कार्बोहाइड्रेट का महत्त्व, इसके प्रकार, कार्य और श्रोत | What is Carbohydrates in Hindi

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कार्बोहाइड्रेट का महत्त्व, इसके प्रकार, कार्य और श्रोत | What is Carbohydrates in Hindi

कार्बोहाइड्रेट क्या है? : carbohydrate kya hai in hindi

कार्बोहाइड्रेट यह ऊर्जा प्राप्ती का मुख्य स्त्रोत हैं। कार्बोहाइड्रेट यह कार्बन हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के मिलने से बनते है। ये ऊर्जा का बहुत सहज स्त्रोत हैं। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ लोगों का आर्थिक स्तर इतना मजबूत नहीं है ऊर्जा प्राप्त कार्बोज के द्वारा ही करते हैं। किसी भी कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं जो कार्बोज द्वारा प्राप्त होतीहैं।

शरीर की विभिन्न गतिविधियों का संचालन तथा दैनिक क्रियाकलापों को संपन्न करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। ऊर्जा अधिकांशतः कार्बोज से प्राप्त किये जाते है। भारतीयों के भोजन में अधिक मात्रा में कार्बोज होता है क्योंकि भारतीय के भोजन में मुख्य रूप से कार्बोज युक्त भोज्य पदार्थों का ही उपयोग किया जाता हैं।

भारतीय के भोजन में कार्बोहाइड्रेट बहुत अधिक मात्रा में रहती है, यह वांछित कैलोरी की लगभग 90% होती है। संतुलित आहार में कार्बोहाइड्रेट से उपलब्ध कैलोरी कुल की 50 से 60 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहि। अधिक सेवन करने से कार्बोहाइड्रेट शरीर में वसा में परिवर्तित हो जाते है। साधारण व्यक्ति के लिए भोजन से 55% से 65 % तक ऊर्जा कार्बोज से प्राप्त होती है। धनवान व्यक्ति अपनी आवश्यक ऊर्जा का 40% कार्बोज से प्राप्त करते हैं जबकि निम्न आय वर्गीय जिनका मुख्य काम कठिन शारिरीक श्रम, मेहनत व मजदुरी करना है, वह अपनी आवश्यक ऊर्जा का 85-90 % कार्बोजयुक्त भोज्य पदार्थों से ही प्राप्त करते हैं। क्योंकि उनके पास धन कर अभाव होता है इसलिए वे वसा से ऊर्जा प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
अतः कार्बोज ऊर्जा की माँग की पूर्ति करने के लिए सबसे सस्ता और सरल श्रोत होता है ।

कार्बोहाइड्रेट के प्राप्ती के मुख्य श्रोत :

कार्बोहाइड्रेट के प्राप्ती के मुख्य स्त्रोत है जो निम्नलिखित है-
i) स्टार्च
ii) शक्कर
iii) सेलूलोज

i) स्टार्च :
स्टार्च यह मुख्य रूप से अनाज, कंद आदि से प्राप्त होता हैं।

ii) शक्कर :
शक्कर यह दो तरह का होता है|
1. मोना सैकेराइड
2. डाइसैकाराइड

iii) सेलूलोज :
सेलूलोज यह सब्जिोयो, फलों और अनाजों में पाई जानेवाली कठोर रेशेदार परत है।

कार्बोज प्राप्त के मुख्य स्त्रोत वनस्पमि जगत है, पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा कार्बोज का निर्माण करते है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया हरी पत्तियों के द्वारा होता है। हरी पत्तियों में क्लोराफिल नामक वर्णक उसस्थित होता हैं। कार्बोज स्टार्च या शक्कर के रूप में संग्रहित होते हैं तनों में यह सेल्युलोज एवं हेमीसेल्यूलोत के रूप में जमा रहता है बीज में स्टार्च की मात्रा बहुत अधिक पायी जाती है।

वर्षाऋतु में जब कई दिनों तक बादल छाए हुये होते है। पेड़पौधा को सूर्यप्रकाश नहीं मिल पाता है तब पेड़-पौधो के भीतर जो संचित कार्बोज होती हैं वह उस समय पेड़-पौधों की वृध्दि और विकास में ऊर्जा देने का काम करते है। ईस तरह कार्बोज द्वारा न केवल मनुष्य या जानवर ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं बल्कि स्वयं पौधे भी इसी से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

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कार्बोहाइड्रेट के प्रकार / वर्गीकरण : Classification of Carbohydrates

कार्बोज का वर्गीकरण भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं के आधार पर किया है जो निम्न अनुसार हैं:

A ) भौतिक विशेषताओं के आधर पर: –

a) शर्कराएं
b)अशर्कराएं

a) शर्कराएं :

1) ये स्वाद में मीठी होती है।
2) प्रकृति में व्यापक से विद्यमान होती है।
3)फल, सब्जियों, शहद, गुड़, शक्कर आदि इनके प्राप्ती के उत्तम स्त्रोत हैं।
4) शर्करा यह जल में घुलनशील होती है।
5) शर्करा खेदार होते हैं।

b)अशर्कराएं-

1) अशर्कराएं यह पावडर के रूप् में होती हैं।
2) स्वादरहित होती है।
3) अशर्कराएं जल में अघुलनशील होती हैं।
4) पेड़-पौधे इनके प्राप्ती केमुख्य साधन हैं।
5) इसका कोई आकार नहीं होता।
6) इनमें शर्करा की कई ईकाइयां होती हैं। अतः इनका अणुभार अधिक होता हैं।
7.इनका सूत्र C6H605)होता हैं।
8.इसका कोई आकार नहीं होता है।
9.इनके रेवे बन ही नहीं सकते हैं।
10.अनाज एवं दाल के छिलके, फल एंव सब्जियों के छिलके एवं भीतरी भाग में पाया जाता हैं।

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B ) रासायनिक विशेषताओं के आधार पर :-

a) मोनासैकराइड्स
b) डाईसैकराइड्स
c) पॉलीसैकराइड्स

a) मोनो-सैकेराइड्स :-

मोनो-सैकराइड्स कार्बोज का सबसे सरलत रूप होता है। जिस पर शरीर के पाचन अंग का कोई एन्जाइम विभाजन की क्रिया नहीं कर पाता तथा वे रक्त में शोषित कर लिए जाते हैं। मोना-सैकराइड्स दो शब्दों से मिलकर बना होता हैं। मोना+सैकराइड्स। मोनो का अर्थ है एक तथा सैकराइड्स का अर्थ है। शर्करा।

भोज्य पदार्थों में पाये जाने वाले मोना-सैकराइड्स हेक्सोसेज होते है। मोनोसैकराइड्स जो पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है, उनमें छ: कार्बन अणु होते हैं।
मोनो सैकराइड्स को मुख्यतः दो वर्गों में विभाजित किया गया।

अल्डोसेस :-
इन शर्कराओं में अल्डीहाइड ग्रुप होता है जिनके उदाहरण हैं:- 1) ग्लूकोज 2) गॅलेक्टोज 3)फुक्टोज

किटोसिस :-

इनमें किटोन ग्रुप प्राप्त होता है जिनके उदाहरण हैं:- फ्रक्टोज एवं सॉरबोज

1) ग्लूकोज :

1.ग्लूकोज शर्करा विभिन्न नाम भी है इसे अलग अलग नामों से जाना जाता हैं। डैक्सट्रोज रक्त की शर्करा या अंगूर शर्करा भी कहते है। यह प्रकृति में व्यापक रूप से विद्यमान रहता हैं। कार्बोज पदार्थों से ग्लूकोज में परिवर्तित होकर रक्त द्वारा शरीर के ऊतकों में ऊर्जा प्रदान करती हैं।ग्लूकोज, शहद, मक्का, चुकंदर आदि में भी प्राप्त होती है। शहद में ग्लूकोज की मात्रा 30/40 तक होती है। मीठी सब्जियों एवं फलो में यह 2-6 तक उपस्थित रहता हैं।
2.रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने पर मधुमेह हो सकता है।ग्लूकोज वसा में परिवर्तीत होकर शरीर का वजन बढ़ाती है।
3. ग्लूकोज की अतिरिक्त मात्रा ग्लाइकोजन ग्लूकोज में परिवर्तीत होकर ऊर्जा प्रदान करती है।

रक्त मे 80-100 mg/100ml से ज्यादा ग्लूकोज उपस्थित नहीं रहता हैं। इससे अधिक ग्लूकोज की मात्रा होने परवह तुरंत ही इंन्युनिलन हारमोन की उपस्थिती में ग्लाइकोजन में बदल जाता है।

2) फ्रक्टोज :

फ्रक्टोज को फलशर्करा कहते है अथवा लिबूलोज भी कहते है। क्रुक्टोज यह अन्य शर्करा की अपेक्षा अधिक मीठी होती है तथा शरीर की ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करती है। ग्लूकोज की अपेक्षा फ्रक्टोज की मिठास दो गुणा अधिक होती है। क्रुक्टोज शहर में (30-40% फलों में 2-5 तथा कई सब्जियों में पायी जाती हैं। फ्रक्टोज सुक्रोज शर्करा के अपघटन से प्राप्त होती है।

फुक्टोज का रासायनिक सुत्र ग्लुकोज की भांति ही C6H12 06 होता है परंतु इनकी रासायनिक रचना में अंतर होता है। ग्लूकोज में एल्डीहाइड समूह (-CHO) होता है जबकि फ्रक्टोज में कीटोन समूह (-CO) होता है। इसके खे कठिन्न्ता से बनते है।
अन्य मोनो-सॅकेराइड्स जो प्राकृतिक रूप में बहूत कम मिलते हैं तथा शरीर में ग्लूकोज के चयापचय के समय बनते हैं। वे है
1. बायोसेस ,
2. ट्रायोसेस ,
3. टेट्रोसेस ,
4. पेन्टासेसे

3) गॅलेक्टोज :

पोषण की दृष्टि से गैलेक्टोज भी अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी कार्बोज है। गॅलेक्टोज अन्य शर्कराओं की तरह भोज्य पदार्थों में स्वतंत्र रूप में नहीं पायी जाती। गॅलेक्टोज अन्य शर्कराओ की तरह भोज्य पदार्थों में स्वतंत्र रूप में नही पायी जाती । दूध में गॅलेक्टोज शर्करा घटक के रूप में मिलती है तथा दूध के पाचन के बाद बनती गैलेक्टोज ही केवल एक ऐसी शर्करा है जो बनस्पति जगत में नहीं पाई जाती हैं।

b) डायसँकेराइड्स :

डाय-सॅकेराइड्स दो सरल शर्करा का योग हैं। जब मोना सँकेराइड्स के दो अणु आपस में धनीभूत क्रिया के द्वारा मिलते हैं तो एक अणु जल तथा एक अणु डाइसैकराइस का निर्माण होता हैं।
यह जल में घुलनशील है तथा इसमें खे बनाये जा सकते है। ये कम मिठास युक्त होते हैं। दो अणु ग्लूकोज आपस में मिलकर एक अणु माल्टोज बनाते है। इसीप्रकार एक अणु ग्लूकोज तथा अणू गैलेक्टोज मिलकर एक अणू लैक्टोज का निर्माण होता है।
पोषक की दृष्टि से डाइसैकराइड्स निम्नलिखित रूप से ज्यादास महत्वपूर्ण होते है:
1. सुक्रोज
2. माल्टोज
3. लैक्टोज

1) सुक्रोज :
सुक्रोज को “गन्ने की शर्करा” भी कहा जाता है। सुक्रोज का निर्माण गन्ने के रस से तथा चुकंदर से किया जाता है। उष्णता, अम्ल तथा उष्णता एन्जाइम की क्रिया से सुक्रोज से एक अणु ग्लूकोज का एंव अणु फुक्टोज का प्राप्त होता है गन्ने में 10-12% तक तथा चुकंदर में 12-18% तक होती है। अल्प मात्रा में यह फल, शहद तथा कुछ विशेष प्रकार की सब्जियों में भी पाया जाता हैं।

2) माल्टोज :-

माल्टोज को “माल्ट शर्करा’ भी कहते है।। यह अंकुरित अनाजों, आदि से बनाया जाता है। अनाज के अंकुरण के समय अम्ल, उष्णता तथा एन्जाइम आमाग्लस द्वारा स्टार्च का अपघटन होने से माल्टोज बनती हैं। माल्टोज यह प्रकृति में स्वतंत्र रूप से विद्यमान नहीं रहता हैं। ग्लूकोज के दो अणुओं के जुडेने से माल्टोज का एक अणू बनता हैं।

3) लैक्टोज :-

लैक्टोज का दूध दुग्ध शर्करा भी कहा जाता है। यह दुध मे प्राप्त होता है। गाय के दुध में 4% तथा माँ के दुध में 7% लैक्टोज पाया जाता है। लैक्टोज शर्करा वनस्पति जगत में नहीं पाया जाता है। एक अणु ग्लूकोज का और एक अणु गैलेक्टोज को संगठित होकर अणु लैक्टोज का बनता हैं। स्तन ग्रंथियो में लैक्टोज का निर्माण, रक्त में उपस्थित ग्लूकोज के संश्लेषण के कारण होता हैं। जल में लैक्टोज घुलनशील होता है, किंतू घुलने में समय ज्यादा लगता हैं। अन्य शर्करा की तुलना में अधिक मीठी होती हैं।
ग्लुकोज + गैलेक्टोज→ लैक्टोज
लैक्टोज एन्जाइम
ग्लूकोज+ गैलेक्टोज → लैक्टोज + पानी

c) पॉली-सैकेराइड्स :

पॉली सैकेराइड्स कई जटिल कार्बोज पदार्थों का समूह है जो जल तें अघुलनशील है तथा स्वाद में मीठे नहीं होते हैं। वनस्पति जगत स्टार्च प्राप्ती के मुख्य साधन हैं। पॉलीसैकराइड्स के अंतर्गत स्टार्च, ग्लाइकोजन, सेल्युलोज, पेक्टिन आदि आते है। इसका गुण पौधों की वृध्दि एवं विकास के लिए ज्यादा उपयोगी एंव लाभकारी होता है। क्योंकि निरंतर पानी की उपस्थितति में भी पेड़-पौधे अपने जड़, तना बीज फल आदि में स्टार्च संग्रह करने में समर्थ हो जाते हैं।
यदि स्टार्च जल में अधिक घुललशील होता है तो पौधे इनका संचय नहीं कर पाते। पोषण की दृष्टि से पॉलीसैकराइड्स में स्टार्च,डेक्सट्रीन सेल्युलोज, ग्लाइकोजन, पेक्टीन तथा हेमीसेल्यूलोज प्रमुख है।

1. स्टार्च :
पौधे स्टार्च के रूप में कार्बोज पदार्थ इकट्ठा करते हैं जिससे उन्हें आवश्यकता पड़ने पर शक्ति प्राप्त होती हैं। अनाज में 70-85% तक स्टार्च पाया जाता हैं। जड एवं तनेवाली सब्जिये में यह 20-35% तक उपस्थित होता हैं। सुखे, बीज, जैसे मटर, सेम, ग्वारफली, आदि। में 40% तक स्टार्च रहता है।
कच्चे सेब एवं केला में भी स्टार्च अधिक मात्रा में होता है। परंतू जैसे-जैसे ये पकने लगते है तो इनमें शर्करा में परिवर्तन होने लगता हैं। और पकने के बादये फल मीठे लगने लगते हैं।

ठीक इसके विपरित कच्चे भूट्टे के दाने, हरे मटर, हरे चने जब ये हरे होते है मतलब कच्चे होते है तब मीठे लगते है लेकिन जैसे जैसे यह परिपक्त होने लगते है तो इनमें मिठास कम होने लगती है ओर शर्कर स्टार्च में परिवर्तीत होत जाते है। पकाये जाने पर स्टार्च का पाचन होकर उससे क्रमशः ड्रेक्स्ट्रीन, माल्टोज, तथा ग्लूकोज पाये जाते हैं। प्रकृति में स्टार्च ग्लूकोज के संघनीकरण के कारण बनती हैं।

2. डेक्स्ट्रीन :
डेक्स्ट्रीन पॉलीसैकराइड्स के अंतर्गत ही आता है यह स्टार्च के अर्द उध्दविच्छेदन से प्राप्त किया जाता हैं। यह शहद मक्का आदि पदार्थों में मिलती हैं, परंतू ज्यादातर स्टार्च की पाचन क्रिया प्राप्त होती हैं। अंकुरित अनाजों में डेक्स्ट्रीन की मात्रा अधिक होती है। डेक्स्ट्रीन कॉर्न शुगर एंव होता हैं। छोटी आँत में एमाइलेज की स्थिती में जब स्टार्च का उध्दविच्छेदन होता हैं। डेक्स्ट्रीन में ग्लूकोज की ज्यादा मात्रा पायी जाती हैं। तथा यह ठंडे जल में घुलनशील हैं।
स्टार्च अम्ल डेक्स्ट्रीन / अमालइलेज एन्जाइम

3. ग्लाइकोजन :-

ग्लाइकोजन को प्राणिज कार्बोज’ भी कहते हैं। इसे जंतू स्टार्च भी कहा जाता है। ग्लाइकोजन यह पेड़-पौधों में यह पूर्णतः अनुपस्थित होता हैं। यह जंतुओं के मांसल भाग तथा अवयवों में प्राप्त होता हैं। यह जीवित मानवों एवं जानवरों के यकृत एवं मांसपेशियों में पाया जाता हैं।
जब भोजन अधिक मात्रा में ग्रहण किया जाता हैं तब पाचन क्रिया के बाद अधिक मात्रा में ग्लूकोज का निर्माण होता है। फलतः रक्त में अधिक मात्रा में ग्लूकोज अवशोषित कर लिया जाता हैं। शरीर में ग्लाइकोजन का संग्रह केवल यकृत तथा मांसपेशियों द्वारा ही होता है। वनस्पति भोज्य पदार्थों में ग्लाइकोजन नहीं प्राप्त होता । शरीर में ग्लूकोज के अलावा मात्रा ग्लाइकोजन में परिवर्तीत होकर यकृत में 3-7% तथा स्नायुपेशियों में 0.5-1.0 % की मात्रा में संग्रहित हो जाती हैं। आवश्यकता पड़ने पर इस ग्लाइकोजन से शरीर का ऊर्जा प्राप्त होती हैं। ग्लूकोज के 5,000-10,000 अणु के संघनिकरण में ग्लाइकोजन बनती है।

4. सेल्युलोज :-

सेल्युलोज यह फल तथा बीज के ऊपर एक आवरण के रूप् में प्राप्त होते है। सेल्युलोज ग्लूकोज की कई इकाइयों से मिलकर बने होते हैं। सेल्युलोज जलमें अघुलनशील होते है तथा इसका शरीर में पाचन नहीं हो जाता है।
सेल्युलोज अनाज दाल, फल एवं सब्जियों के छिलकों में रेशे के रूप् में विद्यमान रहते हैं। हमारे शरीर में सेल्युलोज का काफी महत्व हैं। यह आँतो की माँसपेशियों का क्रियाशील रखने तथा इनके संकुचन एवं प्रसारण गति को बनाये रखने के लिए आवश्यक होता हैं। सेल्युलोज आहार को स्थूलता देता हैं। और जैसा कि हम जानते है मोटापा विभिन्न बिमारियों की जन्म देता है।

सेल्यूलोज भोज्य पदार्थ के साथ पकाये जाने पर को मल होकर टूट जाते है जिससे भोज्य पदाथे पर पाचक रसों की क्रिया सरल हो जाती हैं। आँतो में सेल्यूलोज की विभक्त करने वाले जीवाणु पाये जाते है जो सेल्यूलोज का ऊर्जा में बदल देते हैं।

5. पेक्टीन :-

पेक्टीन यह पके फलों में पाया जानेवाला कार्बोज पदार्थ हैं। पके फलों के छिलकों के ठिक नीचे उपस्थित होता हैं। इसका मनुष्य शरीर में पाचन नहीं हो सकता। जानवरों के श्रृंग तथा खुर में यह बहुतायत से मिलता है। इसका शरीर में पाचन भी नहीं होता । पेक्टीनअनेक गॅलेक्टोयुरोनिक अम्ल के अणु सेमिलकर बनता है।
पेक्टीन को जब चीनी तथा साइट्रीक अम्ल के साथ मिलकर पकाया जाता है तो यह जैली के रूप तके जम जाता हैं पेक्टीन का प्रयोग फलों की जैली बनाने में किया जाता हैं। बच्चे इसे काफी पसंद करते हैं। पेक्टीन का उपयोग अतिसार के उपचार में भी किया जाता हैं।

6. कुछ अन्य पॉलीसैकाराइड्स निम्न है :-

1. फ्रक्टोसन्स
2. गॅलेक्टोन्स
3. पेन्टोसेन्स
4. हेमी-सेल्यूलोज

इस तरह पॉलीसैकाराइड्स के अन्य प्रकार भी हैं। जा कार्बोज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्बोहाइड्रेट के कार्य : Function of Carbohydrates

कार्बोज के प्रमुख कार्य अनेक है कार्बोज के कुछ मुख्य कार्य निम्नलिखित रूप से स्पष्ट किये गये हैं:

1.शरीर को ऊर्जा प्रदान करना :

कार्बोहाइड्रेड का मुख्य काम शरीर को ऊर्जा प्रदान करना है। प्रति ग्राम कार्बोज से चार कैलोरीज ऊर्जा की प्राप्ती होती है। शरीर की गतिविधियों को संचालन करने तथा विभिन्न कार्यों के संपादन करने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती हैं। मस्तिष्क तथा नाड़ी तंतुओं को सुचारू रूप कार्य करने हेतु कैलोरीज की ही जरूरत होती है जो ग्लूकोज द्वारा प्राप्त होती हैं।

भारत देश में अधिकांश लोग लगभग 70-80% तक ऊर्जा कार्बोज से ही प्राप्त करते हैं। जब किसी दिन किन्हीं कारणवश भोजन नहीं मिलता है तो पहले यकृत का ग्लाइकोजन ग्लूकोज में बदललरक शरीर को ऊर्जा प्रदान करता हैं।

2019-02-09T11:38:42+00:00By |Ayurveda|0 Comments

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