पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

1595-Pujya Asaram Bapu Ji | सदा प्रसन्न रहो

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1595-Pujya Asaram Bapu Ji | सदा प्रसन्न रहो 2017-04-25T08:46:45+00:00

Project Description

सदा प्रसन्न रहो | Bapu ji

निरन्तर अखण्ड प्रसन्न रहनेका स्वभाव बनाओ। ज्यों ज्यों प्रसन्नता बढ़ती जायगी, प्रतिकूलता
लज्जित होकर हटती जायगी।

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