गर्मियों में बचें इन 9 बीमारियों से | Common Summer Diseases And Ways To Prevent Them

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गर्मियों में बचें इन 9 बीमारियों से | Common Summer Diseases And Ways To Prevent Them

गर्मी में होने वाली बीमारीयाँ ,उनके लक्षण और इलाज :

1-डीहाइड्रेशन :
डीहाइड्रेशन भले ही आपको बड़ी समस्या न लगे, लेकिन गर्मी के मौसम में डीहाइड्रेशन सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है,

कारण –
झुलसा देनेवाली गर्मी में बाहर निकलने से शरीर से पसीना अधिक निकलता है. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है.

लक्षण –
मुंह सूखना, ड्राई स्किन, मांसपेशियों में ऐंठन, मितली, हल्का सिरदर्द, पसीना बिल्कुल न आना, पेशाब में कमी भूख न लगना आदि.

उपाय-
• रोज़ाना १०-१५ ग्लास पानी ज़रूर पीएं.
• पानी के अलावा छाछ, फलों का जूस, मिल्क शेक पीने से भी शरीर में पानी की कमी पूरी होगी.
• सलाद खाएं. सलाद में पानी से भरपूर चीजें, जैसे- खीरा, टमाटर आदि कोशामिल कर सकते हैं.
• पानी की कमी होने पर नींबू पानी, ग्लूकोज़ या ओआरएस का घोल बनाकर पीएं.
• एसिडिटीवाले पेय से दूर रहें, चाय-कॉफी भी कम कर दें.
• अल्कोहल का सेवन न करें, अल्कोहल शरीर से पानी का स्तर कम कर देता है.
• बच्चे डीहाइड्रेशन के शिकार ज़्यादा होते हैं, क्योंकि खेलकूद में वो अक्सर पानी पीना भूल जाते हैं. यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि उन्हें समय-समय पर पानी पिलाते रहें.

2-हीटस्ट्रोक (लू लगना) :

हीटस्ट्रोक यानी लू लगना. यह बहुत ही गंभीर समस्या है. इसमें तत्काल चिकित्सा की ज़रूरत होती है. समय पर इलाज न होने पर जान भी जा सकती है.

कारण-
जब गर्मी अधिक लगती है, तो पसीना निकलता है, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रण में रहता है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि ज्यादा धूप या गर्मी के कारण शरीर का कूलिंग सिस्टम या गर्मी को नियंत्रित करनेवाली व्यवस्था बिगड़ जाती है और शरीर का तापमान बढ़ जाता है, तापमान बढ़ने से शरीर के अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है.

लक्षण –
थर्मामीटर में अगर शरीर का तापमान १०२-१०३ डिग्री नज़र आए, तो यह खतरनाक स्थिति है, डीहाइड्रेशन, चेहरे का लाल या ड्राई हो जाना, पल्स रेट तेज़ होना, सिरदर्द, चक्कर आना, बेहोशी आदि,

उपाय-
• अगर बाहर तापमान बहुत ज्यादा है।और कोई ज़रूरी काम नहीं है, तो बाहर न निकलें, अगर जाना ज़रूरी है, तो खुद को कपड़ों से अच्छी तरह से ढंककर जाएं.छाता भी साथ ले जाएं. आंखों को तेज़ धूप से बचाने के लिए सनग्लासेस भी अवश्य लगाएं.
• प्यास लगने पर ही पानी न पीएं, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहे और खुद को हाइड्रेटेट रखें.
• अपने आप को ज़्यादा न थकाएं.

3-आंखों में जलन :

आंखें शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा होती हैं. गर्मी के मौसम में इनका खास ख्याल रखने की ज़रूरत होती है, क्योंकि कंजंक्टिवाइटिस, आंखों में जलन जैसी बीमारियां आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

कारण –
गर्मी, तेज़ धूप और अल्ट्रावायलेट किरणों का आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है. तेज़ अल्ट्रावायलेट किरणें रेटिना को नुक़सान पहुंचाती हैं.

लक्षण-
• आंखों का लाल हो जाना.
• आंखों में सूजन या खुजली होना.
• आंखों से गाढ़ा तरल पदार्थ निकलना या लगातार पानी आना.
• आंखों का शुष्क हो जाना आदि.

उपाय –
• हर थोड़ी देर में आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारें.
• बाहर जाते समय आंखों को धूप से बचाएं. यूवी प्रोटेक्शनवाले सनग्लासेस और छाता साथ ले जाना न भूलें.
• अगर कंजंक्टिवाइटिस से ग्रसित हैं, तो संक्रमण न फैले इसके लिए बार-बार अपने हाथों को धोएं. अपना रुमाल या चश्मा किसी के साथ शेयर न करें, आंखों को हाथों से न रगड़े.
• आंखों को रिलैक्स करने के लिए खीरे के टुकड़े या गुलाब जल को कॉटन बॉल्स पर लगाकर आंखों पर रखें. इससे आंखों को ठंडक पहुंचेगी.
• आंखों को आराम देने और स्वस्थ रखने के लिए आठ घंटे की नींद अवश्य लें, साथ ही पौष्टिक आहार लें.

4-त्वचा का झुलसना :

अत्यधिक गर्मी से त्वचा झुलस जाती है. इस मौसम में सनबर्न, टैनिंग, घमौरी, फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां आम हैं.

कारण –
• चिलचिलाती धूप, गर्मी, हवा में नमी के कारण चेहरे पर झुर्रियां व मुंहासे हो जाते हैं, तेज़ धूप त्वचा को बेजान बना देती है.
• अल्ट्रावायलेट किरणों की वजह से त्वचा टैन हो जाती है और त्वचा पर काले चकत्ते बन जाते हैं.
• अधिक पसीना और नमी की वजह से त्वचा पर छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं, जिसे बैक्टीरियल इंफेक्शन या घमौरी कहते हैं.

लक्षण-
• त्वचा पर लाल या काले चकत्ते, खुजली होना, दाने उभर आना आदि.
• चेहरे और हाथों को हल्के रंग के कपड़े से ढंककर रखें.
• प्रभावित जगह पर मॉइश्चराइज़र न लगाएं. इसकी जगह एलोवेरा जेल लगा सकते हैं.
• अगर रोज़ाना मॉइश्चराइज़र लगाने की आदत है तो ऑयली मॉइश्चराइज़र की जगह वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करें.
• गर्मियों में लाइट मेकअप करें.
• अगर फेस पैक लगाती हैं, तो इस मौसम के लिए हर्बल फेसपैक चुनें.
• सनबर्न पर गुलाब जल या तरबूज़ का रस लगाने से आराम मिलता है.
• रोज़ाना सोने से पहले चेहरे को क्लीन करें. इसके लिए कॉटन बॉल को दूध में भिगोकर उससे चेहरा साफ़ करें, इससे छुपी हुई गंदगी भी बाहर आ जाएगी.
• ब्रांडेड टोनर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. टोनर त्वचा के पोर्स को बंद रखता है व उसे ठंडक पहुंचाता है. गुलाब जल भी एक अच्छा टोनर माना जाता है.
• अगर त्वचा टैन हो गई है, तो बेसन के आटे में कुछ बूंदें नींबू का रस व थोड़ा दही मिलाएं और त्वचा पर लगाएं और सूखने दें. कुछ देर बाद धो लें. नींबू के सिट्रस गुण टैन त्वचा के लिए फायदेमंद होते हैं,

उपाय-
• अपनी त्वचा के अनुसार एसपीएफ १५ या ३०+ वाला सनस्क्रिन लोशन चुनें. बाहर निकलने के १५ मिनट पहले सनस्क्रिन लोशन अप्लाई करें.
• ज़्यादा देर तक धूप में न रहें, खासकर सुबह १० बजे से २ बजे तक की धूप बेहद नुक़सानदेह होती है.

5-स्टमक फ्लू :

गर्मी में गैस्ट्रिक या स्टमक फ्लू की समस्या भी हो सकती है, क्योंकि इस मौसम में इसके जीवाणु आसानी से पनपते हैं. कारण । यह वायरस दूषित पानी और खाने से फैलता है. गर्मी के मौसम में खाना जल्दी खराब हो जाता है. इस मौसम में मच्छर-मक्खियां काफ़ी बढ़ जाती हैं और खाने पर बैठकर इस बीमारी को और फैलाती हैं,

लक्षण-
पेटदर्द, उल्टी, बेचैनी, बार-बार गला सूखना, हल्का बुखार, कमज़ोरी, मांसपेशियों में खिंचाव व भूख में कमी जैसे लक्षण हो सकते हैं.

उपाय –
• सड़क के किनारे मौजूद ठेले या खुले खाद्य पदार्थ व बासी खाना न खाए।
• पर्सनल हाइजीन का ख्याल रखें.
• घर के आसपास साफ़-सफ़ाई का भी ध्यान रखें.
• सब्ज़ियों को अच्छी तरह से धोकर ही पकाएं. बा
• हर खाना अगर मजबूरी हो, तो देख लें कि वहां साफ़-सफ़ाई है या नहीं.

6-फूड पॉयज़निंग :

गर्मियों में बासी बचा हुआ खाना और स्ट्रीट फूड खाने से फूड पॉयज़निंग हो जाती है. कारण ज़्यादा हीट और ह्यूमिडिटी के कारण बचा हुआ खाना जल्दी खराब हो जाता है,

लक्षण –
उल्टी होना, पेटदर्द, दस्त, तेज़ बुखार होना, डीहाइड्रेशन आदि इसके मुख्य लक्षण हैं.

उपाय –
• खाना बनाने से पहले, शौच जाने के बाद, पालतू जानवरों को छूने के बाद मेडिकेटेड सोप से हाथों को धोएं.
• अनपॉश्चराइज़्ड मिल्क और इनसे बने पदार्थों का सेवन न करें.
• फूड पॉयज़निंग होने पर पर्सनल हाइजीन, फूड और वातावरण संबंधी हाइजीन का ख्याल रखें.
• अधिक मात्रा में खाना बनाकर फ्रिज में न रखें. यदि बचे हुए खाने को फ्रिज में रखना ही हो,
तो खाने से पहले गरम करके खाएं.
• फूड पॉयज़निंग होने पर अधिक मात्रा में लिक्विड पीएं और हल्का खाना खाएं.
• रेडी टू ईट फूड खरीदते समय उनकी एक्सपायरी डेट चेक करना न भूलें.

घरेलू नुस्खे –
• १ टेबलस्पून शहद और अदरक के रस की कुछ बूंदें मिलाकर खाने से पेट में जलन और दर्द दूर होता है.
• नींबू पानी, लेमन टी और पिपरमेंट टी पीने से फूड पॉयज़निंग में आराम मिलता है.
• १ टेबलस्पून शहद में ३-४ बूंदें तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर खाने से पेट का इंफेक्शन दूर होता है.

7-इंफ्लुएंज़ा :

ये नाक, गला और ब्रॉन्कियल ट्यूब में होनेवाला वायरल इंफेक्शन है, जो छींक या खांसी होने पर वायरस के ज़रिए तेज़ी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है.

लक्षण-
सिरदर्द, बुखार, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, कमज़ोरी और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं. ३-४ दिन तक फ्लू में आराम न मिलने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. समय रहते यदि सही उपचार न किया जाए व सावधानियां न बरती जाएं, तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है.

उपाय-
• खाना खाने से पहले हाथों को मेडिकेटेड सोप से अच्छी तरह से धोएं या फिर सेनेटाइज़र का इस्तेमाल करें.
• खांसते या छींकते समय मुंह को डिस्पोज़ेबल टिश्यू से ढंके,
• पुदीने और नमक की चाय पीने से बुख़ार में आराम मिलता है. इसके अलावा लेमन जूस और हर्बल टी पीने से भी इंफ्लुएंज़ा में लाभ होता है,

8-कंजंक्टिवाइटिस (आंख आना) :

वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण से कंजंक्टिवा (आंखों का सफ़ेदवाला भाग) के ग्रसित होने को कंजंक्टिवाइटिस या पिंक आईज़ कहते हैं,

लक्षण –
आंखों में सूजन होना, लाल होना, खुजली होने के साथ-साथ दर्द की भी शिकायत होती है. इसके प्रमुख लक्षण हैं- आंखों से मवाद व गंदा पानी आना, सूजन होना, धुंधला दिखाई देना
और तेज़ रोशनी सहन न कर पाना आदि.

उपाय-
• कंजंक्टिवाइटिस होने पर सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें. डॉक्टर की सलाह के अनुसार आंखों में एंटीबायोटिक आई ड्रॉप और ऑइन्टमेंट डालें.
• आंखों को २-२ घंटे बाद साफ़ पानी से धोएं.
• आंखों को कॉटन बॉल्स से साफ़ करने के बाद हाथों को साबुन से धोएं.
• संक्रमित आंखों को रब न करें.
• रूई के फाहे को गाय के दूध में भिगोएं. उस पर फिटकरी का चूर्ण छिड़ककर आंखों पर रखें,
• रातभर पानी में भिगोए हुए गुड़ के पानी को कम से कम छह बार छानकर पीएं.
• हरे धनिया को पीसकर उसका रस निकालकर छान लें, इस रस की २-२ बूंदें आंखों में डालने से आराम मिलता है.
• छिले हुए आलू के स्लाइसेस को आंखों पर रखने से आंखों की सूजन दूर होती है.
• आंखों में जलन और खुजली को कम करने के लिए ठंडी ब्रेड की स्लाइसेस आंखों पर रखें,

9-डायरिया :

लक्षण-
बाहर खाना खाने, खाने-पीने में गड़बड़ी होने और अधिक गर्मी के कारण खाना न पचने पर डायरिया हो जाता है. पेटदर्द, उल्टी होना, सिरदर्द, बुखार आना और बार-बार शौच जाना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं.

उपाय –
• खाने से पहले हाथों को साबुन और साफ़ पानी से अच्छी तरह से धोएं.
• बासी बचा हुआ और बाहर का खाना खाने से बचें,
• डायरिया होने पर कम से कम तीन दिन तक डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन न करें.
• ककड़ी, गाजर और मौसमी फलों को अच्छी तरह से धोकर खाएं.
• डायरिया होने पर नारियल पानी पीएं, क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने का सबसे अच्छा विकल्प है.
• ८-१० सिंघाड़े खाकर ऊपर से मढ़ा पीने से डायरिया में तुरंत आराम मिलता है.
• सुखाए हुए संतरे के छिलके व सूखे मुनक्के के बीज को समान मात्रा में घोंटकर पीने से दस्त में राहत मिलती है.
• समान मात्रा में जामुन तथा आम की गुठली की गिरी को पीस लें. १ कप छाछ में २ टीस्पून इस पाउडर को मिलाकर पीने से दस्त में तुरंत लाभ होता है,
• डायरिया में मसालेदार खाना, खट्टी चीजें, साबूत दालें और खीरा खाने से बचें.

2019-04-13T18:29:32+00:00By |Health Tips|0 Comments

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