पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

गर्भासन : गर्भाशय के सभी रोगों को दूर करने वाला चमत्कारिक आसन | Garbhasana Steps and Health Benefits

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गर्भासन : गर्भाशय के सभी रोगों को दूर करने वाला चमत्कारिक आसन | Garbhasana Steps and Health Benefits

गर्भासन ( Garbhasana )के अभ्यास की विधि : garbhasana steps

★ गर्भासन को करने के लिए नीचे चटाई आदि बिछाकर बैठ जाएं।
★ इसके बाद अपने दाएं पैर को घुटनों से मोड़कर बाईं जांघ पर रखें और बाएं पैर को घुटनों से मोड़कर दाईं जांघ पर रखें जैसे पदमासन में बैठते हैं।
★ इसके बाद अपने हाथों को जांघ व पिंडलियों के बीच से फंसाकर कोहनियों तक बाहर निकालें और दोनों कोहनियों को मोड़ते हुए दोनों घुटनों को ऊपर की ओर उठाएं तथा शरीर को संतुलित करते हुए दोनों हाथों से अपने कान को पकड़े।
★ आसन के इस स्थिति में आने पर शरीर का पूरा भार नितम्ब (हिप्प) पर होना चाहिए।
★ इस स्थिति में 1 से 5 मिनट तक रहें और पुन: सामान्य स्थिति में आ जाएं।

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विशेष-

शुरू-शुरू में यह आसन करना कठिन होता है, परंतु कुछ दिनों तक इस आसन का अभ्यास करने से यह आसान हो जाता है। कुक्कुटासन को सही तरह से करने के बाद गर्भासन करना लाभकारी होता है। आइये जाने garbhasana benefits in hindi

गर्भासन ( Garbhasana )से रोगों में लाभ-

★ गर्भासन के अभ्यास से शरीर के सभी अंगों की मालिश हो जाती है तथा रीढ़ की हड्डी मजबूत व लचीली बनती है।
★ यह शरीर के सभी नसों-नाड़ियों के दोषों को दूर करता है तथा मांसपेशियों की अकड़न को खत्म करता है।
★ इससे जठराग्नि प्रदीप्त होती है और जिगर (यकृत), तिल्ली (प्लीहा) सही रूप से काम करते रहते हैं।
★ यह आसन शरीर को हल्का करता है तथा रक्त संचार (खून के बहाव) को तेज करता है।
★ यह भूख को बढ़ाता है तथा स्नायु की दुर्बलता को दूर करता है।
★ इसके अभ्यास से पीलिया रोग दूर होता है।
★ यह आसन स्त्रियों के लिए अधिक लाभकारी होता है।
★ इस आसन को करने से गर्भाशय के सभी रोग ठीक होते हैं।
★ 14 साल से कम उम्र की लड़कियां अगर इस आसन को करें तो उनमें गर्भाशय से संबन्धित किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता।
★ इस आसन को स्त्री प्रसव के 40 दिन बाद पुन: करने लगे तो 3 महीने के अंदर ही शरीर की कमजोरी दूर हो जाती है और चेहरे की सुंदरता लौट आती है।
★ इस आसन को करने से स्त्री-पुरुष दोनों का यौवनकाल अधिक समय तक रहता है।

 

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2017-06-15T17:19:38+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments

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