लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) के 11 लाजवाब फायदे गुण और उपयोग | Laxmi Vlas Ras(Nardiya) Health Benefits in Hindi

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लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) के 11 लाजवाब फायदे गुण और उपयोग | Laxmi Vlas Ras(Nardiya) Health Benefits in Hindi

लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) क्या है : laxmi vilas ras (nardiya) kya hai

लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) टैबलेट या पाउडर रूप में आयुर्वेदिक दवा है। इसका उपयोग उच्च रक्तचाप, पुरानी त्वचा रोग, मधुमेह आदि के उपचार में किया जाता है। यह शरीर में वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करता है। इसके सेवन से शरीर में बल,ओज और वीर्य की वृद्धि होती है |इसका सेवन चमड़ी,गुदा,सिर व बुखार आदि रोगों में विशेष लाभप्रद है।

लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) की सामाग्री : ingredients of laxmi vilas ras (nardiya)

✦अभ्रक भस्म(Abhraka Bhasma)
✦शुद्ध गन्धक (Shuddha Gandhaka)
✦शुद्ध पारा(Shuddha Parada)
✦कपूर(Karpoora )
✦जावित्री
✦जायफल
✦ विधारे के बीज(Vidari)
✦शुद्ध धतूरे के बीज(Dhattura)
✦भाँग के बीज(Bhanga)
✦विदारीकन्द(Vidari)
✦शतावर(Shatavari)
✦नागबला-छाल (गंगरेन) Nagavalli
✦अतिबला
✦गोखरू(Gokshura)
✦हिज्जल (समुद्रशोष) बीज

सेवन की मात्रा और अनुपान : Dosage

✥ 1 गोली या 250 mg(मिलीग्राम) दिन में 2 बार सुबह-शाम भोजन से पहले लें। दवा का अनुपान रोग के ऊपर निर्भर करता है।

✥ 1-1 गोली सुबह-शाम अदरक रस और मिश्री के साथ देने से जीर्ण ज्वर और भयंकर वातज रोग नष्ट होते हैं। विषमज्वर में पीपल चूर्ण और शहद के साथ दें।

लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) के फायदे , गुण और उपयोग : laxmi vilas ras (nardiya) ke fayde , gun aur upyog

1-सन्निपात : यह रसायन सुखसाध्य, कृच्छ्रसाध्य, याप्य और प्रत्याख्येय चारों प्रकार सन्निपातजनित उपद्रवों को शीघ्र नष्ट करता है।

2-इस रसायन के प्रयोग में यह ‘नियम नही है कि वात प्रधान या पित्त प्रधान अथवा कफ दोषोत्थ रोगों को ही नष्ट करें बल्कि किसी भी दोष से उत्पन्न सभी प्रकार के रोगों को यह रसायन शीघ्र नष्ट करता है और समदर्शीवाली युक्ति इस रसायन के सेवन से समूल चरितार्थ होती है।’

3-अठारह प्रकार के कुष्ठ, बीस प्रकार के प्रमेह-नाड़ी, व्रण (नासूर), दुष्ट व्रण, गुदा रोग (अर्श), भगन्दर, रक्त-मांसाश्रित कफ-वात प्रधान श्लीपद (फीलपाँव) मेदगत, धातुगत, जीर्ण अथवा वंशानुगत गलशोथ, अन्त्रवृद्धि , दारुण अतिसार, समस्त प्रकार का कठिन आम-वात रोग, जिव्हा-स्तम्भ, गलग्रह, उदररोग, कर्ण रोग, नासा रोग, अक्षी रोग, मुख रोग, पाँचों प्रकार का कास रोग, राजयक्ष्मा, स्थूलता, (मेदवृद्धि रोग) पसीने में दुर्गंध आना, सर्वशूल, कुक्षिशूल, शिरःशूल, प्रसूता स्त्रियों का मक्कल शूल तथा अन्यान्य प्रसूत रोगों को नष्ट करता है और पुरुषों के ध्वजभंग आदि रोगों को नष्ट करता है।

4-शक्ति : इसके सेवन से वृद्ध पुरुष भी तरुणों जैसी शक्ति और स्फुर्ति सम्पन्न हो जाता है।

5-बालों का असमय पकना : इस रसायन का सेवन करनेवालों को इन्द्रिय शिथिलता और श्वेत केश (केशों का पकना) आदि विकार नहीं होते।

6-नेत्रज्योति : काम-शक्ति और नेत्रज्योति (दृष्टि) की अपूर्व वृद्धि होती है।

7-वीर्य वर्धक : यह रसायन आयुर्वेद -शास्त्र की अत्यन्त उत्कृष्ट और वीर्यवान् औषधि है।

8-हृदय : यह उत्तम हृदयोंत्तेजक (हृदय के लिए बलशाली) है।

9- इस औषधि के प्रयोग से तीव्र से तीव्र हृदय विकार में शान्ति पूर्वक उत्तेजना और रक्तवाहिनी की विस्फारिता एवं जीर्ण हृदय विकार में हृद्यगुणकारी है। इसके हृद्यगुण के कारण हृदय को शान्ति एवं शक्ति मिलती है।

10-इस औषधि का परिणाम पुरीतती, हृदयावरण, वाम और सव्य पाश्र्व पटल (बाईं तथा दाईं ओर के आच्छादित करने वाले कपाट) और हृदय को अनिन्दनिलय इन विभागों पर उत्तम प्रकार से होता है।

11-जिस प्रकार ब्राण्डी आदि औषधियों के सेवन से ह्दयोजना पश्चात् बलात् अवसादकता की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार इस औषधि के सेवन से अवसादकता की प्राप्ति नहीं होती। इस औषधि के प्रयोग से नाड़ी की गति सुधारने के पश्चात् दीर्घ काल तक वैसा ही बनी रहती है।

लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) के नुकसान : laxmi vilas ras (nardiya) ke nuksan /side effects

1-इस आयुर्वेदिक औषधि को स्वय से लेना खतरनाक साबित हो सकता है।
2-लक्ष्मीविलास रस (नारदीय) को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें।
3-बच्चों की पहुंच और दृष्टि से दूर रखें।

2018-09-01T10:36:47+00:00 By |भस्म(Bhasma)|0 Comments