साईटिका के 24 सबसे असरकारक देसी घरेलु उपचार | Sciatica ka Gharelu ilaj

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साईटिका के 24 सबसे असरकारक देसी घरेलु उपचार | Sciatica ka Gharelu ilaj

साइटिका इलाज  : Sciatica Treatment

★ मनुष्य के शरीर में एक साईटिका नाड़ी होती है जिसका ऊपरी सिरा 1 इंच मोटा होता है। यह साईटिका नाड़ी शरीर में प्रत्येक नितम्ब के नीचे से शुरू होकर टांग के पीछे के भाग से होती हुई पैर की एड़ी पर खत्म होती है। इस साईटिका नाड़ी को साइटिका नर्व भी कहते हैं।
★ इस नाड़ी में जब सूजन तथा दर्द होने लगता है तो इसे साईटिका या फिर वात-शूल कहते हैं। जब यह रोग होता है तो व्यक्ति के पैर में अचानक तेज दर्द होने लगता है। यह रोग अधिकतर 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों को होता है।
★ साईटिका का दर्द एक समय में एक ही पैर में होता है। जब यह दर्द सर्दियों में होता है तो यह रोगी व्यक्ति को और भी परेशान करता है।
★ इस रोग में किसी-किसी रोगी को कफ प्रकोप भी हो जाता है। इस रोग के कारण रोगी को चलने में परेशानी होती है।
★ रोगी व्यक्ति जब उठता-बैठता या सोता है तो उसकी टांगों की पूरी नसें खिंच जाती हैं और उसे बहुत कष्ट होता है।

साईटिका रोग होने के लक्षण: satika ke lakshan

जब किसी व्यक्ति को साईटिका रोग हो जाता है तो उसके पैर के निचले भाग से होते हुए ऊपर के भागों तक तेज दर्द होता है। इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति अपने पैर को सीधा नहीं कर पाता है तथा सीधा खड़ा भी नहीं हो पाता है। रोगी व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं। रोगी व्यक्ति को कभी-कभी धीरे-धीरे दर्द होता है तो कभी बहुत तेज दर्द होता है। इस दर्द के कारण रोगी व्यक्ति को बुखार भी हो जाता है।

साईटिका रोग का कारण: satika ka karan

• असंतुलित भोजन का सेवन करने तथा गलत तरीके के खान-पान से भी यह रोग हो जाता है।sciatica ka gharelu ilaj
• रात के समय में अधिक जागने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
• जब किसी व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाती है तो उसे यह रोग हो जाता है।
• यदि साईटिका नाड़ी के पास विजातीय द्रव (दूषित द्रव) जमा हो जाता है तो नाड़ी दब जाती है जिसके कारण साईटिका रोग हो जाता है।
• रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में आर्थराइटिस रोग हो जाने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
• अधिक समय तक एक ही अवस्था में बैठने या खड़े रहने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
• अपनी कार्य करने की क्षमता से अधिक परिश्रम करने के कारण या अधिक सहवास करने के कारण भी यह रोग हो सकता है। आइये जाने साईटिका के लिये आयुर्वेदिक घरेलु उपचार ,sciatica ka ilaj kaise kare

साईटिका का घरेलु उपचार : sciatica ka ayurvedic gharelu upchar

1) लहसुन से साईटिका का उपचार : रोजाना एक दिन में 2-3 लहसुन की कलियों को पानी के साथ निगले इससे भी साइटिका में लाभ मिलती हैं | ( और पढ़ें – लहसुन के फायदे )

2) नींबू से साईटिका का उपचार : 2 चम्मच शहद को एक नींबू के रस में मिलाकर पिने से साइटिका का दर्द दूर होता हैं |( और पढ़ें –नींबू के घरेलू नुस्खे )

3) हार-श्रृंगार से साईटिका का उपचार : हार-श्रृंगार के ताजे पत्ते पीस कर एक गिलास पानी में उबाल लें, जब आधा गिलास पानी बचे तो उसको छान कर रोजाना पिए ऐसा एक सप्ताह तक करे साइटिका में लाभ मिलती हैं |

4) जायफल से साईटिका का उपचार : 10 ग्राम जायफल 100 ग्राम तिल के तेल में मिलाकर पका लें, पके हुए तेल से कमर पर मालिश करे इस प्रयोग से साइटिका का दर्द दूर होता हैं |( और पढ़ें – जायफल के अदभुत फायदे )

5) आलू  से साईटिका का उपचार : 310 ग्राम आलू का रस रोजाना दो-तीन महीने तक पिने से साइटिका के दर्द में बहुत आराम मिलता हैं |(गाजर का रस मिलकर भी इसका सेवन कर सकते हैं और भी ज्यादा असरकारी हो जायेगा)

6) साइटिका का तेल – 2-3 लहसुन लें और इसको राई के तेल में डालकर पकाये, जब अच्छे से पक जाए तो इस तेल से दर्द वाली जगह पर मालिश करने से तुरंत आराम मिलता हैं, यह तुरंत असरकारी /साइटिका का अचूक उपाय/ हैं |

7)तुलसी से साईटिका का उपचार : तुलसी की 5 पत्तियां प्रतिदिन सुबह के समय में खाने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।

8)कालीमिर्च से साईटिका का उपचार : 5 कालीमिर्च को तवे पर सेंककर कर सुबह के समय में खाली पेट मक्खन के साथ सेवन करना चाहिए। इस प्रयोग को प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

9) पारिजात से साईटिका का उपचार : लगभग 250 ग्राम पारिजात के पत्तों को 1 लीटर पानी में अच्छी तरह से उबाल लें और जब उबलते-उबलते पानी 700 मिलीलीटर बच जाए तब उसे छान लें। इस पानी में 1 ग्राम केसर पीसकर डाल दें और फिर इस पानी को ठंडा करके बोतल में भर दें। इस पानी को रोजाना 50-50 मिलीलीटर सुबह तथा शाम के समय पीने से यह रोग 30 दिनों में ठीक हो जाता है। अगर यह पानी खत्म हो जाए तो दुबारा बना लें।

10) नेगड़ से साईटिका का उपचार : 100 ग्राम नेगड़ के बीजों को कूटकर पीस लें। फिर इसके 10 भाग करके 1-1 पर्ची में पैक करके पुड़ियां बना लें। इसके बाद शुद्ध घी में सूजी या आटे का हलवा बना लें और जितना हलवा खा सकते हैं उसको अलग निकाल लें। इस हलवे में एक पुड़िया नेगड़ के चूर्ण की डालकर इसे खा लें और मुंह धो लें। लेकिन रोगी व्यक्ति को पानी नहीं पीना चाहिए। इस हलवे का कम से कम 10 दिनों तक सेवन करने से यह रोग ठीक हो जाता है।

11) मेथी दाना से साईटिका का उपचार : 20 ग्राम आंवला, 20 ग्राम मेथी दाना, 20 ग्राम काला नमक, 10 ग्राम अजवाइन और 5 ग्राम नमक को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच प्रतिदिन सेवन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। ( और पढ़ें – मेथी के अदभुत औषधीय प्रयोग )

12) satika rog ki dawa : अच्युताय हरिओम स्पेशल मालिश तेल साइटिका के दर्द में तुरंत राहत प्रदान करता है |
प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

साईटिका रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:

1)  इस रोग से पीड़ित रोगी को गर्म पानी में आधे घण्टे के लिए अपने पैरों को डालकर बैठ जाना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को तुरंत आराम मिल जाता है। इस क्रिया को प्रतिदिन करने से यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

2)  साईटिका रोग को ठीक करने के लिए आधी बाल्टी पानी में 40-50 नीम की पत्तियां डाल दें और पानी को उबालें। फिर उबलते हुए पानी में थोड़े से मेथी के दाने तथा काला नमक डाल दें। फिर इस पानी को छान लें। इसके बाद गर्म पानी को बाल्टी में दुबारा डाल दें और पानी को गुनगुना होने दे। जब पानी गुनगुना हो जाए तो उस पानी में अपने दोनों पैरों को डालकर बैठ जाएं तथा अपने शरीर के चारों ओर कंबल लपेट लें। रोगी व्यक्ति को कम से कम 15 मिनट के लिए इसी अवस्था में बैठना चाहिए। इसके बाद अपने पैरों को बाहर निकालकर पोंछ लें। इस प्रकार से 1 सप्ताह तक उपचार करने से यह रोग ठीक हो जाता है।

3) रोगी को प्रतिदिन अपने पैरों पर सरसों के तेल से नीचे से ऊपर की ओर मालिश करनी चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

4)  करेला, लौकी, टिण्डे, पालक, बथुआ तथा हरी मेथी का अधिक सेवन करने से साईटिका रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

5)  इस रोग से पीड़ित रोगी को पपीते तथा अंगूर का अधिक सेवन करना चाहिए। इससे यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

6)  सूखे मेवों में किशमिश, अखरोट, अंजीर, मुनक्का का सेवन करने से भी यह रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।

7)  फलों का रस दिन में 3 बार तथा आंवला का रस शहद के साथ मिलाकर पीने से साईटिका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

8)  इस रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को सबसे पहले एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए। इसके बाद रोगी को अपने पैरों पर मिट्टी की पट्टी का लेप करना चाहिए। इसके बाद रोगी को कटिस्नान करना चाहिए और फिर इसके बाद मेहनस्नान करना चाहिए। इसके बाद कुछ समय के लिए पैरों पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए और गर्म पाद स्नान करना चाहिए। इस प्रकार से उपचार करने से साईटिका रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

9) सुबह के समय में सूर्यस्नान करने तथा इसके बाद पैरों पर तेल से मालिश करने और कुछ समय के बाद रीढ़ स्नान करने तथा शरीर पर गीली चादर लपेटने से साईटिका रोग ठीक हो जाता है।

10) सुबह तथा शाम के समय में अपने पैरों पर प्रतिदिन 2 मिनट के लिए ताली बजाने से भी यह रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है।

11)  साईटिका रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के व्यायाम तथा योगासन हैं जिनको करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
ये आसन तथा योगासन इस प्रकार हैं-
• इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी को पीठ के बल सीधे लेट जाना चाहिए। फिर रोगी को अपने पैरों को बिना मोड़े ऊपर की ओर उठाना चाहिए। इस क्रिया को कम से कम 20 बार दोहराएं। इस प्रकार से प्रतिदिन कुछ दिनों तक व्यायाम करने से साईटिका रोग ठीक हो जाता है।
• रोगी व्यक्ति को अपने दोनों पैरों को मोड़कर, अपने घुटने से नाभि को दबाना चाहिए। इस क्रिया को कई बार दोहराएं। इस प्रकार से प्रतिदिन कुछ दिनों तक व्यायाम करने से साईटिका रोग में बहुत लाभ मिलता है।
• साईटिका रोग को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को पीठ के बल सीधे लेटकर अपने घुटने को मोड़ते हुए पैरों को साइकिल की तरह चलाना चाहिए। इस व्यायाम को प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में करने से साईटिका रोग में आराम मिलता है।

12)  साईटिका रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन हैं जिनको प्रतिदिन सुबह तथा शाम के समय में करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है, ये आसन इस प्रकार हैं- उत्तानपादासन, नौकासन, शवसान, वज्रासन तथा भुजंगासन आदि।

साइटिका में परहेज :

1)   इस रोग से पीड़ित रोगी को खटाई, मिठाई, अचार, राजमा, छोले, दही तथा तेल आदि का भोजन में सेवन नहीं करना चाहिए।
2)  रोगी व्यक्ति को तली हुई चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
3)  रोगी व्यक्ति को दालों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा यदि दाल खाने की आवश्यकता भी है तो छिलके वाली दाल थोड़ी मात्रा में खा सकते हैं।
4)  साईटिका रोग से पीड़ित रोगी को ठंडे पेय पदार्थों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
5)  इस रोग से पीड़ित रोगी को जमीन या तख्त पर सोना चाहिए तथा अधिक से अधिक आराम करना चाहिए।