हाई ब्लड प्रेशर(उच्च रक्तचाप) क्या है ? : high blood pressure in hindi

हृदयरोग, मधुमेह आदि बीमारियों की तरह उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) भी तथाकथित आधुनिकता की देन है। अनेक बार ऐसा भी होता है कि व्यक्ति को उच्च रक्तचाप होता है, किंतु किसी प्रकार के लक्षण न होनेके कारण वह जान ही नहीं पाता कि उसे रोग ने आ घेरा है। उसको यह ज्ञान तब होता है, जब वह किसी घटनावश या किसी अन्य रोगके कारण डॉक्टर के पास जाता है। उस समयतक रोगी के दिल, दिमाग, गुर्दे तथा आँख बुरी तरह प्रभावित हो चुके होते हैं। इसलिये उच्च रक्तचापको चुपचाप मारनेवाला (साइलेंट किलर) भी कहा जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर के प्रकार : high blood pressure ke prakar

(ऊपरका रक्तचाप) ब्लडप्रेशर दो प्रकारका होता है–सिस्टोलिक एवं डायस्टोलिक (नीचेका रक्तचाप)। जब हृदय सिकुड़ता है और रक्त शरीरमें प्रवाहित होता है, उस समय जो दबाव रक्त-धमनियोंपर पड़ता है उसे सिस्टोलिक रक्तचाप कहते हैं। जब हृदय फैलता है और हृदय में रक्त भरता है, उस समय जो दबाव रक्त-धमनियों पर पड़ता है उसे डायस्टोलिक रक्तचाप । कहते हैं। । यदि आपका रक्तचाप १२०/८० मिलीमीटर ऑफ मर्करी है तो इसका अर्थ यह है कि आपका सिस्टोलिक ब्लड-प्रेशर १२० तथा डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर ८० मिलीमीटर ऑफ मर्करी है।
यदि कई बार नापनेके बाद भी रक्तचाप १४०/९० मि०मी० ऑफ मर्करी से अधिक हो तो उसे उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर अथवा हाइपरटेंशन कहते हैं। । किसी व्यक्तिका पहली बार रक्तचाप नापा जाय और वह १४०/९० से ज्यादा हो तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह उच्च रक्तचाप से पीडित है। यदि उसी मनुष्य का विभिन्न समयों में तीन बार रक्तचाप नापा जाय और तीनों बार रक्तचाप अधिक पाया जाय तो हम कह सकते हैं। कि उस व्यक्तिको उच्च रक्तचापकी बीमारी है।

उच्च रक्तचाप दो प्रकारका होता है—प्राथमिक और द्वितीयक।

प्राथमिक उच्च रक्तचाप-
इस प्रका रके उच्च रक्तचापका कारण ज्ञात नहीं होता, इसलिये इसे प्राथमिक उच्च रक्तचाप कहते हैं। उच्च रक्तचापके ९० प्रतिशत रोगियों को प्राथमिक उच्च रक्तचाप ही होता है

द्वितीयक उच्च रक्तचाप-
इस प्रकारका उच्च रक्तचाप शरीरके किसी अन्य अङ्गके रोगका परिणाम होता है। यदि शरीरके उस रोग को दूर कर दिया जाय तो इस प्रकारका उच्च रक्तचाप भी ठीक हो जाता है। इस प्रकारके रक्तचाप के कारण गुर्दे के रोग, एंड्रीनल ग्रंथियों के रोग, महाधमनी में रुकावट आदि हैं। स्टेरायड तथा गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से भी रक्तचाप बढ़ जाता है।

प्राथमिक उच्च रक्तचाप भी दो प्रकारका होता है- नम्र एवं उग्र

नम्र उच्च रक्तचाप में लक्षण कम कष्टवाले होते हैं। इसकी प्रगति भी धीमी होती है और इसमें गुर्दे का विकार भी नहीं पाया जाता।

उग्र या मैलिग्नेंट हाईपरटेंशन का वेग उग्र होता है और इसमें गुर्दे भी खराब हो जाते हैं। इसमें डायस्टोलिक रक्तचाप १४० मि०मी० ऑफ मर्करी से ज्यादा हो जाता है। इस अवस्थामें रोगी को उलटी और सिरदर्द हो सकता है। उसके शरीरके किसी अङ्गमें कुछ देरके लिये फालिज मार सकता है। रोगी को दौरे पड़ सकते हैं और वह बेहोश भी हो सकता है।
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हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के सामान्य लक्षण : high blood pressure ke lakshan in hindi

1-उच्च रक्तचाप के सामान्य लक्षणों में सिरका भारी होना, सिरदर्द, याददाश्त कमजोर होना, चक्कर आना, कानों में घंटियाँ-सी बजना, श्रम करनेपर थकानका अनुभव होना, चिड़चिड़ापन, हाँफनी चढ़ना, दिलकी धड़कन बढ़ जाना, छातीमें पीडा होना और पैरों में सूजन आना आदि प्रमुख हैं।

2-उच्च रक्तचापके कारण सिरदर्द अधिकतर सबेरेके समय और सिरके पिछले भागमें होता है। इसके अलावा किसी-किसी रोगीकी नाक से रक्तस्राव भी होने लगता है।

3-जितना अधिक रक्तचाप होगा उतना ही अधिक रोगी को खतरा होगा और रोगी का जीवन उतना ही छोटा होगा। पैंतीस वर्ष की अवस्थामें जो आदमी सामान्यतया स्वस्थ है लेकिन उसका रक्तचाप १३०/९० है तो उसकी उम्र लगभग चार वर्ष कम हो जाती है। यदि किसीका रक्तचाप १४०/९५ रहता है तो उसकी उम्र लगभग नौ वर्ष कम हो जाती है। जिसका रक्तचाप ३५ वर्ष की अवस्थामें १५०/१०० रहता है, उसका जीवनकाल सोलह वर्ष कम हो जाता है। यदि इलाज एवं परहेज से उच्च रक्तचापपर काबू पा लिया जाता है तो इससे होनेवाले खतरोंसे बचा जा सकता है।

4-उच्च रक्तचापसे सर्वाधिक हानि हृदयको होती है। उच्च रक्तचापके कारण हृदय फेल हो सकता है और दिलका दौरा भी पड़ सकता है।

5- उच्च रक्तचापके कारण दिमागकी नस फट सकती है और मस्तिष्कमें रक्तस्राव हो सकता है। जिसे अंग्रेजीमें ‘स्ट्रोक’ कहते हैं। इसके कारण मरीजके आधे शरीरको लकवा मार सकता है, वह बेहोश हो सकता है।

6-यदि उच्च रक्तचापका इलाज नहीं कराया जाय तो गुर्दे खराब हो सकते हैं। इस रोगके कारण आँखके पर्देकी रक्त-धमनियों में स्राव हो सकता है और रोगीकी आँखकी रोशनी जा सकती है।

7-ज्यों-ज्यों अवस्था बढ़ती है मनुष्यका रक्तचाप भी बढ़ता है। सामान्य रूप से यह रक्तचाप नवजात शिशुमें लगभग ६५/४०, बच्चों में १००/६० तथा युवावस्थामें १२०/८० होता है।

8-उच्च रक्तचाप तथा आनुवंशिकीमें गहरा सम्बन्ध है। यदि माता-पिताका रक्तचाप सामान्य है तो बच्चों में उच्च रक्तचापकी सम्भावना तीन प्रतिशत होती है। यदि माँ-बापमेंसे एकको उच्च रक्तचाप हो तो बच्चोंमें इस रोगकी सम्भावना २५ प्रतिशत होती है और यदि माता-पिता दोनों उच्च रक्तचाप से पीडित हैं तो उनके बच्चों में इस रोगका खतरा ७५ प्रतिशत होता है। इसलिये जिनके माता-पिता उच्च रक्तचापके शिकार हों, उन्हें नमक कम खाना चाहिये।

9-यह माना जाता है कि जिन्हें प्राथमिक उच्च रक्तचाप होता है, उनके गुर्दे आनुवंशिक रूपसे पेशाब में नमक की अधिक मात्रा नहीं निकाल पाते हैं; किंतु रक्तचाप बढ़नेसे पेशाबमें नमक अधिक निकलने लगता है।

10-मोटापे तथा उच्च रक्तचाप में गहरा सम्बन्ध है।

11-मानसिक श्रम करने वालों को उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है, किंतु शारीरिक श्रम करने से वजन एवं रक्तचाप दोनों कम हो जाते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर से बचने के उपाय : High Blood Pressure se Bachne ke Upay

उच्च रक्तचाप का जल्दी पता लगाना भी कठिन काम है, इसलिये पैंतीस वर्ष को अवस्था के बाद प्रत्येक मनुष्य को वर्ष में एक बार स्वास्थ्य-परीक्षण अवश्य कराना चाहिये। यदि किसी के माता-पिता उच्च रक्तचाप से पीडित हैं, तो उन्हें भी अपने रक्तचापकी नियमित जाँच कराते रहना चाहिये।
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क्या खायें, क्या नहीं खायें : high blood pressure me kya khaye kya nahi

उच्च रक्तचापपर नियन्त्रण रखनेके लिये खानपान में सावधानी रखना आवश्यक है। सप्ताह में एक दिन उपवास भी उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिये उपयोगी है, किंतु इस बातका ध्यान रहे कि उपवास वाले दिन कुछ भी खाया-पिया न जाय। नमक कम खाये। रोगीको निम्नलिखित चीजों से परहेज करना चाहिये

उच्च रक्तचाप के रोगी ये चीजें ना खायें :

(१) मांस, मद्य, अंडे आदि,
(२) मलाई युक्त दूध, क्रीम, मक्खन, पनीर, खीर, देशी घी एवं दूधसे बनी मिठाइयाँ आदि,
(३) वनस्पति घी, नारियलका तेल आदि; क्योंकि इनमें सेचुरेटेड वसा होती है, जो रक्तचाप तथा सीरम कोलेस्ट्रॉलको बढ़ाती है।
(४) आइसक्रीम, चॉकलेट एवं सूखे मेवे ।
(५) ऐसी चीजें, जिनमें नमक तथा खानेका सोडा मिला हो; जैसे-अचार, डिब्बेबंद सब्जियाँ, केक, पेस्ट्री, ब्रेड,बंद, बिस्कुट, चिप्स, शीतल पेय एवं सोडावाटर आदि।

उच्च रक्तचाप के रोगी ये चीजें खा सकते हैं :

(१) उबली सब्जियाँ एवं कच्ची सब्जियाँ।
(२) नीबूपानी, कम नमक युक्त सब्जियों का सूप।
(३) लस्सी, मलाई उतारा दूध,  दही आदि।
(४) सोयाबीनका दूध।
(५) सोयाबीनका दही, मूंगफलीका तेल आदि। इस प्रकार खानपान में सावधानी रखने तथा संयमित दिनचर्या, व्यायाम एवं शारीरिक श्रम के माध्यम से उच्च रक्तचाप से बचा जा सकता है।

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