पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

अपनी महान सनातन संस्कृति को पहचाने

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अपनी महान सनातन संस्कृति को पहचाने

दो पक्ष – कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष !

तीन ऋण – देव ऋण, पित्र ऋण एवं ऋषि त्रण !

चार युग – सतयुग , त्रेता युग , द्वापरयुग एवं कलयुग!

चार धाम – द्वारिका , बद्रीनाथ, जगन्नाथ पूरी एवं रामेश्वरम धाम !

चारपीठ – शारदा पीठ ( द्वारिका )
, ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम), गोवर्धनपीठ ( जगन्नाथपुरी ) एवं श्रन्गेरिपीठ !

चर वेद- ऋग्वेद , अथर्वेद, यजुर्वेद एवं सामवेद !

चार आश्रम – ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , बानप्रस्थ एवं संन्यास !

चार अंतःकरण – मन , बुद्धि , चित्त , एवं अहंकार !

पञ्च गव्य – गाय का घी , दूध, दही , गोमूत्र एवं गोबर , !

पञ्च देव – गणेश , विष्णु , शिव , देवी और सूर्य !

पंच तत्त्व – प्रथ्वी , जल , अग्नि , वायु एवं आकाश !

छह दर्शन – वैशेषिक , न्याय, सांख्य, योग , पूर्व मिसांसा एवं दक्षिण मिसांसा !

सप्त ऋषि – विश्वामित्र , जमदाग्नि , भरद्वाज , गौतम , अत्री , वशिष्ठ और कश्यप !

सप्त पूरी – अयोध्या पूरी , मथुरा पूरी , माया पूरी ( हरिद्वार ) , कशी , कांची ( शिन कांची – विष्णु कांची ), अवंतिका और द्वारिका पूरी!

आठ योग – यम , नियम, आसन , प्राणायाम , प्रत्याहार , धारणा , ध्यान एवं समाधी !

आठ लक्ष्मी – आग्घ , विद्या, सौभाग्य , अमृत , काम , सत्य, भोग , एवं योग लक्ष्मी !

नव दुर्गा – शैल पुत्री , ब्रह्मचारिणी , चंद्रघंटा ,कुष्मांडा , स्कंदमाता , कात्यायिनी , कालरात्रि , महागौरी एवं सिद्धिदात्री!

दस दिशाएं – पूर्व , पश्चिम, उत्तर , दक्षिण , इशान , नेत्रत्य , वायव्य आग्नेय,आकाश एवं पाताल !

मुख्य ग्यारह अवतार – मत्स्य , कच्छप , बराह , नरसिंह , बामन , परशुराम , श्री राम , कृष्ण , बलराम , बुद्ध , एवं कल्कि !

बारह मास – चेत्र , वैशाख , ज्येष्ठ ,अषाड़ , श्रावन , भाद्रपद , अश्विन , कार्तिक, मार्गशीर्ष . पौष , माघ , फागुन !

बारह राशी – मेष , ब्रषभ , मिथुन , कर्क , सिंह , तुला , ब्रश्चिक , धनु , मकर , कुम्भ, एवं कन्या !

बारह ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ , मल्लिकर्जुना , महाकाल , ओमकालेश्वर , बैजनाथ , रामेश्वरम , विश्वनाथ , त्रियम्वाकेश्वर ­ , केदारनाथ , घुष्नेश्वर , भीमाशंकर एवं नागेश्वर !

पंद्रह तिथियाँ – प्रतिपदा, द्वतीय , तृतीय , चतुर्थी , पंचमी , षष्ठी , सप्तमी , अष्टमी , नवमी , दशमी , एकादशी , द्वादशी , त्रयोदशी , चतुर्दशी , पूर्णिमा , अमावश्या !

स्मृतियाँ – मनु , विष्णु, अत्री , हारीत , याज्ञवल्क्य , उशना , अंगीरा , यम , आपस्तम्ब , सर्वत , कात्यायन , ब्रहस्पति , पराशर , व्यास , शांख्य , लिखित , दक्ष , शातातप , वशिष्ठ !

2017-01-24T14:49:20+00:00 By |Articles|0 Comments

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