पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

संग्रहणी के 56 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Sangrahani Ayurvedic Home remedies in Hindi

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संग्रहणी के 56 सबसे असरकारक घरेलु उपचार | Sangrahani Ayurvedic Home remedies in Hindi

संग्रहणी का परिचय :sangrahani disease

जब दस्त रोग से पीड़ित रोगी गर्म चीज खा लेता है तो रोगी संग्रहणी रोग का शिकार हो जाता है। इस रोग में भोजन को पचाने वाली अग्नि मंद हो जाती है और पाचनक्रिया बहुत बिगड़ जाती है। पाचनक्रिया खराब होने से रोगी के द्वारा खाया हुआ भोजन पच नहीं पाता।

संग्रहणी(sangrahani)रोग 3 प्रकार का होता है-

1. वातज संग्रहणी : जो व्यक्ति बादी वाली चीजे अधिक सेवन करता है अथवा मैथुन अधिक करता है उनकी वायु (गैस) कुपिट होकर पाचनक्रिया को बिगाड़ देती है।
2. पित्त की संग्रहणी : जो व्यक्ति अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन करता है, गर्म चीजों का सेवन करता है, तीखी व खट्टी चीजों का सेवन करते हैं उसे नीले, पीले, पतले, कच्चे दस्त होते हैं।
3. कफ की संग्रहणी : चिकनी, तली हुई, भारी और ठण्डी चीजों का अधिक सेवन करने और सेवन करने के तुरंत बाद सो जाने के कारण खाया हुआ पदार्थ पूरी तरह से पच नहीं पाता। ऐसे में रोगी को दस्त के साथ आंव आने लगता है। इसके अतिरिक्त एक अन्य संग्रहणी भी होता है जिसे सन्निपातक संग्रहणी कहते हैं। इस संग्रहणी में ऊपर के तीनों लक्षण पाए जाते हैं।

कारण :
जब दस्त के रोग से पीड़ित रोगी खान-पान में सावधानी नहीं रखता तब जठराग्नि मंद होकर पाचनक्रिया खराब हो जाता है जिससे वसा (चर्बी) को पचाने की शक्ति समाप्त हो जाती है। इस तरह जब खाया हुआ पदार्थ ठीक से पच नहीं पाता है तो संग्रहणी रोग की उत्पत्ति होती है।

लक्षण :

★ कफ संग्रहणी में भोजन पूरी तरह से नहीं पच पाता, गला सूख जाता है, भूख और प्यास अधिक लगती है, कान, पसली, जांघ, पेडू आदि में दर्द रहता है। रोगी के मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है, मिठाई खाने की अधिक इच्छा होती है तथा बार-बार दस्त लगता रहता है।

★ पित्त की संग्रहणी में नीले, पीले और पानी की तरह पतले दस्त आते हैं रोगी को खट्टी डकारें आती है, छाती व गले में जलन होती है, खाना खाने का मन नहीं करता और प्यास अधिक लगती है।

★ कफज संग्रहणी से पीड़ित रोगी को उल्टी आती है, बार-बार उबकाई आती है तथा खांसी के दौरे पड़ते रहते हैं।

★ सन्निपातज संग्रहणी में सभी लक्षण दिखाई देते हैं। मल झागदार और शरीर कमजोर हो जाता है। जीभ, तालु, होंठ और गाल लाल हो जाता है। इस रोग में आहार के अनुपात में मल अधिक आता है। भोजन करने के तुरंत बाद ही तेज दस्त लग जाता है, खून की कमी हो जाती है, पेट में गड़गड़ाहट होती है, मुंह में छाले हो जाते हैं और कमर दर्द भी होता है।

संग्रहणी (Sprue / Sangrahni) में क्या खाएं क्या नहीं :

नित्य सादा किन्तु सुपाच्य भोजन करें| भोजन में पपीता, अमरूद, कच्चे बेल का गूदा तथा सोंठ का चूर्ण नियमित रूप से लें| छाछ और मक्खन निकला दूध भी ले सकते हैं| मिर्च-मसालेदार, चटपटी, खट्टी, कड़वी तथा सख्त चीजें बिलकुल न खाएं| तरोई, लौकी, परवल, करेला, मेथी, पालक, गाजर आदि का सेवन अधिक मात्रा में करें| सलाद का प्रयोग नित्य करें| फलों में अमरूद, पपीता, शरीफा, केला, संतरा और नीबू का रस लें|

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विभिन्न औषधियों से उपचार : sangrahani treatment in hindi

1. चनसूर : चनसूर के बीजों का 3 से 10 ग्राम चूर्ण को मिश्री मिलाकर सुबह-शाम लेने से संग्रहणी अतिसार रोग समाप्त होता है।
2. बच : एक चौथाई से आधे ग्राम बच का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर खाने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
3. कुटकी : आधे से एक ग्राम कुटकी का चूर्ण शहद के साथ खाने से दस्त में आंवा आना बंद होता है।
4. सौंफ : 20 से 30 मिलीलीटर सौंफ का रस दही या लस्सी के साथ पीने से संग्रहणी दस्त ठीक होता है।
5. अजमोद :
• अजमोद, सोंठ, मोचरस और धाय के फूल को अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें और इसे गाय के दूध या दही के साथ सेवन करें। इससे दस्त में आंव आना रोग दूर होता है।
• अजमोद, सोंठ, छोटी पीपल, कालीमिर्च, सेंधानमक, सफेद जीरा, काला जीरा और भुनी हुई हींग बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को घी में मिलाकर खाना खाने से पहले एक ग्राम की मात्रा में खाएं। इससे संग्रहणी अतिसार का रोग समाप्त होता है।
6. इन्द्रजौ : रसौत, अतीस, इन्द्रजौ, कुड़े की छाल, सोंठ और धाय के फूल बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शहद और चावल के पानी के साथ मिलाकर सेवन करने से संग्रहणी अतिसार रोग ठीक होता है।
7. हरड़ :
• हरड़, छोटी पीपल, सोंठ और चित्रक (चीता) को मिलाकर चूर्ण बनाकर छाछ के साथ पीने से पेचिश रोग दूर होता है।
• 20 ग्राम छोटी हरड़ और 10 ग्राम पोस्तदाना को अलग-अलग भूनकर पीस लें और इसमें 30 ग्राम चीनी डालकर मिलालें। यह 9 ग्राम चूर्ण सुबह पानी के साथ लेने से संग्रहणी अतिसार रोग समाप्त होता है।
8. नागरमोथा :
• नागरमोथा, अतीस, बेलगिरी तथा इन्द्रजौ को लेकर कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने से दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।
• नागरमोथा, बेलगिरी, इन्द्रयव, सुगंधबाला तथा मोचरस बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बकरी के दूध में पकाकर एक चम्मच चटनी प्रतिदिन सेवन करने संग्रहणी रोग नष्ट होता है।
• नागरमोथा, अरलू, सोंठ, धाय के फूल, पठानी लोध्र, सुगन्धवाला, बेलगिरी, मोचरस, पाठा, इन्द्रयव, कुड़े की छाल, आम की गुठली, अतीस और लजालू को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ या चावल के धोवन के साथ सेवन करने से संग्रहणी अतिसार का रोग समाप्त होता है।
• 3 से 6 ग्राम नागरमोथा को अदरक के रस के साथ पीसकर सुबह-शाम सेवन करने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
9. खारानमक : खारानमक, सज्जीखार, जवाखार, कालानमक, सेंधानमक, सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, चव्य, अजमोद, चित्रक, पीपरामूल, भुनी हुई हींग, जीरा और सौंफ बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को पानी या लस्सी के साथ सेवन करने से दस्त का रोग ठीक होता है।
10. कालीमिर्च :
• कालीमिर्च, चीते की जड़ की छाल तथा सेंधानमक 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर लस्सी के साथ सेवन करने से संग्रहणी अतिसार रोग समाप्त होता है।
• कालीमिर्च, चित्रक मूल और कालानमक बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर लें और 3 से 10 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ सेवन करें। इससे खून व आंवयुक्त दस्त का बार-बार आना बंद होता है।
11. कालानमक : कालानमक, चीते की छाल और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छाछ के साथ सेवन करें। इसमा सेवन प्रतिदिन करने से संग्रहणी रोग समाप्त हो जाता है।
12. मूसली : 6 ग्राम काली मूसली बारीक पीसकर 125 ग्राम गाय के लस्सी के साथ सेवन करने से पेचिश रोग समाप्त होता है।
13. चीता : चीता, चव्य, बेलगिरी तथा सोंठ बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर 3 से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से दस्त के साथ आंव आना समाप्त होता है।
14. कुड़ा : 50 ग्राम कुड़ा की छाल का चूर्ण दिन में एक बार खाली पेट दही के साथ खाने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
15. सोंठ :
• सोंठ, गुरुच, नागरमोथा और अतीस बराबर मात्रा में लेकर मोटा-मोटा कूटकर चूर्ण बना लें। यह 2 चम्मच चूर्ण काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पेचिश रोग दूर होता है।
• सोंठ और कच्चे बेल का गूदा बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से घोटकर इसमें 2 गुने मात्रा में पुराना गुड़ मिलाकर मटर के आकार की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली सुबह-शाम लस्सी के साथ सेवन करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
• सोंठ, हरड़ की छाल, पीपल, कालानमक और कालीमिर्च 10-10 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें। यह चुटकी भर चूर्ण सुबह-शाम प्रतिदिन 15 दिनों तक सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
• सोंठ, कुटकी, रसौत, धाय के फूल, बड़ी हरड़, इन्द्रजौ, नागरमोथा और कुड़ा की छाल समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर सेवन करें। यह काढ़ा संग्रहणी व पाचनतंत्र सम्बंधी गड़बड़ी को दूर करता है।
• सोंठ, कूचर, कालीमिर्च, पीपल, यवक्षार, सज्जीखार, पीपलामूल और बिजौरा नींबू का चूर्ण बनाकर नमक मिलाकर सेवन करने से दस्त के साथ आंव व खून आना बंद होता है। यह पाचनशक्ति को बढ़ाता है।
• सोंठ, नागरमोथा, अतीस और गिलोय का काढ़ा बनाकर सेवन करने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
16. पीपल : पीपल, सोंठ, पीपलामूल, चित्रक और चव्य बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर एक चम्मच चूर्ण लस्सी के साथ सेवन करने से संग्रहणी, अपच व भूख न लगना ठीक होता है।
17. गंधक : संग्रहणी रोग से पीड़ित रोगी को 2 ग्राम शुद्ध गंधक, 10 ग्राम सोंठ, 5 ग्राम पीपल, 5 ग्राम पांचों नमक और 2 ग्राम भुनी हुई भांग। इन सभी को बारीक पीसकर 2 चुटकी की मात्रा में ठंडे पानी के साथ सेवन करने से रोग दूर होता है।
18. रसौत :
• 50 ग्राम रसौत को मोटा-मोटा कूटकर 250 ग्राम पानी में एक घंटे तक भिगोकर उसी पानी में मसलकर पकाकर गाढ़ा कर लें। इसके बाद इसकी कालीमिर्च के आकार की गोलिया बना लें। 5-5 गोली हर 4 घंटे के अंतर पर लस्सी के साथ सेवन करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
• पित्त संग्रहणी होने पर रसोत, अतीस, इन्द्रयव और धाय के फूल समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर रख लें। इसमें 2 चूटकी चूर्ण छाछ के साथ खाने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
19. जायफल : जायफल, चित्रक, सफेद चन्दन, बायविडंग, इलायची, भीमसेनी कपूर, वंशलोचन, सफेद जीरा, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल और लबंग बराबर-बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 500 ग्राम मिश्री मिलाकर चुटकी भर चूर्ण छाछ के साथ सेवन करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
20. मोचरस : मोचरस, बेलगिरी, नेत्रबाला, नागरमोथा, इन्द्रयव और कूट की छाल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर खाने से दस्त का रोग समाप्त होता है।
21. मिश्री : 80 ग्राम मिश्री, 80 ग्राम कैथ, 30 ग्राम पीपल, 30 ग्राम अजमोद, 30 ग्राम बेल की गिरी, 30 ग्राम धाय के फूल, 30 ग्राम अनारदाना, 10 ग्राम कालानमक, 10 ग्राम नागकेसर, 10 ग्राम पीपलामूल, 10 ग्राम नेत्रवाला और 10 ग्राम इलायची। इन सभी को एक साथ बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह 2 चुटकी चूर्ण छाछ के साथ खाने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
22. अजवायन : अजवायन, बेल की जड़, कैथ की जड़, सोनापाढ़ा की जड़, कटाई अरनी की जड़, छोटी कटाई, सहजन की जड़, सोंठ, पीपल, चक, भिलवा, पीपलामूल, जवाखार और पांचों नमक बराबर-बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चूटकी चूर्ण सुबह-शाम लेने से दस्त के साथ खून आना, कमजोरी व दर्द आदि दूर होते हैं।
23. सज्जीखार : जवाखार, सज्जीखार, खारा नमक, कालानमक, सेंधानमक, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, अजमोद, चित्रक, पीपलामूल और भुनी हुई हींग को एक साथ पीसकर आधा चम्मच चूर्ण प्रतिदिन सेवन करने से संग्रहणी अतिसार ठीक होता है।
24. चावल : 2 से 3 ग्राम पका चावल दिन में 2 बार खाने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
25. मुनक्का : बड़ी हरड़, मुनक्का, सौंफ और गुलाब का फूल को पीसकर काढ़ा बनाकर पीने से आंवदस्त ठीक होता है।
26. काला तिल : 3 से 6 मिलीलीटर काले तिल के रस में 5 गुनी चीनी डालकर खाने से संग्रहणी अतिसार ठीक होता है।
27. बेल :
• पके हुए बेल का शर्बत सेवन करने से जल्द ही पुराना आंवदस्त ठीक होता है।
• बेल (बेलपत्थर) का शर्बत बनाकर सेवन करने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
• बेलगिरी, नागरमोथा, इन्द्रजौ, सुगंधबाला और मोचरस को बकरी के दूध में पकाकर खाने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
• कच्चे बेल का गूदा तथा सोंठ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इसमें दुगुना पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करने के बाद ऊपर से लस्सी पीएं। इससे संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
28. बिल्वफल : बिल्वफल का एक ग्राम चूर्ण और सोंठ का एक ग्राम चूर्ण के साथ गुड़ के साथ मिलाकर खाने से सभी प्रकार का संग्रहणी रोग दूर होता है।
29. कैथ : 80 ग्राम कैथ का गूदा, 60 ग्राम चीनी, अनारदाना, इमली, बेलगिरी, धाय के फूल, अजमोद और छोटी पीपल 3-3 ग्राम, कालीमिर्च, जीरा, धनिया, पीपलमूल, सुगन्धवाला, कालानमक, अजवायन, दालचीनी, इलायची, तेजपात, नागकेशर, चित्रमूल और सोंठ 1-1 ग्राम। इन सभी को पीसकर चूर्ण बनाकर सेवन करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
30. चिरायता :
• चिरायता, कुटकी, त्रिकुट (सोंठ, कालीमिर्च, पीपल), मुस्तक, इन्द्रयव, करैया की छाल एवं चित्रक समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। यह 3 से 6 ग्राम चूर्ण दही या छाछ के साथ सुबह-शाम प्रयोग करने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
• चिरायता, कुटकी, त्रिकुट (सोंठ, कालीमिर्च, पीपल), नागरमोथा, इन्द्रयव 10-10 ग्राम, चित्रक 20 ग्राम और डेढ़ ग्राम कुड़े की छाल लेकर अच्छी तरह से कूटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को गुड़ से बने शर्बत के साथ प्रयोग करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
31. मैनफल : मैनफल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर सेवन करने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
32. ककड़ासिंगी : ककड़ासिंगी के चर्ण को घी में भूनकर आधे से 2 ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से दस्त के साथ आंव व खून आना बंद होता है।
33. दालचीनी : दालचीनी का काढ़ा प्रतिदिन 3 बार सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
34. सुगन्धबाला : 3 से 6 ग्राम सुगन्धबाला को बेलपत्थर के साथ सेवन करने से दस्त के साथ खून व आंव आना बंद होता है और पाचनशक्ति बढ़ती है।
35. विल्वफल : विल्वफल का गूदा, सोंठ और गुड़ मिलाकर खाने से पेचिश रोग ठीक होता है।
36. शतावरी : 10 से 20 ग्राम शतावरी का चूर्ण सुबह-शाम चीनी मिले दूध के साथ पीने से दस्त के साथ आंव व खून आना बंद होता है।
37. कत्था : 3 से 6 ग्राम कत्था (खैर) सुबह-शाम सेवन करने से आंवदस्त ठीक होता है।
38. मोखा : मोखा का रस आधे-आधे ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से दस्त में आंव आना बंद होता है।
39. नींबू :
• नींबू को काटकर इसमें मूंग के बराबर अफीम डालकर आग सेंककर चूसने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
• कागजी या जंभीरी नींबू का शर्बत बनाकर सुबह-शाम पीने से संग्रहणी रोग दूर होता है।
40. कोकम : 40 से 80 मिलीलीटर कोकम का घोल बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से संग्रहणी का दस्त ठीक होता है।
41. रीठा : 4 ग्राम रीठा को 250 मिलीलीटर पानी के साथ तब तक उबाले जब तक झाग न उठ जाएं और फिर इसे हल्का ठंडा करके पीएं। इससे संग्रहणी रोग दूर होता है और कब्ज दूर होकर पाचनशक्ति बढ़ती है।
42. लहसुन : लहसुन की भुनी हुई पुती, 3 ग्राम सोंठ का चूर्ण और 5 ग्राम मिश्री को मिलाकर दिन में 3 बार लेने से दस्त के साथ खून आना बंद होता है।
43. जीरा : जीरा, छोटी हरड़, लहसुन की भुनी हुई पुती 5-5 ग्राम भूनकर पीस लें और इसे गर्म पानी या लस्सी के साथ सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
44. धनिया : लहसुन, धनिया, अतीस, वेगवाला, नागरमोथा, सोंठ और खरेटी एक समान लेकर काढ़ा बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से पेचिश रोग समाप्त होता है।
45. आम :
• आम के 50 मिलीलीटर ताजे रस में 20-25 ग्राम मीठा दही तथा एक चम्मच शुंठी का चूर्ण मिलाकर दिन में 2 से 3 बार लेने से कुछ ही दिन में पुरानी संग्रहणी रोग ठीक हो जाता है।
• कच्चे आम की गुठली की मींगी का चूर्ण 60 ग्राम, जीरा, कालीमिर्च व सोंठ का चूर्ण 20-20 ग्राम, आम के पेड़ के गोंद का चूर्ण 5 ग्राम तथा अफीम का चूर्ण 1 ग्राम को एक साथ खरल करके बोतल में बंद करके रख लें। यह 3 से 6 ग्राम की मात्रा दिन में 3-4 बार सेवन करने से संग्रहणी, आम अतिसार और खून का बहना बंद होता है।
46. मठ्ठाकल्प : मठ्ठाकल्प से पाचनक्रिया ठीक होती है। इसके सेवन से संग्रहणी रोग ठीक होता है और भूख का न लगना आदि दूर होती है।
47. चांगेरी : पेचिश रोग से पीड़ित रोगी को चांगेरी के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) के रस में पीपल का रस मिलाकर इसके 4 गुना दही में मिलाकर घी में पका लें। यह घी दिन में 2 बार सेवन करने से दस्त में आंव व खून आना बंद होता है।
48. मेथी : मेथी के पत्ते और मेथी का काढ़ा बनाकर 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में दिन में 2 बार पिलाने से संग्रहणी दूर होता है।
49. अदरक : अदरक, सोंठ, नागरमोथा, अतीस और गिलोय बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पेचिश रोग में आराम मिलता है।
50. गिलोय : गिलोय, सोंठ, मोथा और अतीस बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ काढ़ा बनाकर 30-30 मिलीलीटर सुबह-शाम पीने से पाचनक्रिया की खराबी दूर होकर संग्रहणी रोग समाप्त हो जाता है।
51. शरपुंखा : शरपुंखे के बीस ग्राम काढ़ा में 2 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीने से संग्रहणी रोग समाप्त होता है
52. भांग :
• 2 ग्राम धुली हुई भांग को भूनकर 3 ग्राम शहद के साथ चाटने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
• 100 ग्राम भांग, 200 ग्राम शुंठी और 400 ग्राम जीरा को अच्छी तरह एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें। यह 1-2 चम्मच चूर्ण दही में मिलाकर भोजन से आधा घंटे पहले खाने से पुरानी पेचिश दूर होती है।
53. अनार :
• अनार के रस में जायफल, लौंग और सोंठ का चूर्ण और शहद मिलाकर पीने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
• सूखे अनार के छिलके को पानी में पीसकर पीने से भी संग्रहणी रोग दूर होता है।
• 10 ग्राम अनारदाना, 2 ग्राम सोंठ, 2 ग्राम कालीमिर्च और 5 ग्राम मिश्री को पीसकर चूर्ण बनाकर संग्रहणी रोग समाप्त होता है।
• कच्चे अनार के रस में माजूफल, लौंग और सोंठ घिसकर शहद मिलाकर पीने से दस्त के साथ आंव व खून आना बंद होता है।
• 20 से 40 मिलीलीटर अनार की छाल का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।
54. आंवला : आंवला, धनिया, सोंठ, नागरमोथा, खस, बेल का गूदा, कुरैया की छाल, जायफल, अतिविषा, खैर की छाल, अजमोद, एरण्ड की जड़, जीरा लौंग, पीपल, कर्कटश्रृंगी, खुरासानी अजवायन, धाय के फूल और लोघ्रा बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को अनार में भरकर आटे से बंद करके आग पर सेंककर आटा हटाकर चूर्ण की बेर के आकार की गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से अतिसार (दस्त), संग्रहणी, मंदाग्नि, अरुचि और दर्द ठीक होता है।
55. अफीम : अफीम और बछनाग 3-3 ग्राम, लौह भस्म लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग और अभ्रक डेढ़ ग्राम को दूध में घोटकर मूंग के आकार की गोलियां बनाकर दूध के साथ सेवन करने से पेचिश रोग ठीक होता है।
56. अतीस :
• अतीस, सोंठ और गिलोय का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन सेवन करने से दस्त के साथ खून आना बंद हो जाता है।
• पतले दस्त, बदबूदार पसीना व पेचिश रोग में अतीस और शुंठी 10-10 ग्राम को कूटकर दो किलो पानी में पकाएं और आधा शेष रहने पर छानकर थोड़ा अनार का रस मिलाकर दिन में 3-4 बार पीएं। इससे दस्त में खून व आंव आना बंद होता है।

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