चित्रकादि वटी के फायदे और नुकसान , गुण व उपयोग | Chitrakadi Vati ke Fayde aur Nuksan

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चित्रकादि वटी के फायदे और नुकसान , गुण व उपयोग | Chitrakadi Vati ke Fayde aur Nuksan

चित्रकादि वटी क्या है ? chitrakadi vati in hindi

चित्रकादि वटी एक आयुर्वेदिक दवा है जो एनोरेक्सिया और अपचन के आयुर्वेदिक उपचार में प्रयोग की जाती है। यह पाचन शक्ति में सुधार करता है। इसका उपयोग पंचकर्मा की प्रारंभिक प्रक्रिया में किया जाता है, जिसमें रोगी की पाचन शक्ति में सुधार की आवश्यकता होती है।
यह व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले आयुर्वेदिक टैबलेट में से एक है।

चित्रकादि वटी के घटक द्रव्य : chitrakadi vati ingredients in hindi

✦ चित्रकमूल
✦ पीपलामूल
✦ सज्जीखार
✦ यवक्षार
✦ सेन्धानमक
✦ सोंचर नमक
✦ काला नमक
✦ सामुद्र नमक,
✦ सांभर नमक
✦ सोंठ
✦ काली मिर्च
✦ छोटी पीपल
✦ हिंग
✦ अजमोद
✦ चव्य…इत्यादि

चित्रकादि वटी बनाने की विधि : preparation method of chitrakadi vati

चित्रकमूल की छाल, पीपलामूल, सज्जीखार, यवक्षार, सेन्धानमक, सोंचर नमक, काला नमक, सामुद्र नमक, सांभर नमक, सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, घी में सेंकी हुई हिंग, अजमोद, चव्य – प्रत्येक समान भाग लेकर कूट-कपड़छन चूर्ण बना विजोरा या दाड़िम के रस में १ दिन मर्दन कर, चने के बराबर गोलियाँ बना, सुखाकर रख लें ।
वक्तव्य – ‘अन्तः सम्मार्जने प्रायोऽजमोदा तु यवानिका‘ इस उक्ति के अनुसार अजमोदा के स्थान पर अजवायन डालकर बनाना उत्तम है।

मात्रा और अनुपान : chitrakadi vati dosage

१-१ गोली, जल के साथ भोजन के बाद दे।
आइये जाने chitrakadi vati ke fayde in hindi , chitrakadi vati ke labh

चित्रकादि वटी के फायदे ,गुण और उपयोग : chitrakadi vati benefits in hindi

1- आमाशय के बिगड़ जाने पर अन्न ठीक से हजम नहीं होता हो, अर्थात् खाये हुए पदार्थ का अच्छी तरह से परिपाक न होने पर आंवयुक्त कच्चा मल दस्त के साथ निकलता हो (इसकी चिकित्सा जल्दी नहीं करने से संग्रहणी हो जाती है) तो जल के साथ सुबहशाम इसका सेवन करने से अग्नि प्रदीप्त हो जाती है और भूख खुलकर लगने लगती है। अन्न का अच्छी तरह से परिपाक होने पर आँव का बनना बिल्कुल बन्द हो जाता है और पाचन-शक्ति ठीक हो जाती है। ऑवपाचन के लिये यह बटी सर्वोत्तम लाभदायक है। ( और पढ़े पाचनतंत्र मजबूत करने के 24 रामबाण घरेलु नुस्खे )

2- पेट में वायु का या कफ का प्रकोप होने पर उदरशूल, विबन्ध, पेशाब कम होना आदि त्रासदायक कष्ट हो जाते हैं, उनमें इस बटी के सेवन से शीघ्र लाभ होता है।

3- चित्रकादि वटी एनोरेक्सिया और भूख की कमी का इलाज करती है । ( और पढ़ेअरुचि दूर कर भूख बढ़ाने के 32 अचूक उपाय)

4- चित्रकादि वटी कब्ज में राहत देती है ।

5- चित्रकादि वटी पेट फूलना दूर करती है । ( और पढ़ेपेट फूलना (अफरा) का घरेलु उपचार)

6- उल्टी या मतली में यह लाभदायक है ।

उपलब्धता : यह बनी-बनाई इसी नाम से बाजार में मिलती है |

चित्रकादि वटी के नुकसान : chitrakadi vati side effects in hindi

1- उच्च रक्तचाप वाले लोगों को केवल डॉक्टर की सलाह के तहत ही यह दवा लेनी चाहिए, क्योंकि इस दवा में घटक के रूप में नमक होता है।
2- अति खुराक से पेट में मामूली जलन हो सकती है।
3- चित्रकादि वटी को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें ।

विशेष : अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित ” हिंगादि हरड़ चूर्ण ” पेट की तमाम तकलीफों की रामबाण आयुर्वेदिक औषधि है । इसे एक बार जरुर आजमायें ।

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है ।

2018-10-12T12:45:17+00:00 By |Ayurveda|0 Comments