आंखें दुखना-
यदि आंखें केवल गर्मी के कारण दुख रही हैं तो आंखें खुश्क होंगी, उनमें पानी नहीं बहता होगा तथा आंखें गर्मी की ऋतु में ही दुखेंगी। ऐसी दशा में जलन सी होती है। निम्नलिखित टोटा बनाकर पूरा लाभ उठा सकते हैं आम की कच्ची आमियां पीस कर दुखती आंखों पर बांधे आराम आ जायेगा।

मसूड़ों की सूजन-
अमचूर को कुछ जल में भिगोकर बारीक पीस लें। इससे कुल्लियां करने से मसूड़ों की सूजन और दर्द जाता रहेगा।

दमा-
आम की गुठली की गिरी पीस कर छह ग्राम रोज निराहार मुंह प्रातः ही यदि दमे का रोगी खाए तो कुछ दिनों में ही दमा जड़ से जाता रहेगा।

तिल्ली-
पके व मीठे आमों का सौ ग्राम रस लेकर उसमें दो चम्मच भर मधु मिलाकर प्रतिदिन पीने से कुछ ही दिनों में तिल्ली की सूजन ठीक हो सकती है।
आम का अचार तिल्ली को स्वस्थ करने के लिए एक अनुभूत औषधि है। तिल्ली के रोगी को रोटी के साथ आम का अचार खाना चाहिए।

अचार बनाने की विधि-
अचार के लिए बिल्कुल कच्चे आम होने चाहिए। जरा भी पके न हों। सालम हों, टूटे-फूटे भी न हों। आमों को खूब धो लें। फिर सुखाकर उनका गूदा छिलके समेत उतार लें और एक चिकने मटके में भर दें। प्रति एक किलो गूदा में पन्द्रह ग्राम नमक डाल दें। मटके का मुँह बन्द करके रख छोड़े। मटके को प्रतिदिन कई बार हिला दिया करें। तीन दिन बाद एक चारपाई पर, बोरी या चटाई डाल कर मटके में से सब गूदा निकाल कर बोरियों पर फैला दें। अब गूदे का रंग कुछ पीला होगा। मटके में कुछ पानी भी एकत्र हो गया होगा। यह पानी मटके में ही रहने दें। एकदो दिन के बाद जब गूदे की नमी सूख जाये तो उसे एक बड़े थाल आदि में डाल लें या लकड़ी या काँच के बर्तन में। थाल हो तो कलईदार होना चाहिए। अब इसमें प्रति एक किलो गूदे के हिसाब से निम्नलिखित मसाला शामिल कर दें-

•पिसी हल्दी दस ग्राम,
•सौंफ बीस ग्राम,
• मेथी बीज बीस ग्राम,
•लाल मिर्च खूब पिसी हुई पच्चीस ग्राम और
•सरसों का बढ़िया खाने का तेल उचित मात्रा में डाल कर खूब मिला दें।
फिर किसी मिट्टी, लकड़ी अथवा काँच के बर्तन में दबा-दबा कर भर दें। ऊपर से शेष नमकीन जल डाल दें। तेल जितना अधिक डाला जायेगा, अचार उतना ही उत्तम होगा। कई लोग मसाला भिन्नभिन्न चीजों का भी डालते हैं और कई तेल को पकाकर भी डालते हैं परन्तु आम रिवाज कच्चे तेल का ही है।
बर्तन का मुँह बन्द करके रख दें। बीस दिन तक न खायें। उसे कभी कभी हिलाते रहें ताकि तेल और मसाला सारे अचार में समान रूप में मिल जाये। अचार एक मास के पश्चात् खाने के योग्य होता है। यह ध्यान रहे कि अचार को हाथ से न निकाला जाये बल्कि लकड़ी, काँच या कलईदार कलछी आदि से निकालना चाहिए।

अपचन-
पाचन-शक्ति के विकार के लिए आम का पचास ग्राम रस दो ग्राम सोंठ मिला कर प्रातः काल पिलायें।

दाँतों के कीड़े-
आम की गुठली की गिरी दो ग्राम रोज निराहार मुँह लेने से दाँतों के कीड़े मर जाते हैं।

लू लगना-
कुछ कच्चे आम लेकर रेत में दबा दें। जब नरम हो जायें तो निकाल कर निचोड़ लें। कुछ सादा जल, अर्क बेदभुश्क पचास ग्राम, अर्क केवड़ा दस ग्राम और मिश्री बीस ग्राम मिला कर तथा बर्फ से ठण्डा करके थोड़ा-थोड़ा पिलायें। दो-चार बार के पिलाने से पर्याप्त लाभ पहुँच कर रोगी स्वस्थ हो जायेगा।

कच्चे आम को आग में भुर्ते की तरह तनिक भून कर रस निचोड़ लें। फिर उसमें कुछ शक्कर मिलाकर बर्फ से ठण्डा करके पिलायें। लू लगने और बेहोशी होने, विषैली हवा के प्रभाव से हुए ज्वर आदि में, गर्मी के वेग को दूर करने, पित्त के वेग को तोड़ने, प्यास को मिटाने और शान्ति देने के लिए यह इलाज अत्यन्त लाभदायक है।

(और पढ़ेगर्मियों में बनाये शीतलता देने वाला कच्चे आम का स्वादिष्ट पन्ना)

आग से जलना-
आम की गुठली की थोड़ी-सी गिरी कुछ पानी में भिगो कर पीस लें। थोड़ी देर बाद जले हुए स्थान पर लगायें। ठण्डक पड़ जायेगी।

शरीर की निर्बलता-
प्रतिदिन प्रातः काल निराहार मुँह पके आम चूस कर ऊपर से सोंठ, छुहारे मिला हुआ दूध पीने से रक्त पर्याप्त पैदा होकर चेहरे की चमक बढ़ जाती है। कब्ज़ जाती रहती है। घबराहट और अशान्ति नष्ट हो जाती है।
नोट-तुर्श आम पर दूध पीना ठीक नहीं है।

शीघ्रपतन-
कच्चे आम जिनमें अभी गुठली न पड़ी हो लेकर छाया में सुखा लें और पीस कर सुरक्षित रखें। प्रतिदिन प्रात: निराहार मुँह दस ग्राम चूर्ण ।थोड़ी चीनी मिलाकर खाने से कुछ दिन में ही शीघ्रपतन का रोग जाता रहता है।

वीर्यवर्द्धक-
आम के साथ दूध का प्रयोग बहुत ही उत्तम सिद्ध हुआ है। यह शक्तिदायक और रक्तवर्द्धक होने के अतिरिक्त नसों और पुट्ठों को भी शक्ति देता है, बल्कि आम और दूध खाने से रति-शक्ति बढ़ती है और शरीर मोटा होता है।

सिर का गंज-
आम का पुराने से पुराना अचार (कम से कम एक वर्ष का अवश्य हो), लेकर उसमें से तेल अलग करके किसी शीशी में रख लें। प्रतिदिन तेल की मालिश करने से गंज पर पुनः बाल उग आएंगे।

मस्तिष्क पोषक-
आम का ताजा मीठा रस एक कपभर, ताजा दूध आधा कप तथा अदरक का ताजा रस चाय चम्मच-भर (कुछ शक्कर भी मिला सकते हैं) लेकर सबको खूब मिला कर दिन में एक बार पियें।
यह दिमाग को शक्ति देने वाला है। दिमाग की कमजोरी के कारण स्थायी सिर-दर्द, गिरानी और आँकों के सामने अँधेरा आने की शिकायत दूर हो जाती है। रक्त बढ़कर दुबला शरीर मोटा हो जाता है। इन लाभों के अलावा हृदय । और जिगर को भी शक्ति और शान्ति देता है। साँस आने में रुकावट हो, रंग पीला पड़ गया हो, निर्बलता बढ़ रही हो तो इसे आजमाना चाहिए।

आमाशय की कमजोरी-
आमों का ताजा, पतला और मीठा रस पचास या सौ ग्राम लेकर मीठा दही दस ग्राम, अदरक का रस चाय चम्मच-भर लेकर सबको मिलाकर पी लें। ऐसी मात्रा दिन में तीन बार तक दी जा सकती है। इससे पुराने दस्त, संग्रहणी, अनपचा भोजन दस्तों द्वारा निकल जाना, आँतों और आमाशय की कमजोरी और बवासीर के रोग नष्ट हो जाते हैं।

दुबलापन और निर्बलता-
पके, मीठे, ताजा आम का रस एक कप, गाय का ताजा दूध आधा कप, शुद्ध घी एक चम्मच, अदरक का ताजा रस चाय चम्मच-भर लेकर खूब मिलाकर इसमें पच्चीस ग्राम शक्कर मिलाकर पी लें। आम का रस रोज कुछ बढ़ाते रहें। एक-दो सप्ताह तक केवल यही क्रम रखें। इसके सिवा अन्य कोई पदार्थ न खाया जाये।

लाभ-रक्त की न्यूनता की विशेष दशा में भी काम करता है। रक्त बहुत अधिक पैदा करता है। दुबला शरीर भी काफी मोटा और शक्तिवर बन सकता है। शरीर का फीकापन, रूखापन, पीलापन और निर्बलता जाती रहेगी। रक्त की कमी और शरीर के दुबलेपन का इससे बढ़कर इलाज नहीं है।

रक्त और वीर्यवर्द्धक-
आम का ताजा मीठा रस एक कप-भर, शतावर का चूर्ण छह ग्राम, सालब चूर्ण छह ग्राम, ताजा दूध डेढ़ कप-भर, अदरक का रस छह ग्राम, प्याज का रस दस ग्राम, मधु एक बड़ा चम्मच-भर तथा शुद्ध घी दस ग्राम, केसर 3 रत्ती (गुलाबजल दस ग्राम में मिश्रित) । सब चीजों को अच्छी तरह मिलाकर पचास ग्राम बारीक पिसी हुई मिश्री मिलाकर पियें। दो सप्ताह के बाद यह नुस्खा शाम को भी प्रयोग करें।

लाभ- वीर्य की वृद्धि होकर शक्ति बढ़ेगी, रक्त बढ़कर शरीर के सभी अंगों का पोषण होगा। शरीर मोटा होगा। यह हर प्रकार से शरीर का उत्तम पोषक है। शरीर को कुन्दन की तरह बना देता है।

लू लगना-
यह रोग सर्द देशों के लोगों के लिए जो हमारे देश में रहते हैं, बहुत भयानक माना जाता है। इसलिए योरोपियन लोग इससे बहुत घबराते हैं। बहुत-से लोग इससे पीड़ित होकर मौत के घाट उतर जाते हैं। इस रोग से बचने के लिए दवाइयाँ तो बहुत हैं परन्तु यहाँ हम एक साधारण और कम खर्चीला टोटका बता रहे हैं
कच्चे आम, जिनकी गुठली पक चुकी हों, उपलों की गर्म राख में दबा दें। जब वह पकंकर फूल जायें तो निकाल कर राख साफ करके निचोड़ लें। जितना रस निकले उससे दुगनी चीनी मिलाकर उचित मात्रा में शर्बत बनाकर तैयार रखें और रोगी को दो-दो घण्टे बाद बीस ग्राम शर्बत आवश्यकतानुसार जल में मिलाकर पिलायें। रोग यदि ताजा ही है तो दो-तीन बार पिलाने से ही आराम हो जाता है।
इसका लगातार प्रयोग सन-स्ट्रोक (लू लगना) की तीव्र से तीव्र दशा में भी अत्यन्त लाभकारी है।

आम की कायाकल्प माजून-
ताजा आम का रस पाँच किलो, घी चौथाई किलो, छोटी इलायची के बीज सत्तर ग्राम, बंशलोचन पच्चीस ग्राम, दालचीनी सत्तर ग्राम, पीपल पच्चीस ग्राम, अदरक का रस सौ ग्राम या सोंठ का चूर्ण पच्चीस ग्राम, चीनी एक किलो।

विधि-आम के रस, अदरक के रस और घी को मिलाकर धीमी-धीमी आँच पर धीरे-धीरे भूनें। फिर आग से उतार लें-शेष चीजों के चूर्ण खांड में पहले ही मिला रखना चाहिए। फिर दोनों को मिलाकर एक जान कर लें। चाँदी के 100 वर्क इसमें मिलाकर किसी ढक्कनदार चीनी, काँच या कलईदार बर्तन में रख लें। यदि कुछ दिनों के बाद कुछ ढीला हो जाये तो इसे एक बार पुनः पकाकर गाढ़ा कर लें।