कुदरत ने इंसान को बीमारियां दी है, तो उनसे लड़ने के विकल्प भी दिए हैं. जानवर तो बीमारियों से लड़ने के विकल्प नैसर्गिक रूप से पहचान लेते हैं, लेकिन इंसान पीछे रह जाता है. जो लोग इन विकल्पों या साधनों को पहचान लेते हैं, वे बीमारी का इलाज खोज लेते हैं. आजकल बड़ी तेज़ी से बढ़ रहा जोड़ों का दर्द भी कुदरत का दिया
हुआ रोग है. आजकल कम उम्र में ही जोड़ों का दर्द लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है.
हालांकि यह दर्द ज़्यादातर मामलों में पचास साल की उम्र के बाद शुरू होता है. यह दर्द इतना तेज़ होता है कि चलने-फिरने और घुटने मोड़ने में भी परेशानी होती है. शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने पर जॉइंट्स सूज जाते हैं, जो तेज़ दर्द पैदा करते हैं.

जोड़ों का दर्द :

तेज़ और बिज़ी लाइफ में भोजन से पौष्टिकता घटती जा रही है. बाहरी भोजन व पैक्ड फूड से कई रोगों का आक्रमण हो रहा है, जिनमें से एक है जोड़ों का दर्द देनेवाली बीमारी.
आजकल यह बीमारी आम हो गई है, जो शरीर के हर जॉइंट्स को प्रभावित करती है. पहले तो ये बीमारी ५५-६० साल के लोगों को होती थी, लेकिन अब ४० से ४५ साल के लोग भी इसका निशाना बन रहे हैं. वस्तुतः शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ना ही इस बीमारी | के होने का मुख्य कारण है.

ऑटो-इम्यून डिसीज़ जोड़ों के दर्द की कोई खास वजह बता पाना मुश्किल है, इसीलिए इसे ऑटो-इम्यून डिसीज़ कहते हैं. आम जोड़ों का दर्द एक रोग न होकर कई तरह की बीमारियों का मिश्रण होता है. दरअसल, इसकी शुरुआत जोड़ों में सूजन से होती है, फिर बढ़ते-बढ़ते हाथ और पैर के जॉइंट्स में बहुत तेज़ दर्द होने लगता है. लोग इसे बुजुर्गों की लाइलाज बीमारी मान बैठे हैं, जबकि यह धारणा सही नहीं है. शरीर के प्रोटीन्स की क्षय दरअसल, मानव का इम्यून सिस्टम प्रोटीन,बायोकेमिकल्स और सेल्स से मिलकर बना होता है. यह शरीर को बाहरी चोटों, बैक्टीरिया और वायरस से बचाता है. अमूमन इसका काम शरीर को बीमारियों से प्रोटेक्शन देना होता है, लेकिन कभी-कभी यह भी ग़लती कर देता है, जिससे यह शरीर में मौजूद प्रोटीन्स को ही नष्ट करने लगता है, जिससे आर्थराइटिस जैसे ऑटो-इम्यून रोग हो जाते हैं,

( और पढ़ेजोड़ों का दर्द का आयुर्वेदिक इलाज )

शुरू में घुटने में हल्की दर्द :

जॉइंट पेन के समय हड्डियों में दर्द और खिंचाव महसूस होता है. हड्डियों के दर्द की वजह स्पष्ट हो सकती है, जैसे- फ्रेक्चर या बोन कैंसर, वैसे जॉइंट पेन की शुरुआत | घुटनों में हल्के दर्द के साथ होती है. धीरे-धीरे दर्द बढ़ता हुआ हाथों की उंगलियों के जोड़ों तक पहुंच जाता है. हिलने-डुलने या शरीर को मूवमेंट देने से यह दर्द बढ़ जाता है. पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में जोड़ों के दर्द का फ़ौरन उपचार करना चाहिए. शुरू में इसका पता आसानी से लगाया जा सकता है, जोड़ों के दर्द की समस्या पुरुषों से ज़्यादा महिलाओं में पाई जाती है, क्योंकि मेनोपॉज़ के बाद उनकी बोन डेंसिटी बढ़ जाती है. डॉक्टर कहते हैं कि इस बीमारी को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन शुरुआत में ही सावधानी बरत कर इसे बढ़ने से रोका ज़ा सकता है. वैसे तकलीफ़ बढ़ने पर इसका खतरा ज़्यादा बढ़ जाता है.

कई तरह के जोड़ों के दर्द :

जोड़ों के दर्द कई तरह के होते हैं. इन्हें कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. शरीर में दर्द कई बार किसी बड़ी बीमारी का भी संकेत हो सकता है. ऐसे में इन्हें अनदेखा करने की बजाय तुरंत इलाज करवाकर बड़ी बीमारी को टाला जा सकता है.

कार्टिलेज नाम का टिश्यू कम हो जाता है, तब हड्डियों का सीधे संपर्क होने लगता है और हड्डियां आपस में घिसने लगती हैं, जिससे दर्द महसूस होता है.

कमर में दर्द :

जो लोग बहुत ज़्यादा देर तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहते हैं, उन्हें कमर दर्द की शिकायत होने लगती है. दिनभर कंप्यूटर के सामने बैठने से समस्या और भी बढ़ जाती है. कमर दर्द अगर नीचे की ओर बढ़ने लगे और तेज़ हो जाए, तब फ़ौरन डॉक्टर से मिलें.

जबड़े में दर्द :

जो लोग जबड़े को हमेशा काम पर लगाए रखते हैं, उन्हें धीरे-धीरे जबड़े के दर्द की शिकायत होने लगती है. इससे मुंह खोलते और बंद करते समय दर्द होता है. यह दर्द जॉइंट की चोट की वजह से भी हो सकता है. इसका पता सहज लगाया जा सकता है.

अंगूठे में दर्द :

दरअसल, जोड़ों के दर्द का लक्षण अंगूठों में दर्द से दिखता है. जॉइंट्स में ज़रूरत से ज़्यादा युरिक एसिड जमा होने से दर्द बढ़ने लगता है. यह दर्द बढ़ता हुआ असहनीय हो सकता है. लिहाज़ा, इसकी पहचान करके सही इलाज करवाना एकमात्र विकल्प है.

माथा दर्द :

कभी-कभी माथा यानी सिरदर्द भी बहुत तेज़ होने लगता है. सिरदर्द को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी यह बहुत सीरियस हो सकता है और सबसे बड़ी बात कि ये किसी बड़ी बीमारी का लक्षण भी हो सकता है.आइये जाने जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाने के उपाय के बारे में .

जोड़ों के दर्द का घरेलू उपचार :

1-ओवरवेट होने से बचें

जोड़ों का दर्द जोड़ की हड्डी के घिसने से होता है. वैसे यह ५० साल की अवस्था के बाद होता है. लेकिन कई बार यह बीमारी बहुत ज्यादा वज़नवालों को भी हो जाती है. यह जेनेटिक रोग भी हो सकता है. इसका असर पीढ़ी-दर-पीढ़ी देखा जाता है. शारीरिक कसरत डॉक्टर कहते हैं कि जोड़ों के दर्द के मरीज़ को न ही ज़्यादा देर तक बैठना चाहिए और न ही ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत करनी चाहिए, क्योंकि गतिहीनता के कारण जोड़ अकड़ जाते हैं, जबकि बहुत ज़्यादा मेहनत करने से जोड़ों को नुक़सान हो सकता है.

2-कसरत में सावधानी

जोड़ों के दर्द से पीड़ित मरीज़ों को नियमित एक्सरसाइज़ करनी चाहिए. अगर कसरत करने में दर्द या दूसरी परेशानी हो तो कसरत नहीं करनी चाहिए. इसके बदले घर में या बाहर टहलना चाहिए. हल्की कसरत और मॉर्निग वॉक के साथ ही अगर स्विमिंग में भी आधे घंटे गुज़ार लें तो बहुत फ़ायदा होता है.

3-स्टीम बाथ व मसाज

स्टीम बाथ और शरीर की मालिश से जोड़ों के दर्द में बहुत हद तक आराम पहुंचता है. सरसों के तेल में लहसुन का रस और कपूर मिलाकर मालिश करने से ज़्यादा आराम मिलता है.
लाल तेल से मालिश भी राहत देती है. जैतून के तेल की मालिश से जोड़ों का दर्द कम हो जाता है.

5-अदरक

जोड़ों का दर्द कम करने में अदरक अचूक दवा है. कई डॉक्टर अदरक के सेवन की सलाह देते हैं, क्योंकि यह फ़ायदेमंद होता है. रोज़ाना अदरक खाने से या इसका रस पीने से जोड़ों का दर्द बहुत कम हो जाता है. इसके अलावा सूप, सॉस और सलाद के साथ अदरक का सेवन जोड़ों के दर्द से राहत देता है

6-एलोवेरा

एलोवेरा त्वचा के लिए बहुत अच्छी दवा है, जोड़ों के दर्द में तो यह रामबाण इलाज है. एलोवेरा को सरसों के तेल में गर्म करके लगाने से जोड़ों का दर्द कम हो जाता है. एलोवेरा का सेवन केवल जोड़ों के दर्द में ही आराम नहीं देता, बल्कि दूसरी बहुत-सी बीमारियों में भी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है. एलोवेरा इम्यून सिस्टम को मज़बूत बनाता है.

7-तांबे का पानी

तांबा यानी कॉपर जोड़ों के दर्द का दुश्मन माना जाता है. इससे जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है. तांबे के बर्तन में रखा पानी पीकर कई लोग जोड़ों के दर्द से मुक्ति पा चुके हैं. इसका वैज्ञानिक पहलू भी है. तांबे में मौजूद ऑक्सीकरणरोधी गुण के बारे में माना जाता है कि यह जोड़ों की पीड़ा को कम करने में मदद करता है.

क्या खाएं ?

विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और पौष्टिक तत्वों से भरपूर ताज़े फल और सब्ज़ियां जोड़ों के दर्द के लिए दवा मानी जाती हैं. लहसुन, मोसम्बी, संतरा, गाजर और चुकंदर के रस का सेवन करके बीमारी से निजात पाया जा सकता है. नियमित फूलगोभी का रस पीने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है.

दैनिक जीवन में चलने-फिरने, चढ़ाई, सैरसपाटा, व्यायाम से घुटनों के जोड़ों में मौजूद कार्टिलेज ख़र्च होता रहता है. इसकी क्षतिपूर्ति रात में घुटने सीधे रखकर सोने से हो जाती है. दरअसल, रक्त संचार सुचारू रूप से होने पर कार्टिलेज में द्रव या कोलोजन आपस में जुड़ने लगती है. लेकिन जब इसकी क्षतिपूर्ति किसी कारण से नहीं हो पाती, तब खड़े होने, वज़न उठाने और चलते समय संतुलन बनाने में मुश्किल होने लगती है. कार्टिलेज के अभाव में हड्डियां आपस में टकराकर टेढ़ी होने लगती हैं, जिससे बहुत दर्द होता है.