परिचय :

दण्डासन को सामान्य बोलचाल की भाषा में `दण्ड लगाना´ भी कहते हैं। पुराने समय में कुश्ती के अखाड़े में भी इस आसन को किया जाता था। इस आसन को करने का एक और प्रकार भी है जिसमें कमर से ऊपर के भाग को तब तक उठाया जाता है जब तक कि शरीर व फर्श के बीच त्रिभुज का आकार न बन जाएं। इस आसन का अभ्यास स्वच्छ वातावरण व हवादार स्थान पर दरी या चटाई बिछाकर करें।

दण्डासन के अभ्यास की विधि : dandasana steps in hindi

★ दण्डासन के लिए पहले पेट के बल लेट जाएं।

★ अपने दोनों पैरों को मिलाकर व तानकर रखें।

★ इसके बाद अपने दोनों हाथों के बीच थोड़ी दूरी रखते हुए छाती के बिल्कुल सीध में हाथ को कोहनियों से मोड़कर रखें।

★ अब पूरे शरीर को तानते हुए धीरे-धीरे सांस अंदर खींचे (वायु को अंदर भरे) और पंजों पर शरीर का भार देते हुए दोनों हाथों के सहारे शरीर को तब तक ऊपर उठाएं जब तक दोनों हाथ बिल्कुल सीधे न हो जाएं।

★ फिर सांस छोड़ते हुए (वायु को बाहर निकालते हुए) धीरे-धीरे शरीर को नीचे फर्श से थोड़े ऊपर रखें और पुन: श्वास लेकर शरीर को ऊपर ले जाएं।

★ इस प्रकार से श्वास लेकर ऊपर और श्वास छोड़ते हुए नीचे आते हुए इस क्रिया को कई बार करें। इस आसन के अंत में सांस को छोड़कर आराम करें।

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आसन से रोगों लाभ : Dandasana se labh

★ इस आसन के अभ्यास से बाएं कन्धें तथा छाती के स्नायुओं का विकास होता है।

★ यह आसन हाथ-पैरों को सख्त तथा छाती को चौड़ा व मजबूत बनाता है।

★ यह पंजों व हथेलियों को मजबूत करता है।

★ इससे सांस लेने की शक्ति बढ़ती है तथा कंठ फूलता है और शरीर के सभी अंग पुष्ट होते हैं।

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