नारियल के फायदे ,औषधीय गुण, उपाय और उपयोग | Nariyal ke Fayde Hindi Me

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नारियल के फायदे ,औषधीय गुण, उपाय और उपयोग | Nariyal ke Fayde Hindi Me

परिचय एवं स्वरूप :

नारियल के फायदे हिंदी में – नारियल ताड़ सदृश बहुत ऊँचा जाने वाला वृक्ष है। यह शुभ का प्रतीक माना जाता है। इसके पत्ते ताड़ सदृश और उसी तरह ऊँचाई पर लगते हैं। फल मजबूत डंठल के साथ वृक्ष के ऊपर सिर पर ही गुच्छों में लगते हैं। कच्चा फल एकदम हरा, बाहरी भाग चिकना, अंदर की गिरी मजबूत कवच के अंदर सुरक्षित रहती है। कच्चे फल में नारियल पानी रहता है, जो उत्तम पेय के रूप में पिया जाता है। यह पानी सूखने के साथ-साथ गिरी परिपक्वता ग्रहण करती जाती है। पकने पर बाहर के रेशेदार कवच को हटाकर अंदर के कठोर कवच को तोड़कर गिरी निकाल ली जाती है। इसी को नारियल गिरी या गोला कहते हैं। कच्चे तथा पके, दोनों प्रकार के नारियल का मांगलिक कार्यों में बड़ा महत्त्व है।

नारियल समुद्र किनारे, केरल, पं. बंगाल, उड़ीसा, दमन-द्वीप में खूब पैदा होता है। अंडमान में भी यह खूब उगाया जाता है। गोवा इसकी उपज का प्रमुख केंद्र है। भारत के दक्षिणी राज्यों में बड़े पैमाने पर उगाया जा रहा है। नारियल के लगभग सभी अंग-उपांग काम आते हैं।

नारियल का विविध भाषाओं में नाम :

अंग्रेजी—Coconut, कन्नड़-टेंगू;  गुजराती–नारियल;  तमिलतेन्नमारम;  तेलुगू–नारिकेलमु;  पंजाबी–नरेल, गोला;  बँगला–नारिकेल;  मराठी-नारल;  मलयालम तेंगा; संस्कृत–नारिकेल;  हिंदी-खोपरा, गोला, नारियल।

नारियल के औषधीय गुण : nariyal ke aushadhi gun hindi me

आयुर्वेदाचार्यों की सम्मति में नारियल शीतल, देर से पचनेवाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलकारक, रक्त-विकारनाशक, दाहशामक एवं वात-पित्तनाशक है। कच्चा नारियल पित्त ज्वर तथा पित्त विकारों को नष्ट करनेवाला है। नारियल पानी हल्का, तृषाशामक, पित्तनाशक, मधुर एवं मूत्र संस्थान के रोगों में उपयोगी है। यह शीतल, अग्निदीपक एवं वीर्यवर्धक कहा गया है। इन सबके अलावा नारियल भारी, चिकना, ठंडा, मसाने को साफ करनेवाला, बलकारक, पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक, कफकारक एवं काबिज है। सूखा नारियल दाहकारक, मल को रोकनेवाला, बल-वीर्य एवं रुचि को उत्पन्न करनेवाला है।

सूखे नारियल में पोषक तत्त्व 6, वसा 57.4, कार्बोहाइड्रेट्स 31.8 खनिज-पदार्थ कुछ मात्रा में तथा जल या नमी 12 प्रतिशत होती है।

नारियल के उपयोग हिंदी में : nariyal ke upay hindi me

नारियल के लगभग सभी अंग-फल, फूल, गिरी, तेल, पत्ता, छाल एवं जड़ किसी-न-किसी काम अवश्य आते हैं। कच्चे फल का पानी ठंडे पेय के रूप में पिया जाता है। कच्ची गिरी शौक से खाई जाती है। पकी गिरी विभिन्न पक्वान्नों, मिष्टान्नों एवं व्यंजनों में उपयोगी है। हलुवा, खीर, गुझिया, लड्डू आदि पारंपरिक व्यंजनों एवं आइसक्रीम, चॉकलेट, बिस्कुट आदि में इसकी भारी खपत है। धार्मिक मंगल कार्यों में इसका उपयोग सर्वाधिक है। किसी भी कार्य के शुभारंभ में नारियल फोड़कर देवता पर चढ़ाया जाता है। विवाह-शादियों में भी इसका विशेष महत्त्व है। फल के खोल से रेशे निकालकर चटाई, गद्दा, खस, सोफा, कुरसियाँ एवं बस-कार आदि की गद्दियाँ बनाने में उपयोग होता है। नारियल की झाड़ प्रत्येक घर की दैनिक जरूरत है। नारियल गिरी से तेल निकाला जाता है। यह उत्तम खाद्य तेल है। सरसों के तेल की जगह बालों में लगाया जाता है। दक्षिण भारत में रसोई में यह विभिन्न रूपों में उपयोग किया जाता है।

नारियल के फायदे व औषधीय उपयोग : nariyal ke fayde hindi me

नारियल तथा नारियल के अंग-उपांग देशी तथा घरेलू चिकित्सा में बहुत उपयोगी हैं। प्राचीनकाल से ही इनका दवा के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

1-हैजा (डायरिया) :
हैजा की शिकायत में उलटियाँ बंद न हो पा रही हों तो नारियल के पानी में कालीमिर्च पाउडर मिलाकर पिलाएँ। इसके साथ-साथ यह पानी शरीर में कम हो रही पानी की मात्रा की पूर्ति भी करेगा।
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2-हिचकियाँ :
किसी प्रकार हिचकियाँ बंद न हो रही हों तो नारियल की जटा जलाकर इसकी राख को पानी में घोलकर छान लें। इसमें से एक कप की मात्रा में पिला दें। इससे हिचकियाँ तुरंत बंद हो जाएँगी।

3-आंत्रकृमि :
हरा यानी कच्चा नारियल खूब पीसकर एक बड़ा चम्मच सुबह-शाम नियमित रूप से आराम आने तक सेवन करें। इससे आँतों के कीड़े तथा मल में निकलनेवाले कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
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4-आधासीसी दर्द :
अधकपारी के दर्द में नारियल पानी की दो-दो बूंद नाक में टपकाने से आराम मिलता है। अतः कुछ दिनों तक इसका प्रयोग करना चाहिए।

5-खाज-खुजली :
नारियल के तेल में नीबू का रस तथा थोड़ा सा कपूर मिलाकर इस तेल से मालिश करें या खुजली वाले स्थान पर लगाएँ। उस दौरान नमक खाना थोड़ा कम कर दें। इससे खारिश के कारण उठनेवाली फुसियाँ भी शांत हो जाती हैं।
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6-दस्त-अतिसार :
गरमी या लू के कारण लगनेवाले दस्तों में एक कप नारियल-पानी में भुना जीरा पाउडर डालकर दो-दो घंटे बाद पिलाएँ। इससे गरमी शांत होगी तथा शरीर में होनेवाली पानी की कमी की पूर्ति भी होगी।

7-प्रमेह रोग :
नारियल एक परम पौष्टिक मेवा है। नारियल के अंदर शहद भरकर रख दें। शहद उपलब्ध न हो तो चीनी की चाशनी में लौंग, इलायची, कालीमिर्च, सोंठ आदि का पाउडर मिलाकर भरें। पंद्रह दिन रखने के बाद इस नारियल में से प्रात:काल खाया करें, प्रमेह में आशातीत लाभ होगा।

8-पुष्टिवर्धक :
अच्छी पकी नारियल की गिरी को चीनी या खाँड़ अथवा मिश्री के साथ खूब कूटकर चूरा बना लें। इसमें थोड़ा सा कालीमिर्च तथा इलायची पाउडर मिलाकर रख लें। अब एक कटोरी की मात्रा में नित्य प्रातः दूध के साथ खाया करें। यह उत्तम वीर्यवर्धक है। इससे मैथुन-शक्ति बढ़ती है।

9-बालों के लिए हितकर :
नारियल का तेल बालों के लिए उत्तम है। बाल धोने के बाद अच्छी तरह सुखाकर बालों की जड़ में नारियल तेल धीरे-धीरे मालिश करके लगाएँ। इससे बाल नहीं झड़ते। बाल काले और चमकदार बन जाते हैं। यह मालिश रात्रि को सोने के समय से पहले करनी चाहिए।
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10-स्वस्थ-सुंदर संतान :
गर्भवती महिलाओं को ताजा-कच्चे नारियल के 3-4 टुकड़े नित्य चबाकर खाने चाहिए। इसके साथ-साथ एक चम्मच मक्खन में मिश्री तथा थोड़ा सा कालीमिर्च पाउडर मिलाकर चाटें, इसके बाद थोड़ी सी सौंफ मुँह में डालकर चबाया करें, परंतु इसके आधा घंटे तक कुछ खाया-पिया न करें। होनेवाली संतान स्वस्थ और सुंदर होगी।

11-जले-कटे पर :
आग या गरम पानी से जल जाने पर, यदि छाला पड़ गया हो, तो छाले की त्वचा हटा दें। इस घाव पर रोजाना नारियल का तेल लगाकर उस पर मेहँदी का पाउडर लगाते रहें। कुछ दिनों में घाव भर जाएगा।

12-पित्त विकार :
पित्तजन्य रोग–उल्टी, अतिसार, सीने में जलन, मुँह के छाले, मुखपाक आदि विकारों में कच्चे नारियल की गिरी, खस और सफेद चंदन का बुरादा सबको एक जगह मिला लें। रात को इसमें 10 ग्राम की मात्रा में लेकर भिगो दें। प्रात:काल इसे मसलकर खाली पेट पीएँ। पित्त संबंधी सभी व्याधियाँ नष्ट हो जाएँगी तथा पेट का पाचन भी दुरुस्त होगा।

13-मसाने की जलन :
मूत्र संस्थान के रोगों में नारियल का पानी बड़ा गुणकारी है। इसमें कालीमिर्च तथा इलायची पाउडर मिलाकर नित्य प्रात:काल सेवन करना चाहिए। इससे मूत्रकृच्छ्र, पेशाब की जलन, मसाने की दुर्बलता तथा सूजाक रोग में भी फायदा पहुँचता है।

14-चोट-मोच पर :
नारियल के बुरादे में हल्दी मिलाकर चोट-मोचवाले स्थान पर रखकर पट्टी बाँध दें। पूर्व में इस पर थोड़ा नारियल तेल लगाकर सिंकाई कर लें। इससे सूजन उतर जाती है। तथा दर्द में राहत मिलती है।

15-चेचक-खसरा :
शिशु को स्तनपान करानेवाली माताएँ 50 ग्राम नारियल तेल प्रतिदिन किसी भी प्रकार खाएँ तो बच्चे को कभी चेचक नहीं निकलेगी।

16-बिवाइयाँ फटना :
फटी एडियों और हथेलियों में नारियल का गुनगुना तेल रोजाना मालिश किया करें तो कुछ ही दिनों में फटी बिवाइयाँ ठीक हो जाएँगी।

17-दूध उलटना :
शिशु अगर बार-बार दूध उलट देता हो, तो माँ को चाहिए कि कच्चे नारियल का पानी आधा चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएँ। इससे शिशुओं का दूध उलटना बंद हो जाता है।

18-मुँह की दुर्गंध :
कच्चे या पके नारियल की गिरी तथा तुलसी के 5 पत्ते और एक छोटी इलायची मुँह में रखकर धीरे-धीरे चबाएँ, इससे मुँह से आनेवाली दुर्गंध दूर हो जाएगी।

19-नकसीर की शिकायत में :
यदि नकसीर आने लगे या यह अक्सर आती हो तो नारियल तोड़कर इसका पानी पिलाएँ। कच्ची कोमल गिरी निकालकर रोगी को खिलाएँ। इसे प्रातः खाली पेट खिलाना अच्छा रहता है। ठीक हो जाएँ तो भी 3-4 दिन तक खाते रहे जिससे फिर नकसीर नहीं आएगी।

20-पेशाब कम आना :
यदि पेशाब कम आता हो तो रुक-रुककर आता हो। नारियल का पानी तथा गिरी का सेवन करें। इसे 5-7 दिनों तक रोजाना लें। इससे शरीर की गर्मी दूर होगी तथा पेशाब सामान्य हो जाएगा।

21-खूनी बवासीर :
यदि बवासीर ऐसी हो जिसमें रक्त भी गिरता हो तो इसका इलाज नारियल से संभव है। एक नारियल लें। इसकी जटा उतारें। इन जटाओं को जलाएँ। पीसे, बारीक करें तथा छानकर इसे सँभालकर रखें। इस राख को दिन में दो बार आधा-आधा तोला हथेली पर रखें और इतना ही बूरा भी। इसे खाकर ताजा पानी पी लें। 15 दिनों तक खाते रहें। इससे बवासीर बंद होगी। बवासीर के कारण खून भी नहीं टपकेगा।

22-पेट में कीड़े :
पेट में कीड़े हों तो शरीर भी क्षीण होता जाता है। यह तकलीफ़ ज्यादातर बच्चों को होती है। चाहे किसी को भी यह हो, वह नारियल तोड़कर इसका पानी पी ले। कच्ची गिरी भी खा ले। कुछ दिनों तक, दिन में दो बार ले। इससे पेट के कीड़े मरकर निकल जाएँगे।

23-काली खाँसी होना :
यदि काली खाँसी से रोगी दुखी हों, जो अक्सर बच्चों को ही होती है, तो इसके उपचार के लिए नारियल का शुद्ध तेल एक-एक चम्मच, दिन में दो बार पिलाएँ। ऊपर से थोड़ी मिसरी खिला दें। पानी मत पीने दें। इससे काली खाँसी नहीं रहेगी।

24-सिर-दर्द बने रहना :
सिर-दर्द से छुटकारा पाने के लिए सूखी गिरी का तकरीबन दो तोले का टुकड़ा तथा दो तोले मिसरी भी लें। दोनों को एक साथ रोगी चबा-चबाकर खाता रहे। इसे खाली पेट, प्रातः के समय, सूर्य निकलने से पहले ही खिलाएँ। यह सिर-दर्द दूर कर देता है।

25-कील-मुंहासे आदि :
यदि चेहरे पर कील-मुँहासे हों या इनके निशान रह गए हों, किसी भी प्रकार के धब्बे हों या चेचक के दाग हों। इन सब से छुटकारा पाने के लिए नारियल का पानी, रुई के साथ पूरे चेहरे पर अच्छी तरह दिन में तीन बार लगाएँ। 4-5 दिनों में सभी धब्बे गायब हो जाएँगे।

26- टी. बी. रोग में :
यदि किसी को टी. बी. यानि यक्ष्मा रोग हो जाए तो उसे एक छटाँक ताजा गिरी रोज़ाना, लगातार चबा-चबाकर खानी चाहिए। यह टी. बी. के कीटाणुओं को मारने में सफल होती है। दिन में दो बार यह लेनी चाहिए—प्रातः तथा सायं।

27-आग की जलन :
यदि शरीर का कोई अंग आग से जल जाए तब चूने का पानी तथा नारियल का तेल मिलाकर बार-बार लगाएँ। आराम मिलेगा व फफोले नहीं होंगे।

28-बुखार बने रहना :
बुखार हो और उन दिनों कच्चा नारियल मिल सके तो इसका पानी निकालकर रोगी को पिलाएँ। इसे दिन में तीन बार। बुखार पूरी तरह उतारा जा सकता है।

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2018-12-17T20:32:25+00:00By |Herbs|0 Comments

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