ह्रदय रोग के लक्षण कारण बचाव उपचार और सावधानी | Heart Disease: Causes, and Treatments

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ह्रदय रोग के लक्षण कारण बचाव उपचार और सावधानी | Heart Disease: Causes, and Treatments

ह्रदय रोग क्या है ? heart disease in hindi

hriday rog kya hai?
संसार में सबसे ज्यादा हृदय-रोगी भारत में हैं और इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ वर्ष पहले तक सिर्फ प्रौढ़ एवं | वृद्ध आयु में ही हृदय रोग हुआ करता था पर इधर कुछ वर्षों से युवावस्था में ही यह रोग होता पाया जाने लगा है। इस रोग के होने का एक मुख्य कारण होता है धमनियों में सूजन होने का दोष से दूषित रक्तधातु धमनी में रुकावट पैदा करती है। लम्बे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो हार्ट अटेक, लकवा आदि रक्त संचार से सम्बन्धित बीमारी हो जाती है। जब नाड़ी में सूजन और कठोरता आ जाती है और बढ़ती जाती है तो धमनी (नाड़ी) सकरी होने लगती है जिससे रक्त संचार में रुकावट होने लगती है और नाड़ी में ऐंठन होने लगती है। इस स्थिति में हृदय को पर्याप्त मात्रा में रक्त न मिलने पर हार्ट अटेक होता है, सीने में दर्द होता है जिसे एनजाइना पेक्टोरिस कहते हैं।

हृदय रोग के कारण : heart disease causes in hindi

ह्रदय रोग क्यों होता है ? hriday rog kyun hota hai
हृदय रोग होने के कई कारण होते हैं।
(1)  वंशानुगत- खानदान में पहले हार्ट अटेक हुआ हो।
(2)  अनुचित आहार आलू, चावल, नमक, मेदा से बनी चीजें, शक्कर, मिठाई, डेयरी उत्पाद, घी या तैल में तले पदार्थ आदि का भारी मात्रा में और लगातार सेवन करना।
(3)  व्यायाम, योगासन, प्राणायाम या परिश्रम के काम न करना।
(4)  विलासी, आलसी और आरामतलबी दिनचर्या ।
(5)  मानसिक तनाव-चिन्ता में उलझे रहना।
(6) अवसाद (डिप्रेशन)।
(7)  उच्च रक्तचाप बना रहना।
(8) मधुमेह से पीड़ित रहना ।
(9)  देश काल व स्थिति से विपरीत प्रकृति विरुद्ध जीवन शैली।
(10) कफ प्रकृति प्रकोप- मोटापा, घी, तैल, शक्कर, मिठाई का अति सेवन, दिन में सोना।
(11) वात प्रकृति प्रकोप- दुबला पतला शरीर, अस्थिर चित्त वृत्ति,कटु, तिक्त, कषाय रूखा,नमकीन, चाय-काफी का अधिक सेवन, रात्रि जागरण, अति मैथुन, शारीरिक श्रम की अधिकता।
(12) पित्त प्रकृति प्रकोपगरम स्वभाव, क्रोधी, इर्षालु, खट्टे पदार्थ, खटाई, चाय काफी, शराब का सेवन आदि प्रकृति विरुद्ध आहार-विहार करना।
इन कारणों से दुष्ट अग्नि हलका आहारभी नहीं पचा पाती और खाया हुआ आहार विष के समान हो जाता है और वह अन्न विष (आम विष) रक्त को दूषित करता है। ऐसा रक्त हृदय में जा कर सूजन व अवरोध उत्पन्न करता है।

हृदय रोग के लक्षण : heart disease symptoms in hindi

हृदय रोग की पहचान कैसे करें ?
1- छाती में दर्द, श्वास, खांसी, आंखों के सामने अन्धेरा छा जाना, शरीर का वर्ण (रंग) विकृत होना,
2- जी मचलना, घबराहट व बेचैनी होना, पसीना आना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
3- परिश्रम के बाद, भावावेश यानी मानसिक उत्तेजना होने पर भोजन के बाद सीने में दर्द हो तो इसे एन्जाइना पेक्टोरिस कहते हैं। इससे रोगी को बहुत बेचैनी होती है, चेहरा पीला पड़ जाता है, पसीना आता है, कुछ देर बाद शान्ति मिलती है, दर्द ज्यादातर बायीं भुजा की तरफ होता है,
4- रक्त चाप बढ़ा हुआ रहता है।
5- रात को आराम के समय कष्ट हो, बेचैनी हो, चेहरे पर कालिमा आ जाए, हलका बुखार हो और देर तक कष्ट बना रहे इसे कोरोनरी थाम्बोसिस कहते हैं।

हृदय रोग से बचाव : heart disease prevention tips in hindi

हृदय रोग से कैसे बचें ? hriday rog se bachne ke upay
इस रोग के आक्रमण से बचाव करना, इलाज की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है, प्रौढ अवस्था शुरू होने पर पेट और कूल्हों पर चर्बी बढ़ने लगे तो समझ लेना चाहिए कि शरीर में इन्सुलिन का प्रभाव घट रहा है, कोशिकाओं में चर्बी इकट्ठी होने लगी है। इससे रक्तचाप बढ़ने लगता है और धमनियों में कठोरता आने लगती है। HDL (अच्छा कोलेस्टेरोल) कम होने लगता है। और LDL (खराब कोलेस्टेरोल) बढ़ने लगता है। ट्राइग्लिसराइड और ब्लड सुगर की मात्रा बढ़ने लगती है। इन सब लक्षणों को देख कर समझ लेना चाहिए कि हृदय रोग ने दस्तक शुरू कर दी है।

हृदय रोग में सावधानियां : precautions in heart diseases in hindi

हृदय रोग में खान पान और दिनचर्या कैसी हो ? hriday rog me savdhaniya
✶ इन लक्षणों को देखते ही नियमित रूप से 40 से 60 मिनिट तक अनुलोम विलोम और कपाल भाति प्राणायाम तथा योगासन या व्यायाम करें, 2-3 किलोमीटर पैदल घूमने जाएं या गेम खेलें ।
✶ आहार में लौकी, तोरई, टिण्डे, परवल, करेला, मूंग की दाल, मौसमी फल, सलाद, जौ, बाजरा, चना, गेहूं आदि का सेवन करें।
✶ भोजन ताज़ा, हलका सुपाच्य, ऋतु के अनुसार व उचित मात्रा में लें ।
✶ भोजन 32 बार चबा कर निगलें और अन्त में पानी न पिएं। दूसरा भोजन 6 घण्टे बाद ही लें।
✶ भोजन के साथ या अन्त में चाय काफी कोको आदि न लें।

हृदय रोग का उपचार : heart diseases treatment in hindi

हृदय रोग निवारक आयुर्वेदिक औषधियां और घरेलू उपचार क्या है ?
1-अश्वगन्धा, निर्गुण्डी, गिलोय, अर्जुन की छाल, वायविडंग, हरड़, बहेड़ा, आंवला, सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली- इन सबका घन सत्व बराबर मात्रा में ले कर मिला लें और तीन बार छान कर एक जान करके शीशी में भर लें। इसे 1-1 ग्राम सुबह खाली पेट और रात को सोते समय शहद या पानी के साथ लें। यह प्रयोग स्वस्थ व्यक्ति भी सेवन करे तो हृदय रोग होगा ही नहीं।

2-आमलकी रसायन- आधा-आधा चम्मच यह चूर्ण सुबह शाम पानी के साथ लें ।

3-दशमूल काढ़ा और अर्जुन की छाल 500-500 ग्राम (दोनों मिला कर एक किलो) 16 लिटर पानी में डाल कर उबालें जब पानी 4 लिटर रह जाए तो इसमें एक किलो शुद्ध घी डाल कर फिर उबालें। जब घी शेष बचे तब उतार कर छान लें। यह घी 1-1 छोटा चम्मच सुबह शाम दोनों टाइम लें। इस औषधि के सेवन से रक्त-धमनियों का कड़ापन खत्म होता है। यह वसा में घुलनशील होने के कारण कोशिका भित्ति तक पहुंचने में सक्षम है। उच्च कोटि का Antioxidant होने से Free radicals के प्रभाव को कम करता है तथा धमनियों की सूजन कम करता है जिससे हृदय रोग होने की सम्भावना नहीं रहती।

4-अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित हृदयसुधा सिरप समस्त प्रकार के हृदयरोग, कोलेस्ट्रोल,हार्ट-अटैक व नस-नाडियों के अवरोध,हृदय की धडकन हेतु विशेष लाभदायक है।
अगर आपको हृदय रोग है ? डाँक्टर ने ऐन्जियोग्राफी या बायपास सर्जरि करने को कहा है ?कराने से पहले इस दवा का प्रयोग अवश्य करें,ईश्वर कृपा से आपको जरूर लाभ होगा तथा हृदय की तरफ जाने वालि तमाम रक्त वाहिनियाँ खुल जायेंगी ।

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है

2018-09-22T11:38:37+00:00 By |Disease diagnostics|0 Comments