनाकर उपरोक्त गोला इसी में छोड़कर झटसे कड़ाई को नीचे उतारकर (करछुली से पाक और चाशनी को ठीक प्रकार से चला-फिराकर) एकत्रकर 9 टंक के लड्डू बनाकर अथवा थाली में डालकर चाकू से बर्फी के समान पीस काटकर सुरक्षित रखलें । इसे सुबह-शाम (भोजनोपरान्त) 9 टंक की मात्रा में खाने से मस्तक दर्द, शूल, आँखों की लाली, धुंधलापन, निद्रानाश इत्यादि विकार नष्ट होकर मस्तिष्क शान्त रहता है । इस योग की 14 या 1 दिन सेवन करें । प्रयोग काल में दही, तैल, अम्ल पदार्थ और लाल मिर्च न खायें ।

16-मूंगफली के दाने 1 पाव, और बादाम की मींगी 1 पाव, कंकोल (कबाबचीनी), शहद और छोटी इलायची के दाने सभी आधा-आधा तोला गाय का घी तीन तोला, ताजा खोवा (मावा) दो तोला और मिश्री 250 ग्राम लेकर एकत्र सिल पर पीसकर मिलालें । इसे नित्य सुबह-शाम 2-3 तोला सेवन करें तथा उपयुक्त योग में वर्णित परहेज करें। इसके सेवन से नेत्रों तथा हाथ की हथेलियों
और पैरों के तलुवों में होने वाली जलन, आंखों का धुंधलापन, तन्द्रा, दृष्टिक्षीणता, मस्तिष्क की गर्मी और वात पित्त जन्य व्याधियां नष्ट हो जाती हैं।

17- मूंगफली के दाने आधा सेर जल में भिगोकर दूसरे दिन छीलकर दूध के साथ सिल पर पीसलें । तदुपरान्त खोवा आधा सेर घृत में भूनकर कल्क को भी घी में भूनलें । दोनों को मिलाकर इसमें बादाम की गिरी, किसमिस 1-1 टंक और जायफल, जावित्री, लवंग, काली मिर्च, कलमी तज, इलायची, तमालपत्र, नागकेशर, वंशलोचन सभी 2-2 तोला लेकर महीन चूर्ण करके पाक में मिलायें। तदुपरान्त 3 सेर मिश्री की चाशनी बनाकर उक्त सभी द्रव्य इसमें डालकर कतली काट लें । इस पाक के सेवन से जीर्ण ज्वर और क्षय रोग नष्ट हो जाते हैं। यह अत्यन्त शवितबर्धक पाक है । इसे नित्य सुबह-शाम (आयु अवस्था अर्थात् बलाबलानुसार) सेवन करें, तथा ऊपर से दुग्धपान करें । दूध, घृत और गेहूँ की रोटी खायें । दही, तेल, अचार व खट्टा तैल और वातकारक पदार्थों से परहेज करें । इस योग के सेवन से पीनस रोग भी नष्ट हो जाता है ।

18- 10-10 ग्राम भुनी मूंगफली के दानों का चूर्ण और मिश्री चूर्ण मिलाकर भोजनोपरान्त सूखा रोग (रिकेट्स) से ग्रसित बच्चे को खिाने से लाभ हो जाता है।
नोट-औषधि की खुराक धीरे-धीरे बढ़ाते जायें ।

मूंगफली खाने के नुकसान : mungfali khane ke nuksan

1- अधिक मात्रा में मूंगफली सेवन आपको पेट में गैस की समस्या दे सकता है।
2- संवेदनशील त्वचा वालों को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए, इससे स्किन एलर्जी हो सकती है।
3- मूंगफली को हमेसा लाल छिलके हटाकर या साफ करके ही खाना चाहिए नहीं तो यह आंतों में चिपक रोगों का कारण बन सकता है ।
4- गर्म प्रकृति या तासीर के लोगों को मूंगफली से परहेज करना चाहिए अन्यथा उनको पित्त बढ़ने कि समस्या हो सकती है।
5- मूंगफली खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए इससे कफ खांसी जैसी परेशानी हो सकती है।

2018-06-18T21:06:38+00:00 By |Herbs|0 Comments

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