लक्ष्मणा की पहचान ,फायदे ,गुण और उपयोग | Laxmana Ki Pehchan aur Fayde

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लक्ष्मणा की पहचान ,फायदे ,गुण और उपयोग | Laxmana Ki Pehchan aur Fayde

लक्ष्मणा : Ipomaea Sepiaria in Hindi

लक्ष्मणा के सम्बन्ध में चिकित्सक समुदाय के अन्दर बहुत बड़ा मतभेद है। आयुर्वेद की इस सुप्रसिद्ध वनस्पति का आधुनिक वैद्य समाज को अभी तक वास्तविक पता नहीं चल सका है। इस वनस्पति के सम्बन्ध में लोग तरह तरह की अटकलें लगाते हैं। राजनिघंटु और धन्वन्तरी निघंटु के कर्ता ने सफेद कुलवाली कटेरी अथवा भोरीगणी के बीजों को लक्ष्मणा माना है । शालिग्राम निघंटु के कर्ता लिखते हैं कि इस वनस्पति की जड़ में एक सफेद रंग का कंद निकलता है। इसके पत्ते चौड़े होते हैं और उन पर | छाल चन्दन के समान विन्दु लगे हुए रहते हैं। यह वनस्पति पहाड़ों के दुर्गम स्थानों में कहीं २ पैदा होती है और बड़ी कठिनाई से हाथ आती है । बंगाल के कविराज हरलाल गुप्ता अपने ग्रंथ में लिखते हैं कि लक्ष्मणा एक जाति का कंद होता है जो हिमालय के अत्यन्त दुर्गम प्रदेशों में पैदा होता है।

ऐसा सुनने में आता है कि इसके पत्ते रात्रि में दीपक के समान चमकते हैं और सूर्योदय होते ही सब पत्ते – गिर जाते हैं। रात्रि में वे सब पत्ते नये फूटते हैं। इसके कंद का आकार पुतली के समान होता है और | उसे परे लाल रङ्ग के छींटे पड़े हुए रहते हैं और इसमें बकरी के दूध के समान गंध आती है।

लेकिन गुजरात के सुप्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री जयकृष्णइन्द्रजी और इंडियन मेडिसिनल प्लांटस के रचयिता लेफ्टनेंट कीर्तिकर और मेजर बसू ने हनुमानबेल अथवा बनकलमी ( Ipoinaea Bepiaria)
को ही लक्ष्मण माना है और उसी मत को मानकर हम भी यहाँ इसी नाम के नीचे इसे वनस्पति का वर्णन दे रहे हैं ।

लक्ष्मणा के विभिन्न भाषाओं के नाम :

संस्कृत-लक्ष्मणा, पुत्रदा, पुत्रकंदा, पुत्ररंजनी, पुत्रजननी, तूलिनि, नागिनि, नागपुत्री, पुच्छदा इत्यादि
हिन्दी-लक्ष्मणा, वनकलमी । बंगाल-बनकलमी । मराठी-आमटी, आमटीचेल । गुजराती-हनुमान वेल । कच्छ-रातीगुमड़ बेल । तेलगू-मेट्टात्ती । अंगरेजी-Spotted Leaved I pomaea (स्पाटेडलीव्हड़ इपोमिया) । लेटिन-Ipomaea Sepiaria ( इपोमिया सेपिएरिया)।

लक्ष्मणा बूटी की पहचान : Laxmana Ki Pehchan

1-अभिनव निघंटु में इस वनस्पति की पहिचान लिखते हुए लिखा है किः
पुत्रकाकार रक्ताल्प विन्दुभिलँछिता सदा ।।
लक्ष्मण पुत्रजननी वस्तगंधा कृतिर्भवेत् ।।
कथिती पुत्रदाऽवश्चं लक्ष्मणामुनि पुंगवैः ।।

अर्थात्-लक्ष्मणा, पुत्र जननी और पुत्रिका ये इसके संस्कृत नाम होते हैं । इसकी आकृति और इसकी गंध बकरे के समान होती है और इसके पत्तों पर लालरङ्ग के खून के समान छोंटे होते हैं ।

2-बहुत से लोग सारसपक्षी की मादा को भी लक्ष्मणा कहते हैं। अस्तु हम जिस इनुमान वेल को लक्ष्मणा मानकर चले हैं उसके लक्षण इस प्रकार होते हैं ।

3-यह एक जाति की बेल होती है जो प्रायः बारहों मसि देखने में आती है।

4- इसके पत्ते गिलोय के पत्तों की तरह होते हैं।

5-पत्तों पर तथा उनकी बीच की नस के पास बैंगनी रङ्ग के छींटे और धारियाँ होती हैं ।

6-कोई कोई पत्ते तिकोने होते हैं और उन पर छींटे नहीं भी होते हैं।

7-इसके फूल गुलाबी रंग के होते हैं और फल छोटे छोटे गोलाई लिये हुए अणीदार होते हैं ।

8-हर एक फल में ४ खण्ड और चार बीज होते हैं । जिनमें दो दो बीज एक सूक्ष्म और पतले तार से बँधे हुए रहते हैं।

9-यह वेल काठियावाड़ में थूहर की बाड़ों पर बहुत अधिक तादाद में पैदा होती है ।

लक्ष्मणा के फायदे ,गुण दोष और प्रभाव : Laxmna ke fayde in hindi

1-आयुर्वेदिक मत निघंटु में इस वनस्पति के गुणों का वर्णन करते हुए लिखा है कि
लक्ष्मणा मधुरा शीता स्त्री वन्ध्यत्व विनाशिनी ।।
रसायनकरी मल्या त्रिदोषशमनी परा ।।
अर्थात्-लक्ष्मणाकन्द मधुर, शीतल, स्त्री के वंध्यत्व को हरनेवाला, रसायन, बलकारक और त्रिदोष को शांत करनेवाला होता है ।( और पढ़ेबांझपन को दूर करेंगे यह 34 आयुर्वेदिक घरेलू उपचार)

2-गुजरात में हनुमान वेल गर्भस्थान की शुद्धि के लिये उपयोग में ली जाती है और यह विश्वास किया जाता है कि यह वनस्पति गर्भस्थान के विकारों को मिटाकर उसको सन्तानोत्पत्ति के योग्य बना देती है ।

3-इसके पत्तों को पीसकर देहाती लोग फोड़े फुन्सियों के ऊपर बाँधते हैं।

4-इसका रस एक मूत्रल और वाध नाशक वस्तु की तरह उपयोग में लिया जाता है ।

5-संखिया के विष को नष्ट करने के लिये भी यह वनस्पति वहुत सफल और उपयोगी मानी जाती है ।

6-इसकी एक सफेद फुलवाली जाति भी होती है और कई लोगों का विश्वास है कि वही वास्तविक लक्ष्मणा है ।

लक्ष्मणा के फायदे : Laxmna ke Nuksan

इसे डॉक्टर की देख-रेख में ही उपयोग मे लें |

2018-09-14T14:24:12+00:00 By |Herbs|0 Comments