नारंगी (संतरा) खाने के फायदे और नुकसान | Narangi(Orange) Khane ke Fayde aur Nuksan

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नारंगी (संतरा) खाने के फायदे और नुकसान | Narangi(Orange) Khane ke Fayde aur Nuksan

परिचय :

नारंगी इसका लेटिन नाम-‘साइट्रस रेटीक्यूलेटा’ है। नारंगी को ‘सन्तरा’ भी कहते हैं। नारंगी नीबू की ही एक किस्म है। नारंगी देखने में सुन्दर, खाने में खट्टी-मीठी, मधुर और स्पर्श में शीतल लगती है। नारंगी या सन्तरों की 2 किस्में होती हैं-1. खट्टी और 2. मीठी ।
लड्डू, कलवा, रेशमी, नागपुरी, खानदेशी, सिलहटी और सहारनपुरी । इस प्रकार नारंगी या संतरे की कई किस्में होती हैं। नागपुर की नारंगी उत्तम मानी जाती है। नागपुर की नारंगी बड़ी और मीठी होती है।

नारंगी (संतरा) के औषधीय गुण : narangi(orange) aushadhi gun

1- नारंगी का रस मीठा, खट्टा-मीठा और गुणकारी होती है। इस फल का रस तृषा, दाह और अरुचि मिटाता है ।
2- यह पेय के रूप में उत्तम है। इससे रक्तशुद्धि होती है, भूख खुलती है और पाचनशक्ति तीव्र होती है।
3- इसके रस का शर्बत बनता है, जो गर्मियों में शीतलता के लिए पीया जाता है। ।
4- नारंगी सुपाच्य, स्फूर्तिदायक, कृत्रिम गर्मी को दूरकर शीतलता प्रदान करने वाली रक्त को शुद्ध करने वाली तथा रक्तवर्धक है ।
5- भोजनोपरान्त इसका सेवन करने से किसी प्रकार का विकार नहीं होता।
6- नारंगी का रस ज्वरहर, तृषाशामक, ग्राही, रक्तपित्त शामक और रक्त पौष्टिक होता है।
7- बुखार में प्रतिदिन 10-12 नारंगी खा लेने पर भी नुकसान नहीं होता।
8- इसका रस उच्च रक्तचाप को कम करता है और लाभप्रद है। उच्च रक्तचाप का रोगी यदि 2-3 उपवास कर ले और उन दिनों में केवल नारंगी के रस का ही सेवन करे तो लाभ होता है।
9- नारंगी में 87.5% पानी होता है। अतः इसका रस पचने में खूब हल्का है। लगभग एक घण्टे से भी कम समय में नारंगी के रस को शरीर शोषित कर लेता है और अत्यन्त सरलता से रस का पाचन हो जाता है।
10- बीमार व्यक्तियों के लिए मीठी नारंगी ही हितकारी है। खट्टी नारंगी हानि करती है।
11- नारंगी खट्टी अतिशय गर्म और वात-पित्त नाश करने वाली है। यह सारक, स्वादु, हृद्य, दुर्जर, पचने में भारी और वायुनाशक है ।
12- मीठी नारंगी अग्नि को प्रदीप्त करती है, उल्टी को रोकती है, पित्त और वायु को नष्ट करती है। यह सारक, उष्ण और मधुर है।
13- खट्टी नारंगी-हृद्य, बलप्रद, विशद, गुरु, रुचिकर, सारक, उष्ण, सुगन्धयुक्त, वायुनाशक तथा आम, कृमि, श्रम और शूल को नष्ट करने वाली है। अजीर्ण और उदर व्याधि में इसका उचित मात्रा में सेवन लाभकारी होता है । इसके रस में दीपन-पाचन गुण है। यह मन्दाग्नि, खाँसी, वायु, पित्त, कफ, क्षय, शोष, तृषा, दाह उल्टी और अरुचि आदि में पथ्य है ।
14- नारंगी के रस में उत्तेजक और पोषण गुण हैं । इसलिए रात को सोते समय और सुबह को उठकर 1-1 नारंगी का रस पीने से थके हुए और बीमार लोगों में उत्साह उत्पन्न होता है।

वैज्ञानिक मतानुसार :
नारंगी में विटामन ‘ए’ और ‘बी’ सामान्य मात्रा में, विटामिन ‘सी’, अच्छी मात्रा में और विटामिन ‘डी’ अल्प मात्रा में होता है। इसमें लौह और कैल्शियम अधिक मात्रा में है। अतः इसके सेवन से शरीर के वजन तथा रक्त में वृद्धि होती है। रक्त का फीकापन दूर होता है और रक्त लाल रंग का बनता है। दाँतों व हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। नारंगी में फॉस्फोरस आदि खनिज पदार्थ भी हैं।

नारंगी (संतरा) खाने के फायदे / रोगों का उपचार : narangi(orange) khane ke fayde

नारंगी की अपेक्षा मुसम्मी अधिक मीठी होती है । अन्तर केवल इतना ही है कि आरोग्य की दृष्टि से नारंगी-मुसम्मी से बढ़कर है। नारंगी में 40% विटामिन हैं। इसमें विटामिन बी-1′ ज्यादा है ।
नारंगी के सेवन से सूखी, खुरदरी और काली पड़ी हुई त्वचा में चेतना आती है, उसकी कोमलता बढ़ती है और वह मुलायम बनती है। नारंगी में खनिज क्षार सर्वाधिक मात्रा में है। इससे शरीर की अम्लता कम होती है । नारंगी प्रातःकाल भूखे पेट या खाना खाने के 5 घण्टे के बाद सेवन करने से अधिक लाभ होते हैं। एक व्यक्ति को एक बार एक या दो नारंगी लेना पर्याप्त है।

1-चेहरे के दाग-नारंगी के छिलके सुखाकर पीस लें। इसके 4 चम्मच में गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बनाकर नित्य चेहरे पर मलें । ( और पढ़े संतरा खाने के 59 लाजवाब फायदे )

2-इन्फ्लू एँजा-जब इन्फ्लुएँजा महामारी के रूप में फैल रहा हो तो नारंगी खाने से बचा जा सकता है । फ्लू होने पर भी यह लाभदायक है । इन्फ्लूएँजा होने पर केवल नारंगी खाते रहें, गर्म पानी पीएँ यह ठीक हो जाएगा।

3-गुर्दे के रोग-सुबह के समय नाश्ते के पहले 1-2 नारंगी खाकर गर्म पानी या नारंगी का रस पीने से गुर्दे के रोग ठीक हो जाते हैं। इस प्रयोग से गुर्दे के रोगों से बचाव भी होता है। गुर्दो को स्वस्थ रखने के लिए प्रातः भूखे पेट फलों का रस उपयोगी है। ( और पढ़ेसंतरे खाएं तो छिलके न फेंके क्योंकि इन रोगों की ये है जबरदस्त दवा)

4-सर्दी, खाँसी-सर्दी, खाँसी होने पर गर्मी में ठण्डे पानी के साथ और सर्दी में गर्म पानी से नारंगी का रस पीने से लाभ होता है।

5-खाँसी, जुकाम-में नारंगी के रस का एक गिलास नित्य पीने से लाभ होता है। ( और पढ़ेसर्दी-जुकाम में तुरंत राहत देते है यह 20 आयुर्वेदिक घरेलु उपचार )

6-बच्चों का सर्दी से बचाव-बच्चों को नियमित रूप से मीठी नारंगी का रस पिलाते रहने से सर्दी की ऋतु में कोई बीमारी नहीं होती। दुग्धपान करने वाले शिशुओं के लिए यह लाभदायक है।

7-बच्चों का पौष्टिक भोजन-बच्चों को जितना दूध पिलाएँ उसमें उस दूध का एक हिस्सा मीठी नारंगी का रस मिलाकर पिलाएँ। यह बच्चों का पौष्टिक पेय है। इससे शरीर का वजन भी बढ़ता है। ( और पढ़ेशक्तिवर्धक कुछ खास प्रयोग)

8-वक्ष के रोग-श्वास, टी.बी., हृदय और छाती के समस्त रोगों में नारंगी लाभदायक है।

9-बच्चों के दस्त-नारंगी का रस दूध में मिलाकर पिलाना लाभकारी है। ( और पढ़ेबच्चों के पतले दस्त में तुरंत राहत देते है यह 9 घरेलू इलाज )

10-वमन होना व जी-मिचलाना-इन कष्टों में नारंगी के सेवन से लाभ होता है। मोटर-बस आदि से यात्रा करते समय नारंगी का सेवन करते रहना चाहिए।

11-मक्खी-मच्छरों से सुरक्षा-नारंगी के सूखे छिलकों को जलते हुए कोयलों पर डाल देने से इसके धुआँ चमकदार और सुगन्धित होने से मक्खी-मच्छर आस-पास में नहीं रहते। ( और पढ़ेमक्खी भगाने के 8 घरेलु उपाय)

12- खटमलों से सुरक्षा-जहाँ खटमल हों, वहाँ नारंगी के छिलके रखें। खटमल वहाँ नहीं रहेंगे।

13-गैस-नारंगी के सेवन से यकृत रोग ठीक होते हैं । गैस या किसी भी कारण से जिनका पेट फूलता हो, भारी रहता हो, अपच हो उनके लिए नारंगी लाभकारी है। सुबह के समय नारंगी के रस का एक गिलास पी लिया जाए तो आँतें साफ हो जाती हैं और कब्ज नहीं रहता। ( और पढ़ेपेट की गैस को ठीक करने के आयुर्वेदिक उपाय)

14-शक्तिवर्धक-दुर्बल व्यक्ति एक गिलास नारंगी का रस सुबह और दोपहर को नित्य कुछ सप्ताह निरन्तर पीते रहें तो उनके शरीर में ताकत आ जाती है जो बच्चे * बोतल से दूध पीते हैं, कमजोर रहते हैं, उनके लिए नारंगी का रस लाभप्रद है।

15-मुँहासे-नारंगी के सूखे छिलके पीसकर चेहरे पर मलने से मुँहासे दूर होते हैं। पीलिया-इस रोग में नारंगी का सेवन लाभकारी है। ( और पढ़ेकील मुहासों के 19 रामबाण घरेलु उपचार)

16-गर्भावस्था का भोजन-गर्भवती स्त्री को नित्य दो नारंगी दोपहर में पूरे गर्भकाल में खिलाते रहने से सुन्दर शिशु का जन्म होता है।

17-शिशु शक्तिवर्धक-बच्चों को नारंगी का रस पिलाते रहने से वे थोड़े समय में ही मोटे व ताजे हो जाते हैं और उनका पोषण द्रुतगति से होता है। हड्डियों की कमजोरी और टेढ़ापन दूर होता है तथा हड्डियाँ मजबूत हो जाती हैं। ( और पढ़ेदुबलापन दूर करने के 14 सबसे असरकारक उपाय )

18-मदिरापान की लत छुड़ाना-नाश्ते से पूर्व नारंगी खाने से मदिरापान की इच्छा घटती है और धीरे-धीरे शराब पीने की आदत छूट जाती है।

19-पायोरिया-नित्य नारंगी खाने से पायोरिया में लाभ होता है। नारंगी के छिलकों को छाया में सुखाकर मंजन बनाकर प्रयोग करें। ( और पढ़े पायरिया के 45 सबसे असरकारक आयुर्वेदिक घरेलु उपचार )

20-मधुमेह-इसके रोगी नारंगी कम मात्रा में ले सकते हैं। रक्तशोधक-नारंगी रक्त की सफाई करती है। प्यास-अधिक प्यास लगने पर नारंगी खाएँ । लाभकारी है।

21-आन्त्र ज्वर-नारंगी गर्मी, अशान्ति और ज्वर को दूर करती है। रोगी को दूध में नारंगी का रस मिलाकर पिलाएँ अथवा दूध पिलाकर नारंगी खिलाएँ । दिन में कई बार नारंगी खिलानी चाहिए। इससे ऊष्मा कम होती है, मल-मूत्र खुलकर आता है। ( और पढ़ेजीर्ण ज्वर का सरल घरेलु उपाय )

22-कब्ज-सुबह के समय नारंगी का रस कई दिन तक पीते रहने से मल प्राकृतिक रूप से आने लगता है तथा पाचनशक्ति भी बढ़ती है।

23-भूख न लगना-नारंगी की कलियों पर पिसी हुई सोंठ तथा काला नमक डालकर खाएँ। इस प्रयोग से एक सप्ताह में ही भूख लगने लगेगी।

24-मलेरिया-दो नारंगी के छिलके दो कप पानी में उबालें । आधा पानी शेष रहने पर छानकर गर्म-गर्म पीएँ । लाभप्रद है।

25-कुछ अन्य सरल प्रयोग
• नारंगी का रस बेरी-बेरी रोग, स्कर्वी जोड़ों का दर्द और शोथ में लाभप्रद है। यह हृदय, मस्तिष्क और यकृत को शक्ति तथा स्फूर्ति देता है।
• नारंगी के पत्तों का काढ़ा पीने से ज्वर हल्का होता है।
• नारंगी का सेवन करने से कृमि नष्ट होते हैं।
• नारंगी के सेवन से सिर चकराना व चमड़ी के रोग नष्ट हो

नारंगी (संतरा) खाने के नुकसान : narangi(orange) khane ke fayde

✦ खट्टी नारंगी खाँसी, जुकाम व पित्त करती है। इसके फल भी अधिक मात्रा में खाना हितकारी नहीं ।
✦ बीमार व्यक्तियों के लिए मीठी नारंगी ही हितकारी है। खट्टी नारंगी हानि करती है।
✦ खट्टी नारंगी अतिशय गर्म और  पचने में भारी होती है |

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2018-08-03T14:17:42+00:00 By |Herbs|0 Comments