पंचगव्य घृत के फायदे और स्वास्थ्य लाभ | Panchagavya Ghrita Benefits and Side Effects in Hindi

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पंचगव्य घृत के फायदे और स्वास्थ्य लाभ | Panchagavya Ghrita Benefits and Side Effects in Hindi

पंचगव्य घृत क्या है ? Panchagavya Ghrita in Hindi

पंचगव्य घृत घी रूप में एक आयुर्वेदिक दवा है।इस आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग मस्तिष्क को शक्ति देने ,पाचन शक्ति बढ़ाने ,मिर्गी के इलाज ,रक्त शोधन व पित्त विकार जैसे रोगों को दूर करने में किया जाता है |

पंचगव्य घृत बनाने की विधि : Panchagavya Ghrita Bnane ki Vidhi

दशमूल, त्रिफला, हल्दी, दारुहल्दी, कूड़े की छाल, सतौना की छाल, अपामार्ग, नील, कुटकी, अमलतास, कठगूलर के मूल, पुष्करमूल और धमासा ये २४ औषधियां १०-१० तोले लेकर ३२ सेर जल में मिलाकर क्वाथ करें। चतुर्थांश जल शेष रहने पर उतारकर छान लें। फिर भारंगी, पाठा, सोंठ, मिर्च, पीपल, निसोंत, समुद्रफल, गजपीपल, पीपल, मूर्वा, दन्तीमूल, चिरायता, चित्रकमूल, काला सारिवा (अनन्तमूल), सफेद सारिवा, रोहिष घास, गन्धतृण, चमेली के पत्ते सब १-१ तोले मिला जल में पीसकर कल्क करें। फिर क्वाथ, कल्क के साथ गाय के गोबर का रस, दही, दूध, गोमूत्र और गोघृत २-२ सेर मिलाकर मन्दाग्नि पर घृत सिद्ध करें।

उपलब्धता : यह योग इसी नाम से बना बनाया आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के यहां मिलता है।

पंचगव्य घृत सेवन विधि :

पंचगव्य घृत को सुबह 10 ml की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ खाली पेट लिया जा सकता है।
इस घी को लेने के बाद, कम से कम एक घंटे तक कुछ भी (चाय, कॉफी या नाश्ता) नहीं लेना चाहिये ।

पंचगव्य घृत के फायदे व उपयोग : Panchagavya Ghrita ke Fayde

1-पंचगव्य घृत अपस्मार, उन्माद, सूजन, उदररोग, गुल्म, बवासीर, पाण्डु, कामला, भगंदर इत्यादि रोगों में लाभदायक है।

2- पंचगव्य घृत चातुर्थिक ज्वर को नष्ट करता है।

3-पंचगव्य घृत का प्रवेश धातुओं में सरलतापूर्वक हो जाता है। मस्तिष्क के भीतर आम, विष, कफ, कृमि या कीटाणु की स्थिति हुई हो, उसे यह घृत जला डालता है या नष्ट कर देता है। इस हेतु से रोगी को श्रद्धासह पथ्य पालन पूर्वक २-४ मास तक इस घृत का सेवन कराया जावे तो भगवान् धन्वन्तरिजी रोगी को नि:संदेह आरोग्यता प्रदान करते हैं।

5-अपस्मार और उन्माद पीड़ित कई रोगियों को इस घृत का सेवन सफलतापूर्वक कराया गया है और हमें घृत ने यश दिलाया है।
यह पंचगव्य घृत अपस्मार और उन्माद के रोगी के लिए आशीर्वाद रूप श्रेष्ठ औषधि है। यद्यपि जीर्णावस्था और तीक्ष्णावस्था दोनों में प्रयुक्त होता है। तथापि जीर्णावस्था में इसके सेवन की विशेष आवश्यकता रहती है। जीर्णावस्था में लीन विष को नष्ट करने, वायु के प्रतिबन्ध को दूर करने, मन और इन्द्रियों की विकृति को दूर कर प्रकृति को सबल बनाने तथा चिन्ता को नष्टकर मन को प्रसन्न रखने की आवश्यकता है। वे इस पंचगव्य घृत से होते हैं।

( और पढ़ेपंचगव्य के फायदे गुण और उपयोग )

पंचगव्य घृत के नुकसान : Panchagavya Ghrita ke Nuksan

✦इस दवा के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं। हालांकि चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत इस औषधि का उपयोग करना सबसे अच्छा है।
✦पंचगव्य घृत को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।
✦मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और उच्च बीपी वाले रोगी को इसे लेने में सावधानी बरतनी चाहिए।
✦बहुत अधिक खुराक में, यह दस्त और अपचन का कारण बन सकता है।

2018-11-06T18:14:48+00:00 By |Ayurveda|0 Comments