गोरखमुंडी के फायदे गुण उपयोग और नुकसान Gorakhmundi Dosage, Benefits and Side Effects in Hindi

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गोरखमुंडी के फायदे गुण उपयोग और नुकसान Gorakhmundi Dosage, Benefits and Side Effects in Hindi

गोरखमुंडी क्या है ? : gorakhmundi in hindi

देश में उपलब्ध अनेक जड़ी बूटियों में एक है गोरखमुण्डी जिसे मुण्डी भी कहते हैं। इस वनस्पति के पांचों अंगों का उपयोग, कुछ व्याधियों की चिकित्सा में, प्रमुख घटक द्रव्य के रूप में किया जाता है। यह ज़मीन पर फैलने वाली गुल्म जाति की वनौषधि है। यह छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है और दोनों के गुण एक समान होते हैं। इसमें शीतकाल में फूल आते हैं और बाद में फल लगते हैं।

गोरखमुंडी का विभिन्न भाषाओं में नाम :

संस्कृत-मुण्डी । हिन्दी-गोरखमुण्डी | मराठी-बरसवोंडी, गोरखमुण्डी । गुजराती-गोरखमुण्डी । तामिल-कोट्टा-करन्थई । बंगला-मुड़मुड़िया, मण्डीरी । तैलुगु-वोड्डातारुपु । मलयामल-मिरंगनी । कन्नड़-कीयोबोड़ातर। फ़ारसी -कम दुरियस । लैटिन-स्फिरेन्थस इण्डिकस (Sphaeranthus indicus.) ।

गोरखमुंडी के औषधीय गुण व प्रधानकर्म :

गोरखमुण्डी पाक में चरपरी, उष्णवीर्य, मधुर, हलकी, मेधा को हितकारी और गलगण्ड, अपच, पेशाब में रुकावट, कृमि, योनि में पीड़ा, पाण्डु रोग, श्लीपद (हाथी पांव), अरुचि, मिरगी, प्लीहा, मेद तथा गुदा की पीड़ा को नष्ट करने वाली है। यह पचने में भारी और बवासीर नाशक है।

रासायनिक संघटन :

इसमें तिक्त क्षाराभ स्फिरैन्थीन व एक ग्लूकोसाइड पाया जाता है। एक रक्ताभ तैल भी पाया जाता है जिसमें यूजिनाल, आसिमिन आदि तत्व होते हैं। पौधे में पीताभ हरित स्थिर तैल होता है। फूलों में अल्ब्युमिन, एक तैल, रिड्यूसिंग शर्करा, टेनिन, खनिज द्रव्य, उड़नशील तैल तथा ग्लुकोसाइड पाये जाते हैं।

मात्रा एवं सेवन विधि : dosage

इसके पंचांग (जड़,फूल, पत्ती, फल और बीज) का रस एक या दो बड़ा चम्मच भर और काढ़ा 50 मि.लि. तक सुबह शाम लेना चाहिए। आइये जाने gorakhmundi ke fayde in hindi ,gorakhmundi ke labh

गोरखमुंडी के फायदे और उपयोग : health benefits and uses of gorakhmundi

इस जड़ी बूटी के पांचों अंगों (पंचांग) का उपयोग चिकित्सा में किया जाता है। आयुर्वेद ने इसके जो जो गुण बताये हैं उनके अनुसार गोरखमुण्डी का उपयोग, घटक द्रव्य के रूप में करके उस गुण के प्रभाव से रोग को दूर करने में किया जाता है। यहां घरेलू इलाज में उपयोगी कुछ प्रयोग प्रस्तुत किये जा रहे हैं।

1-आमवात में गोरखमुंडी के फायदे :
गोरखमुण्डी के फूल और सोंठ का पिसा हुआ बारीक चूर्ण- दोनों 50-50 ग्राम मिला कर तीन बार छान लें और शीशी में भर लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह शाम शहद के साथ लेने से आमवात रोग नष्ट होता है। ( और पढ़ेआमवात के 15 घरेलू उपचार)

2-बवासीर में गोरखमुंडी के फायदे :
इसकी जड़ की छाल का चूर्ण एक चम्मच, ताज़ी छाछ के साथ सुबह खाली पेट लेने से बवासीर रोग दूर होता है और पेट के कृमि नष्ट होते हैं । ( और पढ़ेबवासीर के 52 सबसे असरकारक घरेलु उपचार)

3-कण्ठमाला में गोरखमुंडी के फायदे :
इसको सिल पर पीस कर, लुगदी बना कर, बवासीर के मस्सों, कण्ठमाला और सूखी गठान पर रख कर पट्टी बांधने से लाभ होता है। ( और पढ़ेकण्ठमाला के 22 घरेलू उपचार )

4-मूत्राशय की पथरी और मूत्र की रुकावट में गोरखमुंडी के फायदे :
इसके पंचांग का चूर्ण 10 ग्राम दो कप पानी में डाल कर उबालें, जब पानी आधा कप रह जाए तब उतार कर छान कर सुबह खाली पेट पीने से मूत्राशय की पथरी और मूत्र की रुकावट की व्याधियां नष्ट होती हैं।

5-मुख की दुर्गन्ध में गोरखमुंडी के फायदे :
मुख की दुर्गन्ध दूर करने के लिए अच्युताय हरिओम का “दंतमंजन लाल” बहुत गुणकारी सिद्ध हुआ है। दंतमंजन लाल का 100 ग्राम वाला पेकिंग खरीद लाएं। इसमें गोरखमुण्डी का महीन पिसा छना चूर्ण मिला लें। इस मंजन से सुबह व रात को सोते समय मंजन करने से मसूढे स्वस्थ व मज़बूत होते हैं और मुख की दुर्गन्ध दूर होती है। ( और पढ़ेमुंह की बदबू के कारण और दूर करने के 15 घरेलू उपाय )

6-स्वर माधुर्य में गोरखमुंडी के फायदे :
गला बैठ जाए जिससे आवाज़ बिगड़ जाती है तो गोरखमुण्डी का बारीक चूर्ण 50 ग्राम और पिसी सोंठ 10 ग्राम अच्छी तरह मिला लें। आधा-आधा चम्मच चूर्ण शहद में मिला कर सुबह शाम चाटने से गला ठीक हो जाता है और आवाज़ सुधर जाती है।

7-पौरुषग्रन्थि वृद्धि में गोरखमुंडी के फायदे :
वृद्धावस्था के प्रभाव से होने वाली व्याधियों में एक व्याधि है पौरुषग्रन्थि (Prostate Gland) की वृद्धि होना। इस व्याधि के कारण मूत्र विसर्जन खुल कर नहीं होता, बैठ कर मूत्र विसर्जन करने में असुविधा व रुकावट होती है। गोरखमुण्डी का अर्क 4-4 चम्मच दिन में तीन बार पीने से यह व्याधि दूर हो जाती है। यदि बाज़ार में अर्क न मिले तो सुबह 2 कप पानी में 10 ग्राम (एक बड़ा चम्मच) चुर्ण डाल कर उबालें । जब आधा कप बचे तब उतार कर छान लें। यह काढ़ा तैयार हो गया। इसे तीन खुराक करके सुबह दोपहर शाम को पिएं।

8-उदर वायु में गोरखमुंडी के फायदे :
गैस बढ़ने की तकलीफ़ दूर करने के लिए आधा चम्मच मुण्डी का चूर्ण दूध के साथ सुबह शाम लेने से आराम होता है।

9-सफ़ेद दाग़ में गोरखमुंडी के फायदे :
त्वचा पर सफ़ेद दाग़ हो । जाए तो तुरन्त यह उपाय करना चाहिए मुण्डी का चूर्ण 50 ग्रा. व समुद्र शोष 25 ग्राम- दोनों को खूब पीस कर मिला लें। इस चूर्ण को 1-1 चम्मच सुबह शाम पानी के साथ लेने से कुछ दिनों में सफ़ेद दाग मिट जाता है। ( और पढ़ेसफेद दाग का कारण व आयुर्वेदिक इलाज)

10-रक्त विकार में गोरखमुंडी के फायदे :
रक्त विकार होने पर त्वचा पर खुजली, फोड़े-फुसी आदि उपद्रव होते हैं। मुण्डी का अर्क या काढ़ा सुबह शाम पीने से रक्त विकार दूर होता है और उपद्रव शान्त होते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में जानकारी रखने वाले बुजुर्ग प्रतिवर्ष चैत्र मास के प्रारम्भिक दो सप्ताह में मुण्डी के चूर्ण का सेवन जल के साथ 15 दिन तक सेवन करते हैं और नमक का सेवन इन 15 दिनों में नहीं करते। इस उपाय से रक्त विकार होने की सम्भावना समाप्त हो जाती है।

11-कम्पवात में गोरखमुंडी के फायदे :
मुण्डी का चूर्ण, कौंच बीज का चूर्ण और लौंग का चूर्ण- तीनों को अच्छी तरह पीस कर मिला लें। सुबह शाम 1-1 चम्मच शहद के साथ, लाभ न होने तक सेवन करना चाहिए।

12-निर्बलता में गोरखमुंडी के फायदे :
मुण्डी के पंचांग को छाया में सुखा कर, कूट पीस कर महीन बारीक चूर्ण कर लें। सुबह खाली पेट एक चम्मच (5-6 ग्राम) मात्रा में यह चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से शरीर शक्तिशाली होता है। यह प्रयोग स्त्री-पुरुष दोनों के लिए उपयोगी है। इस प्रयोग को किसी भी ऋतु में और कितने ही समय तक किया जा सकता है।

13-नेत्र ज्योति बढ़ाने में गोरखमुंडी के फायदे :
इसके फल का चूर्ण और पिसी शक्कर या मिश्री दोनों समान मात्रा में ले कर मिला लें। इसे एक चम्मच मात्रा में, दूध के साथ, लेना है। सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लेना चाहिए । इस प्रयोग से नेत्र रोग दूर होते हैं और नेत्र ज्योति बढ़ती है।

14-नपुंसकता में गोरखमुंडी के फायदे :
मुण्डी की जड़ को पानी से धो कर कूट पीस कर लुगदी बना कर, पीतल की कलईदार कढ़ाही में डाल दें ऊपर से लुगदी के वज़न से चार गुनी मात्रा में काले तिलों का तैल और तैल के वज़न (मात्रा) से चार गुनी मात्रा में पानी डाल कर मन्दी आंच पर पकने के लिए रख दें। जब पानी जल जाए और सिर्फ तैल ही बचे तब उतार लें। इसे बाटल में भर लें। इस तैल से प्रतिदिन बदन पर मालिश करें और पुरुषेन्द्रिय पर यह तैल लगाएं तो शरीर स्वस्थ, शक्तिशाली बनता है और पुरुष के शिश्न में कठोरता व शक्ति आती है। ( और पढ़ेवीर्य वर्धक चमत्कारी 18 उपाय )

गोरखमुंडी के नुकसान : side effects of gorakhmundi in hindi

✦ गोरखमुंडी का अधिक मात्रा में उपयोग जननांगों के लिए हानिकारक हो सकता है।
✦ गोरखमुंडी लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

2018-10-21T17:12:11+00:00 By |Herbs|0 Comments