पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

जानिये किस मास में कौनसे देव की पूजा होती है विशेष फलदायी | Dev Pooja

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जानिये किस मास में कौनसे देव की पूजा होती है विशेष फलदायी | Dev Pooja

मासा अनुसार देवपूजन : Worship of God as per month

माघ मास में सूर्य पूजन(surya puja) का विशेष विधान है | भविष्य पुराण आदि में वर्णन आता है | आरोग्यप्राप्ति हेतु बोले, माघ मास आया तो सूर्य उपासना करों |

फाल्गुन मास आया तो होली (holi puja) का पूजनकिया जाता है.. बच्चों की सुरक्षा हेतु |

चैत्र मास आता है चैत्र मास में ब्रम्हा(brahma ji ki puja), दिक्पाल आदि का पूजन कियाजाता है ताकि वर्षभर हमारे घर में सुख-शांति रहें |

वैशाख मास भगवान माधव (krishna puja)का पूजन किया जाता है ताकि, मरने के बाद वैकुंठलोक की प्राप्ति हो | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय… |

जेष्ठ मास में यमराज (yamraj ki puja)की पूजा की जाती है ताकि, वटसावित्री का व्रत सुहागन देवियाँ करती है | यमराज की पूजा की जाती है ताकि, सौभाग्य की प्राप्ति हो, दुर्भाग्य दूर हो |

श्रावण मास में दीर्घायु की प्राप्ति हो, श्रावण मास में शिवजी(shiv ji ki puja) की पूजाकी जाती है | अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम् |

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भाद्रपद मास में गणपति की पूजा (ganpati ji ki pooja)करते है की, निर्विध्नता की प्राप्ति हेतु |

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में फिर पितृ पूजन(pitru pooja) करते है की, वंश वृद्धि हेतु | और अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में माँ दुर्गा(durga puja) की पूजा होती है की, शत्रुओं पर विजय प्राप्ति हेतु नवरात्रियों में |dev-poojan

कार्तिक मास में लक्ष्मी पूजा (laxmi pooja)की जाती है, सम्पति बढ़ाने हेतु |

मार्गशीर्ष मास में विश्वदेवताओं का पूजन किया जाता है कि जो गुजर गये उनके आत्मा शांति हेतु ताकि उनको शांति मिले | जीवनकाल में तो बिचारेशांति न लें पाये और चीजों में उनकी शांति दिखती रही पर मिली नहीं | तो मार्गशीर्ष मास में विश्व देवताओं के पूजन करते है भटकते जीवों के सद्गति हेतु |

आषाढ़ मास में गुरुदेव (guru pooja)का पूजन करते है अपने कल्याण हेतु और गुरुदेव कापूजन करते है तो फिर बाकी सब देवी-देवताओं की पूजा से जो फल मिलता है वोफल सद्गुरु की पूजा से भी प्राप्त ही सकता है, शिष्य की भावना पक्की हो की – सर्वदेवो मयो गुरु | सभी देवों का वास मेरे गुरुदेव में हैं | तोअन्य देवताओं की पूजा से अलग-अलग मास में अलग-अलग देव की पूजा से अलग-अलग फल मिलता है पर उसमें द्वैत बना रहता है और फल जो मिलता है वो छुपने वाला होता है | पर गुरुदेव की पूजा-उपासना से ये फल भी मिल जाते है और
धीरे-धीरे द्वैत मिटता जाता है | अद्वैत में स्थिति होती जाती है |

श्रोत – ऋषि प्रसाद मासिक पत्रिका (Sant Shri Asaram Bapu ji Ashram)

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2017-08-14T17:16:31+00:00 By |Adhyatma Vigyan, Successful LifeTips|0 Comments

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