पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

पीलिया कैसा भी हो जड़ से खत्म करेंगे यह 36 देसी घरेलु उपचार | Piliya ka Gharelu Upchar

Home » Blog » Disease diagnostics » पीलिया कैसा भी हो जड़ से खत्म करेंगे यह 36 देसी घरेलु उपचार | Piliya ka Gharelu Upchar

पीलिया कैसा भी हो जड़ से खत्म करेंगे यह 36 देसी घरेलु उपचार | Piliya ka Gharelu Upchar

पीलिया के रामबाण घरेलू नुस्खे : piliya ke karan lakshan aur upay

पीलिया क्या है : piliya(Jaundice)

रक्त में लाल कणों की आयु 120 दिन होती है। किसी कारण से यदि इनकी आयु कम हो जाये तथा जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लग जायें तो पीलिया होने लगता है। रक्त में बाइलीरविन नाम का एक पीला पदार्थ होता है। यह बाइलीरविन लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता है तो इससे शरीर में पीलापन आने लगता है। जिगर के पूरी तरह से कार्य न करने से भी पीलिया होता है। पत्ति जिगर में पैदा होता है। जिगर से आंतों तक पत्ति पहुंचाने वाली नलियों में पथरी, अर्बुद (गुल्म), किसी विषाणु या रासायनिक पदार्थों से जिगर के सैल्स में दोष होने से पत्ति आंतों में पहुंचकर रक्त में मिलने लगता है। जब खून में पत्ति आ जाता है, तो त्वचा पीली हो जाती है। त्वचा का पीलापन ही पीलिया कहलाता है।

अधिकतर अभिष्यन्द पीलिया होता है। इसमें कुछ दिनों तक जी मिचलाता है, बड़ी निराशा प्रतीत होती है, आंखें और त्वचा पीली हो जाती है। जीभ पर मैल जमा रहता है तथा रोगी को 99 से 100 डिग्री तक बुखार रहता है। जिगर और पित्ताशय का स्थान स्पर्श करने पर कोमल प्रतीत होता है। पेशाब गहरे रंग का, मल बदबूदार, मात्रा में अधिक और पीला होता है।

कारण : piliya(Jaundice)ke karan

★ अधिक स्त्री-प्रसंग (संभोग),
★ खटाई, गर्म तथा चटपटे और पित्त को बढ़ाने वाले पदार्थ अधिक खाने,
★ शराब अधिक पीने,
★ दिन में अधिक सोने,
★ खून की कमी तथा वायरस के संक्रमण के कारण,
★ खट्टे पदार्थों का सेवन,
★ राई आदि अत्यन्त तीक्ष्ण पदार्थों का सेवन आदि कारणों से वात, पत्ति और कफ ये तीनों दोष कुपित होकर पीलिया रोग को जन्म देते हैं।

लक्षण :piliya ke lakshan in hIndi

बुखार, चक्कर आना, आंखों के सामने पीलापन दिखाई देना, कई बार आंखों के सामने अंधेरा छा जाना, आंखों में पीलापन, शरीर का पीला होना, पेशाब पीला आना, जीभ पर कांटे-से उग आना, भूख न लगना, पेट में दर्द, हाथ-पैरों में टूटन और कमजोरी, पेट में अफारा, शरीर से दुर्गंध का निकलना, मुंह कड़वा हो जाना, दिन-प्रति-दिन कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी आ जाना आदि इस रोग के लक्षण है। रोग बढ़ने पर सारा शरीर हल्दी की तरह पीला दिखाई देता है। इसमें जिगर, पित्ताशय (वह स्थान जहां पत्ति एकत्रित होता हैं), तिल्ली और आमाशय आदि खराब हो जाते हैं।

भोजन तथा परहेज : piliya me parhej / piliya me kya na khaye

• पूर्ण विश्राम, फलाहार, रसहार, तरल पदार्थों जैसे जूस का सेवन, चोकर समेट आटे की रोटी, पुराने चावल का भात, नींबू-पानी, ताजे एवं पके फल, अंजीर, किशमिश, गन्ने का रस, जौ-चना के सत्तू, छाछ, मसूर, मूंग की दाल, केला, परवल, बैगन की सब्जी, गद्पुरैना की सब्जी, क्रीम निकला दूध, छेने का पानी, मूली, खीरा आदि खाना चाहिए।
• पीलिया के रोगी को जौ, गेहूं तथा चने की रोटी, खिचड़ी, पुराने चावल, हरी पत्तियों के शाक, मूंग की दाल, नमक मिलाकर मट्ठा या छाछ आदि देना चाहिए।
• पेट भर कर खाना, ठंड़े पानी से स्नान, लालमिर्च, मसाले, तली हुई चीजें, मांस आदि से दूर रहना चाहिए।
• रोगी को भोजन बिना हल्दी का देना चाहिए।
• रोगी को पूर्ण विश्राम करने का निर्देश दें। इसके साथ ही रोगी को मानसिक कष्ट पहुंचाने वाली बातें नहीं करनी चाहिए।
• घी, तेल, मछली, मांस, मिर्च, मसाला एवं चर्बीयुक्त चीजों से सदा सावधान रहें।
• मैदे की बनी चीजें, खटाई, उड़द एवं खेसाड़ी की दाल, सेम, सरसों युक्त गरिष्ट भोजन न खायें।
• यदि पीलिया रोग में नमक न खायें तो अच्छा रहता है।

इसे भी पढ़े :पीलिया का करेंगे जड़ से खात्मा यह 19 आसान घरेलू उपाय

विभिन्न औषधियों से उपचार : piliya ka gharelu upcha

1. नीम :

• 10 मिलीलीटर नीम के पत्तों के रस में 10 मिलीलीटर अड़ूसा के पत्तों के रस व 10 ग्राम शहद को मिलाकर सुबह के समय पीलिया रोग में लेने से आराम पहुंचता है।
• 200 मिलीलीटर नीम के पत्ते का रस में थोड़ी शक्कर (चीनी) को मिलाकर गर्म करें। इसे 3 दिन तक दिन में एक बार खाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• नीम के 5-6 कोमल पत्तों को पीसकर, शहद में मिलाकर सेवन करने से मूत्रविकार (पेशाब के रोग) और पेट की बीमारियों में लाभ होता है।
• 10 मिलीलीटर नीम के पत्तों के रस में 10 ग्राम शहद को मिलाकर 5 से 6 दिन तक पीने से आराम मिलता है।
• कड़वे नीम के पत्तों को पानी में पीसकर 250 मिलीलीटर रस को निकालकर फिर उसमें मिश्री को मिलाकर गर्म करें। इसे ठंड़ा होने पर पीने से पीलिया रोग दूर होता है।

2. गिलोय :
• गिलोय, अड़ूसा, नीम की छाल, त्रिफला, चिरायता, कुटकी को बराबर मात्रा में लेकर जौकुट करके एक कप पानी में पकाकर काढ़ा बनाएं। फिर इसे छानकर थोड़ा-सा शहद मिलाकर पी जाएं। 20 दिन तक इसका सेवन पीलिया के रोगी को कराने से आराम मिलता है।
• गिलोय का रस एक चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार इस्तेमाल करने से पीलिया रोग में आराम मिलता है।
• लगभग 10 मिलीलीटर गिलोय के रस को शहद के साथ रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

3. शिलाजीत : शुद्ध शिलाजीत में केसर और मिश्री को मिलाकर बकरी के दूध के साथ सेवन करने से कफज पाण्डु (पीलिया) रोग दूर होता है।

4. निशोथ : निशोथ के चूर्ण में 20 ग्राम चीनी को मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से पित्तज पाण्डु रोग दूर होता है।

5. हल्दी :
• 40 ग्राम दही मे 10 ग्राम हल्दी डालकर सुबह-शाम खाने से पीलिया रोग मे लाभ होता जिगर के रोगों में भी यह प्रयोग लाभदायक है।
• 100 मिलीलीटर छाछ या मट्ठे मे 5 ग्राम हल्दी डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से 1 हफ्ते में ही पीलिया रोग में लाभ नजर आता है।

6. गन्ना :
• गन्ने के रस को पीलिया रोग की प्रमुख औषधि माना जाता है। जब गन्ने का मौसम न हो तो चीनी के शर्बत में नींबू डालकर पिया जा सकता है।
• एक गिलास गन्ने के रस में 2-4 चम्मच ताजे आंवले का रस 2-3 बार रोजाना पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
• गन्ने के टुकड़े करके रात के समय घर की छत पर ओस में रख देते हैं। सुबह मंजन करने के बाद उन्हे चूसकर रस का सेवन करें। इससे 4 दिन में ही पीलिया के रोग में बहुत अधिक लाभ होता है।

7. अड़ूसा : अड़ूसे के रस में कलमीशोरा डालकर पीने से मूत्र-वृद्धि होकर पीलिया रोग में लाभ होता है।

8. त्रिफला :
• आधा चम्मच त्रिफला का चूर्ण, आधा चम्मच गिलोय का रस और आधा चम्मच नीम के रस को एकसाथ मिलाकर शहद के साथ 15 दिन तक खुराक के रूप में चाटने से पीलिया में आराम मिलता है।
• त्रिफला, गिलोय, वासा, कुटकी, चिरायता और नीम की छाल को एक साथ मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण की 20 ग्राम मात्रा को लगभग 160 मिलीलीटर पानी में पका लें। जब पानी चौथाई बच जायें तो इस काढ़े में शहद मिलाकर सुबह और शाम के समय सेवन करने से पीलिया रोग नष्ट होता है।

9. तम्बाकू : तम्बाकू का धूम्रपान करने से पीलिया रोग में शीघ्र लाभ होता है।

10. हरड़ :
• हरड़ की छाल, बहेड़े की छाल, आंवला, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, नागरमोथा, वायविडंग, चित्रक को थोड़ी-थोड़ी सी मात्रा में लेकर पीस लें। इसकी 4 खुराक तैयार करें। दिन भर में चारों खुराक शहद के साथ सेवन करें। इसी अनुपात में 15 दिनों की दवा तैयार कर लें। यह प्रसिद्ध योग है।
• हरड़ को गाय के मूत्र में पकाकर खाने से पीलिया रोग और सूजन मिट जाती है।
• 100 ग्राम बड़ी हरड़ के छिलके और 100 ग्राम मिश्री को मिलाकर चूर्ण बनाकर 6-6 ग्राम की खुराक के रूप में सुबह-शाम ताजे पानी के साथ खाने से पीलिया मिट जाता है।

11. कालीमिर्च : 7 सप्ताह तक लगातार कालीमिर्च का चूर्ण छाछ में मिलाकर पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

12. गुग्गल : गुग्गल को गाय के मूत्र के साथ लेने से पाण्डु (पीलिया) रोग और सूजन मिट जाती है।

13. सत्यानाशी : सत्यानाशी की जड़ की छाल का चूर्ण लगभग एक ग्राम तक लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

14. रीठा :
• 15 ग्राम रीठे का छिलका और 10 ग्राम गावजवां को रात में 250 मिलीलीटर पानी में भिगों दें। सुबह उठकर ऊपर का पानी पी जाएं। 7 दिन तक यह पानी पीने से भयंकर पीलिया रोग मिट जाता है।
• रीठे के छिलके को पीसकर रात को पानी में भिगोयें। सुबह ये पानी नाक में 3 बार दो-दो बूंद टपकाने से पीलिया के रोग में लाभ होता है।

15. नींबू :
• प्रतिदिन आंखों में 2-3 बूंद नीबू का रस डालने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।
• 14 से 28 मिलीलीटर नींबू के फलों का रस सुबह और शाम रोगी को देने से पीलिया का रोग ठीक हो जाता है।
• पीलिया रोग में कागजी नींबू का रस एक गिलास पानी में नित्य दो-तीन बार सेवन करना चाहिए।

16. मदार :
• मदार के 25 पत्ते और उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर घोंट लें, फिर चने के बराबर गोलियां बना लें। 2-2 गोली दिन में 3 बार खाने से पीलिया में लाभ होगा। ध्यान रहें कि इस दौरान मिर्च और खटाई न खाएं।
• 1 ग्राम मदार की जड़ की छाल और 12 कालीमिर्च को एकसाथ पीसकर ठंड़ाई की तरह दिन में 2 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

17. मेंहदी :
• 10 ग्राम मेंहदी के पत्तों को 200 मिलीलीटर पानी में रात को भिगों दें। सुबह इस पानी को छानकर रोगी को पिला दें। इससे कुछ दिन में ही पीलिया रोग जड़ से मिट जाता है।
• पीलिया रोग में 50 ग्राम मेंहदी को कुचलकर आधा गिलास पानी में रात को भिगो दें। सुबह इस पानी को 8-10 दिनों तक लगातार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

18. आंवाहल्दी : 7 ग्राम आंवाहल्दी का चूर्ण और 5 ग्राम सफेद चंदन का चूरा शहद में मिलाकर सुबह और शाम 7 दिनों तक खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।

19. तोरई : कड़वी तोरई के रस की 2-3 बूंदों को नाक में डालने से नाक द्वारा पीले रंग का पानी झड़ने लगेगा और एक ही दिन में पीलिया नष्ट हो जाएगा।

20. पुनर्नवा :
• पुनर्नवा की जड़ को साफ करके छोटे-छोटे टुकड़े काट लें। उन 21 टुकड़ों की माला बनाकर रोगी के गलें में पहना दें। पीलिया ठीक होने के बाद उस माला को किसी पेड़ पर लटका दें।
• एक तिहाई कप पुनर्नवा के रस या मकोये के रस में शहद मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

21. वायविडंग : वायविडंग, हल्दी, त्रिफला, त्रिकुटा और मण्डूर को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को घी और शहद के साथ खाने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।

22. अदरक : अदरक, त्रिफला और गुड़ को एकसाथ मिलाकर सेवन करने से पीलिया रोग दूर होता है।

23. द्रोणपुष्पी :
• द्रोणपुष्पी के पत्तों का रस का अंजन यानी काजल के रूप में लगाने से कामला (पीलिया) शान्त हो जाता है।
• द्रोणपुष्पी के पत्तों का 2-2 बूंद रस आंखों में हर रोज सुबह-शाम कुछ समय तक डालते रहने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

24. पित्तपापड़े : पित्तपापड़े के फांट या घोल को पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

25. मकोय :
• मकोय के काढ़े में हल्दी के चूर्ण को डालकर पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• मकोय के 40-60 मिलीलीटर काढ़े में हल्दी का 2 से 5 ग्राम चूर्ण डालकर पीने से पीलिया रोग मे लाभ मिलता है।
• मकोय के 4 चम्मच रस को हल्का गुनगुना करके 7 दिनों तक पीने से पीलिया रोग दूर होता है।

26. कपास : 8 ग्राम कपास की मिंगी को रात को पानी में भिगो दें। सुबह इसे घोटकर और छानकर इसमें थोड़ा-सा सेंधानमक मिलाकर पीने से पीलिया दूर हो जाता है।

27. कसूम्बा : कसूम्बा के 4 ग्राम सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर फांकने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

28. आलू : आलू या उसके पत्तों का काढ़ा बनाकर रोगी को पिलाने से पीलिया दूर हो जाता है।

29. बकरी का दूध : बकरी के दूध के साथ समुद्रफेन को घिसकर पीने से पीलिया में लाभ होता है।

30. गाय का दूध :
• 250 मिलीलीटर गाय के दूध में 2 ग्राम सोंठ मिलाकर सुबह-शाम पीने से पीलिया नष्ट हो जाता है। इसके सेवन के दौरान भोजन में केवल दूध-रोटी खायें।
• क्रीम निकाला हुआ दूध पीना पीलिया रोग में लाभप्रद होता है।

31. पोदीना :
• पोदीना के अधिक सेवन से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• पोदीने की चटनी रोजाना रोटी के साथ खाने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• पोदीने के रस को शहद के साथ 15 दिनों तक सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

32. बबूल :
• बबूल के फूलों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।

33. दारूहल्दी : दारूहल्दी के फांट या घोल में शहद को मिलाकर पीने से पीलिया रोग शान्त हो जाता है।

24. भांगरा : भांगरे के रस में कालीमिर्च मिलाकर दही के साथ खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।

25. बेल :
• बेल के पत्तों के रस में कालीमिर्च का चूर्ण डालकर पीने से पीलिया रोग शान्त हो जाता है।
• बेल के कोमल पत्तों के 10 से 30 मिलीलीटर रस में आधा ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।

26. जामुन : जामुन के रस में जितना सम्भव हो, उतना सेंधानमक डालकर एक मजबूत कार्क की शीशी में भरकर 40 दिन तक रखा रहने दें। इसके बाद आधा चम्मच की मात्रा में रोगी को सेवन कराने से पीलिया में लाभ होगा।

27. सज्जीखार : 10 ग्राम सज्जीखार और 10 ग्राम संचर नमक को नीबू के रस में घोंटकर तीन दिन पीने से पीलिया रोग मिट जाता है।

28. तिलकेटा : तिलकेटा और 21 कालीमिर्च को घोंटकर पीने से पीलिया रोग मिट जाता है।

29. निशोत : 10-10 ग्राम निशोत, सौंठ, कालीमिर्च, पीपल, वायविडंग, दारूहल्दी, चित्रक, कूट, चव्य, त्रिफला, इन्द्रजौ, कुटकी, पीपलामूल, नागरमोथा, काकडासिंगी, अजवाइन, कायफल, पुनर्नवा की जड़ को कूटकर और छानकर 150 ग्राम खांड़ में मिलाकर डेढ किलो पानी में पकाएं। इस पानी के गाढा होने पर या शहद मिलाकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। यह एक गोली सुबह खाली पेट और 1 गोली शाम को पानी से 15 दिन तक लें। यह गोली खांसी, दमा, टी.बी. अफारा, बवासीर, संग्रहणी, खून जाना, पेट के कीड़ो और पीलिया में लाभदायक है।

30. मूली :
• 100 मिलीलीटर मूली के पत्तों के रस में 20 ग्राम चीनी को मिलाकर खाली पेट 15 से 20 दिन पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• 25 मिलीलीटर मूली के रस में लगभग आधा ग्राम की मात्रा में पिसा नौसादर को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से पीलिया के रोग में लाभ होता है।
• 1 चम्मच कच्ची मूली के रस में एक चुटकी जवाखार मिलाकर सेवन करें। कुछ दिनों तक सुबह, दोपहर और शाम को लगातार यह रस पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
• 2 चम्मच मूली के पत्तों के रस में थोड़ी-सी मिश्री को मिलाकर रोजाना 8-10 दिन तक सेवन करने से पीलिया के रोग में आराम मिलता है।
• कच्ची मूली रोजाना सुबह उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
• 125 मिलीलीटर मूली के पत्तों के रस में 30 ग्राम चीनी मिलाकर और छानकर सुबह के समय पीने से हर प्रकार के पीलिया रोग में लाभ होता है।
• मूली की सब्जी का सेवन करने से सभी तरह के पीलिया रोग मिट जाते हैं।
• मूली में विटामिन `सी´, `लौह´, `कैल्शियम´, `सोडियम´, `मैग्नेशियम´ और क्लोरीन आदि कई खनिज लवण होते हैं, जो जिगर की क्रिया को ठीक करते हैं इसलिए पीलिया रोग में मूली का रस 100 से 150 मिलीलीटर की मात्रा में गुड़ के साथ दिन में 3 से 4 बार पीने से लाभ होता है।
• 10 से 15 मिलीलीटर मूली के रस को 1 उबाल आने तक पकाएं। बाद में इसे उतारकर इसमें 25 ग्राम खांड या मिश्री मिलाकर पिलाएं इसके साथ ही मूली और मूली का साग खाते रहने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
• सिरके में बने मूली के अचार का सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
• मूली के ताजे पत्तों को पानी के साथ पीसकर उबाल लें। उबालने पर इसमें दूध की तरह झाग ऊपर आ जाता है। इसको छानकर दिन में 3 बार पीने से पीलिया रोग मिट जाता हैं।
• मूली के पत्तों के साथ उसका रस निकाल लें। दिन में 3 बार इस रस को 20-20 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
• 70 मिलीलीटर मूली के रस में 40 ग्राम शक्कर (चीनी) मिलाकर पीने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।
• 60 मिलीलीटर मूली के पत्ते का रस व 15 ग्राम खाड़ को एकसाथ मिलाकर पीने से पीलिया रोग कुछ ही समय में समाप्त हो जाता है।
• मूली के पत्तों के 100 मिलीलीटर रस में शर्करा मिलाकर प्रात:काल पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है। सुबह मूली खाने या उसका रस पीने से भी पीलिया रोग नष्ट होता है। बिच्छू के डंक मारने पर मूली का रस लगाने और मूली का रस पिलाने से विष का प्रभाव कम होता है तथा जलन और पीड़ा भी नष्ट होती है।
• गन्ने के रस के साथ मूली के रस को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ होता है। मूली के पत्तों की बिना चिकनाई वाली भुजिया खानी चाहिए।
• 100 मिलीलीटर मूली के रस में 20 ग्राम शक्कर मिलाकर पीने से पीलिया रोग मिट जाता है। रोगी को खाने में मूली, संतरा, पपीता, खरबूज, अंगूर और गन्ना आदि दे सकते हैं।

31. बंदाल : बंदाल को रात में पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को छान करके नाक में 2-2 बूंद टपकाने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।

32. सुहागा : भूना सुहागा, भुनी फिटकरी, कलमीशोरा और नौसादर को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीस लें। इसे 1-1 ग्राम की मात्रा में पानी से भोजन के बाद दोनों समय लेने से पीलिया रोग में आराम मिलता है।

33. कलमीशोरा : कलमीशोरा और जवाखार को एक-एक चम्मच की मात्रा में पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लेने से पीलिया के रोग में लाभ मिलता है।

34. जौ : जौ का सत्तू खाकर ऊपर से एक गिलास गन्ने के रस को रोजाना 4-5 दिनों तक पीने से पीलिया कम हो जाता है।

35. बथुआ : 100 ग्राम बथुए के बीजों को कूट-पीसकर और छानकर दिन में 1 बार 15-16 दिन तक आधा चम्मच चूर्ण के रूप में पानी के साथ सेवन करने से पीलिया रोग में लाभ होता है।

36. फिटकरी :
• 200 ग्राम दही में चुटकी भर फिटकरी को घोलकर पीने से पीलिया रोग में आराम मिल जाता है। इस प्रयोग के समय दिनभर केवल दही ही सेवन करें। इससे पीलिया रोग शीघ्र ही ठीक हो जाता है। इसके सेवन से अगर किसी को उलटी हो जाये तो उसे घबराना नहीं चाहिए और छोटे बच्चों को यह कम मात्रा में देना चाहिए।
• सफेद फिटकरी को भूनकर पीस लें। पीलिया रोग होने पर पहले दिन फिटकरी के आधा ग्राम चूर्ण को दही में मिलाकर खाएं, दूसरे दिन इस चूर्ण की मात्रा बढ़ाकर एक ग्राम और तीसरे दिन लगभग 2 ग्राम इसी प्रकार बढ़ाते हुए सातवें दिन साढ़े 4 ग्राम चूर्ण को दही में डालकर 7 दिनों तक लगातार खाने से पीलिया रोग समाप्त हो जाता है।

Summary
Review Date
Reviewed Item
पीलिया कैसा भी हो जड़ से खत्म करेंगे यह 36 देसी घरेलु उपचार | Piliya ka Gharelu Upchar
Author Rating
51star1star1star1star1star

Leave a Reply