पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

आयु तथा बुद्धिवर्धक प्रयोग

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आयु तथा बुद्धिवर्धक प्रयोग

अपने जन्मदिवस पर ८ चिरंजीवियों (मार्कंडेय, अश्वथामा, राजा बलि, हनुमानजी, विभीषण, वेद व्यास जी, कृपाचार्य जी, परशुरामजी) का सुमिरन व प्रार्थना करके एक पत्र में २ पल दूध (१० से १०० ग्राम) तथा थोड़ा सा तिल व गुड मिलाकर पियें तो व्यक्ति दीर्घजीवी होता है l
प्रार्थना करने का मंत्र है –

ॐ मार्कंडेय महाभाग सप्तकल्पांतजीवन, चिरंजीवी यथा त्वं भो भविष्यामि तथा मुने l
रूपवान वित्तवान्श्चैव श्रिया युक्त्श्च सर्वदा, आयुरारोग्य सिद्ध्यर्थ प्रसीद भगवन मुने l
चिरंजीवी यथा त्वं भो मुनीनाम प्रवरो द्विज, कुरुष्व मुनिशार्दूल तथा मां चिरजिविनम l
नववर्षायुतं प्राप्य महता तपसा पुरा, सप्तैकस्य कृतं येन आयु मे सम्प्रय्च्छ्तु l

अथवा तो नींद खुलने पर ८ चिरंजीवी का सुमिरन करे तो व्यक्ति निरोग रहता है l

2017-06-17T09:14:02+00:00 By |Mantra Vigyan|0 Comments

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