लवण भास्कर चूर्ण खाने के 6 लाजवाब फायदे | Lavan Bhaskar Churna Benefits in Hindi

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लवण भास्कर चूर्ण खाने के 6 लाजवाब फायदे | Lavan Bhaskar Churna Benefits in Hindi

परिचय :

लवण भास्कर चूर्ण स्‍वादिष्‍ट तो है ही साथ ही यह भोजन पचाने की सर्वोत्‍तम आयुर्वेदिक औषधि भी है। इसे लेने पर यह हमारे पेट संबंधी सभी रोगों को दूर करता है।
इस चूर्ण को आप छाछ(Buttermilk) के साथ ले सकते है साथ ही इसे आप हलके गर्म पानी के साथ भी ले सकते है।

लवण भास्कर चूर्ण बनाने की विधि : lavan bhaskar churna bnane ki vidhi

नागकेशर, तालीसपत्र ,सेंन्धा नमक, विडू (काला) नमक, धनियाँ, पीपल, पीपलामूल, स्याहजीरा, तेजपात और अम्लवेत – प्रत्येक २-२ तोला । समुद्र नमक ८ तोला, सेंचर-नमक (मनिहारी)५ तोला, काली मिर्च, जीरा और सोंठ १-१ तोला, अनारदाना ५ तोला, दालचीनी, बड़ी इलायची ६६ माशे इन दवाओं को कूट छान चूर्ण बना रखें।
वक्तव्य – कुछ वैद्य इसमें निम्बू रस की भावना देकर सुखाकर रखते हैं, इससे यह अधिक स्वादिष्ट एवं रोचक बन जाता है।

सेवन की मात्रा और अनुपान :

१ माशा से तीन माशा, सुबह शाम भोजन के बाद शीतल जल, छाछ (मट्ठा), दही के पानी आदि के साथ दे।

लवण भास्कर चूर्ण फायदे ,गुण और उपयोग : lavan bhaskar churna ke fayde

1- इसके सेवन से मन्दाग्नि, अजीर्ण, वातकफज गुल्म, तिल्ली, उदर रोग, क्षय, अर्श, ग्रहणी, कुष्ठ, विबन्ध, शूल, आम-विकार आदि रोग नष्ट होते हैं।

2- यह चूर्ण खाने में बहुत स्वादिष्ट और अत्यन्त लाभकारी भी है।

3- पेट के रोग : रोज भोजन के बाद यदि इस चूर्ण का सेवन किया जाय तो पेट के रोग होने की संभावना नहीं रहती।

4- कब्ज : रात को सोते समय गरम पानी से लिया जाय तो प्रातः पाखाना साफ होता है। यदि सम भाग पंचसकार चूर्ण मिलाकर रोगी को दिया जाय तो सुखपूर्वक दो-तीन दस्त खुलासे हो जाते हैं।( और पढ़े कब्ज दूर करने के 18 रामबाण देसी घरेलु उपचार)

5- मन्दाग्नि : मन्दाग्नि और संग्रहणी रोग की यह उत्कृष्ट दवा है। वात-पित्त-कफ इनमें से कोई भी दोष प्रधान होने के कारण मन्दाग्नि या संग्रहणी हो तो इसके सेवन से दूर हो जाती है।

6- गैस  : हिंग्वष्टक चूर्ण 400 ग्राम, लवण भास्कर चूर्ण 400 ग्राम, बीज निकाला हुआ मुनक्का 400 ग्राम, एरंड तेल से शुद्ध किया हुआ कुचला, नौसादर, सुहागे का फूला प्रत्येक 25-25 ग्राम तथा पिपरमिंट 6 ग्राम लें। सर्वप्रथम मुनक्का अच्छी तरह पीसकर कल्क कर लें। अब पिपरमिंट तथा अन्य सभी चीजों का कपड़छन चूर्ण मुनक्का कल्क में मिलाकर खरल करके 1-1 रत्ती (121.50 मि.ग्रा.) की गोलियाँ बना लें।
आवश्यकतानुसार 1-2 गोली 3-4 बार पानी के साथ सेवन करनी चाहिए। गैस के पुराने रोगी भी इससे ठीक हो जाते हैं। ( और पढ़ेपेट की गैस को ठीक करने के आयुर्वेदिक उपाय )

पेट के रोगों की आयुर्वेदिक दवा : pet ke rogo ki ayurvedic dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित पेट के रोगों में शीघ्र राहत देने वाली लाभदायक आयुर्वेदिक औषधियां |

1) संत कृपा चूर्ण – यह चूर्ण पेट के अनेक विकार जैसे कब्ज, गैस की तकलीफ, बदहजमी, अरुचि, भूख की कमी, अम्लपित्त ( एसिडिटी), कृमि, सर्दी, जुकाम, खाँसी, सिरदर्द आदि दूर करने में कारगर तथा विशेष शक्ति, स्फूर्ति एवं ताजगी प्रदान करता है |

2) हिंगादि हरड़ चूर्ण(Hingadi Harad Churna) इस चूर्ण के सेवन से गैस, अम्लपित्त, कब्जियत, आफरा, डकार, सिरदर्द, अपचन, मंदाग्नि, अजीर्ण एवं पेट के अन्य छोटे-मोटे असंख्य रोगों के अलावा चर्मरोग, लीवर के रोग, खांसी, सफेद दाग, कील-मुहांसे, वायुरोग, संधिवात, हृदयरोग, बवासीर, सर्दी, कफ, किडनी के रोग एवं स्त्रियों के मासिकधर्म संबंधी रोगों में लाभ होता है ।

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

(वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

2018-08-22T14:39:08+00:00 By |Ayurveda|0 Comments