पंचामृत लोह गुग्गुलु : Panchamrut Loha Guggul in Hindi

वर्षा एवं शीत ऋतु में, वात प्रकोप से ग्रस्त लोगों को प्राय: आमवात, संधिवात (जोड़ों का दर्द), गृध्रसी (सायटिका) तथा अन्य वातजन्य व्याधियों से कष्ट हुआ करता है। अपच के कारण जब आहार पूरी तरह पच नहीं पाता तो अपचा आम और कुपित वात साथ होकर रक्त के साथ शरीर में भ्रमण करने लगते हैं और जहां-जहां जोड़ होते हैं, वहां-वहां, विशेषकर शरीर के अधोभाग में, पीड़ा उत्पन्न करने लगते हैं। इस व्याधि को आमवात और संधिवात (आर्थराइटिस) कहते हैं। ऐसी व्याधियों को नष्ट करने के लिए आयुर्वेदिक योग ‘पंचामृत लोह गुग्गुलु’ एक अति उत्तम, लाभकारी और निरापद औषधि है।

यह योग प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘भैषज्य-रत्नावली’ जो श्री बैद्यनाथ द्वारा प्रकाशित किये गये ‘आयुर्वेद सार संग्रह नामक ग्रंथ और श्रीकृष्ण गोपाल (कालेड़ा) द्वारा प्रकाशित ‘रस तंत्र सार व सिद्ध प्रयोग संग्रह’ (द्वितीय खंड) नामक ग्रंथ में भी दिया गया है। दोनों ग्रंथों के ग्रंथकारों ने इस योग की बहुत प्रशंसा की है क्योंकि उनके अनुभव में यह योग रोगियों के लिए बहुत गुणकारी सिद्ध हुआ है। इस योग को घर पर बना लेना सरल और निरापद नहीं है, इसलिए इसे बना-बनाया बाजार से खरीद कर प्रयोग करना ही ठीक होगा। फिर भी जानकारी के लिए इस योग के घटक-द्रव्य (फार्मूला) और निर्माण-विधि का विवरण यहां प्रस्तुत किया गया हैं।

पंचामृत लोह गुग्गुलु के घटक द्रव्य :

शुद्ध पारा, शुद्ध गंधक, रौप्य भस्म, अभ्रक भस्म और स्वर्णमाक्षिक भस्म- पांचों द्रव्य 40-40 ग्राम, लोह भस्म 80 ग्राम तथाशुद्ध गूगल (गुग्गुल) 280 ग्राम

पंचामृत लोह गुग्गुलु की निर्माण विधि :

पारा और गंधक मिला कर खूब खरल कर कज्जली बना लें और भस्में मिला कर अच्छी तरह घोंट लें। लोहे के खरल में गुग्गुलु (गूगल) को कड़वे तेल के छींटे देते हुए घोंटें और जब गूगल नरम पड़ जाए तब भस्म आदि घुटे हुए द्रव्य इसमें मिलाकर छह घंटे तक खरल में घुटाई करें । इसके बाद 2-2 रत्ती (एक ग्राम में आठ रत्ती होती है) की गोलियां बना लें।

मात्रा और सेवन विधि :

इसकी मात्रा वयस्कों के लिए 1-1 गोली सुबह-शाम और छोटी आयु के बच्चों के लिए एक गोली को दो खुराक करके सुबह-शाम लेना है। यह गोली दूध से ली जा सकती है। चिकित्सक से परामर्श लेकर, रोग एवं रोगी की स्थिति के अनुसार, यह गोली अलग-अलग अनुपानों के साथ भी ली जाती है।

पंचामृत लोह गुग्गुलु के उपयोग व फायदे : Benefits of Panchamrut Loha Guggul in Hindi

• यह योग रसायन रूप है और मांस पेशियों के दर्द, जोड़ों के दर्द, सायटिका, कमर-दर्द तथा आमवात के दर्द के लिए अत्यंत गुणकारी है।
•  मस्तिष्क के स्नायविक दौर्बल्य, शून्यता, चक्कर आना, घबराहट होना, बेचैनी आदि उपद्रव इस औषधि के सेवन से दूर होते है।
• यह औषधि आम विष को समाप्त करती है, आंत्रशोधक, अग्निवर्द्धक और बलवर्द्धक है।
• मस्तिष्क की कमजोरी से होने वाला सिरदर्द, अनिद्रा और थकावट आदि की शिकायतें दूर करती है।
• यह रस-रक्तादि धातुओं को शुद्ध करती है। जिससे शरीर बल, वर्ण और कांति से युक्त होता है।

उपलब्धता:

यह योग प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि निर्माताओं द्वारा बनाया हुआ आयुर्वेदिक दवा की दुकान पर मिलता है। आवश्यकता पड़ने पर इसे बाजार से खरीद कर सेवन करना चाहिए।

खान-पान और परहेज :

• इस औषधि को सेवन करते समय तले हुए, तेज मिर्च मसालेदार एवं मांसाहारी पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
• मद्य सेवन नहीं करना चाहिए।
• खट्टा पदार्थ एवं बेसन से बने पदार्थ नहीं खाना चाहिए।
• दोनों वक्त सुबह-शाम शौच अवश्य जाना चाहिए यानि कब्ज़ नहीं होने देना चाहिए।
• ठीक निश्चित वक्त पर खूब अच्छी तरह चबा-चबा कर भोजन करना चाहिए।
• शाम का भोजन देर रात को नहीं, बल्कि सोने से 2-3 घंटे पहले कर लेना चाहिए।
वातव्याधि मुख्यत: अपच और कब्ज़ के कारण ही उत्पन्न होती है।
याद रखें, उचित आहार-विहार एवं पथ्य पालन (परहेज) करना औषधि सेवन से ज्यादा लाभकारी और असरकारी होता है। पथ्यपालन किये बिना औषधि सेवन करना व्यर्थ सिद्ध होता है।

पंचामृत लोह गुग्गुलु के नुकसान :

1- पंचामृत लोह गुग्गुलु को डॉक्टर की सलाह अनुसार ,सटीक खुराक के रूप में समय की सीमित अवधि के लिए लें।
2- पंचामृत लोह गुग्गुलु लेने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें ।