पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

नटराज आसन : मन को शांती देने वाला भगवान भोलेनाथ का प्रिय आसन | Natarajasana Steps and Health Benefits

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नटराज आसन : मन को शांती देने वाला भगवान भोलेनाथ का प्रिय आसन | Natarajasana Steps and Health Benefits

परिचय-

नटराज आसन( Natarajasana )भगवान शंकर का मुख्य आसन है। भगवान शंकर का एक नाम नटराज भी है, इसलिए इस आसन को नटराज आसन कहते हैं। योग की उत्पत्ति शंकर भगवान से हुई है और योग शास्त्रों में 84 लाख आसनों को बताया गया है। यह आसन जीवन में जन्म-मृत्यु, बुढ़ापा और रोगों का नाश करने के लिए बनाया गया था। इस आसन के द्वारा व्यक्ति बुढ़ापे व रोगों पर काबू पा सकता है तथा उसे परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है।

नटराज आसन ( Natarajasana )का अभ्यास 2 विधि से किया जाता है-

नटराज आसन भगवान शंकर का मुख्य आसन है। भगवान शंकर का एक नाम नटराज भी है, इसलिए इस आसन को नटराज आसन कहते हैं। how to do natarajasana

पहली विधि-

★ नटराज आसन के लिए पहले दोनों पैरों को मिलाकर सीधा खड़े हो जाएं।
★ इसके बाद बाएं पैर पर संतुलन बनाते हुए दाएं पैर को पीछे की ओर जितना अधिक से अधिक सम्भव हो ऊपर उठाएं।
★ अब दाएं हाथ को पीछे करके ऊपर उठे दाएं पैर के टखनों को पकड़ लें।
★ सिर को सीधा करके दाएं हाथ को ऊपर की ओर नाक के सीध में रखें।
★ सांस क्रिया सामान्य रूप से करें।
★ आसन की इस स्थिति में शरीर का संतुलन जितनी देर तक बनाकर रखना सम्भव हो बनाकर रखें और सामान्य स्थिति में आ जाएं।
★ इसके बाद सीधे होकर यह क्रिया दूसरे पैर से भी करें। इस क्रिया को दोनों पैरों से बदल-बदलकर करें।

इस आसन के अभ्यास में शरीर की स्थिति बिल्कुल पहले की तरह ही रखें। दाएं पैरों को पीछे की ओर जितना ऊपर उठा सकते हैं, पैर को ऊपर उठाएं।

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दूसरी विधि-

★ इस आसन के अभ्यास में शरीर की स्थिति बिल्कुल पहले की तरह ही रखें।
★ दाएं पैरों को पीछे की ओर जितना ऊपर उठा सकते हैं, पैर को ऊपर उठाएं।
★ इसके बाद दाएं हाथ को कोहनी से मोड़कर दाएं पैर को घुटने से मोड़कर उसके अंगूठे को हाथ से पकड़ लें।
★ बाएं हाथ को छाती की सीध में आगे की ओर करके सभी अंगुलियों को मोड़कर केवल तर्जनी अंगुली को खोले रखें।
★ अब पूरे शरीर का संतुलन बाएं पैर पर बनाकर रखें तथा जितने समय तक इस स्थिति में रह सकें, रहें।
★ फिर वास्तविक स्थिति में आकर इस क्रिया को दूसरे पैर से भी करें। इस क्रिया को 3 से 5 बार करें।

नटराजन आसन के फायदे : natarajasana benefits in hindi

★ यह आसन तंत्रिका-तंत्र में संतुलन पैदा करता है। इससे पैरों की मालिश होती है,
★ शरीर का नियंत्रण बनता है तथा मानसिक एकाग्रता में सहायक होता है।
★ इससे आपका बॉडी बैंलेंस बहुत अच्छा होगा और आपका शरीर अधिक से अधिक लचीला बनेगा।
★ इस आसन से हाथ- पैरों में रक्त संचार बेहतर होगा, नर्वस सिस्टम बेहतर होगा है।
★ इस आसन से हाथ – पैरों में जान आती है और इनकी मालिश भी हो जाती है।
★ नटराजन आसन से आपके काम की क्षमता अधिक बढ़ती है क्योंकि इससे आपकी एकाग्रता बढ़ती है।
★ मन को शांत करने और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए नटराजन आसन बहुत फायदेमंद हैं।
★ वृद्घावस्था में होने वाले रोगों को दूर करने के लिए और उनसे बचने के लिए नियमित रूप से नटराजन आसन करना चाहिए।
★ आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी और लंबे समय तक युवा रहने के लिए नटराजन आसन बहुत फायदेमंद है।
★ शरीर पर नियंत्रण बनाने के लिए भी यह आसन लाभकारी है।
★ यदि आपकी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर है या आप जल्दी से निर्णय नहीं ले पाते तो नटराजन आसन करना चाहिए।
★ चेहरे पर चमक लाने योग और सुंदरता बढ़ाने के लिए नटराजन आसन करना चाहिए।

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2017-06-05T09:48:00+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments

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