सौंफ खाने के 61 लाजवाब फायदे | Health Benefits of Saunf (Fennel)

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सौंफ खाने के 61 लाजवाब फायदे | Health Benefits of Saunf (Fennel)

सौंफ के फायदे और नुकसान : Saunf Khane ke Fayde aur Nuksan

★ सौंफ के पौधे 2-3 फुट ऊंचे होते हैं। सौंफ के पौधे में धनिया के पत्ते के समान बारीक पत्ते लगते हैं। सौंफ के पौधे में लम्बे बाल निकलते हैं और फिर पीले रंग के फूल खिलते हैं। पौधों पर सौंफ के दाने उगते हैं। पहले सौंफ के दाने हरे रंग के होते हैं। पक जाने पर इनका रंग कुछ पीला हो जाता है।
★ सौंफ के रस का सेवन करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
★ सौंफ के पत्ते लाभकारी होते हैं और कई तरह के रोग विकारों को ठीक करता है। सौंफ के पत्ते को पीसकर पानी के साथ सेवन करने से स्त्री के स्तनों का विकास होता है।
★ सौंफ से बना शर्बत अधिक प्यास लगना कम करता है।
★ सौंफ मुंह की दुर्गंध को खत्म करती है।
★ सौंफ को सुखाकर सेवन करने से पित्त का नाश होता है।
★ आंखों के रोग में सौंफ का रस पीने से लाभ होता है।
★ सौंफ का रस मीठा, विपाक, कषैला, पेट साफ करने वाला, हृदय को शक्ति देने वाला, घाव, उल्टी, दस्त आदि को दूर करने वाला होता है।

सेवन की मात्रा : सौंफ 2-6 ग्राम की मात्रा में उपयोग करना चाहिए और सौंफ का रस 28 से 56 मिलीलीटर की मात्रा में उपयोग करना चाहिए।

सौंफ से विभिन्न रोगों का सफल उपचार : Saunf Khane ke Fayde(labh) in Hindi

1) आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए : aankh ki roshni badhane me Saunf ke fayde
• प्रतिदिन भोजन करने के बाद 1 चम्मच सौंफ खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इससे पाचन क्रिया भी सही होती है और पेशाब भी साफ होता है।
• सौंफ का चूर्ण बनाकर रात को सोते समय आधा चम्मच की मात्रा में 1 चम्मच चीनी मिले दूध के साथ लेने से आंखों की रोशनी बढ़ती हैं। सौंफ का चूर्ण दूध के स्थान पर पानी के साथ भी लिया जा सकता है।

2) मूत्ररोग : mutra rog me Saunf ke fayde
• घड़े के बासी पानी में सौंफ को पीसकर नाभि पर 1 इंच मोटा लेप लगाएं और साथ ही 2 बताशे में सौंफ के तेल की 15 बूंद रखकर सेवन करें। इससे पेशाब खुलकर आने लगता है।
• सौंफ के रस में थोड़ी हींग डालकर पीने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
• 4 चम्मच सौंफ को रात में 1 गिलास पानी में भिगोकर रख दें और सुबह सौंफ को छानकर पानी को पीएं। इस पानी को पीने से मूत्र से सम्बंधित सभी रोग दूर होते हैं।

3)कब्ज (कोष्ठबद्वता, अजीर्ण) : kabj me Saunf ke fayde
• बेल का गूदा और सौंफ एक साथ चबाकर खाने से कब्ज दूर होती है और पेट साफ होता है। इससे भूख खुलकर लगती है।
• 50 ग्राम सौंफ, 10 ग्राम कालानमक और 5 ग्राम कालीमिर्च को पीसकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाना खाने के बाद गर्म पानी के साथ लेने से कब्ज बजहजमी व कब्ज दूर होती है। इससे कब्ज के कारण पेट में उत्पन्न गैस, मरोड़ व दर्द भी ठीक होता है।
• कब्ज से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन रात को सौंफ का चूर्ण खाकर ऊपर से एक गिलास पानी पीना चाहिए। यह चूर्ण कब्ज व पेट की गैस को दूर करता है।
• आधा चम्मच सौंफ और आधा चम्मच हरड़ को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। रात को खाना खाने के एक घंटे बाद यह चूर्ण सेवन करने से कब्ज (अर्जीण) दूर होती है।
• 3 ग्राम सौंफ, 3 ग्राम बनफशा, 3 ग्राम बादाम और 10 ग्राम चीनी को पीस लें और यह दिन में 3 बार सेवन करें। इससे कब्ज के कारण भोजन का न पचना, दर्द आदि ठीक होता है।
• 50 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम बहेड़ा और 150 ग्राम गूदा कंवर गन्दल को बारीक पीसकर छोटी-छोटी गोलयां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन सुबह-शाम पानी के साथ खाने से पेट साफ होता है। पेट का दर्द व जलन भी दूर होता है।
• 50 ग्राम सौंफ, 100 ग्राम गूदा घी ग्वार, 100 ग्राम सोंठ और 50 ग्राम जीरा को मिलाकर पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से कब्ज दूर होती है।
• सौंफ, सनाय, हरड़ का छिलका, सोंठ और सेंधा नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ 14 से 18 साल तक के किशोरों को देने से कब्ज ठीक होती है।
• 4 ग्राम सौंफ, 4 ग्राम सनाय और 4 ग्राम द्राक्षा (मुनक्का) को पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें और इस काढ़े को रोगी को पिलाने से कब्ज दूर होती है।
• 2 ग्राम सौंफ की जड़ को पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से शौच खुलकर आता है और कब्ज नष्ट होता है।

4) गर्मी अधिक लगना : garmi adhik lagne me Saunf ke fayde
• गर्मी अधिक लगने पर 2 से 4 ग्राम सौंफ को पीसकर पानी में घोट लें और मिश्री मिलाकर बार-बार रोगी को पिलाएं। इससे गर्मी शांत होती है। इससे पीने से मल-मूत्र की जलन दूर होती है।
• जब गर्मी अधिक लगे तो सौंफ को पीसकर सिर पर लेप करें। इससे सिर दर्द, गर्मी व चक्कर आना ठीक होता है।

5) प्यास अधिक लगना : pyas adhik lagane me Saunf ke fayde
• 25 ग्राम सौंफ को 250 मिलीलीटर पानी में भिगो दें और एक घंटे बाद भिगोए हुए पानी को छानकर 1-1 घूंट पीएं। इससे तेज प्यास शांत होती है।
• पित्त-कफ के कारण उत्पन्न बुखार और मलेरिया का बुखार होने पर रोगी को अधिक प्यास लगती हो और बार-बार पानी पीने से भी प्यास शांत नहीं होती। रोगी को पूरे शरीर के अन्दर गर्मी और जलन होती रहती है। इस तरह रोगी में जलन, प्यास, गर्मी को दूर करने के लिए सौफ को पानी में भिगोकर बार-बार पिलाना चाहिए। इससे बुखार की जलन, प्यास व घबराहट शांत होती है।

6) पेचिश, संग्रहणी, दस्त में खून व आंव आना : Saunf ke fayde
• भुनी हुई सौंफ और मिश्री बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और यह 2-2 चम्मच की मात्रा में ठंडे पानी के साथ 20-20 मिनट के अंतर पर सेवन करने से दस्त में आंव व खून आना बंद हो जाता है। इससे पेट के मरोड़, दर्द आदि भी दूर होता है।
• पानी में सौंफ मिलाकर काढ़ा बना लें और इसमें थोडा नमक डालकर पीएं। इससे पेचिश का रोग समाप्त होता है।
• हरी सौंफ को गर्म पानी में उबालकर नमक डालकर दिन में 2 से 3 बार पीएं। इससे पेचिश का रोग ठीक होता है।
• सौंफ को थोड़ा भूनकर मिश्री या शक्कर के साथ मिलाकर पीने से भी पेचिश के रोगी को लाभ मिलता है।
• 100 ग्राम भुनी सौंफ, 100 भुनी सोंठ और 30 ग्राम भुनी हरड़ को अच्छी तरह से पीसकर। इसमें 250 ग्राम चीनी मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से पेचिश का रोग समाप्त होता है।
• सौंफ और छोटी हरड़ बराबर मात्रा में लेकर घी में भून लें और इसका चूर्ण बनाकर बराबर मात्रा में मिश्री मिला लें। यह चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेचिश का रोग ठीक होता है।
• 20 से 30 ग्राम सौंफ का रस दही या लस्सी के साथ पीने से संग्रहणी दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।

7) दस्त (अतिसार): dast me Saunf ke fayde
• सौंफ को पानी में उबालकर ठंडा करके पीने से दस्त का बार-बार आना बंद होता है और शरीर में पानी की मात्रा बनी रहती है।
• भुनी हुई सौंफ में कच्ची सौंफ मिलाकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 2-2 चम्मच की मात्रा में छाछ के साथ दिन में 4 बार पीने से पतने दस्त बंद होते हैं।
• 1 चम्मच सौंफ, 1 चम्मच धनिया, आधा चम्मच जीरा और 1 पुती लहसुन को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर चटनी बना लें। इसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर दिन में 4 बार खाकर ऊपर से छाछ को पीने से दस्त बार-बार आना ठीक होता है।
• सौंफ और सफेद जीरा बराबर मात्रा में लेकर भूनकर लें और इसका बारीक चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3-3 ग्राम की मात्रा में 3-3 घंटे के अंतर पर पानी के साथ पीने से दस्त का अधिक आना बंद होता है।
• 12 ग्राम सौंफ और 6 ग्राम सफेद जीरा को पीसकर रखकर इसमें 12 ग्राम चीनी मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में ठंडे पानी के साथ 20 से 25 दिन तक सेवन करने पेट के कई रोग दूर हो जाते हैं। इससे पेट का दर्द, अफारा और भूख न लगना आदि दूर होता है।
• सौंफ को पानी में भिगोकर कुछ देर बाद पानी को छानकर दिन में 4-5 बार पीने से दस्त का बार-बार आना रोग समाप्त होता है।
• यदि बच्चे को अधिक पतले दस्त आते हो तो 1 ग्राम सौंफ, 1 ग्राम अजवायन और लगभग 1 ग्राम जायफल के चूर्ण को लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की मात्रा में सौंफ के रस के साथ पिलाएं। इससे बच्चों का पतला दस्त का अधिक आना ठीक होता है।
• सौंफ, धनिया और जीरा बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें और फिर इस चूर्ण में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर आधा-आधा चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार छाछ के साथ पीएं। इससे दस्त का बार-बार आना ठीक होता है और शरीर में पानी की कमी समाप्त होती है।
• सौंफ को पानी में भिगोकर बच्चे को पिलाने से पतले दस्त दूर होते हैं।
• 6 ग्राम सौंफ को 100 मिलीलीटर पानी में उबालें और जब पानी आधा बच जाए तो इसमें एक ग्राम कालानमक मिलाकर बच्चे को 1 से 2 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन 3 बार पिलाने से दस्त का रोग समाप्त होता है।

8) आसानी से दांत निकलना : aasani se dant nikalne me Saunf ke fayde
• दांत निकलते समय यदि बच्चा दर्द के कारण अधिक रोता हो तो गाय के दूध में थोड़ा सौंफ उबालकर प्रतिदिन 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 4 बार पिलाएं। इससे दांत आसानी से निकल आते हैं।
• 2 चम्मच मोटी सौंफ को 1 कप पानी में उबालकर 1-1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार बच्चे को पिलाएं। इससे बच्चों के दांत निकलते समय का दर्द ठीक होता है और दांत आसानी से निकल आता है।

9) बच्चों का पेट फूलना : pet fulna me Saunf ke fayde
रात को 1 चम्मच सौंफ को आधा कप पानी में भिगों दें। सुबह सौंफ को उसी पानी में मसलकर छान लें और पानी में दूध मिलाकर बच्चे को पिलाएं। इसके सेवन कराने से बच्चे का पेट फूलना, गैस बनना, पेट दर्द आदि ठीक हो जाता है।

10) खाज-खुजली : khaj khujali me Saunf ke fayde
सौंफ व धनियां थोड़ी सी मात्रा में पीस लें और इसमें डेढ़ गुना घी और दुगना चीनी मिलाकर रख लें। यह प्रतिदिन सुबह-शाम 30-30 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सभी प्रकार की खुजली ठीक होती है।

11) पेट का भारीपन : नींबू के रस में भीगी हुई सौंफ मिलाकर भोजन के बाद खाने से पेट का भारीपन दूर होता है। इससे भूख खूब लगती है और मल भी साफ होता है।

12) जुकाम : 15 ग्राम सौंफ और 5 लौंग को 500 मिलीलीटर पानी में डालकर उबालें। जब पानी उबलकर केवल एक चौथाई रह जाए तो उसे छानकर देशी बूरा या चीनी डालकर पीएं। इससे जुकाम कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।

13) बांझपन : बांझपन को दूर करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण घी के साथ 3 महीने तक सेवन करें। इससे बांझपन दूर होकर गर्भधारण होता है। यह चूर्ण मोटी स्त्रियों के लिए खासकर लाभदायक है। यदि स्त्री दुबली-पतली हो तो उसे सौंफ के चूर्ण में शतावरी का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए।

14) गर्भपात रोकने के लिए : garbhpat rokne me Saunf ke fayde
• गर्भ धारण के बाद 62 ग्राम सौंफ और लगभग 31 ग्राम गुलाब का गुलकन्द पानी के साथ पीसकर प्रतिदिन एक बार पिलाने से गर्भपात रूकता है।
• गर्भधारण करने के बाद पूरे गर्भावस्ता के समय सौंफ का रस पीते रहने से गर्भ स्थिर रहता है।

15) अतिनिद्रा : jyada neend aane ke upchar me Saunf ke fayde
रोगी हर समय नींद में रहता है, उसे बेहद सुस्ती आती रहती है और उसे बिस्तर से बिल्कुल ही उठने का मन नहीं करता है। ऐसे में रोगी को 10 ग्राम सौंफ को 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर चौथाई रह जाने पर थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह-शाम 5 दिन तक पिलाएं। इससे सुस्ती दूर होकर नींद का अधिक आना कम होता है।

16) धूम्रपान : आप सिगरेट, बीड़ी पीना छोडना चाहते है तो सौंफ को घी में सेंक कर शीशी में भर लें। जब भी सिगरेट पीने का मन हो तो इसी सौंफ को आधा-आधा चम्मच की मात्रा में चबाकर खाएं। इससे सिगरेट पीने की आदत छूट जाती है।

17) बच्चा सुन्दर व अच्छा हो : गर्भधारण करने के बाद पूरे 9 महीने तक खाना खाने बाद प्रतिदिन सौंफ चबाकर खाते रहें। इससे बच्चा सुन्दर व साफ पैदा होता है।

18) बुखार : तेज बुखार होने पर सौंफ को पानी में उबाल कर 2-2 चम्मच की मात्रा में बार-बार रोगी को पिलाते रहने से बुखार कम होता है।

19) खूनी बवासीर : khuni bavasir me Saunf ke fayde
• सौंफ और मिश्री को पीसकर आधा चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन दूध के साथ लेने से खूनी बवासीर का रोग ठीक होता है।
• एक चम्मच सौंफ, जीरा और धनियां को 2 कप पानी में उबालें। फिर आधा पानी रहने पर इसे छानकर इसमें 1 चम्मच देशी घी मिलाकर पीएं। इससे रक्तार्श (खूनी बवासीर) ठीक होता है।

20) मुंह के छाले : muh ke chalo me Saunf ke fayde
• जिन लोगों के मुंह में अक्सर छाले होते रहते हैं उसे प्रतिदिन खाना खाने के बाद थोड़ी सौंफ खाना चाहिए। इससे मुंह के छाले ठीक होते हैं।
• सौंफ का चूर्ण बनाकर मुंह के छालों पर लगाने से छाले ठीक होते हैं।

21) पाचक : pachan shakti badhane me Saunf ke fayde
सौंफ और जीरा को बराबर मात्रा में मिलाकर सेंक लें और भोजन के बाद 1 चम्मच सौंफ चबाकर खाएं। इससे भोजन पूरी तरह से पच जाता है और पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।

22) याददास्त का कमजोर होना : yaad shakti badhane me Saunf ke fayde
• सौंफ को थोड़ा पीसकर ऊपर के छिलके उतार दें और अन्दर से मींगी निकालकर बराबर मात्रा में मिश्री के साथ बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार ठंडे पानी या गर्म दूध से फंकी लें। इसके सेवन से स्मरणशक्ति (याददाश्त) बढ़ती है और दिमाग ठंडा रहता है।
• लगभग 75 ग्राम सौंफ, लगभग 15 ग्राम रूमीमस्तंगी और लगभग 75 ग्राम बादाम की गिरी को पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 10 ग्राम गर्म दूध या पानी के साथ रात को सोते समय पीएं। इससे भूलने की बीमारी दूर हो जाती है और याददास्त तेज होती है।

23) दिवांधता (दिन में दिखाई न देना) : लगभग 45 ग्राम सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रख लें। यह चूर्ण 8 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन रात को सोते समय खाने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

24) कांच निकलना (गुदाभ्रंश) : सौंफ और पोसता को अलग-अलग लेकर घी में भून लें। फिर दोनों को मिलाकर पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण आधा से 1 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम मिश्री मिले दूध के साथ बच्चे को पिलाने से कब्ज दूर होकर गुदाभ्रश ठीक होता है।

25) सब्ज मोतियाबिन्द : 120 मिलीग्राम से 2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सौंफ खाने से सब्ज मोतियाबिन्द (आंखों से धुंधला दिखाई) ठीक हो जाता है।

26) अतिक्षुधा, भस्मक, अधिक भूख लगना : 30 मिलीलीटर सौंफ का रस दिन में 2-3 बार दही के साथ मिलाकर सेवन करने अधिक भूख लगना ठीक होता है।

27) मासिकस्राव : यदि अधिक मासिकस्राव हो रहा हो तो सौंफ का सेवन करना चाहिए। इसका सेवन प्रतिदिन करने से मासिकधर्म नियमित होता है।

28) खाना खाने के बाद तुरंत दस्त लग जाना : अगर भोजन करने के बाद तुरंत दस्त लग जाता हो तो उसे दूर करने के लिए भुनी हुई सौंफ और जीरा बराबर मात्रा में मिलाकर भोजन करते समय खाना चाहिए। इससे भोजन के बाद दस्त जाने की आदत समाप्त होती है।

29) कौड़ी का दर्द :
• गुलाब के फूल और सौंफ 4-4 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ पीसकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से कौड़ी का दर्द ठीक होता है।
• कौड़ी का दर्द दूर करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण ठंडे पानी के साथ लें। इससे कौड़ी का दर्द समाप्त होता है।

30) आधासीसी (माइग्रेन) अधकपारी : Saunf ke fayde
लगभग 5 ग्राम सौंफ और लगभग 5 ग्राम धनिया को पीसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण में 5 ग्राम मिश्री मिलाकर 3-3 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लें। इससे आधासीसी (आधे सिर का दर्द) दूर होता है।

31) स्तनों में दूध का कम होना : dud badane me Saunf ke fayde
• 250 ग्राम सौंफ, 250 ग्राम चीनी और 250 ग्राम शतावर को मिलाकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 10 से 15 ग्राम गर्म दूध में डालकर दिन में 3-3 घंटे पर पीने से स्त्री के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
• 500 ग्राम सौंफ को लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें और फिर इस चूर्ण में पिसी हुई मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम 2 चम्मच की मात्रा में गुनगुने दूध के साथ सेवन करें। इससे स्त्री के स्तनों में दूध बढ़ता है।

32) आक्षेप कपकपाना : लगभग 1 ग्राम सौंफ, लगभग 4 ग्राम जटामांसी, लगभग 1 ग्राम दालचीनी, लगभग 1 ग्राम शीतल चीनी और लगभग 8 ग्राम मिश्री को लेकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण रोगी को 3 से 9 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम देने से शरीर का कंपन खत्म होता है। इससे आक्षेप के कारण उत्पन्न कपकंपाना ठीक होता है।

33) पेट का दर्द : pet dard me Saunf ke fayde
• 3 ग्राम सौंफ को 50 मिलीलीटर पानी में उबालें और एक चौथाई पानी बचने पर पानी को छानकर ठंडा होने पर आधी-आधी चम्मच दिन में 3 बार पीने से लाभ होता है।
• 3 ग्राम सौंफ में चुटकी जितना सेंधा नमक मिलाकर खाने से पेट की पीड़ा समाप्त होती हैं।
• भुनी हुई सौंफ खाने से पेट का दर्द, मरोड़ आदि समाप्त होते हैं।
• सौंफ का काढ़ा बनाकर या सौंफ का रस निकालकर पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
• सौंफ और सेंधानमक मिलाकर 2 चम्मच गर्म पानी के साथ फांकी लेने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
• 10 ग्राम सौंफ, 10 ग्राम अजवायन और 10 ग्राम कालानमक बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें और यह चूर्ण 1-1 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ खाने से पेट का दर्द शांत होता है।
• 3 से 4 बूंद सौंफ के रस को तारपीन के तेल में मिलाकर पेट के ऊपर लगाने से पेट के दर्द में लाभ होता हैं।
• सौंफ, जीरा और सेंधा नमक को पीसकर गर्म पानी के साथ पीने से पेट का दर्द दूर होता है।

34) नकसीर : naak se khoon nikalne me Saunf ke fayde
25 ग्राम सौंफ को 25 मिलीलीटर गुलाब के रस मे मिलाकर खाने से नकसीर (नाक से खून बहना) रुक जाता है।

35) बेहोशी : सौंफ के साथ लगभग 120 मिलीलीटर केसर का रस मिलाकर रोगी को पिलाने से बेहोशी दूर होती है।

36) दिमाग के कीड़े : लगभग 6 ग्राम सौंफ, 7 दाने बादाम और 6 ग्राम मिश्री का चूर्ण बना लें और यह चूर्ण रात को दूध के साथ खाने से दिमाग के कीड़े समाप्त होकर दिमाग की कमजोरी दूर होती है। इसको लगातार 40 दिन तक खाना चाहिए।

37) हैजा : haija me Saunf ke fayde
• 4 किलोग्राम सौंफ, 1 किलोग्राम प्याज, 1 किलोग्राम पोदीना की पत्तियां, 500 ग्राम आलूबुखारा, गुलाब के फूल 500 ग्राम, 250 ग्राम बड़ी इलायची के दाने, 125 ग्राम श्वेत चंदन, 125 ग्राम वंशलोचन, 60 ग्राम लौंग, 60 ग्राम छोटी इलायची के दाने, 60 ग्राम अनार दाना, 60 ग्राम दालचीनी और 60 ग्राम देशी कपूर। इन सभी को एक साथ मोटा-मोटा कूट लें और इसमें कर्पूर मिलाकर 20 लीटर पानी में 24 घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे आग पर पकाएं और इससे उत्पन्न भाप को जमा करके रख लें। यह रस 20 से 50 मिलीलीटर तक की मात्रा में रोगी की स्थिति के अनुसार 1-1 घंटे के अंतर पर सेवन कराएं। इससे हैजा की सभी अवस्थाओं में जल्दी लाभ मिलता है। इससे लू लगना भी ठीक होता है।
• 10 ग्राम सौंफ, 8 ग्राम पोदीना, 4 दाने लौंग तथा 20 ग्राम गुलाब का गुलकन्द मिलाकर काढ़ा बना लें और यह हैजा से पीड़ित रोगी को सेवन कराएं। इससे हैजे में लाभ मिलता है।

38) हृदय की कमजोरी : hraday ki kamjori me Saunf ke fayde
10 ग्राम सौंफ को 100 मिलीलीटर पानी में रात को भिगो दें। सुबह सौंफ को इसी पानी में मसलकर छान लें और चीनी मिलाकर सेवन करें। इसका सेवन प्रतिदिन सुबह करने से हृदय की कमजोरी दूर होती है।

39) हृदय दर्द : Saunf ke fayde
5 ग्राम सौंफ और 3 ग्राम सूखा धनिया मोटा-मोटा कूटकर रात को 100 मिलीलीटर गुलाब जल में भिगो दें। सुबह सौंफ व धनियां को इसी पानी में मसलकर छान लें और पहले किसमिस खाकर ऊपर से इस पानी को पीएं। इससे हृदय का दर्द ठीक होता है।

40) मानसिक उन्माद (पागलपन) : 500 मिलीलीटर पानी में 10 ग्राम सौंफ को उबालें और जब पानी 250 मिलीलीटर की मात्रा में शेष रह जाए तो इसे छानकर रख लें। इस पानी में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पागलपन के रोग से पीड़ित रोगी को पिलाने से पागलपन दूर होता है।

41) सिर का दर्द : seene ke dard me Saunf ke fayde
• लगभग 4 ग्राम सौंफ को मिट्टी के बर्तन में रात को भिगोकर रख दें और सुबह कूटकर गुड़ के साथ मिलाकर पिलाने से सिर का दर्द ठीक होता है। इससे सिर की जलन व बालों का झड़ना बंद होता है।
• सौंफ और एरण्ड की जड़ को एक साथ पीसकर माथे पर लेप करने से सिर के सभी रोग ठीक होते हैं।

42) नाभि का हटना (टलना) : 2 चम्मच सौंफ को पीसकर गुड में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम 5 दिन तक सेवन करने से नाभि का टलना या हटना ठीक होता है।

43) बच्चों के रोग : bachon ke rog me Saunf ke fayde
• अगर बच्चे को हिचकी आती हो तो सौंफ और चीनी मिलाकर पीस लें और शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। इससे हिचकी बंद होती है।
• अगर बच्चा किसी कारण से बहुत ज्यादा रोता है और वह सोता न हो तो ऐसे में बच्चे को खसखस का लेप बनाकर कनपटी पर करें और सौंफ को पीसकर चीनी में मिलाकर पिलाएं।
• 5 ग्राम सौंफ को 50 मिलीलीटर पानी में उबालकर हल्का ठंडा करके बच्चे को आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम पिलाने से पेट की गैस व बदहजमी दूर होती है।
• अगर बच्चा सोते-सोते अचानक चौंककर उठ बैठता हो तो समझना चाहिए कि उसे बदहजमी है। ऐसे में बच्चे को प्रतिदिन शहद में सौंफ व पोदीना मिलाकर चटाएं। इससे बदहजमी दूर होती है।

44) शारीरिक शक्ति के लिए : sarir ki takat bdane me Saunf ke fayde
सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन सुबह-शाम भोजन के बाद 2 चम्मच की मात्रा में सेवन करें। इससे शरीर को शक्ति व सफुर्ति मिलती है।

45) खांसी : khasi me Saunf ke fayde
• सौंफ का 10 मिलीलीटर रस और शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी ठीक होती है।
• एक चम्मच सौंफ और 2 चम्मच अजवायन को 500 मिलीलीटर पानी में उबाल लें और फिर इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर छान लें। यह काढ़ा 3 चम्मच की मात्रा में 1-1 घंटे के अंतर पर रोगी को पिलाएं। इससे खांसी में लाभ मिलता है।
• सूखी खांसी में सौंफ मुंह में रखकर चबाते रहने से सूखी खांसी शांत होती है।

46) अफारा, गैस का बनना, वायु विकार : gas me Saunf ke fayde
• यदि बच्चे के पेट में गैस बन रही हो तो सौंफ को पानी में उबालकर व छानकर बच्चे को पिलाएं। इससे गैस बनने के कारण पेट फुलना, दर्द व मरोड़ आदि ठीक होती है।
• सौंफ का इस्तेमाल वायु (गैस) विकार, पेट के रोग, मरोड, पीड़ा आदि को दूर करने के लिए करना लाभकारी होता है। यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत लाभदायक होती है।
• सौंफ को पीसकर 5 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट का फूलना (अफारा) नष्ट होता है।
• 25 ग्राम सौंफ को 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। जब पानी केवल 100 मिलीलीटर बच जाए तो इसमें 2-2 ग्राम सेंधा नमक व कालानमक मिलाकर छान लें। यह काढ़ा प्रतिदिन पीने से गैस बनने के कारण पेट का फुलना ठीक होता है।
• गैस से पीड़ित रोगी को सौंफ का काढ़ा बनाकर बस्ति में लेना चाहिए।
• 20 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम सौंठ, 20 ग्राम विधारा, 20 ग्राम असंगध, 20 ग्राम कुटकी, 20 ग्राम सुरंजान और 20 ग्राम चोबचीनी। इन सभी को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 5-5 ग्राम की मात्रा में भोजन करने के बाद गुनगुने पानी से सुबह-शाम सेवन करें। इससे वायुविकार (गैस से होने वाले रोग) में आराम मिलता है।

47) रतौंधी : गाजर के रस में हरी सौंफ का रस मिलाकर सेवन करने से रतौंधी (रात में दिखाई न देना) ठीक होता है। इसका उपयोग काफी दिनों तक करने से आंखों की रोशनी भी तेज होती है।

48) बवासीर (अर्श) : bawaseer me Saunf ke fayde
• 1 चम्मच सौंफ, 1 चम्मच जीरा और 1 चम्मच धनिया को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा को सुबह-शाम पीने से बवासीर रोग मिटती है।
• सौंफ और मिश्री को पीसकर चूर्ण बना और यह चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ पीने से बवासीर के रोग में लाभ मिलता है।
• बवासीर के रोगी को प्रतिदिन सौंफ के सेवन करना चाहिए। इससे बवासीर रोग में बहुत लाभ होता है।

49) पित्त ज्वर : सौंफ को पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें और काढ़े को छानकर चीनी मिलाकर सेवन करें। इससे पित्त के अधिकत के कारण उत्पन्न बुखार ठीक होता है।

50) वमन (उल्टी) : ulti me Saunf ke fayde
• अगर बार-बार उल्टी हो रही हो तो 20 ग्राम सौंफ और थोड़ी सी पुदीने के पत्ते 2 कप पानी में उबाल लें। जब पानी आधा बाकी रह जाए तो इस छानकर रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर पर पिलाएं। थोड़ी देर में रोगी को उल्टी आना बंद होकर आराम मिल जाता है।
• सौंफ को पानी में डालकर उबाल लें और फिर इस पानी को छानकर इसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं। इससे उल्टी बंद होती है।
• यदि बुखार से पीड़ित रोगी बार-बार उल्टी करता हो तो सौंफ को पीसकर उसका रस निकालकर थोड़ी-थोड़ी देर पर रोगी को पिलाएं।

51) रक्तविकार : khoon ki kharabi me Saunf ke fayde
गर्भाशय की शुद्धि के लिए सौंफ के पत्तों का काढ़ा स्त्री को पिलाना बेहद लाभकारी होता है। इससे खून साफ होता है और रक्तविकार दूर होते हैं।

52) अनिद्रा : सौंफ को पानी के साथ काढ़ा बनाकर दूध में मिलाकर पीने से नींद न आना (अनिद्रा) दूर होता है।

53) अधिक नींद और ऊंघ आना :
• लगभग 10 ग्राम सौंफ को 500 मिलीलीटर पानी में उबालें और जब पानी केवल एक चौथाई रह जाए तो इसमें थोड़ा-सा नमक मिलाकर सेवन करें। इस तरह काढ़ा बनाकर सुबह-शाम 5 दिनों तक सेवन करने से नींद कम हो जाती है और सुस्ती भी दूर होती है।
• 500 मिलीलीटर पानी में लगभग 10 ग्राम सौंफ को उबालें और जब पानी एक चौथाई रह जाए तो इसे छानकर 250 मिलीलीटर दूध, 15 ग्राम घी व स्वादानुसार चीनी मिलाकर रात को सोते समय सेवन करें। इससे नींद अच्छी आती है।
• सौंफ, बीज खुर्फा, बीज काहु 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह 1 चुटकी चूर्ण प्रतिदिन पानी में मिलाकर पीने से रात को नींद अच्छी आती है।

54) अपच (अग्निमांद्य) :
• सौंफ के पत्ते का काढ़ा बनाकर सेवन करने से अपच दूर होता है और पाचन क्रिया तेज होती है। इसका सेवन स्त्रियों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि इससे स्तनों में दूध अधिक होता है।
• 100 ग्राम सौंफ को नीबू के रस में मिलाकर शीशी में भरकर रख दें। इस सौंफ को भोजन के बाद थोड़ा-थोड़ा खाने से भोजन आसानी से हजम होता है। इससे पेट का भारीपन तथा बेचैनी भी दूर होती है।
• एक गिलास पानी में 10 ग्राम सौंफ और 5 ग्राम पुरानी इमली मिलाकर शर्बत बनाएं और इसमें कालानमक डालकर पीएं। इससे भूख का न लगना ठीक होता है और कब्ज भी दूर होती है। यह पाचनशक्ति शक्तिशाली बनाता है।

55) हिचकी का बार-बार आना :
• सौंफ का रस और गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से हिचकी में लाभ मिलता है।
• 10 ग्राम पिसी सौंफ में 10 ग्राम खांड (चीनी) मिलाकर आधा ग्राम दूध या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से हिचकी बंद होती है।

56) कान का दर्द : kan ke dard me Saunf ke fayde
सौंफ, बच, पीपलामूल, कूठ, नागरमोथा और रसौत 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। इसके बाद चूर्ण में लगभग 640 मिलीलीटर केले का रस, 640 ग्राम बिजौरा नींबू का रस, लगभग ढाई किलोग्राम मधुशूक्त और 640 मिलीलीटर सरसों का तेल मिलाकर पका लें। पकने के बाद जब केवल तेल बाकी रह जाए तो इसे उतार कर छान लें और एक शीशी में भरकर रख लें। यह तेल कान में डालने से कान का दर्द, कान से मवाद बहना और बहरापन आदि रोग दूर होते हैं।

57) मुंह की दुर्गन्ध : muh ki badboo me Saunf ke fayde
पाचन क्रिया (भोजन पचाने की क्रिया) के खराब होने के कारण मुंह से दुर्गंध आने लगती है। ऐसे में रोगी को प्रतिदिन भोजन करने के बाद सुबह-शाम आधा चम्मच सौंफ चबाकर खाना चाहिए। इससे मुंह की बदबू खत्म होती है और बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

58) हकलाना, तुतलाना :
5 ग्राम सौंफ को थोड़ा पीसकर 300 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। 100 मिलीलीटर पानी बच जाने पर इसे उतार कर इसमें 50 ग्राम मिश्री तथा 250 मिलीलीटर दूध मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले पीएं। इसका उपयोग लगातार कुछ महीनों तक करने से हकलापन ठीक होता है।

59) बहरापन : bahrapan me Saunf ke fayde
5 ग्राम सौंफ को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। जब पानी उबलकर केवल एक चौथाई हिस्सा बाकी रह जाएं तो इसे 10 ग्राम घी और 200 मिलीलीटर गाय के दूध में मिलाकर पीएं। यह बहरापन को दूर करता है।

60) मासिकधर्म सम्बंधी परेशानियां : 10 ग्राम सौंफ तथा 10 ग्राम पुराना गुड़ लेकर आधे लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक तिहाई बच जाए तो उसे छानकर पीएं। इससे मासिकधर्म सम्बन्धी परेशानी समाप्त हो जाती है।

61) आमातिसार या आंव : aav me Saunf ke fayde
• सौंफ को घी में भून लें और इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 1-1 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन 3 बार ठंडे पानी के साथ फांकने से आमातिसार में आराम होता है।
• 5 बूंद सौंफ का तेल, आधा चम्मच चीनी में मिलाकर प्रतिदिन 4 बार सेवन करने से दस्त में आंव आना बंद होता है।
• 40 ग्राम सौंफ, 20 ग्राम बेलगिरी, 10 ग्राम ईसबगोल के चूर्ण को पानी में मिलाकर सेवन करने से आंव दस्त बंद हो जाता है।
• सौंफ, धनिया और भुना हुआ जीरा बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर थोड़ी-सी मात्रा में दिन में 3 बार छाछ के साथ सेवन करने से दस्त आना कम होता है।

सौंफ खाने के नुकसान : Saunf khane ke nuksan

• सौंफ का ज्यादा मात्र में सेवन छींक, पेट दर्द जैसे परेशानियों को दे सकता है।
• सौंफ का ज्यादा मात्र में सेवन भूख को कम करता है।

2018-04-02T12:50:45+00:00 By |Herbs|0 Comments

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